बोडोफा उपेंद्रनाथ ब्रह्मा — बोडो समुदाय के एक सम्मानित नेता — को उनकी अहिंसात्मक संघर्ष के लिए व्यापक रूप से जाना जाता है, जो जनजातीय पहचान, अधिकारों और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए समर्पित था। 1 मई 2025 को भारत सरकार ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए नई दिल्ली में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया और एक प्रमुख सड़क व रोटरी का नामकरण उनके नाम पर किया। यह पहल सरकार की जनजातीय सशक्तिकरण, पूर्वोत्तर भारत में शांति स्थापना, और क्षेत्रीय आंदोलनों को राष्ट्रीय पहचान देने वाले नेताओं को सम्मानित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
समाचार में क्यों?
1 मई 2025 को भारत सरकार ने बोदो समुदाय के महान नेता बोडोफा उपेंद्रनाथ ब्रह्मा को उनकी 35वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में उनकी 9 फीट ऊँची प्रतिमा का अनावरण किया, साथ ही एक मुख्य सड़क और रोटरी का नाम उनके नाम पर रखा गया।
बोदो समुदाय और अन्य जनजातियों के लिए बोडोफा उपेंद्रनाथ के योगदान को सम्मान देना।
उनके अहिंसात्मक नेतृत्व और सांस्कृतिक पहचान के प्रति प्रतिबद्धता को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देना।
क्षेत्रीय नेताओं को सम्मानित कर राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाना।
यह कदम जनजातीय आत्मसम्मान और पहचान को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करता है।
शांतिपूर्ण आंदोलन और संवाद-आधारित समाधान को प्रोत्साहित करता है।
पूर्वोत्तर भारत के योगदान को मुख्यधारा में लाता है।
जन्म: 1956, निधन: 1990
ऑल बोदो स्टूडेंट्स यूनियन (ABSU) के अध्यक्ष थे।
बोडोलैंड की मांग और बोडो लोगों के अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन का नेतृत्व किया।
बोदो समुदाय में उन्हें “बोडोफा” कहा जाता है, जिसका अर्थ है “बोड़ो लोगों के पिता”।
बोडोलैंड: असम राज्य का एक क्षेत्रीय प्रशासनिक क्षेत्र, जिसे बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन (BTR) कहा जाता है।
बाटौ धर्म (Bathou Religion): बोडो लोगों का पारंपरिक धर्म, जो सिजौ पौधे की पूजा पर आधारित है।
बोडो समझौता 2020 (Bodo Accord): बोडो क्षेत्र में उग्रवाद को समाप्त करने और विकास लाने हेतु ऐतिहासिक शांति समझौता।
2020 बोडो समझौते के 96% प्रावधान पूरे कर लिए गए हैं।
2014 के बाद पूर्वोत्तर भारत में 20 से अधिक शांति समझौते हुए हैं।
10,000 से अधिक उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा से जुड़ाव किया है।
पिछले 3–4 वर्षों में पूर्वोत्तर शांति समझौतों का 78% कार्यान्वयन पूरा हुआ है।
जनजातीय और पूर्वोत्तर नायकों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में कदम।
युवाओं को लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण मार्ग अपनाने की प्रेरणा देता है।
“सबका साथ, सबका विकास” की नीति को जनजातीय कल्याण में सशक्त करता है।
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