केंद्रीय कैबिनेट ने केरल का नाम बदलकर “केरलम” करने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने “केरल” राज्य का नाम बदलकर “केरलम” करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय केरल विधान सभा द्वारा 24 जून 2024 को पारित उस प्रस्ताव के बाद लिया गया, जिसमें संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत राज्य के नाम में आधिकारिक परिवर्तन के लिए केंद्र सरकार से आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया गया था। इस स्वीकृति के साथ राज्य के नाम को उसकी मूल भाषाई और सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप “केरलम” करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत प्रक्रिया

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 3 संसद को किसी राज्य के नाम, क्षेत्रफल या सीमाओं में परिवर्तन करने का अधिकार देता है। संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार, राष्ट्रपति “केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026” को राज्य विधानमंडल की राय प्राप्त करने हेतु Kerala Legislative Assembly को संदर्भित करेंगे। राज्य विधानसभा की राय प्राप्त होने के बाद केंद्र सरकार आगे की कार्रवाई करेगी। राष्ट्रपति की अनुशंसा के बिना यह विधेयक संसद में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। साथ ही, संविधान की प्रथम अनुसूची में संशोधन भी आवश्यक होगा, जहाँ राज्य का नाम वर्तमान में “Kerala” अंकित है।

मांग की पृष्ठभूमि

केरल विधान सभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर कहा था कि राज्य का नाम मलयालम भाषा में “केरलम” है। प्रस्ताव में उल्लेख किया गया कि 1 नवंबर 1956 को राज्यों का भाषाई आधार पर पुनर्गठन हुआ था और इसी दिन “केरल पिरवी दिवस” भी मनाया जाता है। विधानसभा ने केंद्र से राज्य की ऐतिहासिक और भाषाई पहचान के अनुरूप नाम संशोधित करने का आग्रह किया था।

मंत्रालयीय समीक्षा और स्वीकृति

इस प्रस्ताव की समीक्षा गृह मंत्रालय द्वारा की गई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की स्वीकृति के बाद इसे विधि एवं न्याय मंत्रालय के अंतर्गत विधिक कार्य विभाग और विधायी विभाग को भेजा गया। दोनों विभागों की सहमति के पश्चात प्रस्ताव को मंत्रिमंडल के समक्ष रखा गया, जहाँ इसे मंजूरी प्रदान की गई।

निर्णय का महत्व

यदि संसद इस विधेयक को पारित कर देती है, तो राज्य का आधिकारिक नाम “केरल” से बदलकर “केरलम” हो जाएगा और सभी संवैधानिक अभिलेखों में यही नाम दर्ज होगा। यह कदम राज्य की भाषाई पहचान और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने के साथ-साथ उसके मूल मलयालम उच्चारण के अनुरूप आधिकारिक नाम सुनिश्चित करेगा।

MCQs: नाम बदलना – केरल से केरलम

Q1. यूनियन कैबिनेट ने केरल का नाम बदलने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है:
(a) केरल
(b) केरलम
(c) मलयालम प्रदेश
(d) मालाबार
(e) त्रावणकोर

जवाब: (b)
जवाब: प्रस्तावित नया नाम “केरलम” है।

Q2. किसी राज्य का नाम बदलने की शक्ति भारत के संविधान के किस आर्टिकल के तहत दी गई है?
(a) आर्टिकल 1
(b) आर्टिकल 2
(c) आर्टिकल 3
(d) आर्टिकल 4
(e) आर्टिकल 5

जवाब: (c)
जवाब: आर्टिकल 3 संसद को किसी भी राज्य का नाम बदलने का अधिकार देता है।

Q3. संसद में बिल पेश करने से पहले, इसे अपने विचार बताने के लिए किस बॉडी को भेजा जाना चाहिए? (a) सुप्रीम कोर्ट
(b) इलेक्शन कमीशन
(c) संबंधित राज्य विधानसभा
(d) नीति आयोग
(e) फाइनेंस कमीशन

जवाब: (c)
जवाब: प्रेसिडेंट को बिल संबंधित राज्य विधानसभा को भेजना होगा।

Q4. केरल विधानसभा ने नाम बदलने का प्रस्ताव कब पास किया:
(a) 15 अगस्त 2023
(b) 1 नवंबर 2023
(c) 24 जून 2024
(d) 26 जनवरी 2024
(e) 2 अक्टूबर 2024

जवाब: (c)
जवाब: प्रस्ताव 24.06.2024 को पास हुआ था।

Q5. संशोधन के लिए संविधान के किस शेड्यूल में बदलाव की ज़रूरत होगी? (a) दूसरी अनुसूची
(b) तीसरी अनुसूची
(c) चौथी अनुसूची
(d) पाँचवीं अनुसूची
(e) पहली अनुसूची

उत्तर: (e)
उत्तर: राज्यों का नाम संविधान की पहली अनुसूची में दिया गया है।

भारत अपना पहला व्यापक कार्बन ट्रेडिंग कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी में

भारत अपने पहले व्यापक कार्बन ट्रेडिंग कार्यक्रम को शुरू करने के अंतिम चरण में है, जिसका उद्देश्य औद्योगिक उत्सर्जन को विनियमित और रिपोर्ट करना है। यह योजना देश की जलवायु कार्यनीति (Climate Action Framework) में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। Bureau of Energy Efficiency (BEE) के अधिकारियों के अनुसार, यह कार्यक्रम अप्रैल 2025 से मार्च 2026 की अवधि को कवर करेगा। पारदर्शिता और अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए सत्यापनकर्ताओं (Verifiers) के साक्षात्कार वर्तमान में जारी हैं।

कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) क्या है?

कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) भारत का पहला अनुपालन-आधारित (Compliance-Based) कार्बन बाजार है। इस व्यवस्था के तहत उद्योगों को उत्सर्जन लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे। जो इकाइयाँ निर्धारित सीमा से कम उत्सर्जन करेंगी, वे कार्बन क्रेडिट अर्जित कर सकेंगी, जबकि सीमा से अधिक उत्सर्जन करने वाली इकाइयों को क्रेडिट खरीदने होंगे या दंड का सामना करना पड़ेगा। BEE ने अक्टूबर 2025 और जनवरी 2026 में जारी अधिसूचनाओं के माध्यम से सात क्षेत्रों की लगभग 490 औद्योगिक इकाइयों को उत्सर्जन लक्ष्य आवंटित कर दिए हैं।

इस्पात और उर्वरक क्षेत्र अभी शामिल नहीं

हालाँकि इस योजना का लक्ष्य अंततः लगभग 800 इकाइयों को शामिल करना है, जो भारत के अधिकांश औद्योगिक उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं, लेकिन पहले चरण में इस्पात और उर्वरक क्षेत्र को शामिल नहीं किया गया है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि इस्पात और उर्वरक क्षेत्र यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) के अंतर्गत आते हैं, जो जनवरी से लागू हुआ है और उच्च उत्सर्जन वाले उत्पादों के निर्यात पर कार्बन कर लगाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य के चरणों में इन क्षेत्रों को शामिल करना अंतरराष्ट्रीय व्यापार दबावों और जलवायु प्रतिबद्धताओं को संतुलित करने के लिए आवश्यक होगा।

देरी नहीं, योजना तय समय पर

BEE के निदेशक सौरभ दीदी ने स्पष्ट किया है कि योजना में कोई देरी नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि 490 इकाइयों के लिए उत्सर्जन लक्ष्य पहले ही अधिसूचित किए जा चुके हैं और कार्यान्वयन निर्धारित समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ रहा है। यह कार्बन बाजार उद्योगों को उत्सर्जन की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से करने और स्वच्छ उत्पादन पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

वैश्विक स्तर पर कड़े होते जलवायु नियमों के बीच भारत का यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण है। एक घरेलू कार्बन बाजार ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देगा, हरित प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा, भारतीय निर्यातकों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करेगा और भारत को वैश्विक जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुरूप आगे बढ़ने में मदद करेगा। सफल क्रियान्वयन की स्थिति में यह योजना भारत की निम्न-कार्बन विकास रणनीति का एक प्रमुख स्तंभ बन सकती है।

MCQs: भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS)

Q1. भारत का पहला बड़ा कार्बन-ट्रेडिंग प्रोग्राम कौन सी संस्था लागू कर रही है?
(a) SEBI
(b) NITI आयोग
(c) ब्यूरो ऑफ़ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE)
(d) पर्यावरण मंत्रालय
(e) NABARD

जवाब: (c)
जवाब: ब्यूरो ऑफ़ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम लागू कर रहा है।

Q2. भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम के पहले फेज़ में लगभग कितनी इंडस्ट्रियल यूनिट्स शामिल हैं?
(a) 300
(b) 400
(c) 490
(d) 650
(e) 800

जवाब: (c)
जवाब: सात सेक्टर्स में लगभग 490 यूनिट्स को एमिशन टारगेट जारी किए गए हैं।

Q3. भारत के कार्बन ट्रेडिंग प्रोग्राम के पहले फेज़ के लिए कम्प्लायंस पीरियड है:
(a) अप्रैल 2024 – मार्च 2025
(b) जनवरी 2025 – दिसंबर 2025
(c) अप्रैल 2025 – मार्च 2026
(d) जनवरी 2026 – दिसंबर 2026
(e) अप्रैल 2026 – मार्च 2027

जवाब: (c)
Sol: यह प्रोग्राम अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक कवर करता है।

Q4. कार्बन मार्केट के पहले फेज़ में कौन से दो बड़े सेक्टर शामिल नहीं हैं?

(a) पावर और सीमेंट
(b) स्टील और फर्टिलाइज़र
(c) टेक्सटाइल और केमिकल्स
(d) ऑयल और गैस
(e) ऑटोमोबाइल और एविएशन

जवाब: (b)
Sol: स्टील और फर्टिलाइज़र सेक्टर को अभी पहले फेज़ में शामिल किया जाना बाकी है।

Q5. यूरोपियन यूनियन के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) का मुख्य मकसद है:
(a) डिजिटल ट्रेड को बढ़ावा देना
(b) एक्सपोर्ट सब्सिडी देना
(c) ज़्यादा एमिशन वाले इंपोर्ट पर कार्बन टैक्स लगाना
(d) विदेशी इन्वेस्टमेंट बढ़ाना
(e) खेती के एक्सपोर्ट को रेगुलेट करना

जवाब: (c)
जवाब: CBAM, EU में ज़्यादा एमिशन वाले सामान के इंपोर्ट पर कार्बन टैक्स लगाता है।

Q6. कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम के तहत, जो इंडस्ट्री अपनी तय लिमिट से कम एमिशन करती हैं, वे:
(a) एक्स्ट्रा टैक्स दे सकती हैं
(b) ऑपरेशन बंद कर सकती हैं
(c) कार्बन क्रेडिट कमा सकती हैं और बेच सकती हैं
(d) कोयले को बिना किसी रोक-टोक के इंपोर्ट कर सकती हैं
(e) एमिशन की रिपोर्टिंग से बच सकती हैं

जवाब: (c)
जवाब: लिमिट से कम एमिशन करने वाली यूनिट कार्बन क्रेडिट कमा सकती हैं और उनका ट्रेड कर सकती हैं।

Q7. बाद के फेज़ में लगभग 800 यूनिट को शामिल करने से भारत के इंडस्ट्रियल एमिशन का लगभग कितना हिस्सा कवर होगा? (a) थोड़ा हिस्सा
(b) आधा
(c) लगभग सभी
(d) एक-चौथाई
(e) एक-तिहाई

जवाब: (c)
जवाब: 800 यूनिट तक बढ़ाने का मकसद लगभग सभी इंडस्ट्रियल एमिशन को कवर करना है।

भारतीय सेना ने स्ट्रेला-10 मिसाइल का सफल परीक्षण किया

भारतीय सेना की कोणार्क कोर के अंतर्गत आने वाली “ब्लेज़िंग स्काईज़ ब्रिगेड” के एयर डिफेंस वॉरियर्स ने स्ट्रेला-10 (VSHORADS) का पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में उच्च-तीव्रता परीक्षण सफलतापूर्वक किया। राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्र में आयोजित इस लाइव अभ्यास ने कम ऊँचाई पर आने वाले हवाई खतरों से निपटने में सेना की मजबूत युद्धक तत्परता और परिचालन सटीकता का प्रदर्शन किया। यह अभ्यास वायु रक्षा क्षमताओं को और सुदृढ़ करने तथा वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सिमुलेटेड लक्ष्यों पर सटीक प्रहार

BMP आधारित मोबाइल प्लेटफॉर्म से दागी गई स्ट्रेला-10 मिसाइल ने सिमुलेटेड दुश्मन हवाई लक्ष्यों पर सीधे और सटीक प्रहार किए। लगभग 6 से 10 किलोमीटर की प्रभावी मारक क्षमता वाला यह सिस्टम कम ऊँचाई पर उड़ने वाले विमानों, हेलीकॉप्टरों और आधुनिक हवाई खतरों जैसे ड्रोन को निष्क्रिय करने में सक्षम है। अधिकारियों के अनुसार, इस अभ्यास ने फायरिंग मानकों की पुष्टि की, क्रू के बीच समन्वय को मजबूत किया तथा वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में लक्ष्य भेदन प्रक्रियाओं का परीक्षण किया।

अभ्यास की प्रमुख विशेषताएँ

अभ्यास के दौरान निगरानी और लक्ष्य अधिग्रहण प्रणालियों का निर्बाध एकीकरण प्रदर्शित किया गया। रेगिस्तानी परिस्थितियों में सटीक मिसाइल प्रक्षेपण, उच्च स्तर की फायर अनुशासन (Fire Discipline) और सामरिक दक्षता का प्रदर्शन किया गया। अत्यधिक तापमान और बदलती रेत जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में परीक्षण ने सैनिकों की परिचालन क्षमता को परखा। रडार-आधारित प्रणालियों के विपरीत, स्ट्रेला-10 मुख्य रूप से दृश्य लक्ष्य अधिग्रहण (Visual Target Acquisition) पर निर्भर करता है, जिससे प्रशिक्षण और युद्धक्षेत्र जागरूकता अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।

सामरिक महत्व

पोखरण का रेगिस्तानी क्षेत्र चुनौतीपूर्ण वातावरण प्रदान करता है, जिससे वायु रक्षा इकाइयों की वास्तविक युद्ध स्थितियों के लिए तैयारी सुनिश्चित होती है। भारतीय सेना में स्ट्रेला-10 अभी भी सक्रिय सेवा में है, साथ ही भारत लगभग 6 किलोमीटर मारक क्षमता वाले स्वदेशी VSHORADS सिस्टम का भी विकास कर रहा है, जिससे घरेलू रक्षा क्षमताओं को और सुदृढ़ किया जा सके। अधिकारियों ने बताया कि विशेष रूप से सामरिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में परिचालन तत्परता बनाए रखने के लिए ऐसे अभ्यास नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं। यह सफल परीक्षण विकसित होते हवाई खतरों के विरुद्ध राष्ट्रीय वायुक्षेत्र की सुरक्षा के प्रति भारतीय सेना की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026 महाराष्ट्र के शेगांव में आयोजित होगा

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा अखिल भारतीय आयुर्वेदिक कांग्रेस के सहयोग से चार दिवसीय “राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026” का आयोजन 25 से 28 फरवरी 2026 तक महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के शेगांव में किया जाएगा। इस कार्यक्रम का उद्घाटन 25 फरवरी 2026 को द्रौपदी मुर्मू द्वारा संत गजानन महाराज संस्थान के विसावा मैदान में किया जाएगा। इस अवसर पर प्रतापराव जाधव सहित महाराष्ट्र के राज्यपाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे। यह आयोजन आयुष प्रणालियों के प्रचार-प्रसार और जनस्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

मेले का उद्देश्य

राष्ट्रीय आरोग्य मेला एक व्यापक जन-जागरूकता एवं जन-सेवा पहल है, जिसका उद्देश्य आयुष आधारित निवारक (Preventive) और प्रोत्साहक (Promotive) स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच का विस्तार करना है। मेले में आने वाले नागरिकों को निःशुल्क परामर्श, स्वास्थ्य जांच तथा मुफ्त दवाइयाँ प्रदान की जाएँगी। ये सेवाएँ आयुष की विभिन्न पद्धतियों— आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी— के अंतर्गत उपलब्ध होंगी। इसके अतिरिक्त कार्यक्रम में योग प्रदर्शन, विशेषज्ञ व्याख्यान, विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों की थेरेपी प्रदर्शनी तथा प्रतिष्ठित आयुष संस्थानों की प्रदर्शनियाँ भी आयोजित की जाएँगी।

किसानों और औषधीय कृषि पर विशेष फोकस

27 फरवरी 2026 को दोपहर 3:00 बजे “आयुर्वेदिक खेती: उत्पादन, मूल्य संवर्धन और विपणन” विषय पर एक विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। इस सत्र में औषधीय पौधों की खेती, एग्रोफॉरेस्ट्री पद्धतियाँ, फसल कटाई के बाद प्रबंधन (Post-harvest Management) तथा बाजार से जुड़ाव (Market Linkages) पर मार्गदर्शन दिया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य बुलढाणा और व्यापक विदर्भ क्षेत्र के किसानों को औषधीय फसलों की ओर प्रोत्साहित करना है, ताकि उनकी आय में वृद्धि हो और आयुष आपूर्ति शृंखला को मजबूती मिले।

प्रतापराव जाधव ने किसानों, स्वयं सहायता समूहों और युवाओं से सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया है, ताकि वे औषधीय पौधों पर आधारित कृषि में नए अवसरों का लाभ उठा सकें।

एक समेकित मंच

राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026 को सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं, ज्ञान-साझाकरण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन के एक समेकित मंच के रूप में विकसित किया गया है। यह आयोजन आयुष प्रणालियों के महत्व को रेखांकित करता है, जो जनस्वास्थ्य सुधार और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। महाराष्ट्र और पड़ोसी राज्यों के नागरिकों, किसानों, विद्यार्थियों और स्वास्थ्य पेशेवरों से बड़ी संख्या में भाग लेने का आग्रह किया गया है।

MCQs: नेशनल आरोग्य मेला 2026

Q1. नेशनल आरोग्य मेला 2026 किस शहर में होगा?

(a) नागपुर
(b) पुणे
(c) शेगांव
(d) नासिक
(e) औरंगाबाद

जवाब: (c)
जवाब: मेला महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के शेगांव में होगा।

Q2. नेशनल आरोग्य मेला 2026 किस मिनिस्ट्री द्वारा ऑर्गनाइज़ किया जा रहा है?

(a) मिनिस्ट्री ऑफ़ हेल्थ
(b) मिनिस्ट्री ऑफ़ रूरल डेवलपमेंट
(c) मिनिस्ट्री ऑफ़ आयुष
(d) मिनिस्ट्री ऑफ़ एग्रीकल्चर
(e) मिनिस्ट्री ऑफ़ MSME

जवाब: (c)
जवाब: मिनिस्ट्री ऑफ़ आयुष इवेंट ऑर्गनाइज़ कर रहा है।

Q3. मेले का उद्घाटन करेंगे:
(a) प्रधानमंत्री
(b) भारत के राष्ट्रपति
(c) महाराष्ट्र के राज्यपाल
(d) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री
(e) केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री

उत्तर: (b)
उत्तर: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस इवेंट का उद्घाटन करेंगी।

Q4. “आयुर्वेदिक खेती” पर स्पेशल सेशन इस तारीख को होगा:
(a) 25 फरवरी 2026
(b) 26 फरवरी 2026
(c) 27 फरवरी 2026
(d) 28 फरवरी 2026
(e) 1 मार्च 2026

उत्तर: (c)
उत्तर: सेशन 27 फरवरी 2026 को दोपहर 3:00 बजे तय है।

Q5. इनमें से कौन सा सिस्टम आयुष सिस्टम का हिस्सा नहीं है? (a) आयुर्वेद
(b) यूनानी
(c) सिद्ध
(d) एलोपैथी
(e) होम्योपैथी

Ans: (d)
Sol: एलोपैथी, आयुष सिस्टम का हिस्सा नहीं है।

स्लाइस स्मॉल फाइनेंस बैंक ने राजन बजाज को MD और CEO नियुक्त किया

स्लाइस स्मॉल फाइनेंस बैंक ने अपने संस्थापक राजन बजाज को नया प्रबंध निदेशक (MD) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। इस नियुक्ति को बैंक के निदेशक मंडल, शेयरधारकों तथा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से स्वीकृति प्राप्त हुई है, जो उनके नेतृत्व और डिजिटल-प्रथम (Digital-First) दृष्टिकोण पर भरोसे को दर्शाता है।

फिनटेक स्टार्टअप से स्मॉल फाइनेंस बैंक तक

राजन बजाज, जो भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर के पूर्व छात्र हैं, ने वर्ष 2016 में बेंगलुरु स्थित फिनटेक स्टार्टअप “स्लाइस” की स्थापना की थी। शुरुआत में कंपनी ने युवाओं और कम बैंकिंग सुविधा प्राप्त ग्राहकों को नवीन क्रेडिट एवं भुगतान समाधान प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित किया। वर्ष 2024 में स्लाइस का विलय नॉर्थ ईस्ट स्मॉल फाइनेंस बैंक के साथ हुआ, जिससे यह एक पूर्णतः विनियमित स्मॉल फाइनेंस बैंक में परिवर्तित हो गया। विलय के बाद कार्यकारी निदेशक के रूप में कार्य करने के पश्चात अब बाजाज ने सतीश कुमार कालरा का स्थान लिया है।

मजबूत निवेश समर्थन

स्लाइस एसएफबी ने टाइगर ग्लोबल, इनसाइट पार्टनर्स और एडवेंट इंटरनेशनल जैसे वैश्विक निवेशकों से 250 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की पूंजी जुटाई है। बैंक वर्तमान में दैनिक ब्याज क्रेडिट वाले बचत खाते, फिक्स्ड डिपॉजिट, UPI सेवाएँ, ऋण समाधान तथा भारत की पहली UPI-आधारित बैंक शाखा सहित कई डिजिटल उत्पाद प्रदान कर रहा है।

एआई और वित्तीय समावेशन पर फोकस

बाजाज के नेतृत्व में बैंक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग कर बड़े पैमाने पर व्यक्तिगत (Personalised) बैंकिंग सेवाएँ प्रदान करने की योजना बना रहा है। अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि भारत में बैंकिंग क्षेत्र में अपार संभावनाएँ हैं और तकनीक के माध्यम से कम लागत पर अधिक लोगों तक अनुकूलित वित्तीय सेवाएँ पहुँचाई जा सकती हैं।

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह नेतृत्व परिवर्तन Slice SFB को विनियामक अनुपालन और उन्नत फिनटेक नवाचार के संतुलन के साथ आगे बढ़ने में मदद करेगा, जिससे विशेष रूप से ग्रामीण और कम बैंकिंग सुविधा वाले क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को गति मिलेगी।

MCQs: स्लाइस स्मॉल फाइनेंस बैंक अपॉइंटमेंट

Q1. स्लाइस स्मॉल फाइनेंस बैंक के MD और CEO के तौर पर किसे अपॉइंट किया गया है?
(a) सतीश कुमार कालरा
(b) राजन बजाज
(c) यूजीन इमैनुएल कार्थक
(d) अरविंद कृष्णा
(e) उदय कोटक

Ans: (b)
Sol: स्लाइस के फाउंडर राजन बजाज को MD और CEO के तौर पर अपॉइंट किया गया है।

Q2. स्लाइस किस साल शुरू हुई थी?
(a) 2014
(b) 2015
(c) 2016
(d) 2017
(e) 2018

Ans: (c)
Sol: राजन बजाज ने 2016 में एक फिनटेक स्टार्टअप के तौर पर स्लाइस शुरू की थी।

Q3. स्लाइस 2024 में किस बैंक के साथ मर्ज होकर एक स्मॉल फाइनेंस बैंक बन गया? (a) जन स्मॉल फाइनेंस बैंक
(b) नॉर्थ ईस्ट स्मॉल फाइनेंस बैंक
(c) इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक
(d) उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक
(e) AU स्मॉल फाइनेंस बैंक

जवाब: (b)
जवाब: स्लाइस का 2024 में नॉर्थ ईस्ट स्मॉल फाइनेंस बैंक में मर्जर हो गया।

Q4. किस रेगुलेटरी बॉडी ने राजन बजाज के अपॉइंटमेंट को मंज़ूरी दी?

(a) SEBI
(b) IRDAI
(c) NABARD
(d) रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया
(e) मिनिस्ट्री ऑफ़ फाइनेंस

जवाब: (d)
जवाब: अपॉइंटमेंट को रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने मंज़ूरी दी थी।

Q5. स्लाइस स्मॉल फाइनेंस बैंक ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स से कितनी फ़ंडिंग जुटाई है? (a) $100 मिलियन
(b) $150 मिलियन
(c) $200 मिलियन
(d) $250 मिलियन
(e) $300 मिलियन

उत्तर: (d)
उत्तर: बैंक ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स से $250 मिलियन से ज़्यादा जुटाए हैं।

कैबिनेट ने 2026-27 सीज़न के लिए कच्चे जूट के MSP को मंज़ूरी दी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए कच्चे जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को मंजूरी दे दी है।

कच्चे जूट का MSP ₹5,925 प्रति क्विंटल निर्धारित

सरकार ने 2026-27 विपणन सत्र के लिए कच्चे जूट (TD-3 ग्रेड) का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹5,925 प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। यह MSP अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत पर 61.8% का लाभ सुनिश्चित करता है। यह निर्णय सरकार के उस सिद्धांत के अनुरूप है, जिसकी घोषणा बजट 2018-19 में की गई थी, जिसके तहत MSP को उत्पादन लागत का कम से कम 1.5 गुना निर्धारित किया जाता है।

पिछले सत्र की तुलना में वृद्धि

2025-26 सत्र की तुलना में MSP में ₹275 प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। वर्ष 2014-15 में कच्चे जूट का MSP ₹2,400 प्रति क्विंटल था, जो अब बढ़कर ₹5,925 प्रति क्विंटल हो गया है। इस प्रकार 2014-15 से अब तक MSP में ₹3,525 प्रति क्विंटल (लगभग 2.5 गुना) की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

किसानों को लाभ

सरकार के अनुसार वर्ष 2014-15 से 2025-26 के दौरान जूट किसानों को MSP के रूप में कुल ₹1,342 करोड़ का भुगतान किया गया। इसके विपरीत वर्ष 2004-05 से 2013-14 की अवधि में केवल ₹441 करोड़ का भुगतान किया गया था। यह आंकड़ा किसानों को दी जा रही वित्तीय सहायता में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है।

जूट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की भूमिका

भारतीय जूट निगम (JCI) केंद्र सरकार की नोडल एजेंसी के रूप में मूल्य समर्थन संचालन (Price Support Operations) जारी रखेगी। खरीद प्रक्रिया के दौरान होने वाले किसी भी नुकसान की भरपाई केंद्र सरकार द्वारा पूरी तरह की जाएगी।

निर्णय का महत्व

MSP में की गई वृद्धि का उद्देश्य जूट किसानों को उचित पारिश्रमिक सुनिश्चित करना, जूट की खेती को प्रोत्साहित करना, ग्रामीण आय को सुदृढ़ करना तथा जूट उद्योग की आपूर्ति शृंखला को समर्थन देना है। यह निर्णय विशेष रूप से प्रमुख जूट उत्पादक राज्यों— पश्चिम बंगाल, असम और बिहार— के किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध होने की उम्मीद है।

MCQs: कच्चे जूट के लिए MSP 2026-27

Q1. 2026-27 सीज़न के लिए कच्चे जूट (TD-3 ग्रेड) के लिए MSP तय की गई है:
(a) ₹5,500 प्रति क्विंटल
(b) ₹5,650 प्रति क्विंटल
(c) ₹5,925 प्रति क्विंटल
(d) ₹6,000 प्रति क्विंटल
(e) ₹6,200 प्रति क्विंटल

जवाब: (c)
हल: MSP ₹5,925 प्रति क्विंटल तय की गई है।

Q2. MSP प्रोडक्शन की वेटेड एवरेज कॉस्ट पर कितना परसेंट रिटर्न पक्का करता है? (a) 50%
(b) 55%
(c) 58%
(d) 61.8%
(e) 65%

जवाब: (d)
हल: MSP प्रोडक्शन कॉस्ट पर 61.8% का रिटर्न पक्का करता है।

Q3. 2025-26 सीज़न की तुलना में कच्चे जूट का MSP कितना बढ़ा है?
(a) ₹200
(b) ₹250
(c) ₹275
(d) ₹300
(e) ₹350

जवाब: (c)
हल: MSP में ₹275 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई।

Q4. जूट प्राइस सपोर्ट ऑपरेशन के लिए कौन सा संगठन नोडल एजेंसी के तौर पर काम करता है? (a) FCI
(b) NABARD
(c) कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया
(d) जूट कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया
(e) APEDA

जवाब: (d)
जवाब: जूट कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (JCI) प्राइस सपोर्ट ऑपरेशन करता है।

सवाल 5. MSP को प्रोडक्शन की लागत का कम से कम 1.5 गुना तय करने का नियम किस बजट में बताया गया था?

(a) 2016-17
(b) 2017-18
(c) 2018-19
(d) 2019-20
(e) 2020-21

जवाब: (c)
जवाब: इस नियम की घोषणा बजट 2018-19 में की गई थी।

DBT के 40 साल पूरे; डॉ. जितेंद्र सिंह ने ‘SUJVIKA’ AI-ड्रिवन बायोटेक डेटा पोर्टल लॉन्च किया

जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) के 40वें स्थापना दिवस पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने “SUJVIKA” नामक एआई-आधारित बायोटेक उत्पाद डेटा पोर्टल का शुभारंभ किया। यह पोर्टल उद्योग भागीदार जैव प्रौद्योगिकी संचालित उद्यमों का संघ (ABLE) के सहयोग से विकसित किया गया है। कार्यक्रम का आयोजन नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित सिविल सेवा अधिकारी संस्थान (CSOI) में हुआ।

SUJVIKA क्या है?

SUJVIKA एक ट्रेड स्टैटिस्टिक्स डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म है, जो बायोटेक उत्पादों के आयात से संबंधित संरचित और प्रमाणित डेटा उपलब्ध कराता है। यह पोर्टल बायोकेमिकल उत्पादों पर सेक्टर-वार जानकारी, औद्योगिक एंजाइम और अन्य बायोटेक आयात का डेटा, उच्च-मूल्य और उच्च-आयतन आयात का विश्लेषण, आयात निर्भरता का आकलन तथा स्वदेशीकरण और अनुसंधान एवं विकास (R&D) योजना को समर्थन प्रदान करता है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक–निजी भागीदारी के माध्यम से घरेलू बायोमैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना और साक्ष्य-आधारित नीतिनिर्माण को सुदृढ़ करना है।

भारत की बढ़ती बायोइकोनॉमी

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जैव-प्रौद्योगिकी अगली औद्योगिक क्रांति को गति देगी और “विकसित भारत 2047” के तहत 1 ट्रिलियन डॉलर की बायोइकोनॉमी का लक्ष्य रखा गया है। वर्ष 2014 में 100 से कम बायोटेक स्टार्टअप थे, जो आज बढ़कर 11,000 से अधिक हो चुके हैं। इसी अवधि में भारत की बायोइकोनॉमी लगभग 10 अरब डॉलर से बढ़कर 2024 में 165.7 अरब डॉलर तक पहुँच गई है। भारत आज वैश्विक स्तर पर अग्रणी बायोटेक गंतव्यों और वैक्सीन निर्माताओं में शामिल है।

नीतिगत एवं संस्थागत समर्थन

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत BioE3 नीति (Biotechnology for Economy, Environment and Employment) के कार्यान्वयन में जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) और जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान और नवाचार परिषद (BRIC) अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। इसके अतिरिक्त नेशनल बायोफाउंड्री नेटवर्क (6 बायोफाउंड्री और 21 बायो-एनएबलर सुविधाएँ), 21 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 95 बायो-इनक्यूबेटर तथा ₹1 लाख करोड़ के RDI पहल के अंतर्गत ₹2,000 करोड़ का राष्ट्रीय आह्वान जैसी पहलें भी इस क्षेत्र को मजबूती दे रही हैं।

वैज्ञानिक उपलब्धियाँ

जीनोमइंडिया परियोजना के अंतर्गत 99 आबादियों के 10,000 व्यक्तियों के जीनोम अनुक्रमण का डेटा भारतीय जैविक डेटा केंद्र के माध्यम से उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा, सीवियर हीमोफीलिया A के लिए भारत का पहला मानव जीन थेरेपी परीक्षण सफल रहा, जिसमें फैक्टर VIII का स्थायी उत्पादन दर्ज किया गया।

अंतरिक्ष जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और DBT के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत अंतरिक्ष मिशनों में बायोटेक प्रयोगों को भी बढ़ावा दिया गया है।

डिजिटल रूपांतरण और महत्व

मंत्री ने DBT की नई वेबसाइट का भी शुभारंभ किया, जिसे डिजिटल ब्रांड आइडेंटिटी मैनुअल (DBIM) के अनुरूप तैयार किया गया है, जिससे मानकीकृत डिजिटल शासन को बढ़ावा मिलेगा।

DBT का 40वाँ स्थापना दिवस वर्ष 1986 से अब तक की यात्रा को दर्शाता है— जहाँ विभाग ने क्षमता निर्माण से शुरुआत कर आज नवाचार, उद्यमिता और बायोइकोनॉमिक विकास के प्रमुख प्रेरक के रूप में अपनी पहचान स्थापित की है। “SUJVIKA” का शुभारंभ भारत के बायोटेक इकोसिस्टम को एआई-सक्षम डेटा इंटेलिजेंस और रणनीतिक योजना के माध्यम से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

भारत-अमेरिका संयुक्त विशेष बल अभ्यास ‘वज्र प्रहार’ हिमाचल प्रदेश में शुरू

भारत–अमेरिका संयुक्त विशेष बल अभ्यास ‘वज्र प्रहार’ का 16वाँ संस्करण 24 फरवरी से 16 मार्च 2026 तक हिमाचल प्रदेश के बकलोह स्थित स्पेशल फोर्सेस ट्रेनिंग स्कूल में आयोजित किया जाएगा। इस अभ्यास में भारतीय सेना और संयुक्त राज्य अमेरिका की सेना के विशेष बल भाग लेंगे, जिससे दोनों देशों के रक्षा संबंध और मजबूत होंगे।

भाग लेने वाली टुकड़ियाँ

भारतीय सेना की ओर से 45 कर्मियों की विशेष बल टुकड़ी भाग ले रही है, जबकि अमेरिका की ओर से 12 सैनिकों की टुकड़ी, जिन्हें ग्रीन बेरेट्स (Green Berets) के नाम से जाना जाता है, शामिल होगी। इससे पहले इस अभ्यास का पिछला संस्करण नवंबर 2024 में अमेरिका के ऑर्चर्ड कॉम्बैट ट्रेनिंग सेंटर, इडाहो में आयोजित किया गया था।

अभ्यास का उद्देश्य

अभ्यास ‘वज्र प्रहार’ का मुख्य उद्देश्य सैन्य सहयोग को बढ़ावा देना, विशेष बलों के बीच पारस्परिक संचालन क्षमता (Interoperability) में सुधार करना, संयुक्त परिचालन क्षमताओं को सुदृढ़ करना तथा विशेष अभियानों की रणनीतियों में विशेषज्ञता का आदान-प्रदान करना है। यह अभ्यास विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में संयुक्त विशेष बल अभियानों के संचालन पर केंद्रित है।

प्रमुख प्रशिक्षण घटक

प्रशिक्षण कार्यक्रम में उच्च स्तर की शारीरिक तैयारी, संयुक्त मिशन योजना, सामरिक ड्रिल का निष्पादन, सर्वोत्तम प्रथाओं और परिचालन अनुभवों का साझा करना तथा विशेष अभियानों की रणनीति, तकनीक और प्रक्रियाएँ (TTPs) शामिल हैं। इसका उद्देश्य चुनौतीपूर्ण वातावरण में जटिल अभियानों के लिए समन्वय और तत्परता को बढ़ाना है।

सामरिक महत्व

अभ्यास ‘वज्र प्रहार’ भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती रक्षा साझेदारी को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह दोनों देशों के विशेष बलों के बीच आपसी विश्वास, पेशेवर सौहार्द और परिचालन समन्वय को और मजबूत करता है।

भारत और इज़राइल ने नई दिल्ली में FTA बातचीत का पहला दौर शुरू किया

भारत और इज़राइल ने प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement–FTA) के लिए औपचारिक रूप से पहली दौर की वार्ताएँ शुरू कर दी हैं। ये चर्चाएँ 23 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में आरंभ हुईं और 26 फरवरी 2026 तक चलेंगी। इससे पहले नवंबर 2025 में वार्ता के लिए संदर्भ की शर्तें (Terms of Reference–ToR) पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसके तहत द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक संरचित रूपरेखा तय की गई। यह पहल दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने और निवेश, प्रौद्योगिकी तथा नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग को विस्तार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

भारत–इज़राइल व्यापार संबंध

भारत और इज़राइल के बीच वित्त वर्ष 2024-25 में कुल माल व्यापार (Merchandise Trade) लगभग 3.62 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। दोनों देशों के बीच नवाचार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा, उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण, कृषि और सेवा क्षेत्र जैसे कई क्षेत्रों में मजबूत पूरकता (Complementarity) मौजूद है। प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से विशेष रूप से एमएसएमई सहित व्यवसायों को नीति स्थिरता और पूर्वानुमेयता (Certainty and Predictability) मिलने की उम्मीद है, जिससे द्विपक्षीय व्यापार प्रवाह को और गति मिलेगी।

वार्ता के प्रमुख क्षेत्र

दोनों देशों के तकनीकी विशेषज्ञ निम्नलिखित विषयों पर विस्तृत चर्चा कर रहे हैं— वस्तुओं का व्यापार (Trade in Goods), सेवाओं का व्यापार (Trade in Services), मूल के नियम (Rules of Origin), स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता (Sanitary and Phytosanitary–SPS) उपाय, व्यापार में तकनीकी बाधाएँ (Technical Barriers to Trade–TBT), सीमा शुल्क प्रक्रियाएँ एवं व्यापार सुगमता (Customs Procedures and Trade Facilitation) तथा बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights–IPR)। ये सभी विषय व्यापक और संतुलित FTA के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार करते हैं।

प्रमुख अधिकारी

  • वार्ता के उद्घाटन सत्र के दौरान भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि ये बातचीत ऐसे उपयुक्त समय पर हो रही है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25–26 फरवरी 2026 को इज़राइल की यात्रा पर हैं।
  • भारत के मुख्य वार्ताकार अजय भादू, जो वाणिज्य विभाग में अतिरिक्त सचिव हैं, ने संतुलित और दूरदर्शी समझौते के निर्माण के महत्व पर बल दिया।
  • इज़राइल की मुख्य वार्ताकार यिफ़ात अलोन पेरेल, जो ट्रेड पॉलिसी एवं एग्रीमेंट्स की वरिष्ठ निदेशक हैं, ने कहा कि प्रस्तावित FTA दोनों देशों की आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करने और नए बाजारों के द्वार खोलने में सहायक हो सकता है।

सामरिक महत्व

ये वार्ताएँ भारत और इज़राइल के बीच बढ़ती सामरिक साझेदारी को दर्शाती हैं। प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) से आर्थिक सहयोग को गहराई मिलने, आपूर्ति शृंखला की मजबूती बढ़ने तथा दोनों देशों के व्यवसायों के लिए नए अवसर सृजित होने की अपेक्षा है। दोनों पक्ष राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और वैश्विक आर्थिक आकांक्षाओं के अनुरूप एक संतुलित एवं परस्पर लाभकारी समझौता करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।

MCQs: इंडिया-इज़राइल FTA बातचीत

Q1. इंडिया-इज़राइल FTA बातचीत का पहला राउंड कब शुरू हुआ:
(a) 20 फरवरी 2026
(b) 21 फरवरी 2026
(c) 23 फरवरी 2026
(d) 25 फरवरी 2026
(e) 26 फरवरी 2026

जवाब: (c)
जवाब: बातचीत 23 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में शुरू हुई।

Q2. FY 2024-25 में इंडिया और इज़राइल के बीच कुल सामान का व्यापार इस तरह था:
(a) USD 2.5 बिलियन
(b) USD 3.0 बिलियन
(c) USD 3.62 बिलियन
(d) USD 4.2 बिलियन
(e) USD 5.1 बिलियन

जवाब: (c)
जवाब: दोनों देशों के बीच व्यापार USD 3.62 बिलियन था।

Q3. FTA के लिए टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस (ToR) पर साइन किए गए थे:
(a) अक्टूबर 2025
(b) नवंबर 2025
(c) दिसंबर 2025
(d) जनवरी 2026
(e) फरवरी 2026

जवाब: (b)
जवाब: ToR पर नवंबर 2025 में साइन किए गए थे।

Q4. FTA के लिए भारत के चीफ नेगोशिएटर कौन हैं?
(a) राजेश अग्रवाल
(b) अजय भादू
(c) पीयूष गोयल
(d) सौरभ कुमार
(e) अमिताभ कांत

जवाब: (b)
जवाब: अजय भादू, डिपार्टमेंट ऑफ़ कॉमर्स के एडिशनल सेक्रेटरी, भारत के चीफ नेगोशिएटर हैं।

Q5. इनमें से कौन सा टॉपिक FTA नेगोशिएट्स के तहत कवर नहीं किया गया है? (a) सामान का व्यापार
(b) इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स
(c) कस्टम्स प्रोसीजर
(d) मॉनेटरी पॉलिसी रेगुलेशन
(e) सर्विसेज़ का व्यापार

जवाब: (d)
Sol: मॉनेटरी पॉलिसी रेगुलेशन FTA बातचीत का हिस्सा नहीं है।

भारत-जापान संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘धर्म गार्जियन’ उत्तराखंड में शुरू हुआ

भारत–जापान संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘धर्म गार्डियन’ का 7वां संस्करण चौबटिया, उत्तराखंड स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड में शुरू हो गया है। यह अभ्यास 24 फरवरी से 9 मार्च 2026 तक आयोजित किया जाएगा। यह वार्षिक सैन्य अभ्यास भारतीय सेना और जापान ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स (JGSDF) के बीच आयोजित होता है, जो दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।

भागीदारी और टुकड़ियाँ

इस संस्करण में दोनों देशों ने 120-120 सैनिकों की टुकड़ी तैनात की है। जापान ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स (JGSDF) की ओर से 32वीं इन्फैंट्री रेजिमेंट के सैनिक भाग ले रहे हैं, जबकि भारतीय सेना की टुकड़ी लद्दाख स्काउट्स से ली गई है। यह अभ्यास भारत और जापान में बारी-बारी से आयोजित किया जाता है, जो दोनों देशों के बीच गहराती सामरिक साझेदारी को दर्शाता है।

अभ्यास का उद्देश्य

अभ्यास ‘धर्म गार्डियन’ का मुख्य उद्देश्य सैन्य सहयोग को सुदृढ़ करना, पारस्परिक संचालन क्षमता (Interoperability) बढ़ाना और संयुक्त अभियानों की दक्षता में सुधार करना है। इसके तहत अर्ध-शहरी क्षेत्रों में संयुक्त अभियान चलाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह अभ्यास आधुनिक सैन्य तकनीकों के उपयोग, संयुक्त योजना निर्माण तथा समन्वित सामरिक संचालन पर विशेष रूप से केंद्रित है।

प्रमुख सामरिक गतिविधियाँ

दो सप्ताह तक चलने वाले इस अभ्यास के दौरान सैनिक कई महत्वपूर्ण सामरिक गतिविधियाँ संचालित करेंगे। इनमें अस्थायी ऑपरेटिंग बेस (Temporary Operating Base) की स्थापना, इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (ISR) ग्रिड का विकास, मोबाइल वाहन चेक पोस्ट की स्थापना, शत्रुतापूर्ण वातावरण में घेराबंदी और तलाशी अभियान (Cordon and Search Operations), हेलिबोर्न ऑपरेशन तथा हाउस इंटरवेंशन ड्रिल शामिल हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य यथार्थपरक परिस्थितियों में संयुक्त युद्धक क्षमता को मजबूत करना और उच्च स्तर की शारीरिक दक्षता हासिल करना है।

सामरिक महत्व

‘धर्म गार्डियन’ भारत–जापान रक्षा संबंधों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना हुआ है। यह अभ्यास दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास, परिचालन समन्वय (Operational Synergy) और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की तैयारी को सुदृढ़ करता है। नियमित रूप से आयोजित यह संयुक्त सैन्य अभ्यास द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को और गहराई प्रदान करता है।

MCQs: एक्सरसाइज धर्म गार्डियन 2026

Q1. एक्सरसाइज ‘धर्म गार्डियन’ का 7वां एडिशन भारत और इनके बीच हो रहा है:
(a) यूनाइटेड स्टेट्स
(b) ऑस्ट्रेलिया
(c) जापान
(d) साउथ कोरिया
(e) फ्रांस

जवाब: (c)
Sol: यह एक्सरसाइज भारत और जापान के बीच हो रही है।

Q2. एक्सरसाइज ‘धर्म गार्डियन’ 2026 यहां हो रही है:
(a) देहरादून
(b) लेह
(c) चौबटिया
(d) रानीखेत
(e) श्रीनगर

जवाब: (c)
Sol: यह एक्सरसाइज फॉरेन ट्रेनिंग नोड, चौबटिया, उत्तराखंड में हो रही है।

Q3. एक्सरसाइज में इंडियन आर्मी की टुकड़ी शामिल है:
(a) राजपूत रेजिमेंट
(b) सिख रेजिमेंट
(c) गोरखा राइफल्स
(d) लद्दाख स्काउट्स
(e) जाट रेजिमेंट

जवाब: (d)
जवाब: इंडियन टुकड़ी लद्दाख स्काउट्स से शामिल है।

Q4. एक्सरसाइज इस समय के लिए तय है:
(a) 20 फरवरी से 5 मार्च 2026
(b) 24 फरवरी से 9 मार्च 2026
(c) 25 फरवरी से 10 मार्च 2026
(d) 1 मार्च से 15 मार्च 2026
(e) 5 मार्च से 20 मार्च 2026

जवाब: (b)
जवाब: एक्सरसाइज 24 फरवरी से 9 मार्च 2026 तक चलेगी।

Q5. एक्सरसाइज में इनमें से कौन सी मुख्य टैक्टिकल एक्टिविटी है? (a) नेवल सबमरीन ऑपरेशन
(b) स्पेस सर्विलांस ड्रिल
(c) कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन
(d) साइबर हैकिंग सिमुलेशन
(e) मिसाइल टेस्ट फायरिंग

जवाब: (c)
हल: कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन की जाने वाली टैक्टिकल ड्रिल में से एक है।

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