सुप्रीम कोर्ट ने भूटान के टॉप कोर्ट से किया एमओयू

भारत और भूटान के बीच न्यायिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भूटान के साथ युवा विधि पेशेवरों (लॉ क्लर्क्स) के आदान-प्रदान के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस घोषणा की जानकारी भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने दी और भूटान से आए दो लॉ क्लर्क्स का सर्वोच्च न्यायालय में स्वागत किया।

क्यों खबर में है?

भारत और भूटान के बीच एक MoU पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिसके तहत भूटान के लॉ क्लर्क्स भारत के सर्वोच्च न्यायालय में कार्य करेंगे। इस पहल का उद्देश्य न्यायिक आदान-प्रदान, प्रशिक्षण और दीर्घकालिक संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देना है।

MoU के बारे में

इस समझौते की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं—

  • भूटान के दो लॉ क्लर्क भारत के सर्वोच्च न्यायालय में कार्य करेंगे।
  • उनका कार्यकाल तीन माह का होगा।
  • उन्हें भारतीय लॉ क्लर्क्स के समान मानदेय दिया जाएगा।
  • यात्रा व्यय भारत का सर्वोच्च न्यायालय वहन करेगा।

समझौते की पृष्ठभूमि

यह पहल दोनों देशों के बीच विकसित हो रहे न्यायिक सहयोग को दर्शाती है—

  • अक्टूबर 2025 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई ने भूटान का दौरा किया था।
  • इस दौरान भारत और भूटान ने न्यायिक संबंधों को गहरा करने पर सहमति जताई।
  • सहयोग के क्षेत्रों में तकनीकी एकीकरण और क्षमता निर्माण शामिल हैं।

पहल का महत्व

यह MoU दोनों देशों के लिए कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण है—

  • भारत और भूटान के बीच न्यायिक कूटनीति को मजबूती मिलती है।
  • भूटानी न्यायपालिका को भारत की विधिक प्रणाली को समझने और अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
  • यह पहल भारत की ‘पड़ोसी पहले’ (Neighbourhood First) नीति के तहत क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देती है।

रमेश कुमार जुनेजा ने काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन का पदभार संभाला

भारत के चमड़ा निर्यात क्षेत्र को वैश्विक व्यापार के एक अहम दौर में नया नेतृत्व मिला है। रमेश कुमार जुनेजा ने काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट्स (CLE) के चेयरमैन के रूप में पदभार संभाला है। उनका व्यापक उद्योग अनुभव और लंबे समय से संस्थागत जुड़ाव, अंतरराष्ट्रीय चमड़ा बाजारों में भारत की स्थिति को और मजबूत करने में सहायक माना जा रहा है।

क्यों खबरों में है?

रमेश कुमार जुनेजा ने काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट्स (CLE) के चेयरमैन का कार्यभार संभाला। उन्होंने यह जिम्मेदारी चेन्नई में आयोजित CLE की समिति प्रशासन की 184वीं बैठक के दौरान ग्रहण की।

काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट्स (CLE) के बारे में

  • काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट्स, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा प्रायोजित एक निर्यात संवर्धन परिषद है।
  • CLE भारतीय चमड़ा, फुटवियर और चमड़ा उत्पादों के वैश्विक बाजारों में प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह नीति समर्थन, व्यापार सुविधा और बाजार विकास के माध्यम से निर्यातकों की मदद करती है।

रमेश कुमार जुनेजा का पेशेवर सफर

  • रमेश कुमार जुनेजा का चमड़ा उद्योग से जुड़ाव चार दशकों से अधिक का है।
  • वे JC ग्रुप के संस्थापक हैं और 1980 के दशक में अंतरराष्ट्रीय रिटेलर्स के साथ सीधे सहयोग करने वाले शुरुआती उद्योग नेताओं में शामिल रहे।
  • उन्होंने फिनिश्ड लेदर के नामित टैनर बनने का मॉडल अपनाया, जिससे भारतीय चमड़े को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में पहचान और विश्वसनीयता मिली।

CLE के साथ लंबा जुड़ाव

  • जुनेजा पिछले 15 वर्षों से अधिक समय से CLE से जुड़े हुए हैं।
  • वे 2014 से ईस्टर्न रीजन के रीजनल चेयरमैन रहे हैं और अप्रैल 2024 में CLE के वाइस चेयरमैन बने।
  • यह लंबा संस्थागत अनुभव चेयरमैन के रूप में उन्हें निरंतरता और सूझबूझ भरा नेतृत्व देने में मदद करेगा।

महत्व

  • चमड़ा उद्योग भारत में रोजगार सृजन का एक बड़ा स्रोत और निर्यात आय का अहम योगदानकर्ता है।
  • CLE का नेतृत्व स्थिरता मानकों, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और बाजार विविधीकरण जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
  • रमेश कुमार जुनेजा के नेतृत्व में परिषद से मूल्य संवर्धन, नवाचार और भारत के निर्यात दायरे के विस्तार पर विशेष ध्यान देने की उम्मीद है।

RBI ने बैंकों के डिविडेंड पेआउट पर 75% की लिमिट लगाने का प्रस्ताव दिया

भारत के बैंकिंग नियामक ने बैंकों की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक अहम सुधार का प्रस्ताव रखा है। जब बैंकों की लाभप्रदता मजबूत हो रही है और परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार आया है, तब नियामक का ध्यान अब संतुलित पूंजी प्रबंधन पर केंद्रित है। यह प्रस्ताव शेयरधारकों को रिटर्न देने और भविष्य के जोखिमों से निपटने के लिए पर्याप्त आय बनाए रखने—दोनों के बीच संतुलन साधने का प्रयास करता है।

क्यों खबरों में है?

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बैंकों के डिविडेंड भुगतान को उनके कर पश्चात लाभ (PAT) के 75% तक सीमित करने का प्रस्ताव रखा है।
यह प्रस्ताव बैंकों की पूंजी स्थिति मजबूत करने के उद्देश्य से जारी ड्राफ्ट दिशानिर्देशों का हिस्सा है।

RBI के प्रस्ताव में क्या कहा गया है?

  • प्रस्तावित नियमों के तहत बैंक अपने वार्षिक लाभ का 75% से अधिक लाभांश वितरित नहीं कर सकेंगे।
  • यह प्रावधान अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों पर लागू होगा।
  • उद्देश्य यह है कि मुनाफे का एक हिस्सा भविष्य की वृद्धि और जोखिम प्रबंधन के लिए बैंक के पास बना रहे।
  • RBI ने दिशानिर्देशों को अंतिम रूप देने से पहले हितधारकों से सुझाव आमंत्रित किए हैं।

लाभांश पर सीमा लगाने का कारण

  • भारतीय बैंक फिलहाल मजबूत मुनाफा और घटते एनपीए देख रहे हैं।
  • लेकिन अत्यधिक लाभांश वितरण से बैंकों के पूंजी बफर कमजोर हो सकते हैं।

भुगतान पर सीमा लगाकर RBI यह सुनिश्चित करना चाहता है कि बैंक आर्थिक झटकों, क्रेडिट चक्रों और वैश्विक वित्तीय अनिश्चितताओं का सामना करने के लिए पर्याप्त पूंजी बनाए रखें।

बैंकों और शेयरधारकों पर प्रभाव

  • बैंकों के लिए: यह कदम पूंजी संरक्षण और बैलेंस शीट की मजबूती को प्रोत्साहित करेगा, खासकर तब जब ऋण वृद्धि तेज़ बनी हुई है।
  • शेयरधारकों के लिए: भले ही तात्कालिक लाभांश आय कुछ कम हो, लेकिन बेहतर पूंजी पर्याप्तता से दीर्घकालिक स्थिरता और प्रणालीगत जोखिम में कमी आएगी।
  • यह प्रस्ताव वैश्विक बैंकिंग नियामकीय सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप है।

बैंकिंग में लाभांश नियमन

  • बैंकिंग क्षेत्र में लाभांश पर कड़ा नियमन होता है क्योंकि बैंक जनता की जमा राशि और प्रणालीगत जोखिम से जुड़े होते हैं।
  • नियामक अक्सर लाभांश पर सीमा लगाते हैं ताकि बैंक अल्पकालिक रिटर्न के बजाय वित्तीय मजबूती को प्राथमिकता दें।
  • भारत में RBI लाभांश पात्रता को पूंजी पर्याप्तता, परिसंपत्ति गुणवत्ता और लाभप्रदता जैसे मानकों से जोड़ता है।

वित्तीय स्थिरता के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है?

  • मजबूत पूंजी बफर बैंकों को मंदी के दौर में भी ऋण देने में सक्षम बनाते हैं।
  • लाभांश पर सीमा लगाकर RBI सावधानीपूर्ण बैंकिंग नियमन को मजबूत करता है, जिससे मुनाफा अत्यधिक वितरण के बजाय पूरे वित्तीय तंत्र की मजबूती में उपयोग हो सके।

कर्नाटक में सबसे लंबे कार्यकाल वाले मुख्यमंत्री बने सिद्धारमैया

कर्नाटक की राजनीति में एक ऐतिहासिक क्षण दर्ज हुआ है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया राज्य के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले मुख्यमंत्री बन गए हैं। राजनीतिक अस्थिरता, गठबंधन सरकारों और अल्पकालिक कार्यकालों के लिए जाने जाने वाले कर्नाटक में यह उपलब्धि अत्यंत दुर्लभ मानी जा रही है। उनका राजनीतिक सफर सामाजिक न्याय, जमीनी जुड़ाव और राजनीतिक दृढ़ता का प्रतीक है।

खबरों में क्यों?

  • जनवरी 2026 में सिद्धारमैया ने कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री देवराज उर्स के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए यह उपलब्धि हासिल की।
  • उन्होंने अपने विभिन्न कार्यकालों को मिलाकर लगभग 7 वर्ष 8 माह मुख्यमंत्री पद पर पूरे किए।

एक पुराने राजनीतिक रिकॉर्ड का अंत

  • देवराज उर्स ने कर्नाटक में 7 वर्षों से थोड़ा अधिक समय तक शासन किया था।
  • सिद्धारमैया ने इस रिकॉर्ड को पार कर राज्य के राजनीतिक इतिहास में नया अध्याय जोड़ा।
  • गठबंधन राजनीति, दलबदल और अस्थिर सरकारों वाले राज्य में उनका लंबा कार्यकाल लगातार जनसमर्थन और राजनीतिक कुशलता को दर्शाता है।

प्रारंभिक जीवन और राजनीति में प्रवेश

  • सिद्धारमैया का जन्म मैसूरु जिले के टी. नरसीपुरा के पास सिद्धारमनाहुंडी गांव में एक किसान परिवार में हुआ।
  • वे पेशे से वकील रहे और कुछ समय तक विद्यावर्धक लॉ कॉलेज में कानून भी पढ़ाया।
  • 1983 में उन्होंने चामुंडेश्वरी सीट से एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर राजनीति में चौंकाने वाली एंट्री की।

कांग्रेस से पहले की राजनीतिक यात्रा

  • कई अन्य नेताओं के विपरीत, सिद्धारमैया की शुरुआती राजनीतिक नींव कांग्रेस के बाहर पड़ी थी।
  • वे जनता पार्टी और बाद में जनता दल में आगे बढ़े और मुख्यमंत्री रामकृष्ण हेगड़े के कार्यकाल में पशुपालन, रेशम उद्योग (सेरीकल्चर) और परिवहन जैसे महत्वपूर्ण मंत्री पदों पर रहे।
  • उनके राजनीतिक जीवन में एक निर्णायक मोड़ 2006 में आया, जब उन्होंने जनता दल (सेक्युलर) से अलग होकर बाद में कांग्रेस पार्टी का दामन थामा।

AHINDA और सामाजिक न्याय की राजनीति

  • कांग्रेस में आने के बाद सिद्धारमैया ने AHINDA मॉडल को राजनीतिक आधार बनाया।
  • AHINDA = अल्पसंख्यक (Minorities), पिछड़ा वर्ग (Backward Classes) और दलित (Dalits)
  • वे कुरुबा समुदाय से आने वाले कर्नाटक के पहले मुख्यमंत्री हैं, जो राज्य का तीसरा सबसे बड़ा सामाजिक समूह है।
  • यह सामाजिक गठजोड़ उनकी चुनावी सफलता और शासन दर्शन का केंद्र रहा है।

प्रशासनिक उपलब्धियाँ और नेतृत्व भूमिकाएँ

  • सिद्धारमैया ने अब तक कुल 16 राज्य बजट प्रस्तुत किए हैं, जो कर्नाटक के किसी भी मुख्यमंत्री द्वारा पेश किए गए बजटों में सबसे अधिक हैं। इस मामले में उन्होंने रामकृष्ण हेगड़े को भी पीछे छोड़ दिया है।
  • वे 2009 से 2013 और फिर 2019 से 2023 तक दो बार विपक्ष के नेता भी रहे, और सत्ता से बाहर रहते हुए भी राज्य की राजनीति में एक प्रभावशाली तथा केंद्रीय भूमिका निभाते रहे।
  • अपने लंबे राजनीतिक करियर में वे मंत्री, उपमुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री जैसे प्रमुख पदों पर कार्य कर चुके हैं।

विरासत और शासन पर विचार

  • इस उपलब्धि पर सिद्धारमैया ने कहा कि वे इसे रिकॉर्ड नहीं, बल्कि जनता की सेवा का सौभाग्य मानते हैं।
  • उन्होंने देवराज उर्स जैसे नेताओं के प्रभाव को स्वीकार किया।
  • साथ ही बसवन्ना से लेकर नलवाड़ी कृष्णराज वोडेयार तक की सामाजिक न्याय परंपरा का उल्लेख किया।
  • उन्होंने गरीबों, दलितों और पिछड़े वर्गों के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराई।

परीक्षा उपयोगी तथ्य (Prelims & Mains)

  • सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले मुख्यमंत्री (कर्नाटक): सिद्धारमैया
  • रिकॉर्ड तोड़ा: देवराज उर्स
  • मील का पत्थर: जनवरी 2026
  • सामाजिक मॉडल: AHINDA
  • प्रस्तुत बजट: 16 (रिकॉर्ड)
  • पहले मुख्यमंत्री (कुरुबा समुदाय से): सिद्धारमैया

हरियाणा में देश की पहली हाईड्रोजन ट्रेन दौड़ने को तैयार, जानें सबकुछ

भारत हरित परिवहन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। हरियाणा में भारत की पहली हाइड्रोजन-चालित ट्रेन का संचालन जल्द शुरू होने वाला है। यह पायलट परियोजना भारतीय रेलवे के नेतृत्व में चल रही है और जिंद–सोनीपत रेल मार्ग पर संचालित की जाएगी। यह परियोजना अब कमीशनिंग के अंतिम चरण में है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा और सतत परिवहन के प्रति भारत की बढ़ती प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है।

खबरों में क्यों?

हरियाणा में भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के शुभारंभ की तैयारी पूरी हो चुकी है। जिंद में स्थापित हाइड्रोजन संयंत्र तैयार है और परियोजना अंतिम कमीशनिंग चरण में पहुँच गई है।

हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना के बारे में

  • यह उत्तरी रेलवे (Northern Railway) की एक पायलट परियोजना है।
  • ट्रेन हरियाणा के जिंद–सोनीपत मार्ग पर चलेगी।
  • हाइड्रोजन ट्रेन-सेट का निर्माण पूरा हो चुका है।
  • इस परियोजना का उद्देश्य भारत में रेल परिवहन के लिए हाइड्रोजन को स्वच्छ ईंधन के रूप में व्यवहार्य सिद्ध करना है।

हाइड्रोजन संयंत्र और ऊर्जा व्यवस्था

  • जिंद में हाइड्रोजन प्लांट स्थापित किया गया है, जिसकी भंडारण क्षमता 3,000 किलोग्राम है।
  • संयंत्र को स्थिर 11 केवी विद्युत आपूर्ति प्रदान की जा रही है, ताकि कमीशनिंग और नियमित संचालन के दौरान निर्बाध हाइड्रोजन उत्पादन सुनिश्चित हो सके।
  • हाइड्रोजन का उत्पादन इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया के माध्यम से किया जा रहा है, जो हरित हाइड्रोजन उत्पादन की एक प्रमुख विधि है।

राज्य और रेलवे अधिकारियों की भूमिका

  • हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के अधिकारियों के साथ परियोजना की समीक्षा की।
  • उन्होंने विद्युत आपूर्ति प्रणाली की नियमित निगरानी पर जोर दिया।
  • राष्ट्रीय स्तर पर यह परियोजना अनुसंधान, डिजाइन एवं मानक संगठन (RDSO) द्वारा निर्धारित सुरक्षा और प्रदर्शन मानकों के अनुरूप विकसित की जा रही है।

हाइड्रोजन ट्रेनों का महत्व

  • हाइड्रोजन ट्रेनें उपयोग के स्थान पर शून्य कार्बन उत्सर्जन करती हैं।
  • ये गैर-विद्युतीकृत रेल मार्गों पर डीज़ल ट्रेनों का एक प्रभावी विकल्प हैं।
  • यह परियोजना भारत के जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने, हरित हाइड्रोजन को बढ़ावा देने और दीर्घकालिक जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने के राष्ट्रीय उद्देश्यों के अनुरूप है।

परीक्षा उपयोगी बिंदु (प्रारंभिक व मुख्य)

  • देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन: हरियाणा
  • पायलट परियोजना: भारतीय रेलवे (उत्तरी रेलवे)
  • रेल मार्ग: जिंद–सोनीपत
  • हाइड्रोजन प्लांट स्थान: जिंद
  • भंडारण क्षमता: 3,000 किलोग्राम
  • विद्युत आपूर्ति: 11 केवी
  • हाइड्रोजन उत्पादन विधि: इलेक्ट्रोलिसिस
  • संबंधित संस्था: RDSO (सुरक्षा व मानक)

Indian Army ने बनाई आधुनिक भैरव फोर्स, एक लाख ड्रोन ऑपरेटर शामिल

जनवरी 2026 में भारतीय सेना ने सैन्य आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए ‘भैरव’ नामक एक नए आधुनिक युद्ध बल के गठन की घोषणा की। यह विशिष्ट (एलीट) बल ड्रोन तकनीक को युद्ध अभियानों में एकीकृत करने के लिए बनाया गया है, जिससे तकनीक-आधारित आधुनिक युद्ध के युग में भारत की युद्धक्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इस नए बल में 1 लाख से अधिक प्रशिक्षित ड्रोन ऑपरेटर शामिल होंगे, जो इसे दुनिया की सबसे बड़ी समर्पित ड्रोन युद्ध इकाइयों में से एक बनाता है।

‘भैरव’ बल क्या है?

भैरव बल नई पीढ़ी की एक युद्ध इकाई है, जिसे उच्च तीव्रता वाले आधुनिक युद्ध की चुनौतियों के अनुरूप तैयार किया गया है। इन बटालियनों का हर सैनिक उन्नत ड्रोन संचालन में प्रशिक्षित है, जिससे रियल-टाइम निगरानी, सटीक हमले और युद्धक्षेत्र से खुफिया जानकारी जुटाना संभव होता है।

मुख्य क्षमताएँ

  • दुश्मन ठिकानों पर आक्रामक ड्रोन हमले
  • वास्तविक समय में टोही और निगरानी
  • शत्रुतापूर्ण वातावरण में उच्च गति वाले अभियान
  • तकनीक-आधारित युद्धक्षेत्र प्रभुत्व

यह बदलाव हाल के वैश्विक संघर्षों से मिले सबक को दर्शाता है, जहाँ ड्रोन निर्णायक फोर्स मल्टीप्लायर के रूप में उभरे हैं।

भैरव बटालियनों के बारे में

सारांश

भैरव बटालियनें अत्यधिक फुर्तीली और ड्रोन-केंद्रित युद्ध इकाइयों के रूप में संरचित हैं, जो स्पेशल फोर्सेज़ जैसे अभियानों को तेज़ी और सटीकता से अंजाम दे सकती हैं।

मुख्य कार्य

  • विभिन्न स्तरों पर स्पेशल फोर्सेज़ जैसे कार्य
  • गहराई तक सामरिक और परिचालन मिशन
  • अग्रिम मोर्चे की टुकड़ियों को ड्रोन-सक्षम फायरपावर से समर्थन

रणनीतिक उद्देश्य

इनका मुख्य उद्देश्य पैरा स्पेशल फोर्सेज़ (SF) और नियमित इन्फैंट्री बटालियनों के बीच की परिचालन खाई को पाटना है, ताकि सामरिक से लेकर परिचालन गहराई तक अभियानों का निर्बाध निष्पादन हो सके।

वर्तमान स्थिति और विस्तार योजना

  • अब तक 15 भैरव बटालियनें गठित की जा चुकी हैं
  • दोनों सीमाओं पर विभिन्न संरचनाओं में तैनात
  • निकट भविष्य में लगभग 25 बटालियनें गठित करने की योजना

यह विस्तार बहु-डोमेन युद्धक्षेत्रों में कार्य करने वाली भविष्य-तैयार सेनाओं पर भारतीय सेना के फोकस को दर्शाता है।

भारतीय सेना दिवस परेड 2026: पहला सार्वजनिक प्रदर्शन

भैरव बटालियनें 15 जनवरी 2026 को जयपुर, राजस्थान में आयोजित भारतीय सेना दिवस परेड में पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित होंगी। यह प्रस्तुति तकनीक-आधारित सैन्य शक्ति की ओर भारत के संक्रमण का प्रतीक है।

अन्य आधुनिक युद्ध पहल: रुद्र ब्रिगेड

भैरव के साथ-साथ भारतीय सेना ने ‘रुद्र ब्रिगेड’ भी गठित की हैं, जो सर्व-आयामी (ऑल-आर्म्स) एकीकृत संरचनाएँ हैं।

रुद्र ब्रिगेड में शामिल घटक

  • इन्फैंट्री
  • मैकेनाइज़्ड यूनिट्स
  • टैंक
  • तोपखाना
  • स्पेशल फोर्सेज़
  • मानवरहित हवाई प्रणालियाँ (UAS)

ये ब्रिगेड संयुक्तता (जॉइंटनेस) और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को बढ़ाती हैं तथा ड्रोन-केंद्रित भैरव बटालियनों का पूरक हैं।

भारतीय सेना के बारे में

  • भूमिका: थल-आधारित शाखा और भारतीय सशस्त्र बलों का सबसे बड़ा घटक
  • थल सेनाध्यक्ष (COAS): उपेंद्र द्विवेदी
  • मुख्यालय: नई दिल्ली
  • स्थापना: 1895
  • आदर्श वाक्य: सेवा परमो धर्म

परीक्षा उपयोगी त्वरित तथ्य (प्रारंभिक व मुख्य)

  • क्या: उन्नत ड्रोन क्षमताओं वाला आधुनिक युद्ध बल
  • बल का नाम: भैरव
  • गठित करने वाला: भारतीय सेना
  • ड्रोन ऑपरेटर: 1 लाख से अधिक
  • गठित बटालियनें: 15 (बढ़ाकर 25 की जाएँगी)
  • परिचालन भूमिका: ड्रोन-आधारित दुश्मन ठिकानों और संरचनाओं को निशाना बनाना
  • पहला सार्वजनिक प्रदर्शन: भारतीय सेना दिवस परेड
  • तारीख: 15 जनवरी 2026
  • स्थान: जयपुर, राजस्थान

Axis Bank ने डिजिटल बैंकिंग सिक्योरिटी को बढ़ावा देने के लिए ‘सेफ्टी सेंटर’ लॉन्च किया

ऐक्सिस बैंक ने डिजिटल धोखाधड़ी से ग्राहकों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए अपने मोबाइल बैंकिंग ऐप पर ‘सेफ्टी सेंटर’ नामक एक नई सुविधा शुरू की है। इस फीचर के माध्यम से ग्राहक बिना बैंक शाखा जाए या कस्टमर केयर से संपर्क किए, अपने बैंकिंग खातों की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण नियंत्रण स्वयं कर सकते हैं।

क्यों खबरों में है?

जनवरी 2026 में ऐक्सिस बैंक ने अपने मोबाइल ऐप पर सेफ्टी सेंटर लॉन्च किया। इसका उद्देश्य ग्राहकों को डिजिटल बैंकिंग सुरक्षा और धोखाधड़ी से बचाव के लिए अधिक नियंत्रण प्रदान करना है।

सेफ्टी सेंटर के बारे में

सेफ्टी सेंटर ग्राहकों को अपनी जरूरत के अनुसार सुरक्षा सेटिंग्स कस्टमाइज़ करने की सुविधा देता है। इसके जरिए मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग की पहुंच पर रियल-टाइम नियंत्रण संभव है, जिससे किसी भी अनधिकृत या संदिग्ध लेनदेन को समय रहते रोका जा सकता है।

मुख्य सुरक्षा फीचर्स

इस सुविधा में एसएमएस शील्ड शामिल है, जिससे असली और फर्जी ऐक्सिस बैंक संदेशों की पहचान की जा सकती है। ग्राहक चाहें तो इंटरनेट बैंकिंग को पूरी तरह बंद कर सकते हैं, सभी प्लेटफॉर्म पर फंड ट्रांसफर को एक क्लिक में रोक सकते हैं, थर्ड-पार्टी ऐप्स के जरिए नेट बैंकिंग भुगतान ब्लॉक कर सकते हैं, तथा UPI उपयोग, नए पेयी जोड़ने और ट्रांसफर लिमिट पर भी नियंत्रण रख सकते हैं।

इस पहल का महत्व

यह कदम बढ़ते डिजिटल बैंकिंग धोखाधड़ी मामलों से निपटने में मदद करता है। सेफ्टी सेंटर ग्राहकों को स्वयं प्रबंधित सुरक्षा नियंत्रण प्रदान करता है, जिससे वे अधिक सशक्त महसूस करते हैं और बैंक शाखाओं या कस्टमर सपोर्ट पर निर्भरता कम होती है।

डिजिटल बैंकिंग सुरक्षा

डिजिटल बैंकिंग सुरक्षा में ट्रांजैक्शन लिमिट, प्रमाणीकरण जांच और एक्सेस कंट्रोल जैसे उपाय शामिल होते हैं। UPI और मोबाइल बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के बीच, ऐसे फीचर्स ग्राहकों को फिशिंग, फर्जी SMS अलर्ट और अनधिकृत फंड ट्रांसफर से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

वैश्विक दबाव के बावजूद वित्त वर्ष 2027 में भारत की वृद्धि दर 6.9% रहने का अनुमान: इंडिया रेटिंग्स

इंडियन रेटिंग्स एंड रिसर्च (Ind-Ra) के हालिया अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2026–27 (FY27) में भारत की अर्थव्यवस्था 6.9 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है। यह दर FY26 में अनुमानित 7.4 प्रतिशत वृद्धि से कुछ कम है, जिसका प्रमुख कारण वैश्विक अनिश्चितताएँ हैं। हालांकि, मजबूत घरेलू सुधार, नियंत्रित महंगाई और निरंतर पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) के चलते भारत की अर्थव्यवस्था के बाहरी झटकों के बावजूद स्थिर बने रहने की संभावना है।

क्यों चर्चा में है?

इंडियन रेटिंग्स एंड रिसर्च (Ind-Ra) ने FY27 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर 6.9% रहने का अनुमान लगाया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी शुल्क (US Tariffs) जैसे वैश्विक जोखिमों के बावजूद घरेलू सुधार भारत को सहारा दे रहे हैं।

FY27 के लिए विकास परिदृश्य

यह खंड आर्थिक वृद्धि में अपेक्षित धीमापन स्पष्ट करता है:

  • FY27 में GDP वृद्धि 6.9% अनुमानित
  • FY26 में मजबूत वृद्धि के कारण उच्च आधार प्रभाव
  • वैश्विक आर्थिक सुस्ती और कमजोर व्यापार से गति पर असर
  • अर्थव्यवस्था को सहारा देने वाले घरेलू सुधार
  • यह हिस्सा उन सुधारों पर प्रकाश डालता है जो बाहरी झटकों को संतुलित कर रहे हैं:
  • FY26 बजट में आयकर कटौती से उपभोक्ताओं की खर्च योग्य आय में वृद्धि

GST युक्तिकरण (2025) से कर प्रणाली में दक्षता

  • यूके, ओमान और न्यूज़ीलैंड के साथ व्यापार समझौते, जिससे निर्यात को बढ़ावा
  • खपत और निवेश के रुझान
  • यह खंड मांग पक्ष की स्थिति बताता है:
  • कृषि वृद्धि के कारण ग्रामीण मांग मजबूत
  • शहरी खपत अपेक्षाकृत कमजोर बनी हुई
  • पूंजीगत व्यय और आवास क्षेत्र से निवेश को समर्थन

महंगाई और बाहरी जोखिम

यह भाग मूल्य रुझानों और संभावित जोखिमों की चर्चा करता है:

  • FY26–FY27 के दौरान महंगाई का दृष्टिकोण अनुकूल
  • स्थिर खाद्य कीमतों से वास्तविक मजदूरी को समर्थन
  • एल नीनो, कमजोर मुद्रा और वैश्विक व्यापार से जुड़े जोखिम

SEBI ने 30 दिन पुराने प्राइस डेटा के इस्तेमाल का दिया प्रस्ताव

भारत के बाज़ार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने निवेशक शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रमों में मूल्य (प्राइस) डेटा के उपयोग और साझा करने के लिए 30 दिन की एकसमान समय-देरी (Time Lag) का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य संवेदनशील बाज़ार डेटा के दुरुपयोग को रोकते हुए निवेशकों के लिए शैक्षणिक सामग्री को समयोचित और उपयोगी बनाए रखना है।

खबरों में क्यों?

SEBI ने निवेशक शिक्षा के लिए बाज़ार मूल्य डेटा पर 30 दिन की देरी लागू करने का मसौदा प्रस्ताव जारी किया है। यह कदम डेटा के दुरुपयोग की आशंकाओं और अत्यधिक पुराने शैक्षणिक कंटेंट की समस्या को दूर करने के लिए उठाया गया है।

नए प्रस्ताव के बारे में

  • शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए शेयर मूल्य डेटा के साझा करने और उपयोग—दोनों पर एक समान 30 दिन की देरी का प्रावधान।
  • इससे पहले, स्टॉक एक्सचेंज 1 दिन की देरी से डेटा साझा कर सकते थे, जबकि शिक्षकों को कम से कम 3 महीने पुराना डेटा ही उपयोग करने की अनुमति थी।
  • इस असंगति से भ्रम और व्यावहारिक समस्याएँ पैदा हो रही थीं, जिन्हें यह प्रस्ताव दूर करेगा।

बदलाव की ज़रूरत क्यों पड़ी?

  • हितधारकों की प्रतिक्रिया में मौजूदा व्यवस्था की दोनों सीमाओं पर समस्याएँ सामने आईं।
  • एक दिन की देरी को बहुत कम माना गया और इसे दुरुपयोग के लिए संवेदनशील समझा गया, जबकि तीन महीने की देरी के कारण शैक्षणिक सामग्री पुरानी और कम प्रभावी हो जाती थी।
  • SEBI का मानना है कि 30 दिन की समय-देरी एक्सचेंज डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए निवेशक शिक्षा सामग्री की प्रासंगिकता से समझौता किए बिना संतुलन बनाए रखने के लिए पर्याप्त है।

शिक्षा बनाम निवेश सलाह 

  • SEBI ने स्पष्ट किया है कि लाइव या लगभग रियल-टाइम मूल्य डेटा का उपयोग शिक्षा और निवेश सलाह की सीमा को धुंधला कर सकता है।
  • मौजूदा कीमतों का विश्लेषण या भविष्य के मूल्य का अनुमान निवेश सलाह/रिसर्च गतिविधि के अंतर्गत आता है।
  • ऐसी गतिविधियों के लिए पंजीकरण और कड़े नियामकीय मानकों का पालन आवश्यक होता है।

सुरक्षा उपाय और अनुपालन

  • पहले जारी SEBI परिपत्रों के सभी सुरक्षा उपाय लागू रहेंगे।
  • केवल शिक्षा से जुड़े संस्थानों को जनवरी 2025 के परिपत्र के अनुसार यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी सामग्री किसी भी तरह से सिफ़ारिश या सलाह न मानी जाए।

इस बदलाव की पृष्ठभूमि

  • SEBI भारत के प्रतिभूति बाज़ार को विनियमित कर निवेशकों की सुरक्षा और निष्पक्षता सुनिश्चित करता है।
  • मई 2024 में रियल-टाइम डेटा के दुरुपयोग को रोकने के लिए नियम सख़्त किए गए थे।
  • जनवरी 2025 में शिक्षकों के लिए 3 महीने की देरी अनिवार्य की गई, जिसे अब यह नया प्रस्ताव तार्किक और एकरूप बनाना चाहता है।

SEBI – मुख्य तथ्य

  • प्रकार: भारत के प्रतिभूति बाज़ार का वैधानिक नियामक निकाय
  • उद्देश्य: निवेशक हितों की रक्षा, बाज़ार का विनियमन व विकास, पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

  • SEBI से पहले: भारतीय प्रतिभूति बाजार का नियमन पूंजी निर्गम नियंत्रक (Controller of Capital Issues – CCI) द्वारा पूंजी निर्गम (नियंत्रण) अधिनियम, 1947 के तहत किया जाता था।
  • स्थापना: बढ़ती बाजार अनियमितताओं और निवेशकों की शिकायतों के कारण SEBI की स्थापना 1988 में की गई।
  • वैधानिक शक्तियाँ: हर्षद मेहता घोटाले के बाद बाजार में उजागर हुई खामियों के चलते SEBI अधिनियम, 1992 के माध्यम से SEBI को वैधानिक शक्तियाँ प्रदान की गईं।

ओमान और न्यूज़ीलैंड के साथ डील से भारत के आयुष सिस्टम को ग्लोबल बढ़ावा मिला

भारत की पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियाँ अब वैश्विक स्तर पर तेज़ी से स्वीकार की जा रही हैं। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारत की आयुष (AYUSH) प्रणाली को ओमान और न्यूज़ीलैंड के साथ हुए द्विपक्षीय व्यापार समझौतों में औपचारिक मान्यता दी गई है। दिसंबर 2025 में अंतिम रूप दिए गए ये समझौते पारंपरिक चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं को विशेष स्थान देते हैं। यह कदम भारतीय हर्बल और वेलनेस उत्पादों की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग और निर्यात में हुई मज़बूत वृद्धि को भी दर्शाता है।

खबरों में क्यों?

भारत की AYUSH प्रणाली को ओमान और न्यूज़ीलैंड के साथ हुए द्विपक्षीय व्यापार समझौतों में शामिल किया गया है। दिसंबर 2025 में संपन्न इन समझौतों के माध्यम से पारंपरिक चिकित्सा और उससे जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं को औपचारिक मान्यता मिली है।

समझौतों में क्या घोषित किया गया?

इन हालिया व्यापार समझौतों में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं:

  • स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाओं पर विशेष परिशिष्ट (Annexures) शामिल किए गए हैं।
  • आयुष जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को औपचारिक मान्यता दी गई है।
  • हर्बल उत्पादों और वेलनेस सेवाओं में सहयोग का दायरा तय किया गया है।
  • इससे व्यापार में आसानी और नियामक स्पष्टता सुनिश्चित होगी।
  • वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा बाज़ार में भारत की उपस्थिति मज़बूत होगी।

AYUSH को मान्यता क्यों महत्वपूर्ण है?

यह कदम भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली के लिए कई मायनों में अहम है:

  • आयुष प्रणालियाँ भारत की प्राचीन स्वास्थ्य परंपराओं का प्रतिनिधित्व करती हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय मान्यता से विश्वसनीयता और बाज़ार तक पहुँच बढ़ती है।
  • भारतीय निर्यातकों को नियंत्रित विदेशी बाज़ारों में प्रवेश में मदद मिलती है।
  • अनुसंधान और वेलनेस सेवाओं में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा मिलता है।
  • स्वास्थ्य कूटनीति के माध्यम से भारत की सॉफ्ट पावर को मजबूती मिलती है।

AYUSH उत्पादों के निर्यात में वृद्धि

वैश्विक स्तर पर आयुष उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है:

  • आयुष और हर्बल उत्पादों के निर्यात में 6.11% की वृद्धि दर्ज की गई।
  • 2023–24 में निर्यात मूल्य USD 649.2 मिलियन था।
  • 2024–25 में यह बढ़कर USD 688.89 मिलियन हो गया।
  • यह वृद्धि प्राकृतिक और समग्र उपचारों की बढ़ती स्वीकृति को दर्शाती है।
  • ऐसे व्यापार समझौते भविष्य में निर्यात को और गति दे सकते हैं।

AYUSH क्या है?

AYUSH का अर्थ है —

  • Ayurveda (आयुर्वेद)
  • Yoga (योग)
  • Naturopathy (प्राकृतिक चिकित्सा)
  • Unani (यूनानी)
  • Siddha (सिद्ध)
  • Homoeopathy (होम्योपैथी)

आयुष प्रणाली निवारक और समग्र स्वास्थ्य देखभाल पर ज़ोर देती है। भारत कूटनीति के माध्यम से आयुष को वैश्विक स्तर पर सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है। इस क्षेत्र में औषधियाँ, वेलनेस सेवाएँ और शिक्षा शामिल हैं, और निर्यात संवर्धन सरकार का एक प्रमुख फोकस क्षेत्र है।

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