भारत ने समानता में G7 देशों को पछाड़ा – जानिए यह कैसे हुआ!

विश्व बैंक की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब 25.5 के गिनी सूचकांक के साथ दुनिया का चौथा सबसे अधिक समानता वाला देश है। यह आय समानता के मामले में भारत को संयुक्त राज्य अमेरिका (41.8) और चीन (35.7) जैसे देशों से आगे रखता है। यह उपलब्धि भारत के दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के साथ-साथ प्राप्त हुई है, जो दर्शाता है कि समावेशी विकास और सामाजिक कल्याण योजनाओं ने असमानताओं को कम करने में कैसे मदद की है।

गिनी सूचकांक की समझ

परिचय: गिनी सूचकांक (या गिनी गुणांक) को 1912 में इतालवी सांख्यिकीविद् कोर्राडो गिनी ने विकसित किया था।
उद्देश्य: यह किसी देश या समाज के भीतर आय की असमानता को मापता है।

श्रेणी:
0 (पूर्ण समानता): जब सभी लोग समान आय प्राप्त करते हैं।
1 (पूर्ण असमानता): जब संपूर्ण आय एक ही व्यक्ति के पास केंद्रित हो।
– प्रतिशत के रूप में यह मान 0 से 100 के बीच व्यक्त किया जाता है।

भारत की वर्तमान स्थिति

2011 में गिनी सूचकांक: 28.8
2022 में: 25.5 (महत्वपूर्ण गिरावट)
वर्गीकरण: अब भारत “मध्यम रूप से कम असमानता” (25–30) वाले देशों की श्रेणी में आता है।
महत्त्व: यह बदलाव उस पारंपरिक धारणा को चुनौती देता है कि भारत अत्यधिक असमान देश है। यह दर्शाता है कि विशेषकर निम्न आय वर्गों में समावेशी आय वृद्धि हुई है।

भारत में समानता में सुधार के प्रमुख कारण

  1. गरीबी में कमी
    विश्व बैंक की वसंत 2025 रिपोर्ट के अनुसार, 2011 से 171 मिलियन भारतीयों को अत्यधिक गरीबी से बाहर निकाला गया
    – गरीबी की परिभाषा अब $2.15/दिन से बढ़ाकर $3/दिन कर दी गई है।
    – इस आधार पर, भारत की अत्यधिक गरीबी दर 2011–12 में 27.1% से घटकर 2022–23 में 5.3% हो गई।
    गरीबों की संख्या 344.47 मिलियन से घटकर 75.24 मिलियन रह गई।

  2. सरकारी योजनाएं व डिजिटल सुधार
    प्रधानमंत्री जन धन योजना: 55.69 करोड़ से अधिक खाते खुले, जिससे वित्तीय समावेशन बढ़ा।
    आधार और डिजिटल पहचान: 142 करोड़ से अधिक आधार कार्ड, जिससे कल्याण योजनाओं की सीधी पहुँच सुनिश्चित हुई।
    डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT): ₹3.48 लाख करोड़ की बचत, पारदर्शिता व प्रभावशीलता में वृद्धि।
    आयुष्मान भारत व डिजिटल हेल्थ मिशन: 41.34 करोड़ आयुष्मान कार्ड व 79 करोड़ डिजिटल हेल्थ अकाउंट, प्रति परिवार ₹5 लाख तक का स्वास्थ्य कवरेज।
    स्टैंड-अप इंडिया योजना: 2.75 लाख से अधिक ऋण स्वीकृत (₹62,807 करोड़) — वंचित वर्गों के उद्यम को बढ़ावा।
    प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना: 80.67 करोड़ लाभार्थियों को मुफ्त राशन।
    प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना: 29.95 लाख कारीगर पंजीकृत — प्रशिक्षण, ऋण व डिजिटल सहायता प्रदान की गई।

समानता के बावजूद चुनौतियाँ

  1. दृढ़ होती गरीबी
    $3.65/दिन की दर पर (निम्न-मध्यम आय वाले देशों के लिए मानक), भारत की 28.1% जनसंख्या (300 मिलियन से अधिक) अब भी गरीब है।
    – यह भारत की समानता की प्रगति की स्थायित्व पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

  2. आय और संपत्ति में असमानता
    शीर्ष 10% की आय निचले 10% से 13 गुना अधिक है।
    सबसे अमीर 1% के पास देश की 40% संपत्ति है, जबकि निचले 50% के पास केवल 3%।
    इतिहास: 1955 में गिनी सूचकांक 0.371 था जो 2023 में बढ़कर 0.410 हो गया।

  3. पुराना गरीबी मानक
    – भारत अब भी रंगराजन समिति (2014) द्वारा निर्धारित गरीबी रेखा का उपयोग करता है, जो वर्तमान जीवनयापन लागत के अनुरूप नहीं है।
    – इससे सरकारी योजनाएं वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुँचने से चूक सकती हैं।

  4. अवसरों तक असमान पहुँच
    शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल सेवाएं और रोजगार में अभी भी असमानताएँ हैं।
    – ग्रामीण क्षेत्रों, महिलाओं, अनुसूचित जातियों/जनजातियों और असंगठित श्रमिकों को बराबर अवसर नहीं मिलते।
    – उपभोग आधारित समानता में सुधार हुआ है, लेकिन अवसरों की समानता अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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vikash

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