स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए, आंध्र प्रदेश ने वारी एनर्जीज़ द्वारा ₹8,175 करोड़ के निवेश से भारत की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड लिथियम-आयन बैटरी गीगाफैक्ट्री हासिल की है। यह प्रोजेक्ट अनकापल्ली जिले के रामबिल्ली में बनाया जाएगा और इससे लगभग 3,000 सीधी नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है। 16 GWh प्रोडक्शन कैपेसिटी के साथ, यह फैसिलिटी भारत के बैटरी मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करेगी और स्ट्रेटेजिक एनर्जी स्टोरेज सेक्टर में इम्पोर्ट पर निर्भरता कम करेगी।
Waaree Energies एक ग्रीनफील्ड गीगाफैक्ट्री स्थापित करेगी, जिसमें:
इस परियोजना को आंध्र प्रदेश राज्य निवेश संवर्धन बोर्ड से सैद्धांतिक (in-principle) मंजूरी मिल चुकी है।
लिथियम-आयन गीगाफैक्ट्री आंध्र प्रदेश के अनाकापल्ली जिले के रैम्बिली में स्थापित की जाएगी। राज्य सरकार इस परियोजना को अपनी इंटीग्रेटेड क्लीन एनर्जी पॉलिसी के तहत एक मील का पत्थर मान रही है।
निवेश बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने की, जिसमें इस परियोजना को मंजूरी दी गई। वहीं, नारा लोकेश ने इस निवेश का स्वागत करते हुए कहा कि इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और घरेलू बैटरी निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।
बड़े पैमाने पर लिथियम-आयन बैटरी निर्माण निम्न क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है:
Waaree Energies की 16 GWh क्षमता वाली गीगाफैक्ट्री भारत के स्वच्छ ऊर्जा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करेगी और ‘मेक इन इंडिया’ व ऊर्जा संक्रमण लक्ष्यों के तहत आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगी।
आंध्र प्रदेश स्वयं को स्वच्छ-प्रौद्योगिकी (क्लीन टेक) निर्माण का केंद्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य की इंटीग्रेटेड क्लीन एनर्जी पॉलिसी के तहत पहले ही बड़े निवेश आकर्षित किए जा चुके हैं, जैसे:
Waaree की बैटरी गीगाफैक्ट्री उन्नत ऊर्जा भंडारण निर्माण में बैकवर्ड इंटीग्रेशन का प्रतिनिधित्व करती है, जिससे संपूर्ण क्लीन-एनर्जी वैल्यू चेन मजबूत होगी।
इस परियोजना से लगभग 3,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है, साथ ही निम्न क्षेत्रों में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी मिलेंगे:
यह निवेश आंध्र प्रदेश को अगली पीढ़ी के ऊर्जा उद्योगों के लिए एक पसंदीदा गंतव्य के रूप में स्थापित करता है।
गीगाफैक्ट्री एक बड़े पैमाने की विनिर्माण इकाई होती है, जिसे विशाल क्षमता (आमतौर पर गीगावाट-घंटे या GWh में मापी जाती है) में बैटरी सेल और पैक उत्पादन के लिए डिजाइन किया जाता है।
ऐसी इकाइयाँ इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण और ग्रिड आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। गीगाफैक्ट्रियों में निवेश करने वाले देश अपनी सप्लाई चेन को सुरक्षित करने और आयात पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य रखते हैं।
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