भारतीय सेना ने उत्तर पूर्व में आतंकवाद विरोधी (सीआई) काम को छोड़ने और चीन के साथ लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर ध्यान केंद्रित करने के लिए खुद को फिर से तैयार किया है। जिसके तहत अब पूर्वी अरुणाचल प्रदेश में बुनियादी ढांचे के निर्माण और सुदृढ़ीकरण पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
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भारतीय सेना के ने कहा कि इन सीमावर्ती जिलों में सीमा से सटी जगहों पर आवास और हेलीपैड के निर्माण के साथ बुनियादी ढांचे को बढ़ाने के प्रयास चल रहे हैं। सैनिक रसद को मजबूत करना जैसे कि बेहतर गोला बारूद भंडारण सुविधाओं का निर्माण, सड़कों का निर्माण और अंतिम मील तक कनेक्टिविटी कायम करने के लिए खच्चरों के और पैदल चलने लायक रास्तों को बनाने का काम जारी है।
सुरक्षा के बुनियादी ढांचे को बढ़ाने का लक्ष्य सीमाओं पर सैनिकों को तेजी से जुटाने और उनको एलएसी की गश्त बढ़ाने में मदद करना है। सेना के बुनियादी ढांचे के विकास से नागरिक आबादी को भी लाभ होगा। जोखिम भरे इलाकों और अब तक बुनियादी ढांचे की कमी के कारण सैनिक महीने में एक या दो बार एलएसी पर गश्त करते हैं।
बता दें एलएसी तक पहुंचने में सैनिकों को एक हफ्ते तक का समय लगता है। राज्य के दिबांग और लोहित जिलों से एलएसी तक पहुंचने के लिए केवल दो सड़कें हैं। सेना का ज्यादातर फोकस ऊपरी दिबांग घाटी क्षेत्र के विकास पर है। चीन ने एलएसी के पास अपनी ओर बड़ी संख्या में मोबाइल टावर लगाए हैं और कुछ क्षेत्रों में भारतीय फोन चीनी नेटवर्क को पकड़ लेते हैं।
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