38 वर्षों में पहली बार, भारतीय सेना ऑपरेशन पवन के दौरान शहीद हुए सैनिकों को आधिकारिक रूप से श्रद्धांजलि देगी। 1987 से 1990 के बीच श्रीलंका में चलाया गया यह अभियान भारत का सबसे जटिल और चुनौतीपूर्ण बाहरी सैन्य अभियान माना जाता है। इस लंबे इंतज़ार के बाद मिलने वाला सम्मान उस बहादुरी को राष्ट्रीय मान्यता देता है, जो हजारों सैनिकों ने तमिल–सिंहला संघर्ष के कठिन दौर में दिखाई थी।
ऑपरेशन पवन की शुरुआत 1987 में हुई, जब भारत ने इंडो–श्रीलंका समझौते के तहत श्रीलंका में भारतीय शांति सेना (IPKF) तैनात की। उद्देश्य था:
उत्तरी और पूर्वी श्रीलंका में शांति बहाल करना
LTTE सहित सशस्त्र समूहों को निरस्त्र करना
अशांत क्षेत्रों को स्थिर करना
यद्यपि समझौते का लक्ष्य शांति स्थापित करना था, परन्तु LTTE ने इसे मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद:
अप्रत्याशित लड़ाई शुरू हो गई
IPKF को घने जंगलों और कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में ऑपरेशन करने पड़े
शांति स्थापना का मिशन प्रत्यक्ष युद्ध में बदल गया
उग्रवादी संगठनों को निरस्त्र करना (विशेष रूप से LTTE)
संघर्षग्रस्त इलाकों में शांति बहाल करना
श्रीलंका सरकार को तमिल बहुल क्षेत्रों में स्थिरता लाने में सहयोग देना
इंडो–श्रीलंका समझौते को लागू करना
यह मिशन भारत के सबसे कठिन विदेशी अभियानों में से एक माना जाता है।
1,171 भारतीय सैनिक शहीद हुए
3,500 से अधिक घायल हुए
घात लगाकर हमले, गुरिल्ला युद्ध और नज़दीकी लड़ाई आम थीं
कई बार परिस्थितियों के कारण शहीदों के पार्थिव शरीर भी नहीं लाए जा सके
25 नवंबर 1987 को, घात लगाकर हुए हमले के दौरान उन्होंने अद्वितीय साहस दिखाया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने कई उग्रवादियों को मार गिराया और अपने जवानों का नेतृत्व किया। इसके लिए उन्हें मरणोपरांत परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया।
लगभग 38 वर्षों तक ऑपरेशन पवन की कोई आधिकारिक स्मृति समारोह भारत में आयोजित नहीं हुआ।
हालाँकि:
दिग्गज सैनिक,
शहीदों के परिवार,
और पूर्व IPKF कर्मी
खुद ही अलग-अलग स्मारकों पर श्रद्धांजलि देते रहे।
रोचक रूप से श्रीलंका ने भी कोलंबो में IPKF स्मारक बनाया है।
26 नवंबर को भारतीय सेना राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर ऑपरेशन पवन के शहीदों को औपचारिक श्रद्धांजलि देगी।
कार्यक्रम में शामिल होंगे:
सेना प्रमुख और वरिष्ठ सैन्य अधिकारी
दिग्गज सैनिक और शहीदों के परिवार
ऑपरेशन के महत्व और बलिदान का आधिकारिक उल्लेख
यह कदम एक ऐतिहासिक और देर से मिला हुआ सम्मान माना जा रहा है।
ऑपरेशन पवन का संचालन IPKF ने 1987–1990 के दौरान किया।
1,171 भारतीय सैनिक शहीद हुए।
मेजर रामास्वामी परमेश्वरन को 1987 में मरणोपरांत परम वीर चक्र मिला।
2024 में पहली बार ऑपरेशन पवन शहीदों को आधिकारिक श्रद्धांजलि दी गई।
यह भारत का सबसे बड़ा विदेशी सैन्य अभियान माना जाता है।
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