चिली के नए राष्ट्रपति चुने गए जोस एंटोनियो कास्ट

चिली में एक बड़ा राजनीतिक परिवर्तन देखने को मिला है, जहाँ मतदाताओं ने अति-रूढ़िवादी नेता जोसे एंटोनियो कास्ट को देश का अगला राष्ट्रपति चुना है। उनकी जीत अपराध, अवैध प्रवासन और सुरक्षा को लेकर बढ़ती जन-चिंताओं को दर्शाती है और मौजूदा वामपंथी सरकार से स्पष्ट बदलाव का संकेत देती है।

क्या है खबर?

जोसे एंटोनियो कास्ट ने चिली का राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया है। उन्होंने वामपंथी उम्मीदवार जैनेट जारा को हराया। कास्ट को 58.16% मत मिले, जबकि जारा को 41.84% वोट प्राप्त हुए। कास्ट 11 मार्च 2026 को राष्ट्रपति पद की शपथ ग्रहण करेंगे।

पृष्ठभूमि

  • चिली ने 1990 में पिनोशे शासन के बाद लोकतंत्र में वापसी की।
  • तब से सत्ता वाम और दक्षिणपंथ के बीच बदलती रही है।
  • कास्ट 2021 का चुनाव मौजूदा राष्ट्रपति गैब्रियल बोरिक से हार गए थे।
  • बढ़ती अपराध दर और वेनेजुएला से बढ़े प्रवासन ने 2025 के चुनाव परिणामों को प्रभावित किया।

नए राष्ट्रपति के प्रमुख उद्देश्य

जोसे एंटोनियो कास्ट के मुख्य लक्ष्य हैं—

  • अवैध प्रवासन पर नियंत्रण
  • अपराध और संगठित हिंसा में कमी
  • सीमा सुरक्षा को मजबूत करना
  • अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए सरकारी खर्च में कटौती

कास्ट की जीत की प्रमुख विशेषताएँ

  • कानून-व्यवस्था पर कड़ा जोर
  • अवैध प्रवासियों के प्रति सख्त रुख
  • रूढ़िवादी मतदाताओं का मजबूत समर्थन
  • संसद में स्पष्ट बहुमत के बिना राष्ट्रपति पद पर जीत

इस विकास का महत्व

  • चिली की राजनीति में दक्षिणपंथ की ओर झुकाव
  • मतदाताओं की सुरक्षा और स्थिरता को प्राथमिकता
  • दक्षिण अमेरिका में दक्षिणपंथी सरकारों की बढ़ती सूची में चिली का जुड़ना
  • चिली की विदेश और आर्थिक नीतियों पर संभावित प्रभाव

स्थिर तथ्य 

  • राजधानी: सैंटियागो
  • निर्वाचित राष्ट्रपति: जोसे एंटोनियो कास्ट
  • निवर्तमान राष्ट्रपति: गैब्रियल बोरिक
  • क्षेत्र: दक्षिण अमेरिका
  • शासन प्रणाली: राष्ट्रपति प्रणाली

Google Pay ने लॉन्च किया अपना पहला क्रेडिट कार्ड

भारत के डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में Google ने अपना पहला-ऐतिहासिक क्रेडिट कार्ड दुनिया में पहली बार भारत में लॉन्च किया है। यह कार्ड Axis Bank के साथ साझेदारी में और RuPay नेटवर्क पर जारी किया गया है। यह क्रेडिट कार्ड Google Pay से एकीकृत है और इसे सीधे UPI से जोड़ा जा सकता है, जिससे उपयोगकर्ता क्रेडिट के माध्यम से UPI मर्चेंट भुगतान आसानी से कर सकते हैं।

Google के को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड की प्रमुख विशेषताएँ

  • यह Google–Axis Bank को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड RuPay नेटवर्क पर आधारित है, जिससे यह UPI मर्चेंट भुगतान के लिए पूरी तरह अनुकूल है।
  • यह इसकी सबसे बड़ी खासियत है, क्योंकि Visa और Mastercard के क्रेडिट कार्ड को UPI से लिंक नहीं किया जा सकता।
  • कार्ड की एक प्रमुख नवाचार विशेषता है इंस्टेंट रिवॉर्ड सिस्टम।
  • पारंपरिक क्रेडिट कार्ड्स के विपरीत, जहाँ रिवॉर्ड या कैशबैक महीने के अंत में मिलता है, इस कार्ड पर हर लेन-देन पर तुरंत रिवॉर्ड मिलता है, जिसे अगली पेमेंट में तुरंत इस्तेमाल किया जा सकता है।

RuPay–UPI इंटीग्रेशन का महत्व

  • RuPay और UPI, दोनों का संचालन नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा किया जाता है।
  • इनके एकीकरण से उपयोगकर्ताओं को UPI की सरलता और क्रेडिट कार्ड की सुविधा व रिवॉर्ड्स एक साथ मिलते हैं।
  • भारत में RuPay–UPI क्रेडिट मॉडल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
  • PhonePe और Paytm जैसे फिनटेक प्लेटफॉर्म पहले से ही UPI से जुड़े RuPay क्रेडिट कार्ड पेश कर रहे हैं, और अब Google की एंट्री इस मॉडल को वैश्विक स्तर पर मान्यता देती है।

Axis Bank की भूमिका

  • Axis Bank इस क्रेडिट कार्ड का इश्यूइंग बैंक है।
  • यह साझेदारी Google की तकनीकी क्षमता और विशाल यूजर बेस को Axis Bank की बैंकिंग विशेषज्ञता, रेगुलेटरी अनुपालन और क्रेडिट अंडरराइटिंग के साथ जोड़ती है।
  • यह सहयोग भारत के वित्तीय क्षेत्र में बैंक–फिनटेक साझेदारी के बदलते मॉडल को दर्शाता है।

मुख्य बिंदु 

  • Google ने दुनिया का पहला क्रेडिट कार्ड भारत में लॉन्च किया।
  • Axis Bank के साथ साझेदारी, RuPay नेटवर्क पर आधारित।
  • कार्ड को UPI से लिंक कर मर्चेंट भुगतान किया जा सकता है।
  • हर ट्रांजैक्शन पर तुरंत रिवॉर्ड/कैशबैक।
  • RuPay और UPI दोनों NPCI द्वारा संचालित हैं।
  • Visa और Mastercard क्रेडिट कार्ड UPI से लिंक नहीं किए जा सकते।

पोंडुरु खादी को GI टैग मिला

भारत की पारंपरिक हथकरघा विरासत को एक महत्वपूर्ण बढ़ावा देते हुए, आंध्र प्रदेश का विशिष्ट पोंडुरु खादी—जो हाथ से काते और हाथ से बुने गए सूती कपड़े के लिए प्रसिद्ध है—को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा भौगोलिक संकेत (GI) टैग प्रदान किया गया है। यह मान्यता उस ऐतिहासिक प्रशंसा के लगभग 100 वर्ष बाद मिली है, जब महात्मा गांधी ने स्वयं पोंडुरु खादी की असाधारण महीनता और उत्कृष्ट शिल्पकला की सराहना की थी। GI टैग से न केवल पोंडुरु खादी की पहचान और संरक्षण सुदृढ़ होगा, बल्कि स्थानीय बुनकरों की आजीविका को भी मजबूती मिलेगी।

पोंडुरु खादी क्या है?

पोंडुरु खादी एक पारंपरिक हाथ से काती और हाथ से बुनी सूती कपड़ा है, जो अपनी अत्यंत महीन बनावट और मजबूती के लिए प्रसिद्ध है। इसे अन्य खादी किस्मों से अलग बनाने वाली विशेषता है स्थानीय रूप से उगाई गई कपास और पारंपरिक कताई तकनीक का उपयोग, जिसमें अक्सर विशेष लकड़ी की चरखा और चावल की माड़ से सूत को मजबूत किया जाता है। ऐतिहासिक रूप से, पोंडुरु खादी को भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान विशेष पहचान मिली, जब महात्मा गांधी ने इसे स्वावलंबन और स्वदेशी आंदोलन के प्रतीक के रूप में प्रोत्साहित किया।

GI टैग: इसका अर्थ क्या है?

भौगोलिक संकेत (Geographical Indication – GI) टैग एक बौद्धिक संपदा अधिकार है, जो ऐसे उत्पादों को दिया जाता है जो किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र से संबंधित हों और जिनकी गुणवत्ता, प्रतिष्ठा या विशिष्टता उस स्थान से जुड़ी हो। GI टैग से पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण, उत्पाद के नाम के दुरुपयोग पर रोक, और यह सुनिश्चित होता है कि केवल अधिकृत उत्पादक ही उस नाम से उत्पाद का विपणन कर सकें।

सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व

पोंडुरु खादी को मिला GI टैग भारत के पारंपरिक वस्त्रों और स्वदेशी शिल्प के संरक्षण के व्यापक प्रयासों को मजबूत करता है। भारत में पहले से ही बनारसी रेशम, कांचीपुरम रेशम, पोचमपल्ली इकत और चंदेरी कपड़ा जैसे कई GI-टैग प्राप्त वस्त्र हैं। इस सूची में पोंडुरु खादी का शामिल होना आंध्र प्रदेश की सांस्कृतिक और कारीगर पहचान को और सुदृढ़ करता है।

मुख्य बिंदु 

  • पोंडुरु खादी को भौगोलिक संकेत (GI) टैग प्रदान किया गया है।
  • यह आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के पोंडुरु गांव से संबंधित है।
  • GI टैग केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा दिया गया।
  • पोंडुरु खादी की प्रशंसा महात्मा गांधी ने लगभग 100 वर्ष पहले की थी।
  • GI टैग एक भौगोलिक मूल से जुड़ा बौद्धिक संपदा अधिकार है।

SBI के प्रबंध निदेशक अश्विनी कुमार तिवारी का कार्यकाल बढ़ा

बैंकिंग क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण विकास के तहत भारत सरकार ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के प्रबंध निदेशक (Managing Director) अश्विनी कुमार तिवारी के कार्यकाल को दो वर्षों के लिए बढ़ा दिया है। यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है जब देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक आर्थिक विकास, डिजिटल विस्तार और वित्तीय सुधारों के दौर से गुजर रहा है। इस कार्यकाल विस्तार की जानकारी एसबीआई द्वारा एक नियामकीय फाइलिंग के माध्यम से दी गई।

कार्यकाल विस्तार का विवरण

आधिकारिक फाइलिंग के अनुसार, केंद्र सरकार ने अश्विनी कुमार तिवारी को उनके मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति के बाद भी एसबीआई के प्रबंध निदेशक के रूप में पुनर्नियुक्त किया है।

  • उनका वर्तमान कार्यकाल 27 जनवरी 2026 को समाप्त होना था।
  • नए विस्तार के बाद उनका कार्यकाल अब 31 दिसंबर 2027 तक जारी रहेगा, जो उनकी सेवानिवृत्ति (सुपरएनुएशन) की तिथि के अनुरूप है।
  • यह निर्णय एसबीआई के शीर्ष प्रबंधन में निरंतरता सुनिश्चित करता है और तिवारी के नेतृत्व व प्रदर्शन पर सरकार के भरोसे को दर्शाता है।

अश्विनी कुमार तिवारी को दूसरा विस्तार

  • यह उल्लेखनीय है कि यह अश्विनी कुमार तिवारी को दिया गया दूसरा दो-वर्षीय विस्तार है।
  • इससे पहले उन्हें 2024 में भी इसी तरह का विस्तार दिया गया था।
  • उनकी प्रारंभिक नियुक्ति जनवरी 2021 में तीन वर्ष के कार्यकाल के लिए हुई थी।
  • अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने बैंक के बैलेंस शीट को मजबूत करने, डिजिटल बैंकिंग के विस्तार और ऋण वृद्धि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अहम भूमिका निभाई है।

भारतीय स्टेट बैंक की नेतृत्व संरचना

  • भारतीय स्टेट बैंक देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक है।
  • इसका नेतृत्व एक चेयरमैन करता है।
  • चेयरमैन की सहायता के लिए चार प्रबंध निदेशक (MDs) होते हैं, जो बैंक के विभिन्न रणनीतिक और परिचालन क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभालते हैं।
  • यह संरचना एसबीआई के विशाल घरेलू, अंतरराष्ट्रीय, डिजिटल और वित्तीय समावेशन से जुड़े कार्यों के प्रभावी प्रबंधन के लिए बनाई गई है।

मुख्य बिंदु 

  • अश्विनी कुमार तिवारी का नया कार्यकाल: 31 दिसंबर 2027 तक
  • पूर्व कार्यकाल समाप्ति तिथि: 27 जनवरी 2026
  • यह उनका दूसरा दो-वर्षीय विस्तार है (पहला 2024 में)
  • प्रारंभिक नियुक्ति: जनवरी 2021
  • एसबीआई का नेतृत्व: एक चेयरमैन और चार प्रबंध निदेशक

पेंशन के बदले ले सकेंगे लोन, 80% तक एकमुश्त निकासी

सेवानिवृत्ति में अधिक लचीलापन देने के उद्देश्य से एक अहम सुधार के तहत पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के नियमों में महत्वपूर्ण बदलावों की घोषणा की है। संशोधित प्रावधानों के अनुसार अब गैर-सरकारी (निजी क्षेत्र) NPS सब्सक्राइबर अपने कुल पेंशन कॉर्पस का 80% तक निकासी कर सकते हैं, जबकि पहले यह सीमा 60% थी। यह निर्णय भारत की पेंशन व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव है, जिससे निजी क्षेत्र के सब्सक्राइबरों को अपनी सेवानिवृत्ति बचत पर अधिक नियंत्रण मिलेगा।

NPS निकासी नियमों में क्या बदला है

  • पहले सरकारी और गैर-सरकारी, दोनों प्रकार के NPS सब्सक्राइबर केवल 60% कॉर्पस ही निकाल सकते थे और शेष 40% अनिवार्य रूप से एन्युटी में निवेश करना होता था।
  • नए नियम केवल गैर-सरकारी सब्सक्राइबरों पर लागू होंगे। सरकारी कर्मचारियों के लिए 60:40 की मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी।
  • यदि किसी गैर-सरकारी सब्सक्राइबर का कुल कॉर्पस ₹12 लाख से अधिक है, तो वह 80% तक एकमुश्त निकाल सकता है और केवल 20% एन्युटी में निवेश करना होगा।

संशोधित निकासी स्लैब 

PFRDA ने कुल पेंशन संपत्ति के आधार पर निकासी विकल्प स्पष्ट किए हैं:

  • ₹8 लाख या उससे कम: पूरी राशि एकमुश्त निकाली जा सकती है; एन्युटी की कोई बाध्यता नहीं।
  • ₹8 लाख से ₹12 लाख: ₹6 लाख तक एकमुश्त निकासी; शेष राशि से एन्युटी खरीदना अनिवार्य।
  • ₹12 लाख से अधिक: 80% एकमुश्त निकासी और 20% एन्युटी—पहले की 60:40 व्यवस्था के स्थान पर।
  • यह स्तरबद्ध ढांचा वित्तीय लचीलापन और दीर्घकालिक आय सुरक्षा—दोनों को संतुलित करता है।

नए नियमों के लिए पात्रता

  • ये नियम गैर-सरकारी NPS सब्सक्राइबरों पर लागू हैं, जिनमें निजी क्षेत्र के कर्मचारी, स्वरोज़गार करने वाले और स्वैच्छिक रूप से जुड़े सदस्य शामिल हैं।
  • सरकारी कर्मचारियों के लिए कोई बदलाव नहीं; 60% निकासी और 40% अनिवार्य एन्युटी जारी रहेगी।

निकास (Exit) और निवेश आयु सीमा में बदलाव

अब सब्सक्राइबर 85 वर्ष की आयु तक NPS में निवेश बनाए रख सकते हैं (यदि वे पहले निकास न लें)।

सामान्य निकास की अनुमति अब निम्न में से किसी एक पर मिलेगी:

  • 15 वर्ष की सदस्यता पूर्ण होने पर, या
  • 60 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर, या
  • सेवानिवृत्ति/सुपरएन्युएशन—जो भी पहले हो।
  • इससे सब्सक्राइबर अपनी व्यक्तिगत रिटायरमेंट योजना के अनुसार निकासी तय कर सकेंगे।

मृत्यु या लापता होने की स्थिति में नियम

  • यदि एन्युटी खरीद या एकमुश्त निकासी से पहले सब्सक्राइबर की मृत्यु हो जाती है, तो पूरा कॉर्पस नामांकित व्यक्ति/कानूनी उत्तराधिकारियों को दिया जाएगा।
  • यदि सब्सक्राइबर लापता है और मृत मान लिया जाता है, तो 20% कॉर्पस अंतरिम राहत के रूप में जारी किया जाएगा।
  • शेष राशि भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 के अनुसार औपचारिक घोषणा के बाद जारी की जाएगी।

विशेष प्रावधान: नागरिकता, दिव्यांगता और समयपूर्व निकास

  • भारतीय नागरिकता त्यागने की स्थिति में NPS खाता बंद कर पूरा कॉर्पस एकमुश्त निकाला जा सकता है।
  • समयपूर्व निकास पर सामान्यतः 80% एन्युटी और 20% एकमुश्त मिलेगा;
  • लेकिन यदि कुल कॉर्पस ₹5 लाख से कम है, तो पूरी राशि निकाली जा सकती है।
  • 75% या अधिक दिव्यांगता/शारीरिक अक्षमता की स्थिति में, सरकारी डॉक्टर/सर्जन का मेडिकल प्रमाणपत्र देकर निकास का विकल्प उपलब्ध है।

PM मोदी के अदीस अबाबा दौरे के दौरान तीन समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर

भारत और इथियोपिया ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अदीस अबाबा दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच तीन समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। यह प्रधानमंत्री मोदी की इथियोपिया की पहली आधिकारिक यात्रा है, जो अफ्रीका, विशेषकर हॉर्न ऑफ अफ्रीका क्षेत्र के साथ भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता को दर्शाती है।

भारत–इथियोपिया के बीच हस्ताक्षरित प्रमुख MoU

1. सीमा शुल्क प्रशासन में सहयोग

पहला MoU सीमा शुल्क मामलों में प्रशासनिक सहयोग पर केंद्रित है, जिससे दोनों देशों को—

  • सूचना साझा करने में सुधार
  • सीमा शुल्क से जुड़े अपराधों की रोकथाम
  • व्यापार और लॉजिस्टिक्स को सुगम बनाने
  • सीमा पार व्यापार में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

यह समझौता द्विपक्षीय व्यापार की दक्षता बढ़ाने और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

2. इथियोपियाई दूतावास में डेटा सेंटर की स्थापना

दूसरा MoU इथियोपिया के दूतावास में डेटा सेंटर की स्थापना से संबंधित है। इस पहल से—

  • डिजिटल अवसंरचना को मजबूती
  • डेटा सुरक्षा और प्रबंधन में सुधार
  • ई-गवर्नेंस और कूटनीतिक संचार को समर्थन मिलेगा।

यह समझौता डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में भारत की विशेषज्ञता और साझेदार देशों के साथ उसके सहयोग दृष्टिकोण को दर्शाता है।

3. संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना में सहयोग

तीसरा MoU संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभियानों में सहयोग पर केंद्रित है, जिसमें भारत और इथियोपिया दोनों ही प्रमुख योगदानकर्ता हैं। इसका उद्देश्य—

  • समन्वय और प्रशिक्षण को सुदृढ़ करना
  • शांति अभियानों में सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान
  • वैश्विक शांति और सुरक्षा को मजबूत करना है।

यह समझौता बहुपक्षीय सहयोग और वैश्विक स्थिरता के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

औपचारिक स्वागत और सांस्कृतिक कूटनीति

  • प्रधानमंत्री मोदी का अदीस अबाबा में अत्यंत गर्मजोशी से स्वागत किया गया।
  • इथियोपिया के प्रधानमंत्री डॉ. अबी अहमद अली ने स्वयं हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया।
  • उन्हें नेशनल पैलेस में औपचारिक स्वागत और गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
  • प्रधानमंत्री मोदी ने पारंपरिक इथियोपियाई कॉफी सेरेमनी में भी भाग लिया, जो आतिथ्य, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सभ्यतागत मूल्यों का प्रतीक है।

भारत–इथियोपिया संबंध: ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

  • भारत और इथियोपिया के संबंध लंबे समय से ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संपर्कों, शैक्षिक आदान-प्रदान और विकास सहयोग पर आधारित रहे हैं।
  • भारत ने शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में इथियोपिया के क्षमता निर्माण प्रयासों में एक विश्वसनीय साझेदार की भूमिका निभाई है।
  • प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री अबी अहमद अली के बीच मजबूत व्यक्तिगत संबंधों ने द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग को नई गति दी है।

मुख्य बिंदु 

  • प्रधानमंत्री मोदी ने दिसंबर 2025 में इथियोपिया की पहली यात्रा की
  • भारत और इथियोपिया के बीच तीन MoU पर हस्ताक्षर हुए
  • MoU सीमा शुल्क सहयोग, डेटा सेंटर स्थापना और UN शांति स्थापना से संबंधित
  • समझौते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री अबी अहमद अली की उपस्थिति में संपन्न हुए

पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री अरूप बिस्वास कौन हैं?

पश्चिम बंगाल में खेल मंत्री की भूमिका राज्य में खेलों के प्रचार-प्रसार, युवा विकास और प्रमुख खेल आयोजनों के प्रबंधन में अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। हाल के वर्षों में यह जिम्मेदारी अरूप बिस्वास के पास थी, जो एक प्रमुख राजनीतिक नेता रहे हैं और एक हाई-प्रोफाइल अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल आयोजन से जुड़े घटनाक्रम के कारण चर्चा में आए।

पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री कौन थे?

अरूप बिस्वास पश्चिम बंगाल की राजनीति का एक जाना-माना चेहरा और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी रहे हैं। उन्होंने दिसंबर 2025 तक पश्चिम बंगाल सरकार में खेल एवं युवा मामले मंत्री के रूप में कार्य किया, जिसके बाद उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया।

अरूप बिस्वास के बारे में

अरूप बिस्वास राज्य की राजनीति में एक प्रभावशाली नेता रहे हैं और सालों से उन्होंने कई महत्वपूर्ण विभागों को संभाला है। खेल मंत्री के तौर पर, वे राज्य में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने, स्टेडियमों को मैनेज करने और युवाओं के विकास में सहायता करने के लिए ज़िम्मेदार थे।

उनकी भूमिका से जुड़े प्रमुख बिंदु

  • तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता
  • पश्चिम बंगाल के खेल एवं युवा मामले मंत्री
  • बड़े खेल आयोजनों के आयोजन में सक्रिय भूमिका
  • राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल कार्यक्रमों में राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व

इस्तीफा और हालिया घटनाक्रम

  • दिसंबर 2025 में उन्होंने इस्तीफा दिया
  • कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम में लियोनेल मेसी से जुड़े एक कार्यक्रम के दौरान अव्यवस्था के बाद यह फैसला लिया गया
  • मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उनका इस्तीफा स्वीकार किया
  • जांच पूरी होने तक खेल विभाग का अतिरिक्त प्रभार मुख्यमंत्री स्वयं संभाल रही हैं

राष्ट्रपति भवन में ‘परम वीर दीर्घा’ का उद्घाटन

विजय दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने 16 दिसंबर 2025 को राष्ट्रपति भवन में परम वीर दीर्घा का उद्घाटन किया। यह पहल भारत के सबसे वीर सैनिकों के सम्मान और सर्वोच्च सैन्य शौर्य की विरासत को संजोने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से उन वीरों को श्रद्धांजलि दी गई है जिन्होंने राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया और यह राष्ट्रीय गौरव को सुदृढ़ करती है।

परम वीर दीर्घा के बारे में

परम वीर दीर्घा राष्ट्रपति भवन में स्थापित एक विशेष गैलरी है, जहाँ परम वीर चक्र से सम्मानित सभी 21 वीरों के चित्र प्रदर्शित किए गए हैं। इस गैलरी का उद्देश्य आगंतुकों को भारत के उन राष्ट्रीय नायकों के बारे में शिक्षित करना है जिन्होंने देश की रक्षा में असाधारण साहस, अदम्य संकल्प और शौर्य का परिचय दिया। यह दीर्घा स्मारक होने के साथ-साथ जन-जागरूकता का केंद्र भी है।

पृष्ठभूमि और महत्व

जहाँ आज परम वीर दीर्घा स्थापित है, वहाँ पहले औपनिवेशिक काल के ब्रिटिश एड-डी-कैम्प (ADC) के चित्र लगे थे। उनकी जगह भारतीय वीरता पुरस्कार विजेताओं के चित्रों का लगाया जाना औपनिवेशिक विरासत से आगे बढ़कर अपने नायकों के सम्मान का प्रतीक है। यह कदम भारत की सांस्कृतिक विरासत, मूल्यों और स्वदेशी परंपराओं को गर्व के साथ अपनाने की व्यापक पहल को दर्शाता है।

परम वीर चक्र के बारे में

परम वीर चक्र (PVC) भारत का सर्वोच्च सैन्य वीरता सम्मान है, जो युद्धकाल में असाधारण साहस, वीरता और आत्मबलिदान के लिए प्रदान किया जाता है। इसकी स्थापना 1950 में हुई थी और अब तक यह केवल 21 बार प्रदान किया गया है, जिससे इसकी दुर्लभता और प्रतिष्ठा स्पष्ट होती है। इनमें से कई सम्मान मरणोपरांत दिए गए, जो राष्ट्र के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान को दर्शाते हैं।

मुख्य बिंदु 

  • परम वीर दीर्घा का उद्घाटन: 16 दिसंबर 2025 (विजय दिवस)
  • उद्घाटनकर्ता: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु
  • स्थान: राष्ट्रपति भवन
  • प्रदर्शनी: सभी 21 परम वीर चक्र विजेताओं के चित्र
  • परम वीर चक्र: भारत का सर्वोच्च सैन्य वीरता सम्मान
  • पहल का संदेश: औपनिवेशिक विरासत से हटकर राष्ट्रीय गौरव और अपने नायकों का सम्मान

जेपी मॉर्गन भारत में एशिया का सबसे बड़ा GCC स्थापित करेगा

भारत उच्च-मूल्य वाली व्यावसायिक गतिविधियों के लिए वैश्विक कंपनियों की पसंदीदा मंज़िल बना हुआ है। इसी कड़ी में भारत के वैश्विक सेवा पारिस्थितिकी तंत्र को एक बड़ा प्रोत्साहन देते हुए, अमेरिकी बैंकिंग दिग्गज जेपी मॉर्गन ने मुंबई में एशिया का सबसे बड़ा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) स्थापित करने की योजना की घोषणा की है। यह कदम वैश्विक वित्त और प्रौद्योगिकी मानचित्र पर भारत की स्थिति को और सुदृढ़ करता है।

पृष्ठभूमि

जेपी मॉर्गन ने पिछले कुछ वर्षों में भारत में अपनी उपस्थिति लगातार बढ़ाई है। केवल पिछले दो वर्षों में ही बैंक ने लगभग 10 लाख वर्ग फुट कार्यालय स्थान लिया है। कुशल मानव संसाधन, लागत-लाभ, और मजबूत डिजिटल इकोसिस्टम के कारण भारत वैश्विक बैंकों के लिए एक पसंदीदा केंद्र बन गया है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

यह विकास इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह—

  • भारत में एशिया का सबसे बड़ा जीसीसी स्थापित करेगा
  • बड़े पैमाने पर उच्च-कौशल रोजगार सृजित करेगा
  • वैश्विक बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं में भारत की भूमिका को मजबूत करेगा
  • अन्य बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहित करेगा

ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) क्या है?

ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी की ऑफशोर इकाई होती है, जो निम्नलिखित महत्वपूर्ण कार्य संभालती है—

  • सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटल सेवाएँ
  • वित्तीय संचालन और अनुपालन
  • डेटा एनालिटिक्स और जोखिम प्रबंधन
  • अनुसंधान, नवाचार और सपोर्ट सेवाएँ

भारत दुनिया में सबसे अधिक जीसीसी की मेज़बानी करता है, जिससे वह ज्ञान-आधारित सेवाओं का वैश्विक केंद्र बन चुका है।

एक नज़र में प्रमुख बिंदु

  • कंपनी: जेपी मॉर्गन
  • स्थान: पवई, मुंबई
  • क्षेत्रफल: 20 लाख वर्ग फुट
  • कर्मचारी क्षमता: लगभग 30,000
  • पूरा होने का लक्ष्य: 2029

मुख्य निष्कर्ष

  • जेपी मॉर्गन मुंबई में एशिया का सबसे बड़ा जीसीसी स्थापित करेगा
  • यह कदम वित्त और प्रौद्योगिकी सेवाओं में भारत की मजबूती को दर्शाता है
  • परियोजना से बड़े पैमाने पर कुशल रोजगार सृजित होंगे
  • भारत लगातार वैश्विक जीसीसी हब के रूप में उभर रहा है

PM मोदी को इथियोपिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 16 दिसंबर 2025 को इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली ने अपने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘द ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथियोपिया’ से सम्मानित किया। यह पुरस्कार अदीस अबाबा में अंतरराष्ट्रीय सम्मलन केंद्र में आयोजित एक विशेष समारोह में प्रधानमंत्री मोदी को प्रदान किया गया। यह सम्मान प्रधानमंत्री मोदी को प्रदान किया गया 28वां शीर्ष विदेशी राजकीय पुरस्कार है, जो वैश्विक मंच पर भारत के नेतृत्व और उसकी सक्रिय अंतरराष्ट्रीय सहभागिता की निरंतर मान्यता को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री मोदी इस पुरस्कार को प्राप्त करने वाले पहले वैश्विक नेता हैं। मोदी ने इस सम्मान के लिए प्रधानमंत्री अबी और इथियोपिया के लोगों के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने प्रधानमंत्री अबी के नेतृत्व और राष्ट्रीय एकता, स्थिरता, और समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए उनके प्रयासों की सराहना की।

पुरस्कार के बारे में

द ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथियोपिया देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह सम्मान इथियोपिया के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को सुदृढ़ करने और वैश्विक मंच पर उसकी स्थिति को मजबूत करने में असाधारण योगदान के लिए प्रदान किया जाता है। यह पुरस्कार औपचारिक रूप से इथियोपिया के प्रधानमंत्री डॉ. अबीय अहमद अली द्वारा प्रदान किया गया, जिन्होंने स्वयं प्रधानमंत्री मोदी की मेज़बानी की और सम्मान समारोह का नेतृत्व किया।

प्रधानमंत्री मोदी के विचार

इस सम्मान को स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इसे केवल अपने लिए नहीं, बल्कि सभी भारतीयों के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन असंख्य भारतीयों का है, जिनके विश्वास, योगदान और प्रयासों ने भारत–इथियोपिया संबंधों को आकार दिया है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध सभ्यताओं में से एक द्वारा सम्मानित किया जाना विशेष महत्व रखता है और इस पुरस्कार को 140 करोड़ भारतीयों को समर्पित किया।

ऐतिहासिक उपलब्धि और 28वां वैश्विक सम्मान

इस सम्मान के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने दो महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल कीं। वे इथियोपिया का सर्वोच्च सम्मान प्राप्त करने वाले पहले वैश्विक नेता बने और यह पुरस्कार उनका 28वां अंतरराष्ट्रीय राजकीय सम्मान भी है, जो उन्हें विश्व स्तर पर सर्वाधिक सम्मानित भारतीय नेताओं में शामिल करता है। राजनीतिक विश्लेषकों और भाजपा ने इसे भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा और प्रधानमंत्री मोदी के स्थिर एवं सम्मानित नेतृत्व का प्रमाण बताया।

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध

प्रधानमंत्री मोदी ने रेखांकित किया कि भारत और इथियोपिया के बीच हजारों वर्षों पुराने संपर्क और आदान–प्रदान रहे हैं, जिनकी जड़ें शिक्षा, संस्कृति और जन-जन के संबंधों में हैं। उन्होंने विशेष रूप से भारतीय शिक्षकों और शिक्षाविदों की भूमिका की सराहना की, जिन्होंने दशकों से इथियोपिया की शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आज भी कई भारतीय शिक्षक और प्रोफेसर इथियोपिया के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में सेवाएं दे रहे हैं, जिससे दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक सद्भाव और विश्वास मजबूत हुआ है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • प्रधानमंत्री मोदी को इथियोपिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान – द ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथियोपिया प्रदान किया गया।
  • वे यह सम्मान पाने वाले पहले वैश्विक राष्ट्राध्यक्ष/सरकार प्रमुख बने।
  • यह प्रधानमंत्री मोदी का 28वां शीर्ष विदेशी राजकीय सम्मान है।
  • सम्मान इथियोपिया के प्रधानमंत्री डॉ. अबीय अहमद अली द्वारा प्रदान किया गया।
  • भारत–इथियोपिया संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया गया।
  • अफ्रीकी संघ (African Union) का मुख्यालय इथियोपिया में स्थित है।

Recent Posts

about | - Part 79_12.1
QR Code
Scan Me