क्या दो दशकों के बाद, बारबाडोस थ्रेडस्नेक फिर से पाया गया है?

लगभग दो दशकों से, दुनिया का सबसे छोटा ज्ञात साँप, बारबाडोस थ्रेडस्नेक, किसी को दिखाई नहीं दिया था। कई लोगों को डर था कि यह विलुप्त हो गया होगा। लेकिन एक उल्लेखनीय पुनर्खोज में, बारबाडोस के वैज्ञानिकों ने इसके अस्तित्व की पुष्टि की है, जिससे द्वीप की नाज़ुक जैव विविधता के संरक्षण की उम्मीद जगी है।

एक दुर्लभ और रहस्यमय प्रजाति

विवरण और आकार

बारबाडोस थ्रेडस्नेक (Tetracheilostoma carlae) दुनिया का सबसे छोटा सांप है, जिसकी लंबाई पूरी तरह वयस्क अवस्था में मात्र चार इंच (10 सेंटीमीटर) होती है। यह इतना छोटा होता है कि आसानी से एक सिक्के पर समा सकता है। इसकी मुख्य विशेषताएं हैं —
– पतले शरीर के साथ पीले रंग की हल्की रेखाएं जो उसकी पीठ पर चलती हैं,
– सिर के दोनों किनारों पर स्थित आंखें,
– यह सांप अंधा होता है और देखने की बजाय स्पर्श और गंध पर निर्भर करता है।

जीवनशैली और आवास
यह सांप जमीन के नीचे रहने वाला एक खुदाई करने वाला जीव है, और मुख्यतः दीमक और चींटियों को खाता है। अधिकांश सांपों के विपरीत, यह एक बार में केवल एक पतला अंडा ही देता है।
इसकी सूक्ष्मता और छिपने की आदतों के कारण इसे देख पाना बेहद मुश्किल है — यह अक्सर मिट्टी और सूखी पत्तियों में इतनी अच्छी तरह छुपा होता है कि नजर नहीं आता।

पुनः खोज की कहानी

खोज का प्रयास
कई वर्षों की असफल खोज के बाद, बारबाडोस के पर्यावरण मंत्रालय के प्रोजेक्ट ऑफिसर कॉन्नर ब्लेड्स ने एक छोटे जंगल में एक चट्टान उठाते समय इस दुर्लभ सांप को देखा।
उन्होंने बड़ी सावधानी से उसे मिट्टी और सूखी पत्तियों से भरे कांच के जार में रखा और फिर वेस्ट इंडीज विश्वविद्यालय में माइक्रोस्कोप से जांच कर उसकी पहचान की पुष्टि की।
इस प्रयास में उन्हें संरक्षण संगठन Re:wild के कैरेबियन प्रोग्राम ऑफिसर जस्टिन स्प्रिंगर का सहयोग मिला। बाद में इसी संगठन ने इसकी पुनः खोज की घोषणा की।

पहचान की पुष्टि का क्षण
यह सांप दिखने में भारत में पाए जाने वाले ब्राह्मणी ब्लाइंड स्नेक (फ्लावर पॉट स्नेक) जैसा लगता है, जिससे इसकी पहचान करना कठिन था। लेकिन इसकी पीठ पर मौजूद हल्की पीली रेखाओं ने यह पुष्टि कर दी कि यह वही दुर्लभ बारबाडोस थ्रेडस्नेक है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पहली वैज्ञानिक पहचान
इस प्रजाति को पहली बार वर्ष 2008 में टेम्पल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एस. ब्लेयर हेजेस ने वैज्ञानिक रूप से वर्णित किया था। उन्होंने इसे अपनी पत्नी के सम्मान में Tetracheilostoma carlae नाम दिया।
उस समय यह सांप पहले अन्य प्रजातियों में ग़लती से गिना जाता था।
पहचान के समय केवल तीन ज्ञात नमूने थे —
– दो लंदन के एक संग्रहालय में,
– एक कैलिफोर्निया में, जिसे पहले एंटिगुआ से जुड़ा माना गया था।

सालों तक अनिश्चितता
पहचान के बाद यह प्रजाति इतने वर्षों तक नहीं देखी गई कि इसे लगभग लुप्त मान लिया गया था। प्रोफेसर हेजेस ने याद किया कि उन्होंने 2006 में सैकड़ों चट्टानों के नीचे खोज की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।
इसके बाद वर्षों तक उन्हें ईमेल और तस्वीरें मिलती रहीं — लोग समझते थे कि उन्होंने यह सांप खोज लिया है, लेकिन अधिकतर बार वे केवल कीड़े, केंचुए या अन्य छोटे जीव निकलते थे।

पुनः खोज का महत्व

संरक्षण की दृष्टि से महत्व
बारबाडोस थ्रेडस्नेक की पुनः खोज इस सूक्ष्म प्रजाति के पारिस्थितिक महत्व को उजागर करती है। संरक्षण संगठन Re:wild के जस्टिन स्प्रिंगर के अनुसार, यह सांप दीमक और चींटियों जैसी कीट प्रजातियों की संख्या को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र में संतुलन बना रहता है।

विलुप्ति का खतरा
बारबाडोस ने अपने अधिकांश मूल वन क्षेत्र पहले ही खो दिए हैं, जिससे वहां की स्थानिक (केवल वहीं पाई जाने वाली) प्रजातियों के लिए आवास सीमित हो गया है। पहले ही निम्नलिखित प्रजातियाँ वहां से विलुप्त हो चुकी हैं —
बारबाडोस रेसर (एक प्रकार का सांप),
बारबाडोस स्किंक (एक छिपकली प्रजाति),
गुफा में पाई जाने वाली एक विशेष झींगा प्रजाति
यदि शीघ्र संरक्षण के उपाय नहीं किए गए, तो थ्रेडस्नेक को भी ऐसा ही खतरा हो सकता है।

आशा का प्रतीक

इस दुर्लभ सांप की पुनः खोज बारबाडोस में वन्यजीव आवास संरक्षण के प्रति जागरूकता और रुचि को बढ़ावा दे सकती है। प्रोफेसर हेजेस ने कहा, “बारबाडोस कैरेबियाई क्षेत्र में एक अनोखी स्थिति में है — एक दुर्भाग्यपूर्ण वजह से: हैती को छोड़कर, यहां सबसे कम मूल वन क्षेत्र बचा है।” इसलिए यह खोज न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यावरणीय चेतना के लिए भी एक नई उम्मीद का संकेत देती है।

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vikash

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