आदित्य बिड़ला कैपिटल लिमिटेड (ABCL) ने अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली एनबीएफसी सहायक कंपनी, आदित्य बिड़ला फाइनेंस लिमिटेड (ABFL) के साथ सफलतापूर्वक विलय पूरा कर लिया है। यह विलय 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी होगा और इसे शेयरधारकों, ऋणदाताओं और नियामक संस्थाओं, जैसे सेबी, आरबीआई और एनसीएलटी से मंजूरी मिली है। इस कदम का उद्देश्य कॉर्पोरेट संरचना को सरल बनाना, वित्तीय स्थिरता को बढ़ाना और परिचालन दक्षता में सुधार करना है। नए नेतृत्व में, विशाखा मुले को विलयित इकाई की प्रबंध निदेशक एवं सीईओ और राकेश सिंह को कार्यकारी निदेशक एवं एनबीएफसी के सीईओ के रूप में नियुक्त किया गया है, जो नियामक स्वीकृति के अधीन है।
मुख्य बिंदु:
विलय की पूर्णता – ABCL ने 31 मार्च 2025 को विलय की घोषणा की, जिसे 24 मार्च 2025 को NCLT की मंजूरी मिली।
प्रभावी एवं नियुक्ति तिथि – विलय 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी होगा, जबकि नियुक्ति तिथि 1 अप्रैल 2024 रखी गई है।
नियामक अनुमोदन – सेबी, आरबीआई, एनसीएलटी, स्टॉक एक्सचेंज, शेयरधारकों और ऋणदाताओं की मंजूरी से प्रक्रिया पूरी हुई।
नेतृत्व नियुक्तियाँ –
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विशाखा मुले – विलयित इकाई की प्रबंध निदेशक एवं सीईओ।
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राकेश सिंह – कार्यकारी निदेशक एवं एनबीएफसी के सीईओ।
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स्वतंत्र निदेशक – नागेश पिंगे और सुनील श्रीवास्तव नियुक्त।
अध्यक्ष का वक्तव्य – कुमार मंगलम बिड़ला ने भारत की आर्थिक वृद्धि में वित्तीय सेवाओं की भूमिका और ABCL की वित्तीय समावेशन तथा मूल्य सृजन की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
सीईओ का दृष्टिकोण – विशाखा मुले ने कहा कि इस विलय से संगठनात्मक सरलीकरण, पूंजी की बेहतर उपलब्धता और परिचालन तालमेल में वृद्धि होगी।
विलय के उद्देश्य एवं लाभ:
- सरल समूह संरचना – कानूनी संस्थाओं की संख्या कम कर परिचालन को सुव्यवस्थित किया जाएगा।
- वित्तीय शक्ति में सुधार – ABCL को कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) से NBFC में परिवर्तित किया जाएगा, जिससे इसे पूंजी बाजार तक सीधा पहुंच मिलेगी।
- हितधारकों के लिए बेहतर मूल्य – व्यवसाय के समेकन से दीर्घकालिक वृद्धि और शेयरधारकों के लिए अधिक मूल्य सृजन होगा।
- परिचालन दक्षता – नियामक जटिलताओं को कम कर नीति कार्यान्वयन को आसान बनाया जाएगा।