गति शक्ति विश्वविद्यालय और अमेज़न ने साझा शिक्षण व शैक्षणिक नवाचार हेतु समझौता किया

गतिशक्ति विश्वविद्यायलय (Gati Shakti Vishwavidyalaya – GSV), जो भारत का परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र पर आधारित एक विशेषीकृत केंद्रीय विश्वविद्यालय है, ने विश्व की प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियों में से एक Amazon के साथ एक नया समझौता ज्ञापन (MoU) किया है। इस सहयोग का उद्देश्य लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग क्षेत्र में शिक्षण, अनुसंधान और नवाचार को मजबूत बनाना है।

सहयोग का उद्देश्य

इस एमओयू का मुख्य मकसद विश्वविद्यालय और ऐमज़ॉन के बीच ज्ञान साझा करने को प्रोत्साहित करना है। दोनों संस्थान मिलकर नए शैक्षणिक कार्यक्रम तैयार करेंगे, मौजूदा पाठ्यक्रमों को आधुनिक रूप देंगे और संयुक्त अनुसंधान करेंगे।
इस समझौते की विशेष आकर्षण ‘Amazon Chair Professorship’ की स्थापना है, जिसके तहत डेटा-आधारित आधुनिक वेयरहाउसिंग पर शोध होगा।

कुलपति का बयान

GSV के कुलपति प्रो. मनोज चौधरी ने कहा कि विश्वविद्यालय भारत के तेजी से बढ़ते लॉजिस्टिक्स सिस्टम के लिए मजबूत प्रतिभा निर्माण और गहन अनुसंधान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि ऐमज़ॉन इंडिया के साथ काम करने से छात्रों और शोधकर्ताओं को उद्योग विशेषज्ञों से सीधे सीखने का अवसर मिलेगा, जिससे परिवहन व लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में बेहतर योजना, डिजाइन और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।

गतिशक्ति विश्वविद्यायलय के बारे में

  • GSV की स्थापना वर्ष 2022 में संसद के एक अधिनियम के तहत केंद्रीय विश्वविद्यालय के रूप में की गई थी।

  • यह भारत सरकार के रेल मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।

  • विश्वविद्यालय का ध्यान सभी परिवहन क्षेत्रों पर है —
    रेलवे, हाईवे, पोर्ट, एविएशन, मैरीटाइम, शिपिंग, इनलैंड वाटरवे, अर्बन ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स व सप्लाई चेन

  • इसके कुलाधिपति (Chancellor) श्री अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री हैं।

एमओयू का महत्व

इस साझेदारी से छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान मिलेगा, उन्नत शोध को बढ़ावा मिलेगा, और भारत की लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाने के लक्ष्य को समर्थन मिलेगा। शैक्षणिक विशेषज्ञता और ऐमज़ॉन के उद्योग अनुभव के मिलन से भारत के परिवहन और वेयरहाउसिंग क्षेत्र के लिए नए विचार और समाधान विकसित होने की उम्मीद है।

आलिया भट्ट को गोल्डन ग्लोब्स होराइजन अवॉर्ड मिला

बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट को रेड सी इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में गोल्डन ग्लोब्स होराइजन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। आलिया को ट्यूनीशियाई अभिनेत्री हेंड सबरी के साथ एक समारोह में सम्मानित किया गया, जिन्हें उमर शरीफ अवॉर्ड से नवाजा गया। रेड सी इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का पांचवां संस्करण सऊदी अरब के जेद्दा में आयोजित किया जा रहा है।

आलिया ने क्या कहा?

गोल्डन ग्लोब्स होराइजन अवॉर्ड जीतने पर खुशी जताते हुए आलिया ने कहा कि गोल्डन ग्लोब्स द्वारा सम्मानित होना मेरे लिए गर्व की बात है। मैं दुनिया भर में फिल्म और टेलीविजन में बदलाव ला रही महत्वाकांक्षी कलाकारों और महिलाओं की नई पीढ़ी की ओर से बोलने का मौका मिलने के लिए आभारी हूं। ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर प्रभावशाली कहानियों को बताने के लिए लोग एकजुट हो रहे हैं, यह सम्मान वाकई काफी महत्वपूर्ण बन जाता है।

गोल्डन ग्लोब्स की अध्यक्ष ने क्या कहा?

गोल्डन ग्लोब्स की अध्यक्ष हेलेन होहेन ने इस मौके पर कहा कि हमें आलिया भट्ट को गोल्डन ग्लोब्स होराइजन अवॉर्ड से सम्मानित करते हुए बेहद खुशी हो रही है। यह पुरस्कार अंतरराष्ट्रीय सिनेमा में उनके असाधारण योगदान के लिए है। साथ ही वैश्विक मंच पर फिल्म व टेलीविजन के एक गतिशील और प्रभावशाली केंद्र के रूप में मिडिल ईस्ट के लगातार आगे बढ़ने का जश्न मनाता है।

फिल्मों को लेकर सुर्खियां

आलिया भट्ट इन दिनों अपनी फिल्मों को लेकर सुर्खियां बटोर रही हैं। उनकी एक्शन ड्रामा फिल्म ‘अल्फा’ जल्द ही सिनेमाघरों में दस्तक देगी। इस एक्शन-स्पाई थ्रिलर ‘अल्फा’ में वो शरवारी के साथ नजर आएंगी। फिल्म को क्रिसमस के मौके पर रिलीज किया जाना था, लेकिन कुछ वजह से मेकर्स ने इसकी रिलीज डेट 17 अप्रैल 2026 को कर दी।

आलिया भट्ट का बढ़ता ग्लोबल प्रभाव

Golden Globe Horizon Award मिलने के बाद आलिया भट्ट की अंतरराष्ट्रीय पहचान और मजबूत हुई है। उनकी मेहनत, बहुमुखी अभिनय क्षमता और चुनिंदा मजबूत भूमिकाओं ने उन्हें भारतीय सिनेमा की एक वैश्विक प्रतिनिधि बना दिया है।
चाहे प्रशंसक हों या आलोचक—सभी उनके इस सम्मान की सराहना कर रहे हैं।

आलिया की इन फिल्मों की हुई चर्चा

फेस्टिवल ने इंस्टाग्राम पर उनकी जीत की घोषणा करते हुए दिखाया कि कैसे 32 वर्षीय एक्ट्रेस वैश्विक स्तर पर लगातार पहचान बना रही हैं। वैरायटी डॉट काम की रिपोर्ट के मुताबिक आलिया को ये अवॉर्ड हाईवे, राजी, उड़ता पंजाब, डियर जिंदगी और गंगूबाई काठियावाड़ी जैसी फिल्मों के लिए मिला है। 

BMW ने मिलान नेडेल्जकोविक को नया सीईओ नियुक्त किया

बीएमडब्ल्यू ने एक बड़े नेतृत्व परिवर्तन की घोषणा की है, जिसमें उसकी पर्यवेक्षी बोर्ड ने लंबे समय से कार्यरत सीईओ ओलिवर ज़िप्से की जगह मिलान नेडेल्जकोविक को नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया है। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऑटोमोबाइल क्षेत्र तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है और बीएमडब्ल्यू को चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे प्रमुख बाज़ारों में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। नेडेल्जकोविक 14 मई अगले वर्ष आधिकारिक रूप से पदभार संभालेंगे, जिससे जर्मन ऑटोमोबाइल दिग्गज के लिए एक नए रणनीतिक अध्याय की शुरुआत होगी। उनका कार्यकाल 2031 तक चलेगा, जो उन्हें इलेक्ट्रिक और डिजिटल नवाचार की अगली लहर के बीच बीएमडब्ल्यू का नेतृत्व करने के लिए एक लंबा अवसर प्रदान करेगा।

बीएमडब्ल्यू को नए नेतृत्व की आवश्यकता क्यों पड़ी

पिछले कुछ वर्षों में बीएमडब्ल्यू को चीनी इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं से बढ़ती प्रतिस्पर्धा, बढ़ती लागत और अमेरिकी बाज़ार में नए टैरिफ जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इन दबावों के कारण कंपनी को अपना 2025 का आय अनुमान कम करना पड़ा, जिससे निकट भविष्य की कठिन आर्थिक परिस्थितियों का संकेत मिलता है। अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए, बीएमडब्ल्यू अपनी अगली पीढ़ी की इलेक्ट्रिक कारों—विशेष रूप से पूर्णतः इलेक्ट्रिक “नॉय क्लासे” (Neue Klasse) मॉडल्स—पर बड़ा दांव लगा रही है, जिनसे 2026 के बाद तेजी से विकास की उम्मीद है। इस बदलाव को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए नया नेतृत्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मिलान नेडेल्जकोविक कौन हैं?

मिलान नेडेल्जकोविक, उम्र 56 वर्ष, बीएमडब्ल्यू के लिए कोई नया नाम नहीं हैं। 1993 में कंपनी से जुड़ने के बाद, उन्होंने पिछले तीन दशकों में गहन तकनीकी विशेषज्ञता और वैश्विक उत्पादन नेतृत्व पर आधारित एक उत्कृष्ट करियर बनाया है। उनकी व्यापक अनुभव और उत्पादन क्षेत्र में मजबूत पकड़ उन्हें बीएमडब्ल्यू के बदलाव और नवाचार के अगले चरण का नेतृत्व करने के लिए उपयुक्त बनाती है।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

सर्बिया में जन्मे मिलान नेडेल्जकोविक ने जर्मनी में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और आगे चलकर अमेरिका के प्रतिष्ठित मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) में उच्च अध्ययन पूरा किया। उनकी मजबूत इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि को हमेशा उनकी सबसे बड़ी ताकतों में से एक माना जाता है।

बीएमडब्ल्यू में करियर सफर

बीएमडब्ल्यू में अपने लंबे कार्यकाल के दौरान नेडेल्ज़कोविच ने कई महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं—

  • ऑक्सफोर्ड स्थित बीएमडब्ल्यू के MINI प्लांट में पेंट शॉप का प्रबंधन

  • बीएमडब्ल्यू के म्यूनिख प्लांट के प्रबंध निदेशक

  • 2019 में बीएमडब्ल्यू के प्रबंधन बोर्ड में शामिल

  • वैश्विक उत्पादन प्रमुख के रूप में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर कंपनी के महत्वपूर्ण बदलाव का नेतृत्व

उत्पादन प्रणालियों को सरल बनाने और बीएमडब्ल्यू के विश्वभर के प्लांट संचालन को प्रभावी ढंग से संभालने की उनकी क्षमता ने उन्हें CEO पद के लिए स्वाभाविक विकल्प बना दिया।

उद्योग जगत में सराहना

बीएमडब्ल्यू की पर्यवेक्षी बोर्ड के अध्यक्ष निकोलस पीटर ने नेडेल्जकोविक की नेतृत्व शैली की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे “लोगों को एकजुट करते हैं और उन्हें उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करते हैं।” मेट्ज़लर के विश्लेषक पाल स्किर्टा सहित कई विशेषज्ञों ने माना कि बीएमडब्ल्यू के विभिन्न केंद्रों पर उनका व्यापक अनुभव आने वाली चुनौतियों के लिए उन्हें पूरी तरह तैयार करता है।

पूर्व CEO ओलिवर ज़िप्से का आगे क्या?

61 वर्षीय ओलिवर ज़िप्से बीएमडब्ल्यू के आधुनिक दौर के एक प्रमुख नेता रहे हैं। कंपनी में 35 वर्ष बिताने के बाद वे मई 2026 में पद छोड़ देंगे—यह विस्तार सामान्य से अधिक सेवानिवृत्ति आयु तक दिया गया था। अपने कार्यकाल में उन्होंने:

  • कोविड-19 महामारी के दौर में बीएमडब्ल्यू को सफलतापूर्वक संभाला

  • वैश्विक व्यवधानों के बीच सप्लाई चेन को मजबूत किया

  • आने वाली “Neue Klasse” इलेक्ट्रिक वाहन आर्किटेक्चर की नींव रखी

वे जल्द ही एयरबस बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स से जुड़ने वाले हैं, जिससे वे यूरोप के रणनीतिक उद्योगों पर अपना प्रभाव जारी रखेंगे।

निकोलस पीटर ने उन्हें “नॉय क्लासे के पीछे की प्रेरक शक्ति” बताया और बीएमडब्ल्यू की इलेक्ट्रिक भविष्य रोडमैप में उनके योगदान को सराहा।

नया नेतृत्व बीएमडब्ल्यू के भविष्य के लिए क्या मायने रखता है

मिलान नेडेल्जकोविक की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब:

  • इलेक्ट्रिक वाहन बाज़ार में प्रतिस्पर्धा तेज़ होती जा रही है, खासकर चीनी ब्रांडों की आक्रामक वृद्धि के कारण।

  • अमेरिका के उच्च टैरिफ जर्मन कार निर्माताओं के लिए नई चुनौतियाँ पैदा कर रहे हैं।

  • उपभोक्ता तेजी से सॉफ्टवेयर-आधारित और पर्यावरण-अनुकूल वाहनों की ओर झुक रहे हैं।

उत्पादन क्षेत्र में नेडेल्जकोविक की गहरी विशेषज्ञता से उम्मीद है कि बीएमडब्ल्यू लागत को अधिक कुशल बनाएगी, निर्माण प्रक्रियाओं को लचीला करेगी और EV विकास को गति देगी।

2026 में Neue Klasse मॉडल लॉन्च के साथ, बीएमडब्ल्यू को आशा है कि यह नेतृत्व परिवर्तन वैश्विक बाजार में उसकी स्थिति को और मजबूत करेगा।

Amul ने अर्जेंटीना फुटबॉल संघ के साथ क्षेत्रीय प्रायोजक के रूप में अनुबंध बढ़ाया

भारतीय डेयरी दिग्गज अमूल ने अर्जेंटीना फ़ुटबॉल एसोसिएशन (AFA) के साथ अपनी साझेदारी को एक और सत्र के लिए नवीनीकृत कर दिया है। यह नया समझौता लगातार चौथे वर्ष के सहयोग को दर्शाता है और अब फीफा विश्व कप 2026 तक जारी रहेगा।

अमूल 2022 में अर्जेंटीनी फुटबॉल के इतिहास में पहला भारतीय क्षेत्रीय प्रायोजक बना था, जिससे यह विस्तार दोनों ब्रांडों के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बन गया है।

फुटबॉल में एक ऐतिहासिक साझेदारी

AFA के अध्यक्ष क्लाउडियो फेबियन तापिया ने इस साझेदारी पर खुशी जताते हुए कहा कि यह अर्जेंटीनी फुटबॉल और भारत के बीच बढ़ते संबंधों का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि अमूल का भरोसा दोनों देशों के प्रशंसकों और समुदायों के बीच साझा विकास, जुनून और संबंधों को मजबूत करता है।

वैश्विक खेल ब्रांड के रूप में अमूल की भूमिका

अमूल के प्रबंध निदेशक जयन मेहता ने कहा कि ब्रांड का दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों से एक खास जुड़ाव है। उन्होंने कहा, “जिस तरह फुटबॉल सीमाओं के पार दिलों को जोड़ता है, उसी तरह अमूल भी दिलों को जोड़ता है।”
उन्होंने यह भी बताया कि दूध—जिसे दुनिया का मूल ऊर्जा पेय माना जाता है—आज भी खिलाड़ियों और सपनों को पीढ़ियों से ऊर्जा देता आ रहा है।

खेल और पोषण का मेल

अमूल की यह साझेदारी खेल और पोषण की साझा ऊर्जा का उत्सव है। फीफा विश्व कप 2022 के चैंपियन अर्जेंटीना का समर्थन करके ब्रांड यह संदेश देता है कि स्वस्थ पोषण, मैदान के भीतर और बाहर, प्रदर्शन, जुनून और समर्पण को मजबूत करता है।

विश्व कप 2026 की ओर

इस नवीनीकृत प्रायोजन से अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में अमूल की मौजूदगी और मजबूत होती है। यह भारत और दुनिया भर के प्रशंसकों को प्रेरित करता है।
आगामी विश्व कप 2026 के साथ यह साझेदारी रोमांचक पहल, प्रशंसक सहभागिता और फुटबॉल तथा पोषण के संयुक्त उत्सव को सामने लाने का वादा करती है।

आत्मनिर्भर भारत की तरफ भारतीय रेलवे, अपनी पहली हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की कर रहा तैयारी

भारतीय रेल ने अपनी पहली हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन चलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नया प्रोजेक्ट शुरू किया है। यह ट्रेन एक पायलट मॉडल के रूप में तैयार की गई है, ताकि यह दिखाया जा सके कि भविष्य में रेल परिवहन के लिए हाइड्रोजन को स्वच्छ ईंधन के रूप में कैसे प्रयोग किया जा सकता है। यह परियोजना अनुसंधान, डिज़ाइन एवं मानक संगठन (RDSO) द्वारा तैयार किए गए मानकों पर आधारित है। लोकसभा में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस नए विकास के बारे में जानकारी साझा की।

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन

मंत्री ने बताया कि भारत की हाइड्रोजन ट्रेन का निर्माण पूर्ण रूप से पूरा हो चुका है। इसके सुचारु संचालन के लिए हरियाणा के जींद में एक विशेष हाइड्रोजन प्लांट की योजना भी बनाई गई है। यह प्लांट इलेक्ट्रोलाइसिस के माध्यम से हाइड्रोजन तैयार करेगा, जो स्वच्छ और हरित हाइड्रोजन उत्पादन का एक महत्वपूर्ण तरीका है।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में गर्व का कदम

यह नया हाइड्रोजन ट्रेन-सेट पूरी तरह भारत में ही डिजाइन और विकसित किया गया है। यह भारतीय रेल के आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने के मजबूत प्रयासों को दर्शाता है। ट्रेन में उन्नत तकनीक का उपयोग किया गया है, जिसे पूरी तरह देश के भीतर विकसित किया गया है।

विश्व की सबसे लंबी और सबसे शक्तिशाली ब्रॉड-गेज हाइड्रोजन ट्रेन

रेल मंत्री के अनुसार, यह हाइड्रोजन ट्रेन वर्तमान में दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन है, जिसमें 10 कोच हैं। यह सबसे शक्तिशाली भी है, जो ब्रॉड-गेज ट्रैक पर 2400 kW की क्षमता पैदा करती है। इसमें दो ड्राइविंग पावर कारें हैं, जिनमें से प्रत्येक 1200 kW की शक्ति उत्पन्न करती है, और आठ यात्री कोच शामिल हैं।

शून्य प्रदूषण: केवल जलवाष्प का उत्सर्जन

इस ट्रेन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित नहीं करती। चूंकि यह हाइड्रोजन पर आधारित है, इसलिए इसका एकमात्र उत्सर्जन जलवाष्प है। यह ट्रेन को पर्यावरण-अनुकूल बनाता है और रेलों से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

अगली पीढ़ी की ईंधन तकनीक की शुरुआत

वैष्णव ने कहा कि यह परियोजना भारतीय रेल में नई ईंधन तकनीक के उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करती है। पूरे सिस्टम—डिज़ाइन से लेकर प्रोटोटाइपिंग और हाइड्रोजन ट्रैक्शन निर्माण—को पहली बार तैयार किया गया है। चूँकि यह एक पायलट परियोजना है, इसलिए इसकी लागत की तुलना सामान्य ट्रेन प्रणालियों से करना उचित नहीं है।

हरित परिवहन भविष्य के प्रति प्रतिबद्धता

हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना स्पष्ट रूप से भारतीय रेल की स्वच्छ ऊर्जा समाधानों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग और भविष्य के लिए एक अधिक टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल परिवहन प्रणाली बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत है।

विज्ञानिका 2025: साहित्य और रचनात्मक संचार के माध्यम से विज्ञान को बढ़ावा देना

विज्ञानिका: विज्ञान साहित्य महोत्सव 2025 का आयोजन 8–9 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (IISF) के प्रमुख भाग के रूप में किया गया। यह कार्यक्रम CSIR–NIScPR द्वारा विज्ञान भारती (VIBHA), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेटियोरोलॉजी (IITM), पुणे, और पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के सहयोग से आयोजित किया गया। महोत्सव का उद्देश्य यह दिखाना था कि विज्ञान को सरल भाषा, रचनात्मक लेखन और भारतीय सांस्कृतिक रूपों के माध्यम से आम लोगों तक कैसे पहुँचाया जा सकता है। कार्यक्रम में कई जाने-माने वैज्ञानिकों, लेखकों, संपादकों और विज्ञान संचारकों ने भाग लिया, जिससे विज्ञान की लोकप्रियता और जनसंपर्क को नई दिशा मिली।

उद्घाटन सत्र: भारतीय विज्ञान में साहित्य और मीडिया की भूमिका

महोत्सव की शुरुआत “भारतीय विज्ञान विमर्श में साहित्य और संचार माध्यमों की भूमिका” विषयक उद्घाटन सत्र से हुई।
वक्ताओं ने बताया कि कैसे साहित्य और संचार के आधुनिक साधन भारत में वैज्ञानिक सोच को आकार देते हैं।

  • डॉ. परमानंद बर्मन (CSIR–NIScPR) ने महोत्सव का परिचय प्रस्तुत किया।

  • डॉ. नील सरोवर भावेश (VIBHA) ने बताया कि भारत को सांस्कृतिक रूप से जुड़े विज्ञान संचार की आवश्यकता क्यों है।

  • श्री विवेकानंद पै (महासचिव, VIBHA) ने मुख्य वक्तव्य देते हुए विज्ञान संचार में भारतीय दृष्टिकोण की अहमियत पर प्रकाश डाला।

  • प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर, पूर्व कुलपति, पंजाब विश्वविद्यालय ने भारत की वैज्ञानिक संस्थाओं की समृद्ध परंपरा का उल्लेख किया।

  • डॉ. गीता वाणी रयसाम, निदेशक, CSIR–NIScPR ने जनसामान्य के लिए विज्ञान को सरल बनाने के प्रयासों पर बात की।

  • डॉ. रश्मि शर्मा (NCSTC, DST) ने विज्ञान को जन-जन तक पहुँचाने की आधुनिक तकनीकों पर चर्चा की।

  • डॉ. अतुल कुमार श्रीवास्तव (IITM) ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

विज्ञान कवि सम्मेलन: कविता में विज्ञान का स्पर्श

पहले दिन आयोजित विशेष विज्ञान कवि सम्मेलन में प्रसिद्ध कवियों ने विज्ञान और कविता का सुंदर संगम प्रस्तुत किया।

भाग लेने वाले प्रमुख कवि थे—
प्रो. मनोज कुमार पाटेरिया, प्रो. राजेश कुमार, मोहन सगोڑिया, राधा गुप्ता, प्रो. नीरा राघव, यशपाल सिंह ‘यश’, TSRS संदीप और डॉ. अनुराग गौर।

इनकी रचनाओं ने दिखाया कि वैज्ञानिक विचारों को भावपूर्ण और सरल भाषा में कितनी खूबसूरती से समझाया जा सकता है।

दूसरा दिन: आत्मनिर्भर भारत के लिए विज्ञान

दूसरे दिन का सत्र “विज्ञान से समृद्धि – फॉर आत्मनिर्भर भारत” विषय पर केंद्रित था। इसमें भारत के पारंपरिक ज्ञान और उसकी वैज्ञानिक प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा हुई।

मुख्य वक्ता थे—

  • डॉ. अरविंद रणड़े, निदेशक, NIF – पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा और उसके मूल धारकों को सम्मान देने की आवश्यकता पर जोर।

  • डॉ. विश्वजननी जे. सट्टीगेरी (CSIR–TKDL) – पारंपरिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण और साझा करने के महत्व पर प्रकाश।

  • डॉ. एन. श्रीकांत (CCRAS) – पारंपरिक पद्धतियों में वैज्ञानिक मूल्य जोड़ने पर चर्चा।

  • डॉ. कणुप्रिया वशिष्ठ (DBT–BIRAC) – जीवन विज्ञान और बायोटेक्नोलॉजी में हाल के नवाचारों को रेखांकित किया।

सत्र में यह संदेश सामने आया कि भारत का प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान एक साथ मिलकर राष्ट्र की प्रगति को तेज कर सकते हैं।

अपनी भाषा अपना विज्ञान: भारतीय भाषाओं की शक्ति

अपनी भाषा अपना विज्ञान” शीर्षक वाली पैनल चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि जब विज्ञान को भारतीय भाषाओं में साझा किया जाता है, तो लोग उसे अधिक आसानी से समझते हैं।

प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर, श्री देबोब्रत घोष, डॉ. मनीष मोहन गोरे, डॉ. एच. एस. सुधीरा और डॉ. ननाओचा शर्मा ने बताया कि मातृभाषा में विज्ञान संचार से समाज में वैज्ञानिक जागरूकता तेज़ी से बढ़ती है।

 

थाईलैंड में 33वें दक्षिण पूर्व एशियाई खेलों की शुरुआत

थाईलैंड में 9 दिसंबर को 33वें दक्षिण–पूर्व एशियाई खेलों (SEA Games 2025) की आधिकारिक शुरुआत हुई, जो क्षेत्र के सबसे प्रतिष्ठित बहु–खेल आयोजनों में से एक है। बैंकॉक और चोनबुरी प्रांत में आयोजित इस संस्करण में हज़ारों खिलाड़ी और दर्शक एथलेटिक उत्कृष्टता, क्षेत्रीय एकता और सांस्कृतिक गौरव का उत्सव मनाने के लिए एकजुट हुए हैं। प्रतिष्ठित राजमंगला नेशनल स्टेडियम में आयोजित उद्घाटन समारोह ने दक्षिण–पूर्व एशिया की तेजी से विकसित होती खेल पारिस्थितिकी का भव्य आग़ाज़ किया।

भव्य मंच: थाईलैंड में 13,000 से अधिक खिलाड़ी

समृद्ध खेल धरोहर और बड़े आयोजन करने की क्षमता के लिए प्रसिद्ध थाईलैंड इस बार 13,000 से अधिक खिलाड़ियों की मेज़बानी कर रहा है। यह पैमाना SEA Games को एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय खेल मंच के रूप में स्थापित होने का संकेत देता है, जिसमें दक्षिण–पूर्व एशियाई क्षेत्र के सभी सदस्य देशों की मजबूत भागीदारी शामिल है।

प्रतिभागी 11 देश

इस वर्ष SEA Games 2025 में भाग लेने वाले 11 देश हैं—

  1. थाईलैंड (मेज़बान)

  2. मलेशिया

  3. इंडोनेशिया

  4. कंबोडिया

  5. फ़िलिपींस

  6. सिंगापुर

  7. म्यांमार

  8. वियतनाम

  9. लाओ पीपुल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक

  10. ब्रुनेई दारुस्सलाम

  11. डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ तिमोर-लेस्ते

यह विविध भागीदारी दक्षिण–पूर्व एशिया में कूटनीतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को मज़बूत करते हुए खेलों की एकता–परक भूमिका को और सुदृढ़ करती है।

50 मेडल स्पोर्ट्स में प्रतियोगिता

खिलाड़ी कुल 50 पदक खेलों में हिस्सा लेंगे, जिनमें शामिल हैं—

  • ओलंपिक खेल जैसे एथलेटिक्स, तैराकी, बैडमिंटन और फ़ुटबॉल

  • दक्षिण–पूर्व एशियाई पारंपरिक खेल, जो क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करते हैं

इन दोनों का मिश्रण खेलों को वैश्विक रूप से प्रासंगिक और सांस्कृतिक रूप से जड़ित बनाए रखता है, जिससे उभरते खिलाड़ियों को मंच मिलता है और क्षेत्रीय परंपराएँ भी संरक्षित रहती हैं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • 33वें SEA Games 2025 की शुरुआत 9 दिसंबर को थाईलैंड में हुई।

  • आयोजन स्थल: बैंकॉक और चोनबुरी प्रांत।

  • उद्घाटन समारोह: राजमंगला नेशनल स्टेडियम

  • 13,000+ खिलाड़ी भाग ले रहे हैं।

  • कुल 11 दक्षिण–पूर्व एशियाई देश प्रतियोगिता में शामिल हैं।

चेक गणराज्य के अरबपति पॉपुलिस्ट नेता आंद्रेज बाबिस ने दोबारा प्रधानमंत्री पद की शपथ ली

मध्य यूरोप में एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में, चेक गणराज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ है। अरबपति व्यवसायी और सेंट्रिस्ट–पॉपुलिस्ट ANO (YES) आंदोलन के नेता आंद्रेज बाबिस को 9 दिसंबर 2025 को चेक गणराज्य के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई। चार साल बाद उनकी यह वापसी चेक राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देती है। इससे पहले वे 2017 से 2021 तक प्रधानमंत्री रह चुके हैं। बाबिस को राष्ट्रपति पेट्र पावेल ने प्राग कैसल में शपथ दिलाई, जो 3–4 अक्टूबर को हुए संसदीय चुनावों में उनकी पार्टी के मजबूत प्रदर्शन के बाद हुई औपचारिक प्रक्रिया का हिस्सा था।

पृष्ठभूमि: एक विवादित नेता की वापसी

71 वर्षीय आंद्रेज बाबिस चेक राजनीति के सबसे प्रभावशाली, लेकिन सबसे विवादित नेताओं में से एक बने हुए हैं। उनके पिछले कार्यकाल में,

  • लोकलुभावन आर्थिक नीतियाँ

  • यूरोपीय संघ (EU) के साथ सब्सिडी और सुशासन को लेकर टकराव

  • वित्तीय कदाचार के आरोपों पर चल रही जाँचें

जैसे मुद्दों ने सुर्खियाँ बटोरीं। इसके बावजूद, पारंपरिक राजनीतिक दलों से असंतुष्ट मतदाताओं के बीच उनका ANO आंदोलन अभी भी मजबूत समर्थन बनाए हुए है।

चुनावी परिणाम और गठबंधन निर्माण

2025 के चुनावों में ANO आंदोलन सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरा। संसद में बहुमत पाने के लिए बाबिस ने गठबंधन किया है—

  • फ़्रीडम एंड डायरेक्ट डेमोक्रेसी (SPD) – प्रवासन-विरोधी पार्टी

  • मोटोरिस्ट्स फ़ॉर देमसेल्व्स – परिवहन और नागरिक अधिकारों पर केंद्रित दक्षिणपंथी समूह

गठबंधन की ताकत

यह गठबंधन 200 सदस्यीय निचले सदन में 108 सीटों पर नियंत्रण रखता है, जो पूर्व प्रधानमंत्री पेत्र फ़ियाला के नेतृत्व वाले प्रगतिशील–पश्चिमी गठबंधन की तुलना में एक स्पष्ट बहुमत है।

कैबिनेट का गठन

साझेदार दलों ने 16 सदस्यीय मंत्रिमंडल पर सहमति बनाई है—

  • ANO: प्रधानमंत्री सहित 8 मंत्री

  • मोटोरिस्ट्स फ़ॉर देमसेल्व्स: 4 मंत्री

  • SPD: 3 मंत्री

कैबिनेट की औपचारिक नियुक्ति अभी लंबित है, लेकिन बड़े नीतिगत बदलावों की संभावना है।

संदर्भ: यूरोप में राजनीतिक बदलाव का दौर

बाबिस का उदय यूरोप में बढ़ते लोकलुभावन, राष्ट्रवादी और EU-आलोचक सरकारों की लहर का हिस्सा है। उनके नेतृत्व में EU के भीतर निम्न मुद्दों पर सहमति बनाना और कठिन हो सकता है—

  • यूक्रेन युद्ध के लिए समर्थन

  • प्रवासन सुधार

  • ग्रीन ट्रांज़िशन नीतियाँ

  • बजट एवं सब्सिडी ढाँचा

चेक गणराज्य का यह बदलाव हंगरी, स्लोवाकिया और पश्चिमी यूरोप के कुछ हिस्सों में हो रहे राजनीतिक पुनर्संरेखन से मेल खाता है।

स्थिर जानकारी

  • नए प्रधानमंत्री: आंद्रेज बाबिस

  • शपथ ग्रहण: 9 दिसंबर 2025

  • शपथ दिलाने वाले: राष्ट्रपति पेट्र पावेल

  • मुख्य पार्टी: ANO (YES) मूवमेंट

  • गठबंधन साझेदार: SPD + मोटोरिस्ट्स फ़ॉर देमसेल्व्स

  • संसदीय बहुमत: 108/200 सीटें

  • पहला कार्यकाल: 2017–2021

तेलंगाना ग्लोबल समिट में ₹5.75 लाख करोड़ का निवेश हुआ

तेलंगाना ने एक महत्वपूर्ण आर्थिक उपलब्धि हासिल की है, क्योंकि Telangana Rising Global Summit 2025 के समापन पर राज्य को कुल ₹5.75 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। दो दिवसीय इस शिखर सम्मेलन में राज्य की उस रणनीति पर प्रकाश डाला गया, जिसके माध्यम से वह ऊर्जा संक्रमण, AI-आधारित डाटा इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट नगरीकरण और अगली पीढ़ी की तकनीकों में राष्ट्रीय नेतृत्व स्थापित करना चाहता है। ग्लोबल निवेशकों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के शीर्ष नेताओं की भागीदारी के साथ, यह सम्मेलन तेलंगाना की नवाचार-आधारित विकास को गति देने और स्वयं को एक उभरती हुई तकनीकी शक्ति के रूप में स्थापित करने की महत्वाकांक्षा को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

तेलंगाना के वैश्विक निवेश अभियान में बढ़ती गति

यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित किया गया जब भारत के विभिन्न राज्य नवीकरणीय ऊर्जा, AI इंफ्रास्ट्रक्चर, सेमीकंडक्टर्स और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में वैश्विक पूंजी आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा में हैं। हैदराबाद की IT क्षमता के लिए पहले से प्रसिद्ध तेलंगाना अब अपने आर्थिक दृष्टिकोण को और व्यापक बना रहा है, जिसमें शामिल हैं—

  • उन्नत ऊर्जा प्रणालियाँ

  • AI-आधारित डेटा सेंटर इकोसिस्टम

  • भविष्य-योग्य एकीकृत शहरी क्षेत्र

  • कौशल एवं कार्यबल परिवर्तन कार्यक्रम

राज्य सरकार की सक्रिय नीतियों और सुव्यवस्थित निवेशक-सम्पर्क प्रणाली ने इसकी आकर्षकता को वैश्विक कंपनियों के बीच और बढ़ाया है।

ऊर्जा और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर बने निवेश के मुख्य केंद्र

कुल निवेश का बड़ा हिस्सा ऊर्जा और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर गया है, जो तेलंगाना की दीर्घकालिक विकास क्षमता पर निवेशकों के विश्वास को दर्शाता है।

ऊर्जा क्षेत्र

कुल ₹5.75 लाख करोड़ निवेश प्रतिबद्धताओं का लगभग 50% ऊर्जा क्षेत्र में आया। इससे निम्न क्षेत्रों में बढ़ती रुचि साफ़ दिखती है—

  • नवीकरणीय ऊर्जा क्लस्टर

  • बैटरी स्टोरेज समाधान

  • ग्रीन हाइड्रोजन-रेडी इकोसिस्टम

  • औद्योगिक पावर कॉरिडोर

ये परियोजनाएँ भारत के डीकार्बोनाइजेशन प्रयासों और तेलंगाना के ऊर्जा-अधिशेष नवाचार केंद्र बनने की योजना से मेल खाती हैं।

विशाल डेटा सेंटर निवेश घोषणा

डेटा सेंटर निवेश, कुल प्रतिबद्धताओं का दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा रहा। दो प्रमुख कंपनियों ने उच्च-मूल्य परियोजनाओं की घोषणा की—

इन्फ्राकी डेटासेंटर पार्क

  • 1 GW क्षमता वाला AI डेटा सेंटर

  • निवेश मूल्य: ₹70,000 करोड़

AGIDC (सिंगापुर आधारित)

  • ₹67,500 करोड़ का निवेश

  • अंतरराष्ट्रीय गेटवे डेटा सेंटर का निर्माण

  • वैश्विक क्लाउड नेटवर्क एकीकरण को मजबूत करेगा

ये घोषणाएँ तेलंगाना को AI और क्लाउड टेक्नोलॉजी हब के रूप में सशक्त बनाती हैं, जो अगली पीढ़ी के कंप्यूटिंग वर्कलोड्स को संभालने में सक्षम होगा।

शहरी एवं तकनीकी परियोजनाओं के बड़े ऐलान

शिखर सम्मेलन में शहरी विकास से जुड़ी परियोजनाएँ भी प्रमुख रहीं।

JCK Infra की Integrated AI City

  • निवेश: ₹9,000 करोड़

  • परियोजना: Bharat Future City में विकसित होगी

  • आवासीय, वाणिज्यिक, इनोवेशन तथा AI रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल

यह परियोजना तेलंगाना की तकनीक-आधारित शहरी योजना को बढ़ावा देती है और सतत दीर्घकालिक विकास में रुचि रखने वाले वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करती है।

Vision 2047: तेलंगाना का दीर्घकालिक आर्थिक खाका

समापन सत्र के दौरान मुख्यमंत्री ने Telangana Rising 2047 Vision Document जारी किया, जिसे NITI Aayog और Indian School of Business (ISB) के सहयोग से तैयार किया गया है।

विजन लक्ष्य

  • $1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था लक्ष्य – 2034

  • $3 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था लक्ष्य – 2047

रोडमैप का फोकस—

  • समावेशी एवं सतत आर्थिक विकास

  • शिक्षा सुधार

  • युवा-केंद्रित कार्यक्रम

  • वैश्विक-स्तर का इंफ्रास्ट्रक्चर

  • प्रतिभा विकास के लिए एक स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की स्थापना

यह दस्तावेज़ तेलंगाना की वैश्विक प्रतिस्पर्धी ज्ञान एवं नवाचार अर्थव्यवस्था बनने की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है।

स्टैटिक फैक्ट्स

  • कुल निवेश प्रतिबद्धताएँ: ₹5.75 लाख करोड़

  • Infrakey AI डेटा सेंटर परियोजना: ₹70,000 करोड़

  • AGIDC अंतरराष्ट्रीय गेटवे डेटा सेंटर: ₹67,500 करोड़

  • JCK Infra की AI City परियोजना: ₹9,000 करोड़

  • Vision 2047 आर्थिक लक्ष्य: $3 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था

  • Vision 2034 लक्ष्य: $1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था

  • शिखर सम्मेलन: Telangana Rising Global Summit 2025

लिवर की बीमारी का पता लगाने में तेज़ी लाने के लिए पहले AI टूल को मंज़ूरी

अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने दवा परीक्षणों के दौरान एक गंभीर प्रकार की फैटी लीवर बीमारी का आकलन करने में डॉक्टरों की मदद करने के लिए विकसित पहले एआई-संचालित उपकरण को आधिकारिक रूप से मान्यता दे दी है। AIM-NASH नामक यह उपकरण दवा विकास की प्रक्रिया को तेज करने, निदान में निरंतरता लाने और शोधकर्ताओं पर संसाधन-संबंधी बोझ कम करने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती भूमिका का महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है। यह मंजूरी मेडिकल रिसर्च और क्लीनिकल ट्रायल्स की गुणवत्ता को सुधारने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

AIM-NASH क्या है?

AIM-NASH एक क्लाउड-आधारित आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस सिस्टम है, जो लीवर बायोप्सी की छवियों का विश्लेषण करके डॉक्टरों को बीमारी के प्रमुख संकेतकों—जैसे फैट का जमाव, सूजन और स्कारिंग—का मूल्यांकन करने में मदद करता है।

  • ये बायोमार्कर MASH (Metabolic Dysfunction-Associated Steatohepatitis) की पहचान और उसकी प्रगति पर नज़र रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। यह बीमारी लाखों अमेरिकियों को प्रभावित करती है और समय रहते उपचार न मिलने पर लीवर फेल होने या कैंसर तक का कारण बन सकती है।
  • AIM-NASH बड़े डेटासेट पर प्रशिक्षित उन्नत एआई एल्गोरिद्म का उपयोग करके मानकीकृत स्कोर तैयार करता है, जिन्हें अंतिम व्याख्या के लिए डॉक्टर समीक्षा करते हैं। इस प्रक्रिया के स्वचालन से एआई शोध में मौजूद देरी और परिणामों में असंगति जैसी समस्याओं को कम करता है।

MASH दवा परीक्षणों में बदलाव

FDA द्वारा AIM-NASH को मान्यता दिए जाने से MASH के लिए दवा परीक्षणों की प्रक्रिया अधिक तेज़ और सुव्यवस्थित होने की उम्मीद है—यह बीमारी वर्तमान दशक की सबसे चुनौतीपूर्ण मेटाबॉलिक विकारों में से एक है। परंपरागत रूप से, लीवर बायोप्सी को कई विशेषज्ञों द्वारा अलग-अलग समीक्षा की आवश्यकता होती है, जिससे:

  • मूल्यांकन में अधिक समय लगता है

  • परिणामों में भिन्नता बढ़ जाती है

  • परीक्षणों की लागत बढ़ जाती है

AIM-NASH के स्वचालित और एकसमान विश्लेषण से दक्षता, विश्वसनीयता और मानकीकरण में सुधार होता है, जिससे दवा डेवलपर्स संभावित उपचारों को अधिक तेजी से आगे बढ़ा पाते हैं।
यह मान्यता यह भी दर्शाती है कि AI-आधारित निदान पर नियामकों का भरोसा बढ़ रहा है, क्योंकि अध्ययनों ने दिखाया कि AIM-NASH द्वारा दिए गए परिणाम विशेषज्ञ पैथोलॉजिस्ट के आकलन के समान थे।

दवा विकास में AI की बढ़ती भूमिका

  • FDA का यह निर्णय उद्योग में उभरते उस व्यापक रुझान को दर्शाता है, जिसमें AI शोध और विकास का अभिन्न हिस्सा बनता जा रहा है।
  • विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले 3–5 वर्षों में AI दवा विकास का समय और लागत कम से कम 50% तक घटा सकता है, जिससे संपूर्ण फार्मास्यूटिकल उद्योग का स्वरूप बदल सकता है।
  • टार्गेट की पहचान से लेकर क्लीनिकल ट्रायल के अनुकूलन तक, AI आधारित उपकरण तेजी से अनिवार्य बन रहे हैं। MASH जैसी बीमारियों में, जहां निदान की असंगति लंबे समय से बड़ी बाधा रही है, AIM-NASH इस संक्रमण में एक महत्वपूर्ण कदम है।

AIM-NASH कैसे काम करता है?

  • AIM-NASH डीप लर्निंग मॉडल का उपयोग करके अपलोड की गई बायोप्सी छवियों का विश्लेषण करता है और मानक क्लिनिकल स्कोरिंग सिस्टम के अनुरूप मात्रात्मक स्कोर तैयार करता है।
  • इसके बाद ये परिणाम चिकित्सकों के साथ साझा किए जाते हैं, जो अंतिम निदान और मूल्यांकन का निर्णय लेते हैं।
  • AI और मानव विशेषज्ञता का यह संयोजन दोनों—सटीकता और जवाबदेही—को मजबूत करता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि AI डॉक्टरों की सहायता करे, उन्हें प्रतिस्थापित नहीं।

मुख्य बिंदु 

  • FDA ने AIM-NASH को मंजूरी दी, जो दवा परीक्षणों में फैटी लीवर बीमारी का आकलन करने वाला पहला AI टूल है।

  • यह उपकरण लीवर बायोप्सी की छवियों का विश्लेषण करके फैट जमाव, सूजन और स्कारिंग का मूल्यांकन करता है।

  • यह MASH (Metabolic Dysfunction-Associated Steatohepatitis) के उपचार विकसित करने की प्रक्रिया को तेज करने में मदद करेगा।

  • इससे कई विशेषज्ञों द्वारा की जाने वाली मैनुअल बायोप्सी रीडिंग पर निर्भरता घटेगी और दवा परीक्षणों की समय-सीमा कम होगी

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