तंबाकू पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क 1 फरवरी से लागू होगा

सरकार ने तंबाकू और पान मसाला उत्पादों के कराधान में एक महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है। 1 फरवरी से एक नई कर व्यवस्था लागू होगी, जिसके तहत मौजूदा क्षतिपूर्ति उपकर (Compensation Cess) को हटाकर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और एक नया उपकर लगाया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य तथाकथित सिन गुड्स पर अधिक कर लगाकर राजस्व बढ़ाना और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति को मजबूती देना है।

खबर में क्यों?

केंद्र सरकार ने आधिकारिक रूप से अधिसूचना जारी कर बताया है कि 1 फरवरी से तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और पान मसाला पर स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर (Health and National Security Cess) लगाया जाएगा। ये नए कर मौजूदा क्षतिपूर्ति उपकर की जगह लेंगे।

सरकार ने क्या अधिसूचित किया है?

सरकार ने कर प्रणाली में दो प्रमुख बदलाव किए हैं—

  • तंबाकू और उससे जुड़े उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क
  • पान मसाला पर स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर
  • ये दोनों कर GST के अतिरिक्त लगाए जाएंगे और संसदीय मंजूरी के बाद 1 फरवरी से प्रभावी होंगे।

तंबाकू और पान मसाला पर नई कर दरें

1 फरवरी से कर संरचना इस प्रकार होगी—

  • पान मसाला, सिगरेट, तंबाकू एवं समान उत्पाद: 40% GST
  • बीड़ी: 18% GST

GST के अलावा—

  • पान मसाला पर स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर
  • तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लागू होगा।
  • क्षतिपूर्ति उपकर का स्थानापन्न

नए उपकर और अतिरिक्त उत्पाद शुल्क क्षतिपूर्ति उपकर की जगह लेंगे, जो पहले GST के तहत सिन गुड्स पर लगाया जाता था। क्षतिपूर्ति उपकर का उद्देश्य राज्यों को GST लागू होने के बाद हुए राजस्व नुकसान की भरपाई करना था। अब तंबाकू और पान मसाला पर कराधान एक नए तंत्र के तहत किया जाएगा।

कानूनी और संसदीय पृष्ठभूमि

दिसंबर में संसद ने दो विधेयकों को मंजूरी दी, जिनके तहत—

  • पान मसाला के निर्माण पर स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर लगाया जा सकेगा।
  • तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया जा सकेगा।
  • इन्हीं विधेयकों के आधार पर 1 फरवरी से नई कर व्यवस्था लागू की जा रही है।

भारत में सिन गुड्स पर कराधान: पृष्ठभूमि

तंबाकू, शराब और पान मसाला जैसे सिन गुड्स पर भारत में भारी कर लगाए जाते हैं ताकि—

  • स्वास्थ्य जोखिमों के कारण इनके उपभोग को हतोत्साहित किया जा सके।
  • सरकार के लिए अधिक राजस्व जुटाया जा सके।
  • सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी लागतों की भरपाई की जा सके।
  • GST व्यवस्था के तहत भी इन उत्पादों पर उच्च दरें और उपकर/उत्पाद शुल्क लगाया जाता रहा है।

गिनी में सैन्य तख्तापलट करवाने वाले नेता ममाडी डौमबौया ने जीता राष्ट्रपति चुनाव

पश्चिम अफ्रीका के देश गिनी में राजनीतिक स्थिति ने एक निर्णायक मोड़ लिया है। 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद से देश का नेतृत्व कर रहे सैन्य नेता ममाडी डौमबौया राष्ट्रपति चुनाव जीतकर सत्ता में आ गए हैं। प्रमुख विपक्षी दलों द्वारा चुनाव बहिष्कार किए जाने के बीच हुए इस चुनाव के परिणामों ने लोकतांत्रिक संक्रमण और नागरिक शासन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

खबर में क्यों?

गिनी के जुंटा प्रमुख ममाडी डौमबौया ने दिसंबर 2025 में हुए राष्ट्रपति चुनाव में भारी बहुमत से जीत हासिल की। चुनाव लड़ने का उनका फैसला नागरिक शासन बहाल करने के पहले किए गए वादे से पीछे हटने के रूप में देखा जा रहा है। विपक्षी दलों ने चुनाव को अनुचित बताते हुए इसका बहिष्कार किया।

गिनी में राजनीतिक संकट की पृष्ठभूमि

  • सितंबर 2021 में ममाडी डौमबौया ने सैन्य तख्तापलट कर गिनी के पहले लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित राष्ट्रपति अल्फा कोंडे को सत्ता से हटा दिया।
  • तख्तापलट के बाद संविधान निलंबित कर दिया गया और नागरिक शासन की ओर संक्रमण का आश्वासन दिया गया।
  • इस अवधि में राजनीतिक स्वतंत्रताओं पर अंकुश लगाया गया, विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाया गया और कई विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार या निर्वासन में भेज दिया गया।

चुनाव प्रक्रिया और परिणाम

  • राष्ट्रपति चुनाव में कुल आठ उम्मीदवार मैदान में थे।
  • नए संवैधानिक प्रावधानों के तहत कई प्रमुख विपक्षी नेताओं को चुनाव लड़ने से रोका गया।
  • गिनी के चुनाव आयोग के अनुसार, ममादी डूम्बूया को 86.72% वोट मिले, जिससे उन्हें दूसरे दौर की आवश्यकता के बिना ही जीत मिल गई।
  • आधिकारिक तौर पर मतदान प्रतिशत 80.95% बताया गया, हालांकि विपक्षी समूहों ने इस आंकड़े पर सवाल उठाए।

नए संविधान की भूमिका

  • सितंबर 2025 में गिनी में जनमत संग्रह के माध्यम से नया संविधान अपनाया गया।
  • इस संविधान ने सत्तारूढ़ सैन्य जुंटा के सदस्यों को चुनाव लड़ने की अनुमति दी, जिससे डौमबौया की उम्मीदवारी का रास्ता साफ हुआ।
  • राष्ट्रपति का कार्यकाल पांच वर्ष से बढ़ाकर सात वर्ष कर दिया गया, जिसे एक बार नवीनीकृत किया जा सकता है।
  • यह संवैधानिक बदलाव विपक्ष के लिए सबसे बड़ा विवाद का विषय बन गया।

पश्चिम अफ्रीका में सैन्य तख्तापलट

  • हाल के वर्षों में पश्चिम अफ्रीका में माली, बुर्किना फासो और नाइजर जैसे देशों में सैन्य तख्तापलट देखने को मिले हैं।
  • ऐसे संक्रमण अक्सर लोकतंत्र बहाल करने के वादों के साथ शुरू होते हैं, लेकिन जब सैन्य नेता चुनावों के जरिए सत्ता बनाए रखते हैं तो आलोचना तेज हो जाती है।
  • गिनी का मामला क्षेत्र में स्थिरता और लोकतांत्रिक शासन के बीच संतुलन की व्यापक चुनौती को दर्शाता है।

केंद्र सरकार ने केरल, पटना और मेघालय हाई कोर्ट के लिए नए चीफ जस्टिस नियुक्त किए

केंद्र सरकार ने भारत के तीन उच्च न्यायालयों से जुड़े महत्वपूर्ण न्यायिक नियुक्ति और स्थानांतरण को मंजूरी दे दी है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशों के आधार पर केरल, पटना और मेघालय उच्च न्यायालयों के लिए नए मुख्य न्यायाधीशों की अधिसूचना जारी की गई है, जिससे उच्च न्यायपालिका में नेतृत्व की निरंतरता और सुचारु कार्यप्रणाली सुनिश्चित होगी।

खबर में क्यों?

केंद्र सरकार ने केरल, पटना और मेघालय उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण को अधिसूचित किया है। ये निर्णय दिसंबर 2025 में भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशों के अनुरूप लिए गए हैं।

नियुक्तियों का संवैधानिक आधार

  • इन नियुक्तियों और स्थानांतरणों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 222 और अनुच्छेद 217 के तहत किया गया है।
  • अनुच्छेद 222: राष्ट्रपति को भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का स्थानांतरण करने की शक्ति देता है।
  • अनुच्छेद 217: उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों, जिसमें मुख्य न्यायाधीश भी शामिल हैं, की नियुक्ति से संबंधित प्रावधान करता है।

केरल उच्च न्यायालय के नए मुख्य न्यायाधीश

  • न्यायमूर्ति सौमेन सेन, जो वर्तमान में मेघालय उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश हैं, को स्थानांतरित कर केरल उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।
  • वे 9 जनवरी 2026 को वर्तमान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति नितिन मधुकर जमदार के सेवानिवृत्त होने के बाद पदभार ग्रहण करेंगे।

पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति

  • न्यायमूर्ति संगम कुमार साहू, जो इस समय ओडिशा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हैं, को पटना उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।
  • उनकी नियुक्ति उनके पदभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होगी, जिससे बिहार में न्यायिक नेतृत्व को मजबूती मिलेगी।

मेघालय उच्च न्यायालय के नए मुख्य न्यायाधीश

  • न्यायमूर्ति सौमेन सेन के स्थानांतरण के बाद, न्यायमूर्ति रेवती प्रशांत मोहिते डेरे, जो बॉम्बे उच्च न्यायालय की न्यायाधीश हैं, को मेघालय उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।
  • इससे पूर्वोत्तर राज्य में न्यायिक प्रशासन की निरंतरता बनी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की भूमिका

  • ये सिफारिशें 18 दिसंबर 2025 को हुई सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बैठक में की गई थीं।
  • कॉलेजियम प्रणाली न्यायिक नियुक्तियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और इसका उद्देश्य न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखना तथा योग्यता आधारित नियुक्तियाँ और स्थानांतरण सुनिश्चित करना है।

उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया

  • अनुच्छेद 217 के अनुसार, उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश और राज्य के राज्यपाल से परामर्श के बाद की जाती है।
  • मुख्य न्यायाधीश के अलावा अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के मामलों में, संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से भी परामर्श किया जाता है।

परामर्श प्रक्रिया (Consultation Process)

  • उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के नाम की सिफारिश भारत के मुख्य न्यायाधीश और दो वरिष्ठतम न्यायाधीशों वाले कॉलेजियम द्वारा की जाती है।
  • प्रस्ताव की शुरुआत संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा अपने दो वरिष्ठ सहयोगियों से परामर्श के बाद की जाती है।
  • इसके बाद प्रस्ताव मुख्यमंत्री को भेजा जाता है, जो राज्यपाल के माध्यम से इसे केंद्रीय कानून मंत्री को अग्रेषित करते हैं।
  • नीति के अनुसार, किसी राज्य के उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश आमतौर पर उसी राज्य के बाहर से नियुक्त किया जाता है।
  • अंतिम निर्णय कॉलेजियम द्वारा लिया जाता है।

गुजरात में ऊर्जा अवसंरचना पर साइबर हमलों से निपटने के लिए समिति का गठन

डिजिटल तकनीकों जैसे स्मार्ट मीटर, स्मार्ट ग्रिड और स्वचालित नियंत्रण प्रणालियों के बढ़ते उपयोग के साथ बिजली क्षेत्र की ऊर्जा अवसंरचना साइबर खतरों के प्रति अधिक संवेदनशील हो गई है। इस जोखिम को पहचानते हुए गुजरात सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य ने तैयारियों की समीक्षा, प्रणालियों में सुधार और महत्वपूर्ण बिजली अवसंरचना की दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष समितियों का गठन किया है।

खबर में क्यों?

गुजरात सरकार ने स्मार्ट ग्रिड, SCADA प्रणालियों और डिजिटल बिजली आपूर्ति नेटवर्क से जुड़े बढ़ते साइबर जोखिमों को देखते हुए राज्य की ऊर्जा अवसंरचना को साइबर हमलों से सुरक्षित रखने के लिए 11 सदस्यीय कोर कमेटी और 19 सदस्यीय टास्क फोर्स का गठन किया है।

निर्णय के बारे में

  • यह पहल गुजरात के ऊर्जा एवं पेट्रोकेमिकल्स विभाग (EPD) द्वारा की गई है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य महत्वपूर्ण ऊर्जा अवसंरचना की सुरक्षा करना है।
  • यह फैसला 24×7 बिजली आपूर्ति प्रणालियों पर साइबर खतरों को लेकर बढ़ती चिंताओं को दर्शाता है।
  • बिजली क्षेत्र में बढ़ती डिजिटलाइजेशन से साइबर जोखिमों का खतरा भी बढ़ा है।

गठित प्रमुख समितियाँ

कोर कमेटी

  • 11 सदस्य शामिल
  • ऊर्जा क्षेत्र में समग्र साइबर सुरक्षा रणनीति की समीक्षा
  • नीतियों, तैयारियों और सिस्टम की मजबूती का आकलन
  • दीर्घकालिक सुधारों और रूपरेखाओं का सुझाव

टास्क फोर्स

  • 19 सदस्य शामिल
  • परिचालन और तकनीकी पहलुओं पर ध्यान
  • साइबर सुरक्षा उपायों के कार्यान्वयन में सहायता
  • प्रशिक्षण, मॉक ड्रिल और समन्वय गतिविधियों में सहयोग

मुख्य जिम्मेदारियाँ

कोर कमेटी और टास्क फोर्स—

  • ऊर्जा क्षेत्र में आईटी और साइबर सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा करेंगी।
  • साइबर घटनाओं से निपटने की तैयारियों का आकलन करेंगी।
  • साइबर सुरक्षा नीति में सुधार के सुझाव देंगी।
  • मजबूत साइबर सुरक्षा प्रणाली के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार करेंगी।
  • साइबर जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देंगी।

क्षमता निर्माण पर फोकस

  • साइबर ड्रिल और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
  • अधिकारियों और संस्थानों के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
  • शैक्षणिक संस्थानों और साइबर विशेषज्ञों के साथ साझेदारी विकसित की जाएगी।
  • राज्य और राष्ट्रीय एजेंसियों के साथ प्रभावी समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा।

आंठवा पे कमीशन गठित करने वाला सबसे पहला राज्य बना असम

असम ने सरकारी वेतन सुधारों के क्षेत्र में पहल करते हुए देश का पहला राज्य बनने का गौरव हासिल किया है, जिसने अपनी 8वीं राज्य वेतन आयोग (8th State Pay Commission) का गठन किया है। यह सक्रिय निर्णय 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 1 जनवरी 2026 को समाप्त होने से पहले लिया गया है। इस कदम ने राज्य कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और अन्य राज्यों का ध्यान आकर्षित किया है, क्योंकि वेतन आयोग सरकारी कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और पेंशन के निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आयोग का समय से पहले गठन असम सरकार की वेतन संशोधन प्रक्रिया को तेज करने की मंशा को दर्शाता है।

खबर में क्यों?

असम ने अपनी 8वीं राज्य वेतन आयोग का गठन किया है और ऐसा करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है। इस निर्णय की घोषणा मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने की। यह फैसला 7वें वेतन आयोग के 1 जनवरी 2026 को समाप्त होने से पहले लिया गया है।

8वीं राज्य वेतन आयोग के बारे में

वेतन आयोग सरकार द्वारा निम्नलिखित की समीक्षा और सिफारिश के लिए गठित किया जाता है—

  • सरकारी कर्मचारियों के वेतन
  • भत्ते और सेवा लाभ
  • सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन

असम का 8वां राज्य वेतन आयोग वर्तमान 7वें वेतन आयोग की व्यवस्था का स्थान लेगा और मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों, महंगाई तथा राज्य की वित्तीय क्षमता के आधार पर नए वेतन ढांचे की सिफारिश करेगा।

घोषणा और नेतृत्व

  • आयोग के गठन की घोषणा मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने की।
  • पूर्व असम मुख्य सचिव सुभाष दास को 8वें राज्य वेतन आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

इस कदम के साथ असम ने अन्य राज्यों और यहाँ तक कि केंद्र सरकार से भी बढ़त बना ली है, जहाँ 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की प्रक्रिया अभी औपचारिक रूप से शुरू नहीं हुई है।

राज्य कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महत्व

असम का यह प्रारंभिक कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि—

  • इससे राज्य कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को शीघ्र स्पष्टता मिलेगी।
  • अन्य राज्यों की तुलना में सिफारिशें जल्दी प्रस्तुत होने की संभावना बढ़ेगी।
  • यदि सरकार शीघ्र स्वीकृति देती है, तो संशोधित वेतन और पेंशन सामान्य से पहले लागू हो सकते हैं।
  • हालाँकि, विशेषज्ञों के अनुसार वेतन आयोग को आमतौर पर अपनी रिपोर्ट तैयार करने में लगभग 18 महीने का समय लगता है।

पृष्ठभूमि: भारत में वेतन आयोग

  • वेतन आयोग केंद्र और राज्यों द्वारा समय-समय पर गठित किए जाते हैं।
  • वर्तमान में 7वां वेतन आयोग लागू है, जिसका कार्यकाल 1 जनवरी 2026 को समाप्त होगा।
  • वेतन आयोग की सिफारिशें स्वतः लागू नहीं होतीं, इसके लिए सरकार की मंजूरी आवश्यक होती है।
  • वेतन संशोधन अक्सर पूर्व प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव) से लागू किए जाते हैं और बकाया राशि बाद में दी जाती है।

आगे क्या?

सामान्य प्रक्रिया के अनुसार—

  • 8वां राज्य वेतन आयोग अपनी रिपोर्ट देने में लगभग 18 महीने ले सकता है।
  • यद्यपि 1 जनवरी 2026 को संदर्भ तिथि माना जाएगा, वास्तविक क्रियान्वयन 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में हो सकता है।
  • असम की यह शुरुआती पहल उसके कर्मचारियों को अन्य राज्यों की तुलना में संभावित लाभ दिला सकती है।

गगनयान और आर्टेमिस-II: 2026 के ऐतिहासिक मानव अंतरिक्ष मिशन

वर्ष 2026 वैश्विक अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित होने वाला है। भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका दो महत्वपूर्ण मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशनों की तैयारी कर रहे हैं। जहाँ भारत का गगनयान मिशन स्वदेशी मानव अंतरिक्ष उड़ान प्रणालियों का परीक्षण करेगा, वहीं नासा का आर्टेमिस-II मिशन पाँच दशकों से अधिक समय बाद मनुष्यों को चंद्रमा से आगे ले जाएगा और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों की दिशा तय करेगा।

खबर में क्यों?

  • भारत का भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और अमेरिका की नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) वर्ष 2026 में होने वाले ऐतिहासिक मिशनों की तैयारी कर रहे हैं।
    ISRO का मानव रहित गगनयान-G1 मिशन और NASA का आर्टेमिस-II मिशन भविष्य के मानव अंतरिक्ष और गहरे अंतरिक्ष अभियानों के लिए तकनीकी आधार तैयार करेंगे।

गगनयान मिशन: भारत का मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम

गगनयान कार्यक्रम का उद्देश्य भारत की स्वतंत्र मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता विकसित करना है, जिसमें अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रूप से अंतरिक्ष में भेजना और वापस लाना शामिल है।

  • पहला मानव रहित कक्षीय परीक्षण मिशन G1, अस्थायी रूप से मार्च 2026 में प्रस्तावित है।
  • इसे LVM3 (गगनयान-Mk3) रॉकेट से प्रक्षेपित किया जाएगा, जिसे अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिए ह्यूमन-रेटेड बनाया गया है।

व्योममित्रा की भूमिका और मिशन के उद्देश्य

  • व्योममित्रा नामक एक ह्यूमनॉइड रोबोट G1 मिशन में शामिल होगा।
  • यह अंतरिक्ष यात्रियों के व्यवहार और प्रतिक्रियाओं का अनुकरण करेगा।
  • मिशन में जीवन समर्थन प्रणाली, क्रू मॉड्यूल की सुरक्षा, संचार प्रणाली, पुनःप्रवेश प्रक्रिया और समुद्र में रिकवरी तंत्र का परीक्षण किया जाएगा।
  • सफलता की स्थिति में भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जिनके पास मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता है।

नासा का आर्टेमिस-II मिशन

  • आर्टेमिस-II मिशन 5 फरवरी 2026 से पहले नहीं निर्धारित है।
  • इसमें चार अंतरिक्ष यात्री होंगे, जो ओरियन अंतरिक्ष यान में यात्रा करेंगे, जिसे स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट से प्रक्षेपित किया जाएगा।
  • यह 1972 में अपोलो-17 के बाद पहला मानव मिशन होगा जो निम्न पृथ्वी कक्षा से आगे जाएगा, और गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण की वापसी को चिह्नित करेगा।

आर्टेमिस-II के प्रमुख लक्ष्य

  • लगभग 10 दिनों का चंद्रमा के चारों ओर उड़ान मिशन।
  • अंतरिक्ष यान चंद्रमा से 5,000 समुद्री मील से अधिक दूरी तक जाएगा, जो अब तक की सबसे दूर मानव यात्रा होगी।
  • डीप-स्पेस नेविगेशन, विकिरण सुरक्षा, दीर्घकालिक जीवन समर्थन प्रणालियों और मिशन संचालन का परीक्षण।
  • यह भविष्य के चंद्र लैंडिंग मिशनों और मंगल अभियानों का मार्ग प्रशस्त करेगा।

वैश्विक अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए महत्व

  • गगनयान और आर्टेमिस-II, मिलकर एक बहुध्रुवीय (Multipolar) अंतरिक्ष युग की शुरुआत का संकेत देते हैं।
  • भारत निम्न पृथ्वी कक्षा में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है, जबकि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण का नेतृत्व कर रहा है।
  • वर्ष 2026 में विकसित होने वाली तकनीकें भविष्य में अंतरिक्ष स्टेशन, निजी मिशन, चंद्र आधार और अंतरग्रहीय यात्रा को प्रभावित करेंगी।

भारत और पाकिस्तान ने काउंसलर समझौते के तहत कैदियों की लिस्ट का आदान-प्रदान किया

भारत और पाकिस्तान ने एक बार फिर एक नियमित लेकिन महत्वपूर्ण कूटनीतिक प्रक्रिया को पूरा किया है। दोनों देशों ने एक-दूसरे की हिरासत में मौजूद नागरिक कैदियों और मछुआरों की सूची का आदान-प्रदान किया। यह प्रक्रिया एक मौजूदा द्विपक्षीय समझौते के तहत की गई और व्यापक राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद मानवीय तथा कांसुलर संवाद की निरंतरता को दर्शाती है।

खबर में क्यों?

भारत और पाकिस्तान ने 2008 के कांसुलर एक्सेस समझौते के तहत राजनयिक माध्यमों से कैदियों और मछुआरों की सूचियों का आदान-प्रदान किया। इस दौरान मानवीय पहलुओं पर जोर देते हुए भारत ने पाकिस्तान में बंद भारतीय कैदियों और मछुआरों की शीघ्र रिहाई, कांसुलर पहुंच और स्वदेश वापसी की मांग की।

कैदियों की सूची के आदान-प्रदान के बारे में

  • यह आदान-प्रदान नई दिल्ली और इस्लामाबाद में एक साथ किया गया।
  • विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत ने अपनी हिरासत में मौजूद 391 नागरिक कैदियों और 33 मछुआरों की जानकारी साझा की, जो पाकिस्तानी हैं या पाकिस्तानी माने जाते हैं।
  • इसके बदले में पाकिस्तान ने 58 नागरिक कैदियों और 199 मछुआरों की सूची दी, जो भारतीय हैं या भारतीय माने जाते हैं।

कांसुलर एक्सेस समझौता, 2008 की प्रमुख विशेषताएं

  • यह समझौता दोनों देशों को वर्ष में दो बार कैदियों की सूची का आदान-प्रदान करने की अनुमति देता है।
  • इसके तहत हिरासत में लिए गए नागरिकों को कांसुलर पहुंच प्रदान की जाती है, जिससे वे अपने देश से संपर्क कर सकें।
  • इसका उद्देश्य कैदियों और मछुआरों के अधिकारों, सुरक्षा और कल्याण की रक्षा करना है, विशेषकर उन मछुआरों के लिए जो अनजाने में समुद्री सीमाएं पार कर जाते हैं।

भारत की मांगें और कूटनीतिक रुख

  • भारत ने नागरिक कैदियों और मछुआरों के साथ-साथ उनकी नौकाओं की शीघ्र रिहाई और स्वदेश वापसी की मांग की।
  • नई दिल्ली ने पाकिस्तान से 167 ऐसे भारतीय कैदियों और मछुआरों की रिहाई में तेजी लाने को कहा, जो अपनी सजा पूरी कर चुके हैं।
  • इसके अलावा, भारत ने 35 ऐसे कैदियों को तत्काल कांसुलर पहुंच देने की मांग की, जिन्हें भारतीय माना जा रहा है लेकिन अभी तक यह सुविधा नहीं मिली है।

मानवीय चिंताएं और सुरक्षा मुद्दे

  • भारत ने पाकिस्तान की हिरासत में मौजूद सभी भारतीय और भारतीय माने जाने वाले कैदियों की सुरक्षा, संरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
  • मछुआरों की गिरफ्तारी अक्सर समुद्री सीमा के अनजाने उल्लंघन के कारण होती है, जिससे उनकी लंबी हिरासत एक मानवीय मुद्दा बन जाती है, न कि आपराधिक।
  • इस तरह के आदान-प्रदान से हिरासत में लिए गए लोगों की उपेक्षा और दुर्व्यवहार को रोकने में मदद मिलती है।

कूटनीतिक प्रयासों से हुई प्रगति

  • आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2014 से लगातार कूटनीतिक प्रयासों के चलते पाकिस्तान से 2,661 भारतीय मछुआरों और 71 भारतीय नागरिक कैदियों की स्वदेश वापसी हो चुकी है।
  • इसमें 2023 के बाद से रिहा किए गए 500 मछुआरे और 13 नागरिक कैदी भी शामिल हैं, जो संवाद और कांसुलर तंत्र के माध्यम से धीरे-धीरे हो रही प्रगति को दर्शाता है।

एयर मार्शल एस. श्रीनिवास ने IAF ट्रेनिंग कमांड के प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाला

भारतीय वायुसेना (IAF) ने एयर मार्शल एस. श्रीनिवास को अपने प्रशिक्षण कमान (Training Command) का नया प्रमुख नियुक्त किया है। यह नियुक्ति वायुसेना के प्रशिक्षण और मानव संसाधन विकास क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण नेतृत्व परिवर्तन को दर्शाती है। एक अनुभवी फाइटर पायलट, फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और प्रमुख प्रशिक्षण संस्थानों के कमांडर के रूप में उनके व्यापक अनुभव से पायलट प्रशिक्षण, सुरक्षा और परिचालन तैयारियों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

खबर में क्यों?

एयर मार्शल एस. श्रीनिवास ने 1 जनवरी को भारतीय वायुसेना के प्रशिक्षण कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (AOC-in-C) का पदभार संभाला। पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने प्रशिक्षण कमान युद्ध स्मारक पर शहीद कर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

एयर मार्शल एस. श्रीनिवास के बारे में

एयर मार्शल एस. श्रीनिवास भारतीय वायुसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी हैं, जिन्हें फाइटर संचालन, उड़ान प्रशिक्षण और प्रशिक्षण प्रशासन में व्यापक अनुभव प्राप्त है। वे उड़ान प्रशिक्षण, सुरक्षा और कार्मिक प्रबंधन से जुड़े नेतृत्वकारी दायित्वों के लिए जाने जाते हैं।

करियर पृष्ठभूमि

  • नेशनल डिफेंस अकादमी (NDA) के पूर्व छात्र
  • 13 जून 1987 को भारतीय वायुसेना के फाइटर स्ट्रीम में कमीशन
  • श्रेणी ‘A’ के योग्य फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर
  • विभिन्न विमानों पर 4,200 से अधिक उड़ान घंटे

उड़ान और परिचालन अनुभव

एयर मार्शल श्रीनिवास ने कई प्रकार के विमानों पर उड़ान भरी है, जिनमें शामिल हैं:

  • मिग-21, इस्क्रा, किरण
  • पीसी-7 एमके-II, एचपीटी-32, माइक्रोलाइट विमान

इसके अलावा वे निम्न भूमिकाओं के लिए भी योग्य हैं:

  • चेतक और चीता हेलीकॉप्टर पर सेकंड पायलट
  • पेचोरा मिसाइल प्रणाली पर ऑपरेशंस ऑफिसर

प्रमुख कमांड नियुक्तियाँ

  • कमांडेंट, एयर फोर्स अकादमी
  • पश्चिमी सीमा पर एक अग्रिम फाइटर बेस के एयर ऑफिसर कमांडिंग
  • एक प्रमुख फ्लाइंग प्रशिक्षण बेस के एयर ऑफिसर कमांडिंग
  • एयर ऑफिसर कमांडिंग, एडवांस मुख्यालय पश्चिमी वायु कमान (जयपुर)
  • कमांडिंग ऑफिसर, फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स स्कूल
  • कमांडेंट, इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस सेफ्टी
  • कमांडिंग ऑफिसर, बेसिक फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूल

शैक्षणिक और व्यावसायिक योग्यताएँ

एयर मार्शल श्रीनिवास ने निम्न प्रतिष्ठित संस्थानों से प्रशिक्षण प्राप्त किया है:

  • नेशनल डिफेंस कॉलेज (NDC)
  • कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट (CDM)
  • डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज (DSSC)

उनकी शैक्षणिक योग्यताओं में शामिल हैं:

  • रक्षा एवं सामरिक अध्ययन में एमफिल
  • मास्टर ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज
  • रक्षा एवं सामरिक अध्ययन में एमएससी

पुरस्कार और सम्मान

  • उत्कृष्ट सेवाओं के लिए एयर मार्शल एस. श्रीनिवास को निम्न सम्मान प्रदान किए गए हैं:
  • विशिष्ट सेवा पदक (VSM) – 2017
  • अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) – 2024

तमिलनाडु थाचनकुरिची में एक कार्यक्रम के साथ जल्लीकट्टू 2026 की शुरुआत

तमिलनाडु में वार्षिक जलीकट्टू सत्र की शुरुआत वर्ष 2026 की शुरुआत में होने जा रही है। राज्य सरकार ने 3 जनवरी 2026 को पहले जलीकट्टू आयोजन की अनुमति प्रदान की है। यह पारंपरिक सांड-वश में करने का खेल पुडुकोट्टई ज़िले के थाचनकुरिची गांव में आयोजित होगा। यह आयोजन नियमन और सुरक्षा मानकों के तहत तमिलनाडु की सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाता है।

खबर में क्यों?

तमिलनाडु सरकार ने आधिकारिक रूप से 3 जनवरी को पुडुकोट्टई ज़िले के थाचनकुरिची गांव में जलीकट्टू 2026 के पहले आयोजन की अनुमति दी है। यह अनुमति पशुपालन, दुग्ध, मत्स्य एवं मछुआ कल्याण विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के माध्यम से दी गई है, जिससे राज्य में जलीकट्टू सत्र की औपचारिक शुरुआत होती है।

जलीकट्टू 2026 आयोजन के बारे में

जलीकट्टू आयोजन की अनुमति सरकारी गजट के माध्यम से जारी की गई है। यह आयोजन पुडुकोट्टई ज़िले के थाचनकुरिची गांव में होगा। परंपरागत रूप से हर वर्ष जलीकट्टू सत्र का पहला आयोजन यहीं किया जाता है, जिससे इस गांव को विशेष सांस्कृतिक महत्व प्राप्त है।

कानूनी ढांचा और अनुमति

यह आयोजन पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 (तमिलनाडु संशोधन अधिनियम, 2017) के अंतर्गत स्वीकृत किया गया है। इस संशोधन के तहत जलीकट्टू को एक पारंपरिक खेल के रूप में नियमन के साथ अनुमति दी गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आयोजन के दौरान सभी कानूनी प्रावधानों और न्यायालय द्वारा निर्धारित सुरक्षा उपायों का कड़ाई से पालन किया जाएगा।

सुरक्षा मानक और एसओपी

अधिसूचना के अनुसार जलीकट्टू आयोजन राज्य सरकार तथा पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवाओं के निदेशक द्वारा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) के अनुसार ही होगा। जिला प्रशासन को भीड़ नियंत्रण, जन सुरक्षा, पशु कल्याण और आपातकालीन प्रबंधन (आपदा प्रबंधन सहित) सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

पारदर्शिता और ऑनलाइन आवेदन प्रणाली

सरकार ने दोहराया है कि जलीकट्टू एवं अन्य पारंपरिक आयोजनों के लिए आवेदन केवल निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। मैनुअल आवेदन मान्य नहीं होंगे। इससे पारदर्शिता, निगरानी और जवाबदेही बढ़ेगी तथा आयोजकों द्वारा सुरक्षा व कल्याण दिशानिर्देशों के पालन को सुनिश्चित किया जा सकेगा।

थाचनकुरिची और पुडुकोट्टई का महत्व

थाचनकुरिची को जलीकट्टू सत्र के पारंपरिक उद्घाटन स्थल के रूप में विशेष सांस्कृतिक पहचान प्राप्त है। पुडुकोट्टई ज़िला तमिलनाडु में सबसे अधिक ‘वाडीवासल’ (वह द्वार जहाँ से सांड छोड़े जाते हैं) के लिए जाना जाता है, जो जलीकट्टू आयोजनों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं।

भागीदारी और पिछले वर्षों के आंकड़े

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2025 में लगभग 600 सांडों और 350 तामरों (सांड पकड़ने वाले प्रतिभागी) ने भाग लिया था, जबकि 4,500 से अधिक दर्शक मौजूद थे। इस दौरान सांड मालिकों, तामरों, दर्शकों और एक सांड को चोटें आई थीं। 2024 में 700 से अधिक सांडों ने भाग लिया और 22 लोग घायल हुए, जिससे सख्त सुरक्षा उपायों की आवश्यकता रेखांकित होती है।

तमिलनाडु में जलीकट्टू

जलीकट्टू तमिल संस्कृति और फसल उत्सवों, विशेष रूप से पोंगल, से जुड़ा एक पारंपरिक खेल है। वर्षों से यह परंपरा और पशु कल्याण के बीच बहस का विषय रही है। कानूनी चुनौतियों के बाद तमिलनाडु सरकार ने संशोधन कर इसे नियमन और सुरक्षा शर्तों के साथ आयोजित करने की अनुमति दी है।

दिसंबर 2025 में UPI ट्रांजैक्शन बढ़कर 21.63 बिलियन

भारत का डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम लगातार तेज़ी से विस्तार कर रहा है। दिसंबर महीने में यूनिफ़ाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस (UPI) के माध्यम से लेन-देन की संख्या और मूल्य—दोनों में मज़बूत वृद्धि दर्ज की गई। ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि व्यक्ति और व्यवसाय नक़द रहित भुगतान पर तेजी से निर्भर हो रहे हैं, जिससे रियल-टाइम डिजिटल भुगतान प्रणालियों में भारत की वैश्विक अग्रणी स्थिति और सुदृढ़ हुई है।

समाचार में क्यों?

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया (NPCI) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में UPI लेन-देन की मात्रा साल-दर-साल 29% बढ़कर 21.63 अरब (बिलियन) लेन-देन तक पहुंच गई। लेन-देन का मूल्य और दैनिक उपयोग भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा, जो देशभर में डिजिटल भुगतान अपनाने की निरंतर वृद्धि को दर्शाता है।

दिसंबर में प्रमुख वृद्धि बिंदु

  • UPI लेन-देन 21.63 अरब तक पहुंचे — वार्षिक आधार पर 29% की तेज़ बढ़ोतरी
  • लेन-देन का कुल मूल्य साल-दर-साल 20% बढ़कर लगभग ₹28 लाख करोड़
  • मासिक आधार पर भी मात्रा और मूल्य—दोनों में स्वस्थ वृद्धि, जो एकमुश्त उछाल नहीं बल्कि स्थायी उपयोग को दर्शाती है

दैनिक लेन-देन रुझान

  • दिसंबर में औसत दैनिक लेन-देन मूल्य लगभग ₹90,217 करोड़, जो नवंबर 2025 के ₹87,721 करोड़ से अधिक है
  • औसत दैनिक लेन-देन संख्या बढ़कर 698 मिलियन, जबकि नवंबर में यह 682 मिलियन थी
  • ये आंकड़े दर्शाते हैं कि UPI बड़े पैमाने पर उच्च-आवृत्ति (हर रोज़) भुगतान संभालने में सक्षम है

UPI के साथ IMPS का प्रदर्शन

  • इमीडिएट पेमेंट सर्विस (IMPS) में भी वृद्धि दर्ज
  • दिसंबर में IMPS लेन-देन मूल्य ₹6.62 लाख करोड़, सालाना 10% की बढ़ोतरी
  • लेन-देन संख्या 380 मिलियन, जो नवंबर के 369 मिलियन से अधिक है
  • यह त्वरित बैंक ट्रांसफर की स्थिर मांग को दर्शाता है

वृद्धि का महत्व

  • शहरी और ग्रामीण—दोनों भारत में डिजिटल अपनाने की गहराई बढ़ रही है
  • कम-नक़द अर्थव्यवस्था के सरकारी लक्ष्यों को समर्थन, पारदर्शिता में सुधार और नक़दी पर निर्भरता में कमी
  • व्यवसायों के लिए तेज़ सेटलमेंट और कम लेन-देन लागत से दक्षता और आर्थिक गतिविधि में वृद्धि

UPI क्या है?

यूनिफ़ाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस (UPI) एक रियल-टाइम भुगतान प्रणाली है, जो मोबाइल फ़ोन के माध्यम से बैंक खातों के बीच तुरंत धन हस्तांतरण की सुविधा देती है।
NPCI द्वारा विकसित UPI, पीयर-टू-पीयर और मर्चेंट लेन-देन को आसान, कम लागत और उच्च सुरक्षा के साथ सक्षम बनाता है। यह भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था और वित्तीय समावेशन प्रयासों की रीढ़ बन चुका है।

 

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