अडानी पावर लिमिटेड ने 4,000 करोड़ रुपये में दिवाला प्रक्रिया के जरिये 600 मेगावाट क्षमता वाली विदर्भ इंडस्ट्रीज पावर लिमिटेड का अधिग्रहण पूरा होने की मंगलवार को घोषणा की। अडानी पावर लिमिटेड (एपीएल) ने बयान में कहा कि 18 जून 2025 को राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) की मुंबई पीठ ने विदर्भ इंडस्ट्रीज पावर लिमिटेड (वीआईपीएल) के लिए उसकी समाधान योजना को मंजूरी दे दी है।
अडानी पावर लिमिटेड (APL) ने दिवाला समाधान प्रक्रिया (Insolvency Resolution Process) के तहत विदर्भ इंडस्ट्रीज पावर लिमिटेड (VIPL) के पावर प्लांट का अधिग्रहण पूरा कर लिया है। यह पावर प्लांट महाराष्ट्र के नागपुर ज़िले के बुटीबोरी में स्थित है और इसमें दो यूनिट हैं, जो प्रत्येक 300 मेगावाट बिजली का उत्पादन करती हैं। यह संयंत्र घरेलू कोयले का उपयोग करता है। इस डील को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मुंबई पीठ ने 18 जून 2025 को मंजूरी दी थी, और अधिग्रहण की प्रक्रिया 7 जुलाई 2025 को पूरी हो गई। यह सौदा कुल ₹4,000 करोड़ के मूल्य पर संपन्न हुआ।
इस अधिग्रहण के साथ ही अडानी पावर की कुल उत्पादन क्षमता अब 18,150 मेगावाट हो गई है, जिससे यह भारत की सबसे बड़ी निजी थर्मल पावर कंपनी बन गई है। कंपनी गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, झारखंड और कर्नाटक जैसे राज्यों में थर्मल पावर प्लांट संचालित करती है। इसके अलावा, वह गुजरात में 40 मेगावाट का एक सौर ऊर्जा संयंत्र भी चलाती है।
अडानी पावर लिमिटेड (APL) का लक्ष्य 2029–30 तक अपनी कुल क्षमता को बढ़ाकर 30,670 मेगावाट तक पहुंचाना है। इसके तहत कंपनी वर्तमान में छह ब्राउनफील्ड अल्ट्रा सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट (USCTPPs) का निर्माण कर रही है, जो सिंगरौली-महान (मध्य प्रदेश), रायपुर, रायगढ़, कोरबा (छत्तीसगढ़), कवाई (राजस्थान) और मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश) में ग्रीनफील्ड प्लांट शामिल हैं। साथ ही, कंपनी कोरबा में पहले अधिग्रहित 1,320 मेगावाट के सुपरक्रिटिकल प्लांट पर भी निर्माण कार्य फिर से शुरू कर रही है।
अडानी पावर लिमिटेड (APL) के सीईओ एस.बी. ख्यालिया ने कहा कि कंपनी भारत के “सबके लिए बिजली” (Electricity for All) लक्ष्य को साकार करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि बेस-लोड पावर प्लांट्स की संख्या बढ़ाकर अडानी का उद्देश्य देश को विश्वसनीय और किफायती बिजली उपलब्ध कराना है, जो विकास के लिए बेहद जरूरी है।
APL न केवल नए प्रोजेक्ट्स के माध्यम से विस्तार करना चाहती है, बल्कि मौजूदा संयंत्रों का आधुनिकीकरण और प्रभावी उपयोग करके भी वृद्धि की दिशा में काम कर रही है। कंपनी की रणनीति यह सुनिश्चित करना है कि ऊर्जा उत्पादन क्षमता का पूर्ण उपयोग हो और देश की बढ़ती मांग को समय पर पूरा किया जा सके।
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