विज्ञान प्रसार को बढ़ावा: एपी साइंस सिटी और CSIR-NIScPR के बीच 5 साल का MoU

आंध्र प्रदेश साइंस सिटी ने 30 मार्च, 2026 को CSIR-NIScPR के साथ एक रणनीतिक समझौता किया है। इस सहयोग का उद्देश्य पूरे देश में विज्ञान जागरूकता, STEM शिक्षा और नीति अनुसंधान को बढ़ावा देना है। यह साझेदारी वैज्ञानिक सोच की संस्कृति विकसित करने और साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण में सुधार करने पर केंद्रित है।

AP साइंस सिटी-CSIR NIScPR MoU की मुख्य बातें

  • आंध्र प्रदेश साइंस सिटी (SCAP) ने CSIR-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस कम्युनिकेशन एंड पॉलिसी रिसर्च के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह MoU विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देगा।
  • इस समझौते का मुख्य उद्देश्य विज्ञान का प्रचार-प्रसार और सहयोगात्मक अनुसंधान है, विशेष रूप से विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (STI) नीति के क्षेत्र में।
  • इसका मुख्य उद्देश्य साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण को बढ़ावा देना है, जो प्रभावी शासन और विकास रणनीतियों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • यह MoU गैर-वित्तीय प्रकृति का है और यह पाँच वर्षों तक वैध रहेगा; साथ ही, आपसी सहमति के आधार पर इसे आगे बढ़ाने का विकल्प भी उपलब्ध है।

विज्ञान के प्रचार-प्रसार और जन-जागरूकता को सुदृढ़ बनाना

इस साझेदारी का एक मुख्य उद्देश्य विज्ञान संचार को बेहतर बनाना और नागरिकों के बीच जागरूकता बढ़ाना है।

तेज़ी से बदलते इस विश्व में, सोच-समझकर निर्णय लेने के लिए इस प्रकार की वैज्ञानिक साक्षरता अत्यंत आवश्यक है।

इस सहयोग के माध्यम से, दोनों संस्थानों का उद्देश्य है:

  • जनता के बीच वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना
  • साथ ही STEM शिक्षा (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित) को प्रोत्साहित करना
  • जटिल वैज्ञानिक विचारों को आम लोगों के लिए समझने में आसान बनाना

भारत के वैज्ञानिक इकोसिस्टम में SCAP और CSIR-NIScPR की भूमिका

  • आंध्र प्रदेश साइंस सिटी, जिसका मुख्यालय अमरावती में है, अपनी स्थापना के वर्ष 2016 से ही इनोवेशन, STEM लर्निंग और वैज्ञानिक जिज्ञासा को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है।
  • दूसरी ओर, CSIR-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस कम्युनिकेशन एंड पॉलिसी रिसर्च की स्थापना 2021 में काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च के तहत की गई थी। और इसका मुख्य ध्यान विज्ञान संचार, अनुसंधान और नीतिगत अध्ययनों पर होगा।
  • इनके संयुक्त प्रयास और ताकत वैज्ञानिक अनुसंधान और नीति-निर्माण के बीच की खाई को पाटने में मदद करेंगे।

विज्ञान का लोकव्यापीकरण क्या है?

विज्ञान का लोकव्यापीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा वैज्ञानिक ज्ञान को आम जनता के लिए सुलभ और बोधगम्य बनाया जाता है। इसमें विज्ञान प्रदर्शनियाँ, कार्यशालाएँ, प्रकाशन और डिजिटल माध्यमों से पहुँच बनाने जैसी गतिविधियाँ भी शामिल हैं।

SCAP और CSIR-NIScPR जैसे विभिन्न संस्थान इस मिशन को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, और यह वैज्ञानिकों तथा समाज के बीच की खाई को पाटने में सहायक सिद्ध होगा।

 

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vikash

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