विश्व मानव तस्करी निरोधक दिवस 2024: 30 जुलाई

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विश्व मानव तस्करी निरोधक दिवस हर साल 30 जुलाई को मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य मानव तस्करी के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इसे समाप्त करने के लिए किए जा रहे प्रयासों को समर्थन देना है।

क्यों मनाया जाता है विश्व मानव तस्करी निरोधक दिवस?

मानव तस्करी एक गंभीर अपराध है जो मानवाधिकारों का उल्लंघन करता है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य लोगों में जागरूकता फैलाना और उन्हें इस अपराध के प्रति संवेदनशील बनाना है। मानव तस्करी के शिकार लोगों की पहचान करना, उन्हें आवश्यक सहायता और समर्थन प्रदान करना। सरकारों और संगठनों द्वारा मानव तस्करी को रोकने के लिए उठाए गए कदमों को मजबूती देना और नए उपायों को लागू करना है।

विश्व मानव तस्करी निरोधक दिवस 2024 की थीम

हर साल इस दिन की एक विशेष थीम होती है जो मानव तस्करी के खिलाफ लड़ाई में एक विशेष पहलू को उजागर करती है। थीम का चयन वर्तमान परिस्थितियों और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए किया जाता है।

विश्व मानव तस्करी निरोधक दिवस का महत्व

मानव तस्करी एक वैश्विक समस्या है जो लगभग हर देश में पाई जाती है। इस दिन का महत्व इसे वैश्विक स्तर पर पहचान देने में है। यह दिन मानवाधिकारों की रक्षा और सम्मान को बढ़ावा देने का काम करता है। विभिन्न देशों, संगठनों और समुदायों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना ताकि मानव तस्करी को रोका जा सके। एकजुट होकर मानव तस्करी के खिलाफ लड़ना है और इसे समाप्त करने के लिए ठोस कदम उठाने हैं।

विश्व मानव तस्करी निरोधक दिवस का इतिहास

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2013 में इस दिन को विश्व मानव तस्करी निरोधक दिवस के रूप में घोषित किया। इसे वर्ष 2010 में एक एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान पारित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य मानव तस्करी के शिकार लोगों की सहायता करना और उनकी रक्षा करना था। यह दिवस विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों की तस्करी को समाप्त करने के लिए मनाया जाता है। मानव तस्करी “मानव गरिमा और शारीरिक अखंडता, मानवाधिकारों और विकास” के लिए एक गंभीर खतरा है।

 

अंतर्राष्ट्रीय मित्रता दिवस 2024: 30 जुलाई

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दोस्ती का जश्न मनाने के साथ-साथ नए लोगों से मिलने और दोस्त बनाने के विचार को बढ़ावा देने के लिए प्रतिवर्ष 30 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय मित्रता दिवस मनाया जाता है। जिसका मकसद अपने दोस्तों का आभार व्यक्त करना और फ्रेंडशिप को सेलिब्रेट करना है। दोस्ती दुनिया का सबसे प्यारा और मजबूत रिश्ता है, जिसे हम खुद बनाते हैं। जिंदगी में एक अच्छे दोस्त का साथ मेंटल हेल्थ को दुरुस्त रखने के साथ व्यक्तिगत विकास के लिए भी बहुत जरूरी होता है।

विभिन्न देशों में मित्रता दिवस अलग-अलग तारीखों पर मनाई जाती है। भारत, बांग्लादेश समेत मलेशिया, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका जैसे देश हर साल अगस्त महीने के पहले रविवार को विश्व मित्रता दिवस मनाते हैं। जबकि कई अन्य देश 30 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय दोस्ती दिवस के तौर पर मनाते हैं।

अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस की थीम

साल 2024 में अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस को “विविधता को अपनाना, एकता को बढ़ावा देना” थीम के साथ सेलिब्रेट किया जा रहा है।

दोस्ती दिवस का इतिहास

इस दिन को मनाने का विचार पहली बार 20वीं सदी की शुरुआत में आया। सबसे पहले यह 1958 में विश्व मैत्री धर्मयुद्ध में प्रस्तावित किया गया। यह एक अंतर्राष्ट्रीय नागरिक संगठन है। हालांकि आधिकारिक तौर पर साल 2011 में संयुक्त राष्ट्र संघ की एक आम सभा ने अंतर्राष्ट्रीय मित्रता दिवस मनाने की शुरुआत हुई।

 

जितेंद्र सिंह प्रतिष्ठित “लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड” से सम्मानित

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देश-विदेश के प्रमुख चिकित्सा हस्तियों, पेशेवरों और चिकित्सकों के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के अवसर पर आयोजित समारोह में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को मधुमेह विज्ञान, मधुमेह देखभाल और मधुमेह अनुसंधान के क्षेत्र में उनके अनुकरणीय समर्पण के लिए प्रतिष्ठित “लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड” से सम्मानित किया गया। मधुमेह विज्ञान, मधुमेह देखभाल और मधुमेह अनुसंधान के विकास के लिए उनके अनुकरणीय समर्पण के लिए उन्हें देश भर में और विदेशों में भी ख्याति मिली।

राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध चिकित्सा पेशेवर

मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. वी. मोहन ने इस अवसर पर उन्हें एक शिक्षक, प्रोफेसर, शोधकर्ता और मधुमेह रोग के चिकित्सक के रूप में बताया। उन्होंने कहा कि डॉ. जितेंद्र सिंह राष्ट्रीय स्तर पर ज्ञात चिकित्सा पेशेवर का एक और दुर्लभ उदाहरण हैं। वे एक नेता के तौर पर भी बेहद सफल रहे हैं और तीन बार से लगातार केंद्र सरकार में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वे जम्मू और कश्मीर के पहले व्यक्ति हैं जिन्हें लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए केंद्रीय मंत्रिपरिषद में जगह मिली है। पूर्व में उन्हें जवाहरलाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (जेआईपीएमईआर) से “ओरेशन के लिए स्वर्ण पदक” और पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित “जमना देवी ज्ञान देवी पुरस्कार” भी मिल चुका है।

आठ पुस्तकों के लेखक

डॉ. जितेंद्र सिंह को मधुमेह के विभिन्न पहलुओं पर आठ पुस्तकों और तीन मोनोग्राम के लेखक के रूप में वर्णित किया गया है। उन्होंने चिकित्सा की प्रमुख पाठ्यपुस्तकों में मधुमेह पर अध्याय लिखे हैं और मंत्री बनने से पहले उन्होंने एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडिया द्वारा प्रकाशित प्रतिष्ठित “एपीआई टेक्स्टबुक ऑफ मेडिसिन” के बारह क्रमिक संस्करणों में मधुमेह पर एक अध्याय लिखा था। डॉ. जितेन्द्र सिंह द्वारा लिखी गई मधुमेह जागरूकता पुस्तकों में से एक पुस्तक “डायबिटीज मेड ईज़ी” को प्रगति मैदान, नई दिल्ली में आयोजित विश्व पुस्तक मेले के बेस्ट-सेलर सेक्शन में शामिल किया गया था।

नीता अंबानी ने पेरिस 2024 ओलंपिक में इंडिया हाउस का उद्घाटन किया

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नीता अंबानी ने हाल ही में पेरिस ओलंपिक शुरू होने के एक दिन बाद पेरिस में इंडिया हाउस का उद्घाटन किया। नीता अंबानी ने पारंपरिक भारतीय तरीके से दीप प्रज्वलित कर कंट्री हाउस यानी इंडिया हाउस का उद्घाटन किया।

इस मौके पर देश विदेश के मेहमान, आईओसी अधिकारी और भारत की मशहूर हस्तियां शामिल थीं। इंडिया हाउस के उद्घाटन के मौके पर आईओसी सदस्या नीता अंबानी ने उम्मीद जताई कि भारत जल्दी ही ओलंपिक की मेजबानी करेगा। उन्होंने कहा कि ओलंपिक इतिहास में पहली बार बने इंडिया-हाउस में आपका स्वागत है।

नीता अंबानी ने क्या कहा?

इंडिया हाउस के महत्व पर नीता अंबानी ने कहा कि इंडिया हाउस को भारत की ओलंपिक आकांक्षाओं के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। हम आशा करते हैं कि यह हमारे एथलीटों के लिए घर से दूर घर जैसा अनुभव होगा। इंडिया हाउस, पार्क ऑफ नेशंस के पार्क डे ला विलेट में स्थित है और 27 जुलाई से 11 अगस्त तक ओलंपिक के दौरान स्थानीय समयानुसार सुबह 11 बजे से रात 11 बजे तक मेहमानों के लिए खुला रहेगा।

1.4 अरब भारतीयों का सपना

हाल ही में आईओसी सदस्य चुनी गईं नीता अंबानी ने कहा कि ओलंपिक के इतिहास में पहली बार बने इंडिया हाउस में आपका स्वागत है। आज हम 2024 के पेरिस ओलंपिक खेलों में एक नया सपना देख रहे हैं। एक ऐसा सपना, जो 1.4 अरब भारतीयों का है। भारत को ओलंपिक में लाने का और ओलंपिक को भारत में लाने का, एक साझा सपना।

 

अल्ट्राटेक ने इंडिया सीमेंट की 32.72% हिस्सेदारी खरीदी

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आदित्य बिड़ला ग्रुप की स्वामित्व वाली सीमेंट कंपनी अल्ट्राटेक के बोर्ड ने इंडिया सीमेंट लिमिटेड में 32.72 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की मंजूरी दे दी है। इस डील में अल्ट्राटेक को 390 रुपए प्रति शेयर के हिसाब से टोटल 3,954 करोड़ रुपए देने होंगे।

इसमें कंपनी को इंडिया सीमेंट के प्रमोटर्स और एसोसिएट्स के 10 करोड से ज्यादा शेयर मिलेंगे। अब अल्ट्राटेक सीमेंट के पास इंडिया सीमेंट के मेजॉरिटी स्टेक यानी 55.49 प्रतिशत हिस्सेदारी आ गई है। इस बात की जानकारी कंपनी ने 28 जुलाई को एक्सचेंज फाइलिंग में दी है।

जून में 22. 77 प्रतिशत हिस्सेदारी

अल्ट्राटेक सीमेंट के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने जून में इंडिया सीमेंट्स में 22.77 प्रतिशत की हिस्सेदारी के अधिग्रहण की मंजूरी दी थी। कंपनी ने इंडिया सीमेंट्स के 7.06 करोड़ स्टॉक्स 268 रुपए प्रति शेयर के हिसाब से खरीदी। इस डील की टोटल वैल्यू करीब 1,885 करोड़ रुपए है।

अल्ट्राटेक का शेयर

अल्ट्राटेक सीमेंट का शेयर 26 जुलाई को 1.95 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद 11,664.05 रुपए के स्तर पर बंद हुआ। कंपनी के शेयर में पिछले एक महीने में 0.03 प्रतिशत की गिरावट रही है। इसने 6 महीने में 13.53 प्रतिशत और एक साल में 40.42 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। इस साल अल्ट्राटेक का शेयर 11.47 प्रतिशत चढ़ा है।

अल्ट्राटेक देश की सबसे बड़ी सीमेंट कंपनी

अल्ट्राटेक देश की सबसे बड़ी सीमेंट कंपनी है, जिसकी कुल उत्पादन क्षमता 152.7 MPTA (15.27 करोड़ टन सालाना) है। इस साल की शुरुआत में कंपनी ने ₹7,600 करोड़ की एंटरप्राइज वैल्यू पर केसोराम के सीमेंट बिजनेस का अधिग्रहण किया था।

इतने करोड़ टन सीमेंट बनाती है इंडिया सीमेंट

इंडिया सीमेंट की कैपिसिटी 14.45 mtpa यानी कंपनी एक साल में 1.45 करोड़ टन सीमेंट बनाने में सक्षम है। इसमें 1.30 करोड़ टन तमिलनाडु और 15 लाख टन राजस्थान से उत्पादन करती है। कंपनी के शेयर ने पिछले एक महीने में 26.72 प्रतिशत, 6 महीने में 43.99 प्रतिशत और एक साल में 73.27 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। इस साल इंडिया सीमेंट का शेयर 42.37 प्रतिशत चढ़ा है।

कर्नाटक बैंक ने ICICI लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस के साथ साझेदारी की

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कर्नाटक बैंक ने आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी के साथ रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है, जिससे उसके ग्राहक बीमा उत्पादों की व्यापक रेंज तक पहुँच सकेंगे। इस सहयोग का उद्देश्य व्यक्तियों और व्यवसायों दोनों के लिए स्वास्थ्य, मोटर, यात्रा और गृह बीमा सहित विभिन्न बीमा आवश्यकताओं को पूरा करना है।

पेशकश का विवरण

यह साझेदारी कर्नाटक बैंक के ग्राहकों को निम्नलिखित सुविधाएँ प्रदान करेगी:

  • स्वास्थ्य बीमा: चिकित्सा व्यय और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को कवर करना।
  • मोटर बीमा: वाहनों को नुकसान और चोरी से सुरक्षा।
  • यात्रा बीमा: यात्रा से संबंधित जोखिमों और आपात स्थितियों के लिए कवरेज।
  • गृह बीमा: संभावित जोखिमों से आवासीय संपत्तियों की सुरक्षा।

डिजिटल बीमा पहल

कर्नाटक बैंक के कार्यकारी निदेशक शेखर राव ने इस बात पर प्रकाश डाला कि बैंक डिजिटल बीमा समाधानों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इस पहल में शामिल हैं:

  • ऑनलाइन पॉलिसी खरीद: ग्राहकों को ऑनलाइन बीमा पॉलिसी खरीदने में सक्षम बनाना।
  • वास्तविक समय में दावा प्रसंस्करण: दावों का त्वरित और कुशल संचालन सुनिश्चित करना।
  • व्यक्तिगत सलाहकार सेवाएँ: डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से अनुकूलित बीमा सलाह प्रदान करना।

अधिकारियों के बयान

शेखर राव ने इस बात पर जोर दिया कि आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के साथ सहयोग सर्वश्रेष्ठ बीमा समाधान प्रदान करने और ग्राहक सुविधा को बढ़ाने की दिशा में एक कदम है। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के खुदरा और सरकारी प्रमुख आनंद सिंघी ने साझेदारी के बारे में उत्साह व्यक्त किया, इसे अपने बीमा प्रस्तावों का विस्तार करने और ग्राहकों को एक व्यापक पोर्टफोलियो प्रदान करने के अवसर के रूप में देखा।

मार्च 2024 तक देश भर में डिजिटल पेमेंट में 12.6 प्रतिशत की वृद्धि: RBI Data

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डिजिटल पेमेंट की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। इसको लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक डेटा शेयर किया है। आरबीआई इंडेक्स के अनुसार 31 मार्च 2024 तक देश भर में डिजिटल पेमेंट में 12.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। आरबीआई का डिजिटल पेमेंट इंडेक्स (आरबीआई-डीपीआई) मार्च 2024 के अंत में 445.5 पर था, जबकि सितंबर 2023 में 418.77 और मार्च 2023 में 395.57 था।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपने बयान में कहा कि मार्च 2024 की अवधि के दौरान देश भर में पेमेंट परफॉर्मेंस और पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर ढांचे में वृद्धि की वजह से डिजिटल पेमेंट की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। यह वृद्धि सभी मापदंडों में हुई है।

 RBI Index क्या है?

केंद्रीय बैंक ने देश भर में पेमेंट के डिजिटलीकरण की सीमा को पकड़ने के लिए आधार के रूप में मार्च 2018 में एक समग्र RBI-DPI के निर्माण की घोषणा की थी। इस इंडेक्स में पांच व्यापक पैरामीटर शामिल हैं। यह पैरामीटर विभिन्न अवधियों में देश में डिजिटल पेमेंट की गहराई और पैठ को मापने में सक्षम बनाते हैं।

ये पैरामीटर पेमेंट इनेब्लर्स (वेटेज 25 प्रतिशत), पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर – डिमांड-साइड फैक्टर्स (10 प्रतिशत), पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर – सप्लाई- साइड फैक्टर्स (15 प्रतिशत), पेमेंट परफॉर्मेंस (45 प्रतिशत), और कंज्यूमर सेंट्रिसिटी (5 प्रतिशत) हैं। मार्च 2021 से इस सूचकांक में चार महीने के अंतराल के साथ अर्ध-वार्षिक आधार पर डेटा को प्रकाशित किया जाता है।

एपीजे अब्दुल कलाम की 9वीं पुण्यतिथि

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मिसाइल मैन के नाम से मशहूर देश के पूर्व राष्‍ट्रपति डॉ. एपीजे अब्‍दुल कलाम की आज 9वीं पुण्‍यतिथि है। डॉ. कलाम महान वैज्ञानिक होने के साथ महान विचारक और लेखक भी थे। उनका पूरा जीवन आज के युवाओं के लिए एक शिक्षा की तरह है।

अब्‍दुल कलाम ने देश का सर्वोच्‍च पद प्राप्‍त किया, लेकिन फिर भी वो हमेशा जमीन से जुड़े रहे। उनका स्‍वभाव बेहद सहज, सरल और विनम्र था। वे हमेशा खुद को एक वैज्ञानिक और शिक्षक की तरह ही देखा करते थे।

प्रमुख योगदान और विरासत

एयरोस्पेस इंजीनियरिंग और रक्षा

डॉ. कलाम ने भारत की अग्नि और पृथ्वी मिसाइलों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे देश की सामरिक रक्षा क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) में उनके काम में एसएलवी-III परियोजना की देखरेख शामिल है, जिसने भारत के पहले उपग्रह रोहिणी को पृथ्वी की कक्षा में प्रक्षेपित किया।

परमाणु विकास

डॉ. कलाम ने भारत के परमाणु हथियार परीक्षणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, विशेष रूप से 1998 में पोखरण-II परीक्षण, जिसने भारत के रक्षा इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण को चिह्नित किया।

स्वास्थ्य सेवा में नवाचार

हृदय रोग विशेषज्ञ सोमा राजू के साथ मिलकर डॉ. कलाम ने 1998 में किफायती “कलाम-राजू स्टेंट” और बाद में 2012 में “कलाम-राजू टैबलेट” विकसित किया, जिसका उद्देश्य दूरस्थ स्वास्थ्य सेवा में सुधार करना था।

एपीजे अब्‍दुल कलाम की प्रेरक बातें

  • सपने हमारे तभी तभी सच हो सकते है जब सपनों को पूरा करने के लिए अपनी नींद तक का त्याग कर दें।
  • सपने वो नहीं होते जो आप सोते समय देखते हैं, सपने वो होते हैं जो आपको सोने नहीं देते।
  • देश का सबसे अच्छा दिमाग क्लासरूम के आखिरी बेंचों पर मिल सकता है।
  • यदि हम स्वतंत्र नहीं हैं, तो कोई भी हमारा सम्मान नहीं करेगा।
  • इंतजार करने वाले को उतना ही मिलता है, जितना कि कोशिश करने वाले छोड़ देते हैं।
  • मनुष्य के लिए कठिन हालात का होना बहुत जरूरी है क्योंकि इसके बिना आप सफलता का आनंद नहीं ले सकते हैं।

International Tiger Day 2024: जानें इस दिन का इतिहास, महत्व और उद्देश्य

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अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस (International Tiger Day) हर साल 29 जुलाई को मनाया जाता है। वैश्विक स्तर पर बाघों के संरक्षण व उनकी लुप्तप्राय हो रही प्रजाति को बचाने के लिए जागरूकता फैलाना ही इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य है। इसका लक्ष्य बाघों के प्राकृतिक आवासों की रक्षा के लिए एक वैश्विक प्रणाली को बढ़ावा देना और बाघ संरक्षण के मुद्दों के लिए जन जागरूकता और समर्थन बढ़ाना है।

बाघ हमारे पारिस्थितिकी तंत्र को स्वस्थ रखने और उसकी विविधता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अगर बाघ नहीं बचेंगे, तो इससे पूरा पारिस्थितिक तंत्र बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है। बता दें कि बाघों की तेजी से घटती हुई संख्या एक गंभीर पर्यावरणीय चुनौती है। मानवीय गतिविधियों, अवैध व्यापार, शिकार और आवास के नुकसान की वजह से बाघों की कई प्रजातियां विलुप्त होने को हैं।

इस दिन का उद्देश्य

इस खास दिन, पूरी दुनिया में बाघों की कम होती संख्या पर नियंत्रण करना। साथ ही उनके आवासों यानि जंगलों की सुरक्षा करना, साथ ही इसका विकास कर दुनिया को बाघों की घटती संख्या के प्रति जागरूक करना ही इसका उद्देश्य है।

अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस: महत्व

WWF विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले 100 सालों में दुनिया-भर में लगभग 97 फीसदी जंगली बाघों आबादी घट गई है। एक सदी पहले लगभग 100,000 बाघों की तुलना में वर्तमान में केवल 3,000 बाघ जीवित हैं। वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड (WWF), इंटरनेशनल फंड फॉर एनिमल वेलफेयर (IFAW) और स्मिथसोनियन कंजर्वेशन बायोलॉजी इंस्टीट्यूट (SCBI) सहित कई अंतरराष्ट्रीय संगठन भी जंगली बाघों के संरक्षण में लगे हुए हैं।

बाघ कितने प्रकार के हैं?

बाघ अलग-अलग रंगों के होते हैं जैसे सफेद बाघ, काली धारियों वाला सफेद बाघ, काली धारियों वाला भूरा बाघ और गोल्डन टाइगर और उन्हें चलते हुए देखना एक अद्भुत नजारा हो सकता है। अब तक बाली टाइगर, कैस्पियन टाइगर, जावन टाइगर और टाइगर हाइब्रिड ऐसी प्रजातियां हैं जो विलुप्त हो चुकी हैं।

वर्ल्ड टाइगर डे का इतिहास

वर्ल्ड टाइगर डे की शुरुआत साल 2010 से हुई जब इसे रूस में सेंट पीटर्सबर्ग टाइगर समिट में मान्यता दी गई थी। सभी इस बात से हैरान थे जब एक रिपोर्ट से पता चला कि सभी बाघों में से 97% गायब हो गए है, वैश्विक परिदृश्य में सिर्फ 3,900 बाघ ही जीवित हैं।

भारत में प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत

भारत सरकार ने साल 1973 में बाघों को संरक्षण प्रदान करने के मकसद से प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत की थी। इस प्रोजेक्ट के तहत कई सारे टाइगर रिजर्व स्थापित किए गए। कई तरह की नीतियां बनाई गईं, जिससे बाघों का शिकार रोका जा सके, उनकी संख्या बढ़ाने पर काम किया जा सके।

रूस की नेवी-डे परेड में शामिल हुआ भारत, जानें सबकुछ

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भारतीय नौसेनिकों ने 28 जुलाई को रूस के 328वीं नेवी-डे परेड में हिस्सा लिया। इस मौके पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने भारतीय नौसेनिकों से सलामी ली। भारत की तरफ से नेवी-डे परेड में युद्धपोत INS तबर ने शामिल हुआ।

परेड की सलामी लेते हुए पुतिन ने भारतीय नौसेनिकों को अभिवादन किया और नौसेनिकों को नेवी-डे परेड में भाग लेने के लिए बधाई भी दी। युद्धपोत INS तबर की कमान कैप्टन एम.आर हरीश संभाल रहे थे। उनके साथ 280 सदस्यों का क्रू भी युद्धपोत पर मौजूद था।

भारतीय नौसेना में शामिल

आईएनएस तबर युद्धपोत का निर्माण रूस में ही हुआ है और इसे 2004 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था।

200 जहाजों ने हिस्सा लिया

सेंट पीटर्सबर्ग में मनाए जा रहे 328 वें नेवी-डे में करीब 200 जहाजों ने हिस्सा लिया। ये सभी 2024 तक नेवी का हिस्सा रहे हैं। इस दौरान 15 हजार से अधिक सैनिक भी मौजूद रहे।

रूस पहुंचने से पहले INS तबर 17 जुलाई को जर्मनी पहुंचा था। जहां इसने 3 दिन तक हमबर्ग पोर्ट पर स्टे किया। जहां भारतीय नौसेनिकों ने जर्मनी नेवी के साथ आधिकारिक मुलाकात की। इसके साथ भारतीय युद्ध-पोत को देखने के लिए आम नागिरकों को भी मौका दिया।

नौसेना का आधुनिकीकरण

रूसी फ्रिगेट, कॉर्वेट और परमाणु पनडुब्बियों का हाल ही में आधुनिकीकरण किया गया है, जिनमें से कुछ अत्याधुनिक परमाणु-सक्षम जिरकोन हाइपरसोनिक मिसाइलों से लैस हैं। मैक 9 तक की गति से उड़ने वाली मिसाइल को हवाई सुरक्षा द्वारा रोका नहीं जा सकता है। जनवरी 2020 में ज़िरकोन दागने वाला पहला नौसेना युद्धपोत एडमिरल गोर्शकोव था।

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