पीवी सिंधु बीडब्ल्यूएफ एथलीट्स कमीशन की चेयरपर्सन चुनी गईं

भारत की बैडमिंटन आइकन पुसर्ला वेंकट सिंधु (पीवी सिंधु) ने कोर्ट के बाहर भी एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। दो बार की ओलंपिक पदक विजेता और पूर्व विश्व चैंपियन पीवी सिंधु को बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (BWF) एथलीट्स कमीशन की चेयरपर्सन के रूप में 2026–2029 कार्यकाल के लिए चुना गया है। यह नियुक्ति वैश्विक खेल प्रशासन में उनके नेतृत्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

भूमिका और जिम्मेदारियाँ

एथलीट्स कमीशन की अध्यक्ष बनने के साथ ही पीवी सिंधु BWF काउंसिल की भी सदस्य होंगी। इससे बैडमिंटन खिलाड़ियों की आवाज़ सीधे खेल की वैश्विक सर्वोच्च निर्णय प्रक्रिया में शामिल होगी। इस भूमिका में वे—

  • दुनिया भर के बैडमिंटन खिलाड़ियों के हितों और चिंताओं का प्रतिनिधित्व करेंगी
  • नीतिगत निर्माण और शासन संबंधी निर्णयों में योगदान देंगी
  • खेल की निष्पक्षता, ईमानदारी और खिलाड़ियों के कल्याण की पैरवी करेंगी

सिंधु की प्रतिक्रिया

नियुक्ति पर आभार व्यक्त करते हुए सिंधु ने इसे अपने लिए सम्मान की बात बताया। उन्होंने पिछली अध्यक्ष ग्रेसिया पोली के योगदान की भी सराहना की। सिंधु ने कहा कि वे BWF के साथ मिलकर ऐसे सार्थक और दीर्घकालिक बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिनसे हर स्तर के खिलाड़ियों को वास्तविक लाभ मिले।

पृष्ठभूमि: एथलीट्स कमीशन से जुड़ाव

पीवी सिंधु 2017 से BWF एथलीट्स कमीशन से जुड़ी हुई हैं और 2020 से BWF इंटीग्रिटी एम्बेसडर के रूप में भी कार्य कर रही हैं। खिलाड़ियों के प्रतिनिधित्व और खेल की ईमानदारी से जुड़े मामलों में उनके लंबे अनुभव ने उन्हें इस पद के लिए एक स्वाभाविक विकल्प बनाया।

अन्य प्रमुख नियुक्तियाँ

  • नीदरलैंड्स की डेबोरा जिल को उपाध्यक्ष (डिप्टी चेयर) नियुक्त किया गया
  • अन्य सदस्यों में ओलंपिक चैंपियन आन से-यंग, मिस्र की दोहा हनी और चीन की जिया यीफान शामिल हैं
  • पैरा-बैडमिंटन में हांगकांग (चीन) के चान हो यूएन डेनियल पूर्णकालिक अध्यक्ष बने
  • भारतीय पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी अबू हुबैदा भी कमीशन का हिस्सा हैं

पीवी सिंधु की खेल विरासत

पीवी सिंधु भारत की अब तक की सबसे सफल बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। उनकी प्रमुख उपलब्धियाँ—

  • रियो ओलंपिक 2016 में रजत पदक
  • टोक्यो ओलंपिक 2020 में कांस्य पदक
  • विश्व चैंपियनशिप में कई पदक, जिनमें स्वर्ण भी शामिल
  • वे 2026 बैडमिंटन एशिया टीम चैंपियनशिप (क़िंगदाओ, चीन) में भारत का नेतृत्व भी करेंगी

मुख्य बिंदु

  • पीवी सिंधु BWF एथलीट्स कमीशन की चेयरपर्सन (2026–2029) चुनी गईं
  • वे BWF काउंसिल की भी सदस्य होंगी
  • 2017 से कमीशन से जुड़ी हैं
  • पिछली अध्यक्ष: ग्रेसिया पोली
  • यह नियुक्ति वैश्विक खेल प्रशासन में भारत की भूमिका को मजबूत करती है

सैंड आर्टिस्ट सुदर्शन पटनायक ने विशाल सांता क्लॉज़ बनाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया

प्रसिद्ध रेत कलाकार और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित सुदर्शन पटनायक ने ओडिशा के पुरी स्थित नीलाद्रि बीच पर सांता क्लॉज की एक विश्व रिकॉर्ड बनाने वाली रेत और सेब से बनी विशाल मूर्ति का निर्माण किया है। यह कलाकृति क्रिसमस की भावना को दर्शाने के साथ-साथ शांति और सद्भाव का संदेश भी देती है।

विश्व का सबसे बड़ा सांता क्लॉज

  • इस कृति का शीर्षक “विश्व की सबसे बड़ी सेब और रेत से बनी सांता क्लॉज इंस्टॉलेशन” रखा गया है।
  • इसका अनावरण 26 दिसंबर 2025 को किया गया।
  • इसे वर्ल्ड रिकॉर्ड्स बुक ऑफ इंडिया द्वारा आधिकारिक रूप से मान्यता दी गई है।
  • सुदर्शन पटनायक ने इस अनोखी और उत्सवपूर्ण कृति का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया।

मूर्ति की प्रमुख विशेषताएँ

  • 1.5 टन सेब और रेत का उपयोग
  • आकार: 60 फीट लंबी, 45 फीट चौड़ी और 22 फीट ऊँची
  • रेत कला और फलों का अनूठा संयोजन
  • विश्व भर में शांति और सद्भाव का संदेश देने के उद्देश्य से तैयार

इस कलाकृति का महत्व

  • पुरी में सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा
  • रचनात्मक सार्वजनिक कला के माध्यम से क्रिसमस की भावना का प्रसार
  • एकता और सद्भावना का वैश्विक संदेश
  • भारत की नवोन्मेषी और पर्यावरण–अनुकूल कला प्रतिभा का प्रदर्शन

सुदर्शन पटनायक के बारे में

  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध रेत कलाकार
  • सामाजिक मुद्दों और वैश्विक घटनाओं पर आधारित कलाकृतियों के लिए जाने जाते हैं
  • जलवायु परिवर्तन, मानवीय विषयों और पर्यावरणीय मुद्दों पर कई रिकॉर्ड तोड़ रचनाएँ बना चुके हैं

पृष्ठभूमि

  • पुरी का नीलाद्रि बीच रेत कला प्रदर्शनियों और पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है
  • भारत में क्रिसमस का पर्व व्यापक रूप से मनाया जाता है, जहाँ चर्च, बाज़ार, सजावट और कैरोल्स से उत्सवपूर्ण माहौल बनता है

मुख्य बिंदु

  • सुदर्शन पटनायक ने विश्व की सबसे बड़ी सेब और रेत से बनी सांता क्लॉज मूर्ति बनाई
  • स्थान: नीलाद्रि बीच, पुरी (ओडिशा)
  • 1.5 टन सेब का उपयोग
  • आकार: 60 × 45 × 22 फीट
  • वर्ल्ड रिकॉर्ड्स बुक ऑफ इंडिया से मान्यता
  • क्रिसमस पर शांति और सद्भाव का वैश्विक संदेश

आपराधिक जांच ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए NATGRID को NPR से जोड़ा जाएगा

भारत सरकार ने हाल ही में राष्ट्रीय खुफिया ग्रिड (NATGRID) को राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) से जोड़ा है, ताकि खुफिया जानकारी एकत्र करने की क्षमता को मजबूत किया जा सके और आपराधिक जांच की प्रक्रिया को तेज किया जा सके। इस एकीकरण से कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों को सत्यापित जनसांख्यिकीय तथा परिवार-आधारित आंकड़ों तक पहुंच मिलेगी, जिससे संदिग्धों, उनके नेटवर्क और उनकी गतिविधियों/आवागमन के पैटर्न की पहचान करना आसान होगा।

राष्ट्रीय खुफिया ग्रिड (NATGRID)

उद्देश्य

  • 26/11 मुंबई आतंकी हमलों (2008) के बाद खुफिया समन्वय में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए विकसित एक रियल-टाइम खुफिया और डेटा एक्सेस प्लेटफॉर्म।
  • कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों को महत्वपूर्ण सूचनाओं तक त्वरित पहुंच उपलब्ध कराना।

प्रशासन

  • गृह मंत्रालय (MHA) के अंतर्गत कार्य करता है।
  • अधिकृत एजेंसियों के बीच सुरक्षित सूचना-साझाकरण की रीढ़ (secure backbone) के रूप में कार्य करता है।

एकीकृत डेटा स्रोत

  • 20 से अधिक श्रेणियों के नागरिक और वाणिज्यिक डेटाबेस को समेकित करता है।
  • इसमें बैंकिंग एवं वित्तीय लेन-देन, दूरसंचार रिकॉर्ड, पासपोर्ट एवं आव्रजन डेटा, कर पहचानकर्ता, वाहन पंजीकरण, पुलिस FIR (CCTNS) और अन्य ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
  • मांग पर, भूमिका-आधारित (role-based) पहुंच प्रदान की जाती है; डेटा स्थायी रूप से संग्रहीत नहीं किया जाता।

पहुंच रखने वाली एजेंसियां

  • प्रारंभ में: इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA)।
  • बाद में: प्रवर्तन निदेशालय (ED), वित्तीय खुफिया इकाई (FIU), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI)।
  • नवीन सुधार: राज्य स्तर पर पुलिस अधीक्षक (SP) रैंक के अधिकारियों को भी पहुंच प्रदान की गई।

गांडीव (Gandiva) विश्लेषणात्मक बैकबोन

  • बहु-स्रोत डेटा फ्यूजन और एंटिटी रेज़ोल्यूशन के लिए उन्नत एनालिटिक्स और इंटेलिजेंस टूल।
  • टेलीकॉम KYC, ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण और अन्य फोटो-आधारित पहचान प्रणालियों का उपयोग कर चेहरे की पहचान करता है।
  • असंबंधित दिखने वाले डेटा बिंदुओं को जोड़कर संदिग्धों की पहचान और ट्रैकिंग को तेज करता है।

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR)

उद्देश्य

  • भारत के सामान्य निवासियों का एक व्यापक डेटाबेस, जिसे परिवार-आधारित आधार पर संधारित किया जाता है।
  • राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के निर्माण की दिशा में पहला कदम।

इतिहास

  • पहली बार 2010 में संकलित किया गया।
  • 2015 में घर-घर जाकर गणना के माध्यम से अद्यतन किया गया, जिसमें लगभग 119 करोड़ निवासियों को कवर किया गया।

कानूनी आधार

  • भारत के नागरिकता अधिनियम के अंतर्गत।

मुख्य बिंदु

  • NATGRID का गठन 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के बाद किया गया।
  • यह गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
  • 20 से अधिक नागरिक और वाणिज्यिक डेटाबेस को एकीकृत करता है।
  • गांडीव एक उन्नत एनालिटिक्स टूल है, जो चेहरे की पहचान और एंटिटी रेज़ोल्यूशन सक्षम करता है।
  • NPR निवासियों का परिवार-आधारित डेटाबेस है, जिसे पहली बार 2010 में तैयार किया गया।
  • NATGRID को NPR से जोड़ने से नेटवर्क विश्लेषण और आतंकवाद-रोधी जांच की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

BIS ने अगरबत्तियों के लिए पहला भारतीय मानक जारी किया

उपभोक्ता सुरक्षा और उत्पाद गुणवत्ता को मजबूत करने के उद्देश्य से भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने अगरबत्तियों (अगारबत्ती) के लिए भारत का पहला मानक अधिसूचित किया है। यह नया मानक IS 19412:2025 है, जिसे राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 2025 के अवसर पर घोषित किया गया। इस मानक में कच्चे माल, जलने की क्षमता, सुगंध की गुणवत्ता और रासायनिक सुरक्षा से जुड़े व्यापक नियम तय किए गए हैं, साथ ही कई हानिकारक रसायनों पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाया गया है। यह निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत दुनिया का सबसे बड़ा अगरबत्ती उत्पादक और निर्यातक देश है और यह सुरक्षित घरेलू उत्पादों तथा नैतिक विनिर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम है।

IS 19412:2025 क्या है?

  • IS 19412:2025 अगरबत्तियों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया पहला भारतीय मानक है।
  • यह बाजार में बिकने वाली अगरबत्तियों को मानव स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित, पर्यावरण के अनुकूल और गुणवत्ता में एकरूप बनाने हेतु एक संरचित नियामक ढांचा प्रदान करता है।

यह मानक चार मुख्य क्षेत्रों पर केंद्रित है—

  • कच्चे माल की गुणवत्ता
  • जलने की विशेषताएँ और राख का व्यवहार
  • सुगंध का प्रदर्शन और स्थिरता
  • रासायनिक सुरक्षा और विषाक्तता नियंत्रण

इस पहल के माध्यम से धार्मिक, सांस्कृतिक और सुगंधित उपयोग के लिए व्यापक रूप से प्रयुक्त अगरबत्तियाँ पहली बार औपचारिक गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में आई हैं।

हानिकारक रसायनों पर प्रतिबंध

नए मानक का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उन खतरनाक रसायनों पर प्रतिबंध है जो मानव स्वास्थ्य, घर के भीतर वायु गुणवत्ता और पर्यावरण को नुकसान पहुँचा सकते हैं।

प्रतिबंधित कीटनाशक रसायन

मानक के तहत निम्नलिखित कीटनाशक रसायनों के उपयोग पर रोक लगाई गई है—

  • एलेथ्रिन (Alethrin)
  • पर्मेथ्रिन (Permethrin)
  • सायपरमेथ्रिन (Cypermethrin)
  • डेल्टामेथ्रिन (Deltamethrin)
  • फिप्रोनिल (Fipronil)

ये रसायन तंत्रिका तंत्र को नुकसान और श्वसन संबंधी जोखिमों से जुड़े माने जाते हैं तथा कई देशों में प्रतिबंधित या नियंत्रित हैं।

प्रतिबंधित कृत्रिम सुगंध रसायन

कुछ कृत्रिम सुगंध मध्यवर्ती रसायनों पर भी रोक लगाई गई है, जैसे—

  • बेंज़िल सायनाइड (Benzyl cyanide)
  • एथाइल एक्रिलेट (Ethyl acrylate)
  • डाइफिनाइलएमीन (Diphenylamine)

इन रसायनों के दहन से बंद स्थानों में विषाक्त, एलर्जिक और पर्यावरणीय प्रभाव पड़ सकते हैं।

राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 2025 पर घोषणा

  • IS 19412:2025 की घोषणा केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 2025 के अवसर पर की।
  • यह कदम उपभोक्ता सशक्तिकरण के व्यापक उद्देश्य के अनुरूप है, जिससे रोज़मर्रा के घरेलू उत्पाद वैज्ञानिक रूप से तय सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरें।

यह मानक क्यों महत्वपूर्ण है?

अगरबत्तियाँ देशभर में करोड़ों घरों, मंदिरों और कार्यस्थलों पर प्रतिदिन जलाई जाती हैं। अब तक इस क्षेत्र में समान राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का अभाव था, जबकि लंबे समय तक धुएँ और रसायनों के संपर्क से स्वास्थ्य जोखिम हो सकते हैं।

नया BIS मानक—

  • उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य, विशेषकर श्वसन स्वास्थ्य की रक्षा करेगा
  • घर के भीतर वायु गुणवत्ता में सुधार करेगा
  • पर्यावरण अनुकूल और नैतिक विनिर्माण को बढ़ावा देगा
  • पर्यावरण प्रदूषण को कम करेगा
  • भारतीय अगरबत्ती उत्पादों पर उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ाएगा

मुख्य बिंदु

  • BIS ने अगरबत्तियों के लिए भारत का पहला मानक IS 19412:2025 अधिसूचित किया
  • घोषणा राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 2025 पर की गई
  • एलेथ्रिन, पर्मेथ्रिन, सायपरमेथ्रिन, डेल्टामेथ्रिन और फिप्रोनिल जैसे हानिकारक कीटनाशकों पर प्रतिबंध
  • बेंज़िल सायनाइड और एथाइल एक्रिलेट जैसे कृत्रिम सुगंध रसायनों पर रोक
  • उद्देश्य: उपभोक्ता सुरक्षा, बेहतर इनडोर एयर क्वालिटी और पर्यावरण संरक्षण
  • भारत दुनिया का सबसे बड़ा अगरबत्ती उत्पादक और निर्यातक देश है

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के लिए तीन नए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किए

भारत की कानूनी और संवैधानिक व्यवस्था के तहत केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में संघ सरकार का प्रतिनिधित्व करने के लिए तीन वरिष्ठ अधिवक्ताओं को अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) नियुक्त किया है। इन नियुक्तियों की औपचारिक अधिसूचना 22 दिसंबर 2025 को जारी की गई। इसका उद्देश्य शीर्ष न्यायालय में सरकार की कानूनी पैरवी को और अधिक सुदृढ़ बनाना है।

नियुक्त किए गए अधिवक्ता

निम्नलिखित प्रतिष्ठित वरिष्ठ अधिवक्ताओं को अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया है—

  • वरिष्ठ अधिवक्ता दविंदर पाल सिंह
  • वरिष्ठ अधिवक्ता कनकमेडला रविंद्र कुमार
  • वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल कौशिक

इनमें से कनकमेडला रविंद्र कुमार पूर्व राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं और सुप्रीम कोर्ट में संवैधानिक एवं दीवानी मामलों में उनके पास व्यापक अनुभव है।

नियुक्ति का विवरण

  • केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में प्रतिनिधित्व हेतु तीन वरिष्ठ अधिवक्ताओं की नियुक्ति की गई है।
  • इन सभी नियुक्तियों की अवधि तीन वर्ष या अगले आदेश तक (जो भी पहले हो) होगी।
  • ऐसी अवधि-आधारित नियुक्तियाँ सरकार की कानूनी टीम में निरंतरता बनाए रखने के साथ-साथ भविष्य में आवश्यक बदलाव की लचीलापन भी सुनिश्चित करती हैं।

महत्व

  • केंद्र सरकार के बढ़ते कानूनी कार्यभार को देखते हुए इन नियुक्तियों का विशेष महत्व है।
  • नए कानूनों, नीतिगत फैसलों और नियामक ढांचे के विस्तार के कारण सरकार कई महत्वपूर्ण मामलों में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पक्षकार रहती है।
  • अनुभवी वरिष्ठ अधिवक्ताओं की नियुक्ति से सरकार को मजबूत संवैधानिक तर्क, प्रभावी कानूनी रक्षा और मामलों के त्वरित निपटारे में मदद मिलेगी, जिसका सीधा प्रभाव शासन और नीति-निर्माण पर पड़ता है।

सुप्रीम कोर्ट में ASG की भूमिका

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अदालत के समक्ष सरकार का पक्ष जिम्मेदारी और स्पष्टता के साथ प्रस्तुत करते हैं।
उनकी प्रमुख भूमिकाएँ—

  • सरकार की ओर से मामलों की पैरवी करना
  • मंत्रालयों को कानूनी सलाह देना
  • कानूनी रणनीतियों की समीक्षा करना
  • अन्य विधि अधिकारियों के साथ समन्वय करना
  • संवैधानिक मामलों में ASG कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच सेतु की भूमिका निभाते हैं।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) कौन होते हैं?

  • ASG, भारत सरकार के शीर्ष विधि अधिकारियों में शामिल होते हैं।
  • इनकी नियुक्ति Law Officers (Conditions of Service) Rules के तहत की जाती है।
  • वे अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया और सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया की सहायता करते हैं।
  • मुख्य रूप से सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों में संवैधानिक व्याख्या, केंद्रीय कानूनों, अंतर-सरकारी विवादों और प्रमुख जनहित याचिकाओं से जुड़े मामलों की पैरवी करते हैं।

मुख्य बिंदु

  • केंद्र सरकार ने 22 दिसंबर 2025 को तीन नए ASG नियुक्त किए
  • ASG सुप्रीम कोर्ट में संघ सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं
  • कार्यकाल: तीन वर्ष या अगले आदेश तक
  • ASG, अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की सहायता करते हैं
  • विषय: भारतीय संविधान, न्यायपालिका और शासन व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण

सरकार ने EPFO ​​के आधुनिकीकरण के लिए व्यापक सुधारों की घोषणा की

भारत सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के आधुनिकीकरण और देशभर में सामाजिक सुरक्षा कवरेज के विस्तार के लिए कई बड़े सुधारों की घोषणा की है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने गुजरात के वटवा में EPFO के नव-निर्मित भविष्य निधि भवन के उद्घाटन के अवसर पर इन पहलों की जानकारी साझा की। इन सुधारों का उद्देश्य EPFO सेवाओं को अधिक सुलभ, प्रौद्योगिकी-संचालित और नागरिक-अनुकूल बनाना तथा श्रमिकों की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

घोषित प्रमुख EPFO सुधार

EPFO सेवाओं में सुधार के लिए निम्नलिखित प्रमुख कदम घोषित किए गए हैं—

  • आधुनिक, प्रौद्योगिकी-सक्षम EPFO कार्यालय और सिंगल-विंडो सेवा
  • किसी भी EPFO क्षेत्रीय कार्यालय में EPF समस्याओं का समाधान
  • सदस्यों की सहायता के लिए EPF सुविधा प्रदाताओं की शुरुआत
  • निष्क्रिय EPF खातों को सक्रिय करने हेतु मिशन-मोड KYC अभियान
  • तेज़ दावा निपटान के लिए सरलीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म
  • FTAs के माध्यम से विदेश में कार्यरत भारतीय श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा
  • मार्च 2026 तक 100 करोड़ नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने का लक्ष्य

सुधारों का विस्तृत विवरण

1. आधुनिक, तकनीक-सक्षम EPFO कार्यालय

  • देशभर के EPFO कार्यालयों को पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तर्ज पर आधुनिक, नागरिक-केंद्रित सेवा केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है।
  • ये कार्यालय सिंगल-विंडो सेवा के रूप में कार्य करेंगे, जिससे EPF से जुड़ी सभी समस्याओं का त्वरित समाधान संभव होगा।
  • दिल्ली में इसका पायलट प्रोजेक्ट पहले से चल रहा है।

2. किसी भी कार्यालय से सेवा सुविधा

  • नई व्यवस्था के तहत EPF सदस्यों को अब अपने मूल या लिंक्ड EPFO कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं होगी।
  • वे देश के किसी भी क्षेत्रीय EPFO कार्यालय में जाकर अपनी शिकायतों का समाधान करा सकेंगे, जिससे सुविधा और लचीलापन बढ़ेगा।

3. EPF सुविधा प्रदाताओं की शुरुआत

  • डिजिटल प्रक्रियाओं से अपरिचित श्रमिकों की सहायता के लिए EPF सुविधा प्रदाता शुरू किए जाएंगे।
  • ये अधिकृत सहायक प्रक्रियाएं समझाने, दावे दाखिल करने और EPFO लाभों तक पहुंच में मदद करेंगे, विशेषकर पहली बार उपयोग करने वालों को।

4. निष्क्रिय खातों के लिए मिशन-मोड KYC अभियान

  • अपूर्ण KYC या पहुंच संबंधी समस्याओं के कारण बड़ी राशि निष्क्रिय EPF खातों में फंसी हुई है।
  • EPFO मिशन-मोड KYC सत्यापन अभियान चलाकर इन निधियों को उनके वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचाएगा।

5. सरलीकृत डिजिटल दावा निपटान

  • दावों की आसान फाइलिंग और तेज़ निपटान के लिए एक समर्पित डिजिटल प्लेटफॉर्म लाया जाएगा।
  • ₹5 लाख तक के दावों का स्वचालित निपटान पहले ही लागू किया जा चुका है, जिससे देरी और कागजी कार्रवाई कम हुई है।

6. विदेश में कार्यरत भारतीयों के लिए सामाजिक सुरक्षा

  • भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) में अब सामाजिक सुरक्षा प्रावधान शामिल किए जाएंगे।
  • इससे विदेश में कार्यरत भारतीय श्रमिक अपने PF योगदान बनाए रख सकेंगे और भारत लौटने पर भी लाभ प्राप्त कर सकेंगे—जैसा कि भारत–यूके FTA में प्रावधान है।

7. सामाजिक सुरक्षा कवरेज का विस्तार

  • 2014 से पहले भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज 19% था, जो अब 64% हो चुका है।
  • वर्तमान में लगभग 94 करोड़ लोग सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के अंतर्गत कवर हैं।
  • सरकार का लक्ष्य मार्च 2026 तक 100 करोड़ नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO)

  • कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 के तहत स्थापित वैधानिक निकाय
  • श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधीन कार्यरत
  • केंद्रीय न्यासी बोर्ड द्वारा प्रशासित (सरकार, नियोक्ता और कर्मचारी—त्रिपक्षीय संरचना)
  • तीन योजनाओं का प्रबंधन: EPF (1952), EPS (1995), EDLI (1976)
  • EPS के तहत 58 वर्ष की आयु में न्यूनतम 10 वर्ष की सेवा पर पेंशन
  • सुप्रीम कोर्ट ने हाल में नियोक्ता की सहमति से उच्च पेंशन योगदान का विकल्प चुनने हेतु अतिरिक्त समय की अनुमति दी

मुख्य बिंदु

  • EPFO कार्यालय सिंगल-विंडो, तकनीक-सक्षम सेवा केंद्र बनेंगे
  • नागरिक सहायता के लिए EPF सुविधा प्रदाता शुरू होंगे
  • निष्क्रिय खातों को खोलने हेतु मिशन-मोड KYC अभियान
  • भारत के FTAs में सामाजिक सुरक्षा प्रावधान शामिल
  • मार्च 2026 तक 100 करोड़ नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा का लक्ष्य
  • EPFO कोष: ₹28 लाख करोड़ | ब्याज दर: 8.25%

वैभव सूर्यवंशी को मिला राष्ट्रीय बाल पुरस्कार, राष्ट्रपति मुर्मू ने किया सम्मानित

उभरते क्रिकेटर और 14 वर्षीय बाल प्रतिभा वैभव सूर्यवंशी को घरेलू और अंडर-19 क्रिकेट में उनकी असाधारण उपलब्धियों के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार 5 से 18 वर्ष आयु के बच्चों के लिए भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो खेल, कला, विज्ञान, सामाजिक सेवा, पर्यावरण और साहस जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्टता को मान्यता देता है।

राष्ट्रपति द्वारा सम्मान और प्रशंसा

पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि वैभव सूर्यवंशी ने अत्यंत प्रतिस्पर्धी क्रिकेट जगत में कम उम्र में ही अपनी अलग पहचान बना ली है और उस आयु में कई रिकॉर्ड स्थापित किए हैं, जब अधिकांश खिलाड़ी केवल संगठित प्रशिक्षण की शुरुआत करते हैं।
बीसीसीआई ने अपने आधिकारिक संदेश में उन्हें एक “विस्फोटक युवा बल्लेबाज़” बताया और कहा कि उनके प्रदर्शन ने उन्हें देश के सबसे चर्चित युवा क्रिकेटरों में शामिल कर दिया है।

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के बारे में

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 5 से 18 वर्ष आयु के बच्चों के लिए भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह पुरस्कार असाधारण प्रतिभा और साहस को पहचानने के लिए प्रतिवर्ष छह श्रेणियों में प्रदान किया जाता है—

  • साहस
  • सामाजिक सेवा
  • पर्यावरण
  • खेल
  • कला एवं संस्कृति
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

वैभव सूर्यवंशी को खेल श्रेणी में सम्मानित किया गया, जो युवा खेल प्रतिभाओं के पोषण और उत्सव के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

वैभव सूर्यवंशी की प्रमुख उपलब्धियाँ

1. घरेलू क्रिकेट रिकॉर्ड

  • विजय हजारे ट्रॉफी में अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ 84 गेंदों में 190 रन, लिस्ट-A इतिहास के सबसे कम उम्र के शतकवीर बने।
  • लिस्ट-A क्रिकेट में सबसे तेज़ 150 रन का एबी डिविलियर्स का रिकॉर्ड तोड़ा।
  • एक 50 ओवर मैच में 15 छक्के, किसी भी भारतीय द्वारा सर्वाधिक।

2. टी-20 रिकॉर्ड

  • सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में बिहार के लिए 61 गेंदों में नाबाद 108 रन, 14 वर्ष 250 दिन की उम्र में टूर्नामेंट के सबसे कम उम्र के शतकवीर बने।

3. अंडर-19 उपलब्धियाँ

  • अंडर-19 एशिया कप में यूएई के खिलाफ 95 गेंदों में 171 रन, टूर्नामेंट में किसी भारतीय का सर्वोच्च स्कोर।
  • ब्रिस्बेन में यूथ टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 के खिलाफ शतक।

4. राइजिंग स्टार्स एशिया कप

  • भारत-A की ओर से यूएई के खिलाफ 42 गेंदों में 144 रन, 11 चौके और 15 छक्के।
  • 32 गेंदों में शतक, सीनियर राष्ट्रीय स्तर पर शतक लगाने वाले सबसे कम उम्र के पुरुष क्रिकेटर बने।

5. इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) उपलब्धियाँ

  • राजस्थान रॉयल्स के लिए 14 वर्ष 23 दिन की उम्र में आईपीएल डेब्यू, इतिहास के सबसे कम उम्र के खिलाड़ी।
  • गुजरात टाइटंस के खिलाफ 35 गेंदों में शतक, आईपीएल के सबसे कम उम्र के शतकवीर।
  • यह शतक आईपीएल इतिहास में किसी भारतीय का सबसे तेज़ और कुल मिलाकर दूसरा सबसे तेज़ (क्रिस गेल के बाद) शतक।

मुख्य बिंदु

  • वैभव सूर्यवंशी को 2025 में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार मिला।
  • पुरस्कार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा प्रदान किया गया।
  • लिस्ट-A, सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी और आईपीएल में सबसे कम उम्र के शतकवीर।
  • विजय हजारे ट्रॉफी में 190 रन (84 गेंद), एबी डिविलियर्स का लिस्ट-A रिकॉर्ड टूटा।
  • आईपीएल के सबसे कम उम्र के खिलाड़ी और शतकवीर।
  • प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 5–18 वर्ष आयु के बच्चों के लिए भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान।

भारत के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025 प्रदान किया

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 26 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025 प्रदान किए। यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान उन बच्चों को दिया जाता है जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियाँ और अनुकरणीय आचरण प्रदर्शित किया है। यह समारोह इस बात को रेखांकित करता है कि साहस, नवाचार, रचनात्मकता और सामाजिक उत्तरदायित्व से परिपूर्ण युवा भारत के भविष्य को आकार दे रहे हैं।

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के बारे में

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह पुरस्कार छह श्रेणियों—साहस, सामाजिक सेवा, पर्यावरण, खेल, कला एवं संस्कृति, तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी—में प्रदान किया जाता है। पूर्व राष्ट्रीय वीरता पुरस्कारों के स्थान पर शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य समाज और राष्ट्र के लिए सकारात्मक प्रभाव डालने वाले युवा आदर्शों को प्रोत्साहित, प्रेरित और सम्मानित करना है।

राष्ट्रपति का संबोधन और संदेश

अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मु ने पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि उनकी उपलब्धियों ने उनके परिवारों, समुदायों और पूरे देश को गौरवान्वित किया है। उन्होंने जोर दिया कि ये पुरस्कार केवल सम्मान नहीं, बल्कि मूल्यों के साथ उत्कृष्टता की ओर आगे बढ़ने की प्रेरणा हैं। राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि यह सम्मान देशभर के बच्चों को अपनी क्षमता पर विश्वास करने और समाज में सार्थक योगदान देने के लिए प्रेरित करेगा।

ऐतिहासिक संदर्भ और प्रेरणा

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में गुरु गोबिंद सिंह और उनके चारों पुत्रों के सत्य और न्याय के लिए किए गए बलिदान का स्मरण किया। उन्होंने विशेष रूप से छोटे साहिबज़ादों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनकी वीरता आज भी भारत और विश्वभर में सम्मानित है। इस संदर्भ के माध्यम से उन्होंने बताया कि देशभक्ति और नैतिक साहस की मूल्यपरंपरा पीढ़ियों से आगे बढ़ती है।

साहस और उत्कृष्टता की प्रेरक कथाएँ

राष्ट्रपति ने कई पुरस्कार विजेताओं के उदाहरण साझा किए। उन्होंने सात वर्षीय वाका लक्ष्मी प्रज्ञिका की शतरंज उपलब्धियों का उल्लेख किया, जो भारत की वैश्विक शतरंज पहचान को सुदृढ़ करती हैं। अजय राज और मोहम्मद सिदान पी द्वारा त्वरित सूझ-बूझ से जान बचाने के साहसी कार्यों की सराहना की गई। उन्होंने व्योमा प्रिया (9) और कमलेश कुमार (11) को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने दूसरों को बचाते हुए अपने प्राण न्यौछावर किए। इसके अलावा, दस वर्षीय श्रवण सिंह की प्रशंसा की गई, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीमा गांव में तैनात सैनिकों को पानी, दूध और लस्सी उपलब्ध कराई।

विविध क्षेत्रों में उपलब्धियाँ

समारोह में साहस से आगे की उपलब्धियों को भी रेखांकित किया गया। राष्ट्रपति ने दिव्यांग खिलाड़ी शिवानी होसुरु उप्पारा की सराहना की, जिन्होंने आर्थिक और शारीरिक चुनौतियों के बावजूद खेलों में उत्कृष्टता हासिल की। उन्होंने वैभव सूर्यवंशी की भी प्रशंसा की, जिन्होंने कम उम्र में क्रिकेट में कई रिकॉर्ड बनाकर अपनी पहचान बनाई। ये उदाहरण खेल, नवाचार, संस्कृति और सामाजिक सेवा सहित बच्चों की विविध प्रतिभाओं को दर्शाते हैं।

मुख्य बिंदु

  • प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार बच्चों के लिए भारत का सर्वोच्च सम्मान
  • पुरस्कार राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किए जाते हैं
  • छह श्रेणियों में सम्मान, जिनमें साहस और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी शामिल
  • समारोह 26 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित
  • बाल सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण पर भारत का सशक्त फोकस

अंतर्राष्ट्रीय महामारी तैयारी दिवस 2025: 27 दिसंबर

अंतर्राष्ट्रीय महामारी तैयारी दिवस हर वर्ष 27 दिसंबर को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य महामारियों की रोकथाम, तैयारी और प्रभावी प्रतिक्रिया के महत्व को रेखांकित करना है। यह दिवस मजबूत स्वास्थ्य प्रणालियों, प्रारंभिक चेतावनी तंत्र और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर बल देता है, ताकि संक्रामक रोगों के प्रकोप से मानव जीवन और अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने वाले विनाशकारी प्रभाव को कम किया जा सके। कोविड-19 महामारी ने स्पष्ट कर दिया कि महामारियाँ केवल स्वास्थ्य संकट ही नहीं होतीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियाँ भी उत्पन्न करती हैं, जिससे महामारी तैयारी एक वैश्विक प्राथमिकता बन गई है।

इस दिन का महत्व

  • हर साल 27 दिसंबर को महामारी तैयारी के महत्व को रेखांकित करने के लिए मनाया जाता है।
  • 7 दिसंबर 2020 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा स्थापित किया गया।
  • COVID-19 महामारी के दौरान वैश्विक प्रतिक्रिया की चुनौतियों से प्रेरित।

मुख्य उद्देश्य

  • महामारी की रोकथाम और तैयारी के बारे में शिक्षा और जागरूकता को बढ़ावा देना।
  • वैश्विक साझेदारी और जानकारी के आदान-प्रदान के महत्व को उजागर करना।
  • कमजोर आबादी का समर्थन करने के लिए स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करना।

वैश्विक दृष्टिकोण

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मजबूत स्वास्थ्य प्रणालियों के निर्माण पर जोर दिया।
  • महामारी तैयारी में शामिल हैं:
    • जागरूकता बढ़ाना।
    • वैज्ञानिक ज्ञान और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना।
    • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और वकालत कार्यक्रमों को लागू करना।
  • COVID-19 के अनुभव ने मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों की तात्कालिकता को उजागर किया।

हितधारकों की भूमिका

  • सरकारों और संस्थानों से राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुसार इस दिन को मनाने का आह्वान।
  • स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संस्थाओं के बीच सहयोग महत्वपूर्ण।
  • मौजूदा महामारियों का समाधान करते हुए भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों की तैयारी पर ध्यान केंद्रित करना।

गतिविधियां और कार्य

  • शिक्षा, अभियानों और जागरूकता बढ़ाने वाली गतिविधियों के माध्यम से इस दिन का पालन।
  • अनुसंधान, नवाचार और वैक्सीन और उपचारों के विकास के लिए समर्थन।
  • वैश्विक स्तर पर महामारी प्रतिक्रिया क्षमताओं के लिए आधारभूत ढांचे का निर्माण।

वैश्विक तैयारी का महत्व

  • महामारियां सार्वजनिक स्वास्थ्य और वैश्विक सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण खतरा हैं।
  • सक्रिय उपाय संक्रामक रोगों के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव को कम कर सकते हैं।
  • यह दिन भविष्य के प्रकोपों को रोकने के लिए एकजुट प्रतिबद्धता का आह्वान करता है।

भारत ने दो नई एयरलाइंस को मंजूरी दी

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने दो नई एयरलाइनों अल हिंद एयर (Al Hind Air) और फ्लाईएक्सप्रेस (FlyExpress) को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) प्रदान कर दिया है। इन मंजूरियों के साथ ही वर्ष 2026 में इनके व्यावसायिक संचालन का रास्ता साफ हो गया है। इनके अलावा शंख एयर (Shankh Air), जिसे पहले ही NOC मिल चुका है, के भी अगले वर्ष परिचालन शुरू करने की उम्मीद है। यह घटनाक्रम भारत के घरेलू विमानन बाजार में बढ़ती गतिविधि और प्रतिस्पर्धा का संकेत देता है।

नई मंजूरियों की पृष्ठभूमि

  • NOC दिया जाना किसी भी नई एयरलाइन के शुभारंभ की दिशा में पहला महत्वपूर्ण नियामकीय कदम होता है।
  • इसका अर्थ है कि प्रस्तावित एयरलाइन ने स्वामित्व, वित्तीय क्षमता और सुरक्षा मंजूरियों से जुड़े प्रारंभिक मानदंड पूरे कर लिए हैं।
  • अल हिंद एयर और फ्लाईएक्सप्रेस को मंजूरी ऐसे समय में मिली है जब भारत का विमानन बाजार तेज़ी से बढ़ रहा है, लेकिन साथ ही बाज़ार एकाग्रता (concentration) और प्रणालीगत मजबूती को लेकर चिंताएँ भी मौजूद हैं।

भारत का विमानन उद्योग परिदृश्य

  • भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बन चुका है।
  • यह वृद्धि बढ़ती आय, बेहतर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और हवाई यात्रा की बढ़ती मांग से प्रेरित है।
  • वर्तमान में देश में 9 अनुसूचित घरेलू एयरलाइंस संचालित हो रही हैं, लेकिन बाजार संरचना अत्यधिक एकाग्र है।
  • इंडिगो और एयर इंडिया समूह मिलकर घरेलू बाजार के 90% से अधिक हिस्से पर नियंत्रण रखते हैं।
  • अकेले इंडिगो की बाजार हिस्सेदारी 65% से अधिक है, जिससे वह सबसे बड़ा खिलाड़ी बन जाता है।
  • अन्य एयरलाइनों में आकासा एयर, स्पाइसजेट, स्टार एयर, फ्लाई91 और इंडिया वन एयर शामिल हैं।

नई एयरलाइनों के प्रवेश का महत्व

  • अल हिंद एयर, फ्लाईएक्सप्रेस और शंख एयर के प्रवेश से प्रतिस्पर्धा में धीरे-धीरे सुधार होने की उम्मीद है।
  • इससे क्षमता का विस्तार होगा और यात्रियों को अधिक विकल्प मिलेंगे।
  • नई एयरलाइंस कम सेवा प्राप्त मार्गों पर कनेक्टिविटी बढ़ा सकती हैं और क्षेत्रीय विमानन को मजबूती दे सकती हैं।
  • दीर्घकाल में इससे बेहतर किराया निर्धारण, सेवा गुणवत्ता में सुधार और विमानन प्रणाली की स्थिरता को बढ़ावा मिल सकता है।

मुख्य बिंदु 

  • नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने अल हिंद एयर और फ्लाईएक्सप्रेस को NOC प्रदान किया।
  • दोनों एयरलाइंस के 2026 में परिचालन शुरू करने की संभावना है।
  • शंख एयर को पहले ही NOC मिल चुका है और वह भी अगले वर्ष शुरू हो सकती है।
  • भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार है।
  • अकेले इंडिगो की हिस्सेदारी 65% से अधिक है, जिससे द्विदलीय (duopoly) चिंताएँ बढ़ती हैं।
  • नई एयरलाइंस प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और प्रणालीगत जोखिम कम करने में सहायक हो सकती हैं।

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