जर्मनी के हैम्बर्ग पहुंचा भारतीय युद्धपोत INS तबर

about – Page 739_3.1

भारत का युद्धपोत आईएनएस तबर (INS Tabar) तीन दिवसीय यात्रा पर जर्मनी के हैम्बर्ग (Hamburg) पहुंचा है। यह यात्रा दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने के व्यापक प्रयासों के तहत की गई है।

भारतीय नौसेना ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच साझा मूल्यों, लोकतांत्रिक सिद्धांतों और वैश्विक शांति एवं सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता की नींव पर बने रिश्ते हैं। यह जहाज कई तरह के हथियारों और सेंसर से लैस है और भारतीय नौसेना के सबसे शुरुआती स्टील्थ फ्रिगेट में से एक है।

समुद्री साझेदारी अभ्यास

आईएनएस तबर भारतीय नौसेना के पश्चिमी बेड़े का हिस्सा है जो पश्चिमी नौसेना कमान के तहत मुंबई में स्थित है। भारतीय नौसेना ने कहा कि जहाज के हैम्बर्ग से रवाना होने पर दोनों नौसेनाएं समुद्री साझेदारी अभ्यास भी करेंगी। जहाज की कमान कैप्टन एमआर हरीश के हाथ में है।

नौसेना का पी-8आई विमान

भारतीय नौसेना का पी 8आई विमान बहुपक्षीय अभ्यास, रिम ऑफ द पैसिफिक (रिमपैक) 2024 में अमेरिका के ज्वाइंट बेस पर्ल हार्बर में सैन्य अभ्यास में भाग ले रहा है। ज्वाइंट बेस पर्ल हार्बर-हिकम हवाई के ओहू द्वीप पर एक अमेरिकी सैन्य अड्डा है। बहुपक्षीय अभ्यास के दौरान अमेरिकी सेना और अन्य भाग लेने वाली नौसेनाओं के साथ एंटी सबमरीन मिशन को अंजाम देने के बाद भारतीय नौसेना पी 8आई को ज्वाइंट बेस पर्ल हार्बर, हिकम एयरफील्ड हवाई में उतरते हुए देखा गया।

ठाणे से बोरीवली: भारत की सबसे लंबी और सबसे बड़ी शहरी सुरंग

about – Page 739_5.1

13 जुलाई, 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की सबसे लंबी और सबसे बड़ी शहरी सुरंग परियोजना, ठाणे बोरीवली ट्विन टनल का उद्घाटन किया, जिसे मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) द्वारा विकसित किया गया है। 16,600 करोड़ रुपये की यह परियोजना ठाणे और बोरीवली के बीच यात्रा के समय को एक घंटे से घटाकर सिर्फ़ 12 मिनट कर देगी, जिससे यात्रा की दूरी 12 किलोमीटर कम हो जाएगी। यह पहल मुंबई में कनेक्टिविटी बढ़ाने के उद्देश्य से 29,000 करोड़ रुपये की व्यापक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का हिस्सा है।

ठाणे बोरीवली ट्विन टनल की मुख्य विशेषताएं

  • सुरंग की लंबाई: 11.8 किमी
  • मार्ग: ठाणे से बोरीवली में राष्ट्रीय राजमार्ग 8 तक
  • अनुमानित लागत: 16,600 करोड़ रुपये
  • ऑपरेशनल लेन: 2 ऑपरेशनल लेन, 1 इमरजेंसी लेन
  • यात्रा समय में कमी: 1 घंटे से ज़्यादा की बचत (यात्रा 12 मिनट में पूरी हुई)
  • कार्बन उत्सर्जन में कमी: 1,50,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष
  • पूरा होने का लक्ष्य: मई 2028

पर्यावरण और तकनीकी पहलू

सुरंग, जिसमें हर 300 मीटर पर क्रॉस पैसेज के साथ 10.25 किलोमीटर का बोर सेक्शन शामिल है, भारत की सबसे बड़ी सुरंग-बोरिंग मशीन का उपयोग करेगी। MMRDA ने आश्वासन दिया है कि इसके निर्माण से संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान को कोई नुकसान नहीं होगा और इससे ध्वनि और वायु प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी।

रणनीतिक निहितार्थ और लाभ

  • यातायात में कमी: घोड़बंदर रोड और पश्चिमी एक्सप्रेस हाईवे पर यातायात में आसानी।
  • बढ़ी हुई कनेक्टिविटी: सीधे और कुशल मार्ग के साथ पूर्व-पश्चिम उपनगरीय कनेक्टिविटी में सुधार।
  • पर्यावरणीय प्रभाव: वार्षिक कार्बन उत्सर्जन में 1,50,000 मीट्रिक टन की कमी आने की उम्मीद है।

मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) के बारे में

1975 में स्थापित, MMRDA मुंबई महानगर क्षेत्र में विकास की योजना बनाने और उसकी देखरेख करने के लिए जिम्मेदार है। इसने मुंबई शहरी अवसंरचना परियोजना और मुंबई ट्रांस-हार्बर लिंक सहित अन्य महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं के अलावा बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स और मुंबई मेट्रो के विकास की पहल की।

चांदीपुरा वायरस क्या है, जानें सबकुछ

about – Page 739_7.1

गुजरात में चांदीपुरा वायरस लगातार खतरनाक होता जा रहा है। वहीं, गुजरात में चांदीपुरा वायरस से एक चार साल की बच्ची की मौत हुई है। इसकी पुष्टि राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) ने की है। एक स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा कि राज्‍य का स्‍वास्‍थ्‍य विभाग चांदीपुरा वायरस को लेकर पूरी तरह अलर्ट है।

गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री ऋषिकेश पटेल का कहना है कि राज्य में चांदीपुरा वायरस के 14 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से आठ मरीजों की मौत हुई है। सभी के नमूनों की पुष्टि के लिए पुणे स्थित एनआईवी भेजे गए हैं।

संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार लोगों की स्क्रीनिंग कर रही है। गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री ऋषिकेश पटेल ने बताया कि वायरस के कारण जिन संदिग्ध लोगों की मौत हुई है, उनके सैंपल को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में भेजा गया है। वहीं, अब तक 44 हजार लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है।

क्या है चांदीपुरा वायरस और ये कैसे फैलता है?

CHPV वायरस Rhabdoviridae फैमिली का वायरस है। Rhabdoviridae फैमिली में वो वायरस भी आते हैं, जिनसे रेबीज होता है। CHPV वायरस मक्खियों और मच्छरों की कुछ प्रजातियों (जैसे, डेंगू वाले एडीज एजिप्टी मच्छर) से फैलता है। वायरस इन मक्खी-मच्छरों की लार ग्रंथि में रहता है और इन मक्खी-मच्छरों के काटने से इंसान इस वायरस से संक्रमित हो सकता है और उसे इंसेफेलाइटिस यानी दिमाग के एक्टिव टिश्यूज में इन्फ्लेमेशन हो सकता है।

चांदीपुरा वायरस संक्रमण के लक्षण क्या हैं?

वायरस के संक्रमण से बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द और ऐंठन, दस्त जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। इसके अलावा सांस की समस्या, खून निकला या खून की कमी जैसे लक्षण भी सामने आते हैं। स्टडीज के मुताबिक, इंसेफेलाइटिस के बाद संक्रमण तेजी से बढ़ता है और अस्पताल में भर्ती होने के 24-48 घंटों के बीच मरीज की मौत तक हो सकती है। ये संक्रमण आम तौर पर 15 साल से कम उम्र के बच्चों में ही फैलता है। इस वायरस के इलाज के लिए अभी कोई वैक्सीन नहीं है।

चांदीपुरा वायरस कहां से आया?

रिपोर्ट के अनुसार साल 1965 में महाराष्ट्र के भंडारा जिले के चांदीपुरा गांव में इस तरह के संक्रमण का पहला मामला सामने आया था। इसलिए इसे चांदीपुरा वायरस नाम दिया गया। इस पहले मामले की जांच के बाद पता चला था कि यह वायरस रेत में घूम रही एक मक्खी के कारण फैला था। वायरस के कारण दिमाग में सूजन और तेज बुखार के लक्षण दिखाई देते हैं।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस वायरस का सबसे बुरा प्रभाव 2003-04 में देखने को मिला था। तब संक्रमण के कारण महाराष्ट्र, उत्तरी गुजरात और आंध्र प्रदेश में 300 से ज्यादा बच्चों की मौत हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, 2004 में जब ये वायरस फैला था तब आंध्र प्रदेश में संक्रमण के कारण 78 फीसदी मृत्यु दर रिकॉर्ड किया गया था।

अब कैलिफोर्निया में नहीं रहेंगे स्पेसएक्स और X के मुख्यालय

about – Page 739_9.1

एलन मस्क ने 16 जुलाई को कहा कि वह अपने दो व्यवसायों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और रॉकेट निर्माता स्पेसएक्स का मुख्यालय टेक्सास में स्थानांतरित करेंगे, जिससे कैलिफोर्निया के साथ विवाद और बढ़ गया है।

इन शहरों में होगा एक्स और स्पेसएक्स का मुख्यालय

एलन मस्क ने स्पेसएक्स के मुख्यालय और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स को कैलिफोर्निया से टेक्सास स्थानांतरित करने का एलान किया। उन्होंने बताया कि स्पेसएक्स का मुख्यालय फिलहाल कैलिफोर्निया के हॉथोर्न में बना हुआ है। इसे अब टेक्सास के स्टारबेस में स्थापित किया जाएगा। वहीं एक्स का मुख्यालय अब सैन फ्रांसिस्को में नहीं रहेगा। उसे यहां से हटाकर ऑस्टिन ले जाया जाएगा। मस्क के अनुसार, इस फैसले के पीछे का कारण कैलिफोर्निया में हाल ही में पारित किया गया कानून था, जिस पर सोमवार को गवर्नर गेविन न्यूजॉम ने हस्ताक्षर किया था।

नया कानून क्या है?

इस कानून के मुताबिक, स्कूल के नियमों के तहत अब शिक्षक और स्टाफ बच्चे की लैंगिक पहचान और लैंगिक पसंद को लेकर माता-पिता समेत किसी को भी बिना बच्चे की मर्जी के नहीं बता सकते। कानून के समर्थकों का कहना है कि यह उन एलजीबीटीक्यू छात्रों की सुरक्षा में मदद करेगा जो ऐसे घरों में रहते हैं, जहां उनका सम्मान नहीं होता है। मगर विरोधियों का कहना है कि यह स्कूलों की माता-पिता के साथ अधिक पारदर्शी होने की क्षमता में बाधा पैदा करेगा।

बच्चों की सुरक्षा

मस्क ने कहा कि इस कानून और इससे पहले आए कई अन्य कानूनों के कारण स्पेसएक्स अब अपना मुख्यालय हॉथोर्न से स्टारबेस में स्थानांतरित करेगा। उन्होंने आगे कहा कि मैंने करीब एक साल पहले गवर्नर न्यूजॉम को यह स्पष्ट कर दिया था कि इस तरह के कानून परिवारों और कंपनियों को अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए कैलिफोर्निया छोड़ने के लिए मजबूर करेंगे।

यह पहली बार नहीं

गौरतलब है, यह पहली बार नहीं है, जब एलन मस्क ने अपनी किसी कंपनी को कैलिफोर्निया से बाहर ले जाने का फैसला किया है। साल 2021 में टेस्ला ने अपने कॉर्पोरेट मुख्यालय को कैलिफोर्निया के पालो ऑल्टो से हटाकर टेक्सास के ऑस्टिन में स्थानांतरित कर दिया था। इसके अलावा, मस्क ने अपना घर कैलिफोर्निया से हटाकर टेक्सास में बना लिया था।

आईएनएस दिल्ली को पूर्वी बेड़े के सर्वश्रेष्ठ जहाज का पुरस्कार मिला

about – Page 739_11.1

विशाखापत्तनम में आयोजित वार्षिक ‘फ्लीट अवार्ड्स फंक्शन-2024’ में आईएनएस दिल्ली को पूर्वी बेड़े का सर्वश्रेष्ठ जहाज चुना गया है। 14 जुलाई, 2024 को विशाखापत्तनम में फ्लीट अवार्ड्स समारोह में पूर्वी बेड़े की सामरिक सफलताओं का सम्मान किया गया, जिसमें आईएनएस दिल्ली को सर्वश्रेष्ठ जहाज का नाम दिया गया।

आईएनएस कवरत्ती को कार्वेट, ओपीवी और एलएसटी की श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ जहाज के रूप में मान्यता दी गई, साथ ही आईएनएस शिवालिक, आईएनएस सुमेधा और आईएनएस सुमित्रा को भी उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सराहा गया।

रियर एडमिरल राजेश धनखड़ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में पूर्वी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, वाइस एडमिरल राजेश पेंढारकर मुख्य अतिथि थे।

परिचालन उपलब्धियाँ

पूरे वर्ष के दौरान, पूर्वी बेड़े ने हिंद महासागर क्षेत्र में विभिन्न अभ्यासों और मिशनों के माध्यम से अपनी परिचालन तत्परता का प्रदर्शन किया, जिसमें नौसैनिक अभ्यास, उभयचर अभियान और मानवीय प्रयास शामिल हैं।

सांस्कृतिक उत्सव और मनोबल में वृद्धि

औपचारिक कार्यवाही के अतिरिक्त, इस कार्यक्रम में सौहार्द को बढ़ावा देने तथा भारतीय नौसेना की समृद्ध विरासत और प्रतिबद्धता का जश्न मनाने के लिए एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया, जिससे पूर्वी बेड़े की रणनीतिक तत्परता और एकजुटता को बल मिला।

about – Page 739_12.1

महाराष्ट्र सरकार ने युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए योजना शुरू की

about – Page 739_14.1

युवाओं में बेरोजगारी से निपटने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने मुख्यमंत्री युवा कार्य प्रशिक्षण योजना शुरू की है। इसका उद्देश्य मूल्यवान इंटर्नशिप के अवसर प्रदान करना, युवाओं को आवश्यक कौशल से लैस करना और प्रतिस्पर्धी नौकरी बाजार में उनकी रोजगार क्षमता को बढ़ाना है।

₹5,500 करोड़ का प्रावधान

सरकार ने इस योजना के लिए ₹5,500 करोड़ का प्रावधान किया है। महाराष्ट्र में रहने वाले 18 से 35 वर्ष की आयु के उम्मीदवार इस योजना के तहत आवेदन करने के पात्र हैं। न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 12वीं पास से लेकर स्नातकोत्तर तक है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि युवाओं का एक व्यापक वर्ग व्यावहारिक प्रशिक्षण के अवसरों का लाभ उठा सके। कौशल, रोजगार, उद्यमिता और नवाचार विभाग के साथ पंजीकृत महाराष्ट्र में संचालित उद्योगों और प्रतिष्ठानों को भी भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

योजना की मुख्य विशेषताएं

योजना की मुख्य विशेषताओं में छह महीने की इंटर्नशिप अवधि और प्रशिक्षुओं को उनकी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर सहायता देने के लिए डिज़ाइन की गई वजीफा संरचना शामिल है। प्रशिक्षुओं को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से मासिक वजीफा मिलेगा। 12वीं पास के लिए ₹6,000 का वजीफा आवंटित किया गया है, और आईटीआई/डिप्लोमा के लिए – ₹8,000 और डिग्री/पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए – ₹10,000 की पेशकश की जाएगी।

भाग लेने के लिए कौन पात्र हैं?

सरकारी प्रतिष्ठान और निजी क्षेत्र के उद्योग दोनों ही भाग लेने के पात्र हैं, बशर्ते वे ईपीएफ, ईएसआईसी, जीएसटी, डीपीआईटी और उद्योग आधार के साथ पंजीकरण सहित विशिष्ट मानदंडों को पूरा करते हों और कम से कम तीन वर्षों से परिचालन में हों।

महिलाओं के लिए लाडली बहन योजना की शुरुआत

पंढरपुर में बोलते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा, “हमने राज्य में महिलाओं के लिए लाडली बहन योजना शुरू की है। हमसे पूछा गया कि हम भाइयों के लिए क्या कर रहे हैं। हमने युवाओं के लिए यह योजना लाई है और सरकार अप्रेंटिसशिप का खर्च उठाने जा रही है।”

एलआईसी ने कॉर्पोरेट एजेंसी व्यवस्था के तहत आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के साथ समझौता किया

about – Page 739_16.1

बैंकएश्योरेंस के योगदान को बढ़ाने और 2047 तक सभी को जीवन बीमा कवरेज प्रदान करने के अपने प्रयास को जारी रखते हुए, भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने कॉर्पोरेट एजेंसी व्यवस्था के तहत देश के सबसे अच्छे तकनीकी रूप से उन्नत और आशाजनक बैंकों में से एक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक लिमिटेड के साथ समझौता किया है।

गठजोड़ के लिए समझौता

गठजोड़ के लिए समझौते पर 16 जुलाई, 2024 को हस्ताक्षर किए गए। इस गठजोड़ से आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के 1 करोड़ से अधिक ग्राहकों को सुविधा होगी जो अब बैंक के माध्यम से एलआईसी पॉलिसी खरीद सकेंगे। डिजिटल ऑन-बोर्डिंग की यात्रा पहले ही शुरू हो चुकी है और विकास के चरण में है और एक बार पूरा हो जाने पर, ग्राहक बैंक की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन एलआईसी पॉलिसी खरीद सकेंगे।

एलआईसी की योजनाएं

एलआईसी की 3600 से अधिक शाखाओं और सैटेलाइट कार्यालयों तथा आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की 1000 से अधिक शाखाओं के विशाल नेटवर्क की संयुक्त ताकत से देश भर में जीवन बीमा की पहुंच आसान हो जाएगी और यह 2047 तक सभी को जीवन बीमा सुरक्षा प्रदान करने के लक्ष्य को प्राप्त करने में एक लंबा रास्ता तय करेगा। देश की प्रमुख बीमा कंपनी होने के नाते, एलआईसी के पास समाज के सभी वर्गों के लिए योजनाएं हैं, जिनमें वार्षिकी, यूएलआईपी, बचत और टर्म इंश्योरेंस जैसे विभिन्न उत्पाद शामिल हैं।

डिजिटल जानकार ग्राहकों को मिलेगा लाभ

इस अवसर पर एलआईसी के एमडी आर दोराईस्वामी ने बताया कि इन दोनों संगठनों के एक साथ आने से आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के डिजिटल जानकार ग्राहकों को आकर्षक उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध होगी।

एडीबी ने भारत में रूफटॉप सौर प्रणाली के लिए 240.5 मिलियन डॉलर के ऋण को मंजूरी दी

about – Page 739_18.1

एशियाई विकास बैंक (ADB) ने भारत में रूफटॉप सोलर सिस्टम को वित्तपोषित करने के लिए 240.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर के ऋण को मंजूरी दी है, जो अक्षय ऊर्जा के माध्यम से ऊर्जा पहुंच का विस्तार करने के सरकार के प्रयासों में सहायता करता है। एडीबी ने 17 जुलाई को घोषणा की कि यह वित्तपोषण मल्टीट्रेंच फाइनेंसिंग फैसिलिटी (एमएफएफ) सोलर रूफटॉप इन्वेस्टमेंट प्रोग्राम के 2 और 3 चरणों का समर्थन करेगा, जिसे शुरू में एडीबी ने 2016 में मंजूरी दी थी। 2023 में, कार्यक्रम को विशेष रूप से आवासीय सोलर रूफटॉप सिस्टम की तैनाती पर ध्यान केंद्रित करने के लिए पुनर्गठित किया गया था।

भारत का लक्ष्य क्या है?

भारत का लक्ष्य कार्बन उत्सर्जन को कम करने की अपनी वैश्विक प्रतिबद्धताओं के अनुरूप 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा स्रोतों से लगभग 50 प्रतिशत संचयी विद्युत शक्ति स्थापित क्षमता प्राप्त करना है। एडीबी का वित्तपोषण इन लक्ष्यों का समर्थन करता है और प्रधानमंत्री के सूर्य घर कार्यक्रम में योगदान देगा, जो लोगों को देश भर में छतों पर सौर प्रणाली स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

डेवलपर्स और अंतिम उपयोगकर्ताओं को ऋण

स्वीकृत वित्तपोषण भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) को आवंटित किया जाएगा। ये संस्थान पूरे भारत में डेवलपर्स और अंतिम उपयोगकर्ताओं को रूफटॉप सोलर सिस्टम की स्थापना के लिए ऋण प्रदान करेंगे। विशेष रूप से, एडीबी एसबीआई को अपने स्वच्छ प्रौद्योगिकी कोष (सीटीएफ) से 90.5 मिलियन अमरीकी डालर प्रदान करेगा, जबकि नाबार्ड को 150 मिलियन अमरीकी डॉलर प्राप्त होंगे, जिसमें एडीबी के साधारण पूंजी संसाधनों से 80 मिलियन अमरीकी डालर और सीटीएफ से 70 मिलियन अमरीकी डालर शामिल हैं।

क्या लाभ हैं?

एडीबी ने कहा कि छत पर सौर ऊर्जा प्रणाली की स्थापना समग्र बिजली वितरण प्रणाली को महत्वपूर्ण लाभ प्रदान करती है।

  • यह बिजली की खपत के स्थान के करीब बिजली पैदा करके तकनीकी और परिचालन बोझ को कम कर सकता है, जिससे लंबी दूरी की बिजली आपूर्ति की आवश्यकता और संबंधित सिस्टम हानि कम हो जाती है।
  • उपभोग के बिंदु से यह निकटता बिजली वितरण की दक्षता को बढ़ाती है और ऊर्जा स्वतंत्रता की एक डिग्री प्रदान करती है, जिससे बिजली आपूर्ति में व्यवधान कम होता है।

महाराष्ट्र सरकार ने लॉन्च की ‘लाडला भाई’ योजना

about – Page 739_20.1

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने लड़कियों के लिए ‘माझी लड़की बहिन योजना’ की घोषणा के बाद राज्य में लड़कों के लिए ‘लाडला भाई योजना’ की घोषणा की। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने राज्य में लाड़ला भाई योजना लॉन्च करने का ऐलान किया है। इसका उद्देश्य पात्र महिलाओं को 1,500 रुपये की मासिक वित्तीय सहायता प्रदान करना है। आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर महाराष्ट्र के पंढरपुर में बोलते हुए, शिंदे ने कथित तौर पर कहा कि राज्य सरकार लड़के और लड़कियों के बीच अंतर नहीं करती है और ‘लाडला भाई योजना’ योजना बेरोजगारी की समस्या का समाधान करेगी।

योजना में फायदे?

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पंढरपुर में लाडला भाई योजना को लेकर घोषणा की है। इस योजना के तहत 12वीं पास करने वाले युवाओं को 6 हजार रुपये प्रति माह, डिप्लोमा करने वाले युवाओं को 8 हजार रुपये प्रति माह और ग्रेजुएट युवाओं को 10 हजार रुपये प्रति माह सरकार की ओर से दिए जाएंगे।

नौकरी में भी मिलेगा फायदा

लाडला भाई योजना के तहत कोई युवक एक साल तक किसी फैक्ट्री में अप्रेंटिसशिप करेगा, जिसके बाद उसे काम का अनुभव मिलेगा और उस अनुभव के आधार पर उसे नौकरी मिल जाएगी। सीएम शिंदे ने कहा कि एक प्रकार से हम एक कुशल जनशक्ति तैयार कर रहे हैं। हम प्रदेश के साथ देश के उद्योग जगत को कुशल युवा देने जा रहे हैं। सरकार युवाओं को उनकी नौकरियों में कुशल बनाने के लिए भुगतान करने जा रही है।

इस योजना का उद्देश्य

रिपोर्ट के अनुसार, सीएम शिंदे ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य कुशल कार्यबल तैयार करना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इतिहास में यह पहली बार है कि किसी सरकार ने इस तरह की योजना शुरू की है। शिंदे की यह घोषणा इस साल के अंत में होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से ठीक पहले आई है।

माझी लड़की बहिन योजना क्या है?

मुख्यमंत्री माझी लड़की बहिन योजना के तहत 21 से 60 वर्ष की आयु वर्ग की पात्र महिलाओं को ₹1,500 का मासिक भत्ता मिलेगा।

इस योजना का उद्देश्य

इस योजना का उद्देश्य महिलाओं के समग्र विकास और सशक्तिकरण को सुनिश्चित करना है, जिसमें आर्थिक स्वतंत्रता, आत्मनिर्भरता, स्वास्थ्य और पोषण शामिल है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री अजीत पवार ने राज्य का बजट पेश करते हुए घोषणा की कि इस योजना के लिए हर साल ₹46,000 करोड़ उपलब्ध कराए जाएंगे, जिसे जुलाई में लागू किया जाएगा।

भारत ने चौथी आईसीसीपीआर मानवाधिकार समीक्षा पूरी की

about – Page 739_22.1

भारत ने जिनेवा में नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय अनुबंध (आईसीसीपीआर) के अंतर्गत मानवाधिकार समिति द्वारा अपनी चौथी आवधिक समीक्षा सफलतापूर्वक पूरी कर ली है, जिससे मानवाधिकारों के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति उसकी प्रतिबद्धता प्रदर्शित होती है।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल

भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अटॉर्नी जनरल श्री आर. वेंकटरमणी और सॉलिसिटर जनरल श्री तुषार मेहता ने किया और इसमें सचिव (पश्चिम) श्री पवन कपूर भी शामिल थे। महिला एवं बाल विकास, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी, अल्पसंख्यक मामले, विदेश मामले, जनजातीय मामले और गृह मामले सहित कई मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी भी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे।

समीक्षा विवरण

15-16 जुलाई, 2024 को आयोजित समीक्षा में मानवाधिकार समिति के साथ विभिन्न नागरिक और राजनीतिक अधिकारों के मुद्दों पर रचनात्मक बातचीत शामिल थी। चर्चा किए गए विषयों में भ्रष्टाचार विरोधी उपाय, गैर-भेदभाव, महिलाओं और अल्पसंख्यकों की स्थिति, आतंकवाद विरोधी और राष्ट्रीय सुरक्षा, न्यायिक ढांचा, गोपनीयता और डेटा सुरक्षा कानून और नए आपराधिक कानून शामिल थे।

भारत की उपलब्धियाँ

भारत ने कमज़ोर समूहों की सुरक्षा में अपने प्रयासों और वैश्विक मानवाधिकार ढांचे में अपने योगदान पर प्रकाश डाला। समिति ने भारत की बहुलवाद, अहिंसा और विविधता की परंपराओं की सराहना की और एक जीवंत संसदीय लोकतंत्र के रूप में इसकी स्थिति पर ध्यान दिया।

समिति की भूमिका

18 स्वतंत्र विशेषज्ञों से बनी मानवाधिकार समिति समय-समय पर समीक्षा करके तथा टिप्पणियां और सिफारिशें करके ICCPR के कार्यान्वयन की निगरानी करती है।

ऐतिहासिक संदर्भ

ICCPR एक बहुपक्षीय संधि है, जो संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 1966 में अपनाई गई थी। यह संधि व्यक्तियों के नागरिक और राजनीतिक अधिकारों का सम्मान करने के लिए प्रतिबद्ध करती है। हालांकि 1966 में अपनाने के बाद इसे 1976 में लागू किया गया था। भारत इसके पहले भी ICCPR की तीन समीक्षाओं से गुजर चुका है, जो कि 1997 में हुई थी।

about – Page 739_12.1

Recent Posts

द हिंदू रिव्यू मार्च 2026
Most Important Questions and Answer PDF
QR Code
Scan Me