AIFF ने पूर्व भारतीय डिफेंडर इलियास पाशा के निधन पर शोक व्यक्त किया

भारत और ईस्ट बंगाल के पूर्व दिग्गज फुटबॉलर इलियास पाशा का 22 जनवरी 2026 को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। अपने शांत, अनुशासित और सटीक खेल के लिए प्रसिद्ध पाशा कर्नाटक के बेहतरीन फुटबॉलरों में गिने जाते थे। उनके निधन से भारतीय फुटबॉल जगत में शोक की लहर है। वे अपने पीछे पत्नी, दो बेटियां और दो बेटे छोड़ गए हैं।

प्रारंभिक जीवन और फुटबॉल की शुरुआत

इलियास पाशा का जन्म और पालन-पोषण उत्तर बेंगलुरु के व्यालिकावल क्षेत्र में हुआ। उन्होंने अपने फुटबॉल करियर की शुरुआत विनायका फुटबॉल क्लब से की, जहां एक युवा डिफेंडर के रूप में उनकी प्रतिभा जल्द ही सामने आई। उनकी मेहनत और खेल कौशल ने उन्हें 1980 के दशक के मध्य में इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्रीज़ (ITI) क्लब तक पहुंचाया, जिससे उनके राष्ट्रीय स्तर के करियर की नींव पड़ी।

राष्ट्रीय फुटबॉल में उभार

पाशा ने 27 जनवरी, 1987 को कोझिकोड में हुए नेहरू कप में बुल्गारिया के खिलाफ भारत के लिए डेब्यू किया था। उन्होंने आठ इंटरनेशनल मैच खेले, जिसमें दो नेहरू कप (1987 और 1991), 1991 के SAF गेम्स और 1992 के एशियन कप क्वालिफायर शामिल हैं। उनके शांत और संयमित डिफेंस ने उन्हें नेशनल टीम के लिए एक भरोसेमंद खिलाड़ी बना दिया था।

संतोष ट्रॉफी और घरेलू उपलब्धियां

कर्नाटक का प्रतिनिधित्व करते हुए, पाशा नियमित रूप से संतोष ट्रॉफी में खेलते थे, और कोलकाता (1987), क्विलोन (1988), और गुवाहाटी (1989) में टूर्नामेंट में हिस्सा लिया। गुवाहाटी में उनके शानदार प्रदर्शन की वजह से कर्नाटक फाइनल के करीब पहुंच गया था। बाद में, उन्होंने 1993 और 1995 में बंगाल के साथ दो संतोष ट्रॉफी खिताब जीते।

क्लब करियर की झलक

पाशा मोहम्मडन स्पोर्टिंग के लिए खेले, और 1989 में उन्होंने सैत नागजी ट्रॉफी और निज़ाम गोल्ड कप जीता। इसके बाद वह ईस्ट बंगाल में शामिल हो गए, जहाँ 1990 के दशक में उन्होंने अपने करियर का सबसे अच्छा समय बिताया। उन्होंने 1993-94 सीज़न में टीम की कप्तानी की और क्लब की कई सफलताओं में उनकी अहम भूमिका थी।

ईस्ट बंगाल के साथ प्रमुख उपलब्धियां

  • कलकत्ता फुटबॉल लीग: 1991, 1993, 1995, 1996, 1998
  • आईएफए शील्ड: 1990, 1991, 1994, 1995, 1997
  • डूरंड कप: 1990, 1991, 1993, 1995

अन्य ट्रॉफियां: फेडरेशन कप, रोवर्स कप, वाई-वाई कप, एयरलाइंस ट्रॉफी, बोर्डोलोई ट्रॉफी, कलिंगा कप, मैकडॉवेल ट्रॉफी, सुपर कप

वे 1990 की ट्रिपल क्राउन विजेता ईस्ट बंगाल टीम का हिस्सा थे और 1993 में क्लब को उसकी पहली अंतरराष्ट्रीय ट्रॉफी वाई-वाई कप दिलाने वाली टीम में भी शामिल रहे।
1993-94 एशियन कप विनर्स कप में अल ज़ावरा एससी के खिलाफ 6-2 की ऐतिहासिक जीत में उन्होंने कप्तानी की।

व्यक्तित्व और विरासत

दाएं विंग-बैक के रूप में इलियास पाशा अपने अनुशासन, शांति और खेल को पढ़ने की क्षमता के लिए जाने जाते थे। वे गोलकीपर के लिए भरोसेमंद ढाल साबित होते थे।
पूर्व साथी खिलाड़ी फल्गुनी दत्ता ने उन्हें एक मार्गदर्शक और प्रेरक व्यक्तित्व बताया, जो बिना किसी ईर्ष्या के युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते थे। 2012 में, ईस्ट बंगाल क्लब ने उन्हें उनके योगदान के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया।

श्रद्धांजलि और अंतिम विदाई

  • अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) और पूरे भारतीय फुटबॉल जगत ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया।
  • ईस्ट बंगाल क्लब ने सम्मान स्वरूप क्लब का झंडा आधा झुका दिया और अंडर-16 टीम ने एक मिनट का मौन रखा।
  • बेंगलुरु स्थित उनके निवास पर उन्हें अंतिम विदाई दी गई, जहां पूर्व खिलाड़ी और अधिकारी उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे।

इलियास पाशा की विरासत

इलियास पाशा को एक विश्वसनीय डिफेंडर, अनुशासित खिलाड़ी और प्रेरणादायक मार्गदर्शक के रूप में हमेशा याद किया जाएगा। उनका जीवन और योगदान आने वाली पीढ़ियों के फुटबॉल खिलाड़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

G7 Summit 2026: फ्रांस में दुनिया के 7 सबसे ताकतवर देशों की बैठक, जानिए 13 बड़े फैसले और भारत के लिए क्यों है खास

दुनिया की राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े कई बड़े फैसलों का मंच माने जाने…

3 days ago

दुनिया का सबसे जहरीला बिच्छू कौन सा है?, जानें कहाँ पाए जाते हैं सबसे ज्यादा बिच्छू

धरती पर मौजूद सबसे डरावने जीवों में बिच्छू (Scorpion) का नाम जरूर लिया जाता है।…

1 month ago

भारत में कहाँ है एशियाई शेरों का असली घर? दुनिया की इकलौती जगह जहाँ जंगल में आज़ादी से घूमते हैं Asiatic Lions

शेरों का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में अफ्रीका के विशाल जंगलों की तस्वीर…

1 month ago

भारत का कौन-सा राज्य कहलाता है “Spice Garden of India”? जिसके मसालें दुनिया-भर में है मशहूर

भारत अपने मसालों के लिए सदियों से पूरी दुनिया में प्रसिद्ध रहा है। भारतीय मसालों…

1 month ago

भारत का सबसे अमीर गांव कौन-सा है? यहां हर घर में करोड़ों की संपत्ति, बैंक में जमा हैं हजारों करोड़

भारत गांवों का देश कहा जाता है। यहां लाखों गांव हैं, जिनमें से कई आज…

1 month ago

क्या आप जानते हैं भारत का Tea Capital कौन-सा राज्य है? यहां उगती है सबसे ज्यादा चाय

रेलवे स्टेशन हो, ऑफिस हो या गांव की चौपाल — चाय हर जगह लोगों की…

1 month ago