SBI 70 साल का हुआ: भारत की आर्थिक प्रगति का प्रतिबिंब

देश का सबसे पुराना कमर्शियल बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, आज 1 जुलाई को 70 वर्ष का हो गया है। इस दिन को एसबीआई शाखाओं में SBI Celebration day के रूप में मनाया जाता है। एसबीआई की जड़ें बैंक आफ कलकत्ता से जुड़ी हैं, जिसकी स्थापना 1806 में हुई थी और बाद में बैंक आफ मद्रास और बैंक आफ बॉम्बे के साथ इसका विलय करके इंपीरियल बैंक आफ इंडिया बना, जो अंततः 1955 में एसबीआई बन गया।

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने 1 जुलाई 2025 को अपनी स्थापना के 70 वर्ष पूरे किए। यह दिन भारत की आर्थिक यात्रा में एक ऐतिहासिक पड़ाव है। केवल एक बैंक नहीं, SBI भारत के विकास का एक ऐसा स्तंभ है जिसने गांवों के किसानों से लेकर अंतरराष्ट्रीय कंपनियों तक को वित्तीय सहयोग प्रदान किया है।

इतिहास: प्रेसिडेंसी बैंकों से SBI तक का 200 सालों का सफर

  • 1806: बैंक ऑफ कोलकाता की स्थापना (बाद में बैंक ऑफ बंगाल)

  • 1840: बैंक ऑफ बॉम्बे

  • 1843: बैंक ऑफ मद्रास
    इन तीनों को मिलाकर 1921 में इम्पीरियल बैंक ऑफ इंडिया बना।

  • 1 जुलाई 1955: भारत सरकार ने इसे राष्ट्रीयकृत कर भारतीय स्टेट बैंक के रूप में स्थापित किया।
    यह निर्णय पहली पंचवर्षीय योजना के ग्रामीण विकास एजेंडे का हिस्सा था।

ग्रामीण भारत तक पहुंच: SBI की समावेशी रणनीति

  • 1959 में आठ एसोसिएट बैंकों को जोड़ा गया, जिससे अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में SBI की पकड़ मजबूत हुई।

  • बाद में, बिहार बैंक, नेशनल बैंक ऑफ लाहौर, और कोचीन बैंक जैसे अन्य बैंकों का भी विलय हुआ।

  • 2017: SBI ने अपनी अंतिम पांच सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक को भी मिला लिया – यह भारत का सबसे बड़ा बैंकिंग समेकन (merger) बना।

SBI आज: एक वैश्विक वित्तीय महाशक्ति

  • मुख्यालय: मुंबई

  • कुल परिसंपत्तियाँ: ₹61 लाख करोड़ (अक्टूबर 2024 तक)

  • ग्राहक: 50 करोड़+

  • शाखाएँ: 22,500+

  • एटीएम: 63,580

  • बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट आउटलेट्स: लगभग 83,000

  • अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति: 29 देशों में 241 कार्यालय

वित्त वर्ष 2024–25: रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन

  • शुद्ध लाभ: ₹70,901 करोड़ (FY24 की तुलना में 16% वृद्धि)

  • ऑपरेटिंग प्रॉफिट: ₹1.10 लाख करोड़ – पहली बार ₹1 लाख करोड़ का आंकड़ा पार किया।
    यह SBI की मजबूत वित्तीय रणनीति और संचालन की दक्षता का प्रमाण है।

शेयर बाजार में SBI की यात्रा: विश्वास और स्थायित्व

  • 1997 में SBI ने शेयर बाजार में प्रवेश किया।

  • इसके शेयरों ने भारत की अर्थव्यवस्था के साथ उतार-चढ़ाव देखा लेकिन मजबूत प्रदर्शन बरकरार रखा।

  • SBI एक विविध वित्तीय समूह (conglomerate) बन चुका है:

    • SBI लाइफ इंश्योरेंस

    • SBI जनरल इंश्योरेंस

    • SBI म्यूचुअल फंड

    • SBI कार्ड

नवाचार में अग्रणी: YONO और डिजिटल बदलाव

  • YONO (You Only Need One): SBI का मोबाइल बैंकिंग प्लेटफॉर्म जिसने डिजिटल बैंकिंग को आम आदमी तक पहुंचाया।

  • बैंक ने स्टार्टअप्स, फिनटेक साझेदारियों, और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देकर खुद को तकनीकी रूप से प्रासंगिक बनाए रखा है।

SBI: भारत के विकास में भागीदार

  • किसान क्रेडिट कार्ड हो या MSME ऋण,

  • डिजिटल भुगतान हो या विदेशों में भारतीय प्रवासियों की मदद—
    SBI हर वर्ग के साथ खड़ा रहा है, भारत की आर्थिक रीढ़ बनकर।

राष्ट्रीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स दिवस 2025

हर वर्ष 1 जुलाई को चार्टर्ड अकाउंटेंट्स दिवस (CA Day) मनाया जाता है। यह दिन भारत की वित्तीय व्यवस्था और व्यापारिक समुदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (ICAI) की स्थापना (1 जुलाई 1949) की स्मृति में मनाया जाता है। यह दिवस उन चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के योगदान का सम्मान करता है जो वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाते हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: रजिस्टर्ड अकाउंटेंट से ICAI तक

  • स्वतंत्रता से पहले भारत में लेखा परीक्षा का कार्य बिना किसी औपचारिक नियामक संस्था के किया जाता था।

  • ब्रिटिश शासनकाल में “Indian Companies Act” के तहत सरकार द्वारा एक “रजिस्टर ऑफ अकाउंटेंट्स” रखा जाता था और इन व्यक्तियों को Registered Accountants कहा जाता था।

  • लेकिन पेशे में एकरूपता और नैतिक आचरण सुनिश्चित करने हेतु किसी मानक संस्था का अभाव था।

  • 1948 में एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर चार्टर्ड अकाउंटेंट्स अधिनियम, 1949 पारित हुआ, जिसके फलस्वरूप ICAI की स्थापना 1 जुलाई 1949 को हुई।

ICAI: भारत की वित्तीय प्रणाली की रीढ़

  • ICAI, भारत सरकार के कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के अधीन एक सांविधिक निकाय है।

  • यह न केवल भारत की सबसे पुरानी बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी चार्टर्ड अकाउंटेंट संस्था है।

  • ICAI के अंतर्गत एक कठिन शिक्षा और परीक्षा प्रणाली है, जो तकनीकी दक्षता और नैतिकता पर विशेष बल देती है।

  • यह संस्था सरकार को सलाह, लेखा मानकों का निर्धारण, और पेशेवर उत्कृष्टता को बढ़ावा देने का कार्य करती है।

भारत की अर्थव्यवस्था में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की भूमिका

वित्तीय पारदर्शिता और विश्वास निर्माण

  • CA पारदर्शी लेखा परीक्षण के माध्यम से निवेशकों और सार्वजनिक हितधारकों में विश्वास पैदा करते हैं।

कर व्यवस्था में सहयोग

  • जटिल कर कानूनों की समझ से ये व्यवसायों को टैक्स अनुपालन में मदद करते हैं और राष्ट्रीय राजस्व में योगदान करते हैं।

स्टार्टअप और कारोबार वृद्धि में मार्गदर्शन

  • व्यवसायिक ढांचा, नियामकीय अनुपालन, और वित्तीय योजना में सहयोग कर उद्यमशीलता को प्रोत्साहन देते हैं।

वैश्विक प्रतिस्पर्धा में योगदान

  • विदेशी निवेश आकर्षित करने, क्रॉस-बॉर्डर साझेदारी और अंतरराष्ट्रीय मानकों का अनुपालन कराने में सहायक।

रोजगार सृजन में सहयोग

  • पेशे से जुड़े प्रशिक्षण, कोचिंग संस्थानों और फर्मों के माध्यम से रोजगार के अवसर पैदा करते हैं।

एक CA की मुख्य जिम्मेदारियां

  • ऑडिटिंग: वित्तीय विवरणों की सटीकता सुनिश्चित करना

  • कर नियोजन एवं अनुपालन

  • वित्तीय योजना और जोखिम प्रबंधन

  • कॉर्पोरेट सलाहकार सेवाएं (विलय, अधिग्रहण, मूल्यांकन आदि)

  • विधिक और नियामकीय अनुपालन सुनिश्चित करना

चार्टर्ड अकाउंटेंट्स दिवस का महत्व

  • यह दिन चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की निष्ठा, परिश्रम और जिम्मेदारी को सम्मानित करता है।

  • यह निरंतर व्यावसायिक विकास, नैतिकता और तकनीकी उन्नति की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

  • डिजिटल युग में, जब डेटा-आधारित निर्णय और नियामकीय अनुपालन सर्वोपरि हैं, CA की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

Ladakh में पहला एस्ट्रो Festival, विज्ञान और चमत्कार का मिलेगा अनूठा अनुभव

लद्दाख ने विज्ञान आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। हाल ही में लेह में आयोजित पहले “एस्ट्रो टूरिज्म फेस्टिवल” का सफल समापन हुआ। यह दो दिवसीय आयोजन लद्दाख पर्यटन विभाग और भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA), बेंगलुरु के सहयोग से किया गया, जिसका उद्देश्य लद्दाख को खगोल पर्यटन (Astro Tourism) के प्रमुख गंतव्यों में शामिल करना है।

समाचार में क्यों?

भारत में विज्ञान आधारित और टिकाऊ पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयासों के तहत, लद्दाख में पहला एस्ट्रो टूरिज्म फेस्टिवल आयोजित किया गया। इस आयोजन ने लद्दाख की भौगोलिक विशेषताओं — जैसे उच्च ऊँचाई, शुष्क मौसम और न्यूनतम प्रकाश प्रदूषण — का उपयोग कर इसे खगोल पर्यटन के लिए आदर्श स्थल के रूप में प्रस्तुत किया।

प्रमुख विशेषताएं

अवधि:

2-दिवसीय आयोजन | स्थान: लेह, लद्दाख

आयोजक संस्थाएं:

  • लद्दाख पर्यटन विभाग

  • भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA), बेंगलुरु

  • सहयोग: कश्मीर विश्वविद्यालय और ISRO वैज्ञानिकों का

प्रमुख स्थल:

  • लेह विश्वविद्यालय परिसर: रात्रि आकाश अवलोकन

  • हनले डार्क स्काई रिज़र्व: भारत का पहला डार्क स्काई रिज़र्व (2022 में घोषित)

रात्रि आकाश अवलोकन सत्र

  • टेलीस्कोप की सहायता से

    • तारामंडल 

    • ग्रहों की स्थिति 

    • दूरस्थ आकाशीय पिंडों (Deep-sky objects) जैसे आकाशगंगाएं और नीहारिकाएं देखी गईं।

विशेषज्ञ सत्र

  • ISRO के वैज्ञानिकों द्वारा खगोल विज्ञान पर व्याख्यान

  • भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान के शोधकर्ता

  • कश्मीर विश्वविद्यालय के शिक्षाविदों द्वारा संवादात्मक चर्चाएं

उद्देश्य

  • लद्दाख को भारत के एस्ट्रो टूरिज्म हब के रूप में विकसित करना

  • आम जनता और पर्यटकों को खगोल विज्ञान व अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति जागरूक करना

  • स्थानीय विकास योजनाओं में विज्ञान आधारित पर्यटन को शामिल करना

  • लद्दाख की प्राकृतिक विशेषताओं का वैज्ञानिक दृष्टिकोण से उपयोग करना

पृष्ठभूमि

  • हनले डार्क स्काई रिज़र्व विश्व के उच्चतम और साफ-सुथरे खगोल अवलोकन स्थलों में से एक है।

  • भारतीय खगोल वेधशाला, हनले में ऑप्टिकल, इंफ्रारेड और गामा-रे टेलीस्कोप स्थापित हैं।

महत्त्व और प्रभाव

  • स्थायी पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

  • युवाओं और पर्यटकों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास

  • वैश्विक एस्ट्रो टूरिज्म ट्रेंड्स के अनुरूप भारत की भागीदारी

  • लद्दाख को बहुआयामी पर्यटन स्थल के रूप में सुदृढ़ बनाना

भारत में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 78% की कमी आई

भारत ने सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। UN इंटर-एजेंसी ग्रुप फॉर चाइल्ड मोर्टैलिटी एस्टीमेशन (UN IGME) की 2024 रिपोर्ट के अनुसार, भारत में पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में 78% की गिरावट दर्ज की गई है, जो कि वैश्विक औसत (61%) से कहीं अधिक है। साथ ही, नवजात मृत्यु दर (Neonatal Mortality Rate) में भी 70% की गिरावट देखी गई है।

समाचार में क्यों?

यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब वैश्विक विशेषज्ञ कोविड-19 महामारी के बाद सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयासों की समीक्षा कर रहे हैं। भारत की सफलता सांख्यिकीय उपलब्धि के साथ-साथ समानता आधारित टीकाकरण के एक वैश्विक मॉडल के रूप में भी उभरी है।

प्रमुख उपलब्धियां

  • 78% की गिरावट पांच वर्ष से कम उम्र की मृत्यु दर में (वैश्विक औसत: 61%)

  • 70% की गिरावट नवजात मृत्यु दर में (वैश्विक औसत: 54%)

  • शून्य-खुराक बच्चों (Zero-dose Children – जिन्हें कोई टीका नहीं मिला) की संख्या 2023 में 0.11% से घटकर 2024 में 0.06% हुई।

सफलता के पीछे प्रमुख कारण

सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (Universal Immunization Programme – UIP)

  • शुरुआत: 1985

  • हर साल टीकाकरण लाभार्थी:

    • 2.9 करोड़ गर्भवती महिलाएं

    • 2.6 करोड़ शिशु

  • 12 बीमारियों के खिलाफ निःशुल्क टीके – पोलियो, खसरा, हेपेटाइटिस-बी आदि।

मिशन इंद्रधनुष और इंटेंसिफाइड मिशन इंद्रधनुष

  • दूरदराज़ और वंचित इलाकों तक टीकाकरण पहुंचाने के लिए विशेष अभियान।

  • समुदाय आधारित जागरूकता से टीकों में भरोसा बढ़ाया गया।

प्रमुख उद्देश्य

  • शिशु और मातृ मृत्यु दर को कम करना

  • सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) के लक्ष्य को पाना

  • सामाजिक न्याय और स्वास्थ्य समानता को सुनिश्चित करना

  • जनमानस में टीकों के प्रति विश्वास बढ़ाना

पृष्ठभूमि और स्थैतिक तथ्य

  • UN IGME: यूनिसेफ, WHO, वर्ल्ड बैंक और UN-DESA का संयुक्त मंच।

  • नवजात मृत्यु दर: जन्म के 28 दिनों के भीतर शिशुओं की मृत्यु।

  • पांच वर्ष से कम उम्र की मृत्यु दर: पांच साल से कम आयु में बच्चों की मृत्यु।

महत्त्व और वैश्विक प्रभाव

  • भारत का प्रदर्शन निम्न व मध्यम आय वाले देशों के लिए एक प्रेरणास्रोत मॉडल है।

  • यह उपलब्धि भारत की वैश्विक दक्षिण (Global South) में एक मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य नेतृत्व की स्थिति को भी दर्शाती है।

  • यह संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य 3 (SDG-3)“सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण को सुनिश्चित करना” – की दिशा में बड़ा योगदान है।

रेलवे का बड़ा फैसला, 1 जुलाई से बदल जाएंगे टिकट बुकिंग से जुड़े ये 5 बड़े नियम

भारतीय रेलवे ने यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने और आरक्षण प्रणाली को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से एक व्यापक सुधार योजना की घोषणा की है। इन सुधारों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, जिससे टिकट बुकिंग से लेकर यात्रा तक की प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सक्षम बन सके।

चार्ट तैयार करने का नया नियम: अब प्रतीक्षा सूची की स्थिति पहले से स्पष्ट

पुरानी व्यवस्था:

  • आरक्षण चार्ट आमतौर पर ट्रेन प्रस्थान से 4 घंटे पहले तैयार किया जाता था।

  • इससे प्रतीक्षा सूची वाले यात्रियों को अंतिम क्षण तक असमंजस बना रहता था, विशेषकर उन यात्रियों के लिए जो दूर-दराज से स्टेशन आते हैं।

नई व्यवस्था:

  • अब रेलवे ने चार्टिंग के लिए समय सीमा 8 घंटे पूर्व तय करने का निर्णय लिया है:

    • 2 बजे के बाद रवाना होने वाली ट्रेनों के लिए चार्ट उसी दिन 8 घंटे पहले तैयार होगा।

    • 2 बजे से पहले रवाना होने वाली ट्रेनों के लिए चार्ट पिछली रात 9 बजे तैयार कर लिया जाएगा।

लाभ:

  • प्रतीक्षा सूची की स्थिति पहले से पता चलेगी।

  • वैकल्पिक व्यवस्था करने का समय मिलेगा।

  • दूर-दराज से यात्रा करने वालों को सुविधा होगी।

  • यात्रा की योजना बनाना आसान होगा।

नया आधुनिक यात्री आरक्षण प्रणाली (PRS): दिसंबर 2025 तक होगा लॉन्च

भारतीय रेलवे की सूचना प्रणाली संस्था CRIS द्वारा एक नया और आधुनिक PRS विकसित किया जा रहा है, जो तेज, लचीला और तकनीकी रूप से अत्याधुनिक होगा।

प्रमुख विशेषताएं:

  • बुकिंग क्षमता: 32,000 टिकट/मिनट से बढ़कर 1.5 लाख टिकट/मिनट

  • पूछताछ क्षमता: 4 लाख/मिनट से बढ़कर 40 लाख/मिनट

  • सीट चयन का विकल्प: यात्री अपनी पसंदीदा सीट देख और चुन सकेंगे।

  • भाड़ा कैलेंडर: किराये की तुलना कर यात्रा योजना बनाई जा सकेगी।

  • विशेष श्रेणियों के लिए सेवा: दिव्यांगजन, छात्र, रोगी आदि के लिए अलग सुविधाएं।

  • बहुभाषीय इंटरफेस: क्षेत्रीय भाषाओं में बुकिंग और पूछताछ की सुविधा।

प्रभाव:

  • त्योहारी सीजन या तत्काल बुकिंग के दौरान सर्वर लोड नहीं बढ़ेगा।

  • डिजिटल समावेशन और नागरिक-केंद्रित शासन को बढ़ावा।

तत्काल टिकट अब केवल प्रमाणित उपयोगकर्ताओं को ही मिलेगा – पारदर्शिता और सुरक्षा में सुधार

1 जुलाई 2025 से तत्काल टिकट की बुकिंग अब सिर्फ सत्यापित यूजर्स के लिए उपलब्ध होगी।

प्रमाणीकरण प्रक्रिया:

  • OTP आधारित पहचान सत्यापन।

  • आधार कार्ड या DigiLocker में सुरक्षित सरकारी पहचान-पत्र से सत्यापन।

  • सत्यापन के बिना तत्काल बुकिंग संभव नहीं।

लाभ:

  • एजेंटों और बोट्स द्वारा टिकट हेराफेरी रुकेगी।

  • ईमानदार यात्रियों को अधिक अवसर मिलेंगे।

  • अंतिम समय की बुकिंग अब अधिक निष्पक्ष और सरल होगी।

भाषाई समावेशन: अब अपनी भाषा में टिकट बुक करें

नया PRS बहुभाषीय समर्थन प्रदान करेगा, जिससे देशभर के यात्री अपनी मातृभाषा में बुकिंग और पूछताछ कर सकेंगे।

फायदे:

  • ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के लोगों के लिए आरक्षण प्रक्रिया अधिक सुलभ होगी।

  • डिजिटल खाई को पाटने की दिशा में बड़ा कदम।

नया युग: डिजिटल दक्षता और यात्री सुविधा का समन्वय

रेलवे के ये सभी नए प्रयास, विशेष रूप से डिजिटल इंडिया और नागरिक-केंद्रित शासन के विजन के अनुरूप हैं। ये सुधार न केवल यात्रा अनुभव को बेहतर बनाएंगे, बल्कि रेलवे को एक आधुनिक और भरोसेमंद परिवहन तंत्र के रूप में स्थापित करेंगे।

यह नई प्रणाली भारतीय रेलवे के करोड़ों यात्रियों को सरल, तेज और पारदर्शी सेवा प्रदान करने की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव है।

चुनाव आयोग 345 पार्टियों का रजिस्ट्रेशन रद्द करेगा, जानें वजह

भारत के चुनाव आयोग ने 345 गैर-मान्यता प्राप्त पंजीकृत राजनीतिक दलों (RUPPs) को अपनी लिस्ट से हटाने का फैसला किया है। ये वे दल हैं जो पिछले 6 सालों में एक भी चुनाव नहीं लड़े और इनके पंजीकृत पते पर कोई कार्यालय नहीं मिला। चुनाव आयोग ने बताया कि देश भर के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैले इन 345 दलों ने रजिस्टर्ड अनरजिस्टर पॉलिटिकल पार्टी के रूप में बने रहने की अनिवार्य शर्तों को पूरा नहीं किया। आयोग के पास वर्तमान में 2800 से ज्यादा RUPPs रजिस्टर्ड हैं, लेकिन इनमें से कई दल न तो चुनाव लड़ रहे हैं और न ही अपनी मौजूदगी साबित कर पा रहे हैं।

समाचार में क्यों?

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 345 पंजीकृत अप्रत्याक्षित राजनीतिक दलों (Registered Unrecognised Political Parties – RUPPs) को शोकॉज नोटिस जारी किए हैं। ये वे दल हैं जिन्होंने 2019 के बाद से कोई चुनाव नहीं लड़ा है और जिनका भौतिक पता उपलब्ध नहीं है। यह कदम निर्वाचन सुधारों के प्रति आयोग की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, विशेषकर ऐसे दलों के विलयन (de-listing) की प्रक्रिया को सशक्त करने की दिशा में, जो सिर्फ कागजों पर अस्तित्व में हैं।

RUPPs क्या हैं?

  • ये वे राजनीतिक दल हैं जो जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के अंतर्गत ECI में पंजीकृत होते हैं।

  • लेकिन वे राज्य या राष्ट्रीय दल के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं होते, क्योंकि उनका चुनावी प्रदर्शन न्यूनतम शर्तें पूरी नहीं करता।

RUPPs को प्राप्त प्रमुख सुविधाएं:

  • आयकर में छूट (धारा 13A, आयकर अधिनियम 1961 के तहत)।

  • चुनाव चिह्न का आवंटन

  • 20 स्टार प्रचारकों के नामांकन का अधिकार।

समस्या क्या है?

  • भारत में 2800+ RUPPs पंजीकृत हैं, परंतु 2024 के आम चुनावों में केवल 750 ने ही भाग लिया।

  • शेष “लेटर पैड पार्टियाँ” कहलाती हैं — जो सिर्फ कागजों पर हैं, धरातल पर सक्रिय नहीं।

प्रमुख मुद्दे:

  • टैक्स छूट का दुरुपयोग

  • दानदाताओं की जानकारी नहीं दी जाती (धारा 29C का उल्लंघन)

  • कार्यालयों/पदाधिकारियों की जानकारी अपडेट नहीं की जाती

  • कई दलों का कोई भौतिक अस्तित्व नहीं मिलता — धोखाधड़ी की आशंका

कानूनी पृष्ठभूमि:

  • सुप्रीम कोर्ट ने Indian National Congress बनाम Institute of Social Welfare (2002) मामले में कहा:

    • ECI किसी पार्टी का de-registration तभी कर सकता है, जब:

      • पंजीकरण धोखे से प्राप्त किया गया हो

      • दल संविधान के प्रति निष्ठा छोड़ दे

      • दल को सरकार गैरकानूनी घोषित कर दे

हाल की कार्रवाई

  • 345 RUPPs की पहचान, जिनमें से:

    • 2019 के बाद कोई चुनाव नहीं लड़ा

    • कोई वैध पता या संपर्क जानकारी नहीं

  • राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को नोटिस भेजने का निर्देश

  • मार्च 2024 (मई 2025 तक अद्यतन) सूची के अनुसार:

    • 281 दल de-list किए गए

    • 217 को निष्क्रिय घोषित किया गया

कानूनी और नीतिगत कमी

  • RP अधिनियम, 1951 में ECI को दलों का de-registration करने का स्पष्ट अधिकार नहीं दिया गया है।

  • कानून आयोग की सिफारिशें:

    • 170वीं रिपोर्ट (1999): राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र अनिवार्य हो

    • 255वीं रिपोर्ट (2015): 10 वर्षों से चुनाव में भाग नहीं लेने वाले दलों को हटाने की व्यवस्था

  • ECI का 2016 का मेमोरेंडम: RP अधिनियम में संशोधन की मांग

इस कदम का महत्व

  • चुनावी पारदर्शिता और प्रक्रियाओं की शुद्धता बढ़ेगी

  • करदाताओं के पैसों का दुरुपयोग रोका जा सकेगा

  • राजनीतिक दलों में जवाबदेही और संवैधानिक मूल्यों का पालन सुनिश्चित होगा

  • व्यापक चुनावी और राजनीतिक सुधारों की नींव तैयार होगी

CBDT चेयरमैन रवि अग्रवाल का कार्यकाल जून 2026 तक बढ़ा

केंद्र सरकार ने केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के चेयरमैन रवि अग्रवाल का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया है। अब वह 1 जुलाई 2025 से 30 जून 2026 तक अनुबंध के आधार पर इस पद पर बने रहेंगे। यह फैसला शनिवार को मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (Appointments Committee of the Cabinet) ने लिया। रवि अग्रवाल भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के 1988 बैच के अधिकारी हैं।

समाचार में क्यों?

केंद्र सरकार ने रवि अग्रवाल के केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल को 30 जून 2026 तक बढ़ा दिया है। यह निर्णय कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) द्वारा लिया गया है और इसका उद्देश्य प्रत्यक्ष कर नीति-निर्माण में नेतृत्व की निरंतरता सुनिश्चित करना है।

प्रमुख तथ्य

  • पद: अध्यक्ष, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT)

  • अधिकारी: रवि अग्रवाल

  • बैच: 1988 बैच, भारतीय राजस्व सेवा (IRS – आयकर संवर्ग)

  • कार्यकाल विस्तार: 1 जुलाई 2025 से 30 जून 2026 तक (या अगले आदेश तक)

  • नियुक्ति का स्वरूप: अनुबंध आधार पर

  • स्वीकृति निकाय: कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC)

पृष्ठभूमि और करियर हाइलाइट्स

  • जुलाई 2023 में CBDT के सदस्य (प्रशासन) के रूप में नियुक्त।

  • जून 2024 में अध्यक्ष बने, नितिन गुप्ता (1986 बैच IRS) के स्थान पर।

  • प्रत्यक्ष कर प्रशासन, नीति क्रियान्वयन और संगठनात्मक दक्षता में गहरी समझ के लिए जाने जाते हैं।

CBDT की संरचना

  • CBDT, वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अंतर्गत आता है।

  • आयकर, कॉरपोरेट टैक्स और अन्य प्रत्यक्ष करों की नीति तैयार करने और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी निभाता है।

  • इसमें एक अध्यक्ष और छह सदस्य होते हैं, जो विशेष सचिव स्तर के अधिकारी होते हैं।

पुनर्नियुक्ति का महत्व

  • कर सुधारों के दौर में नेतृत्व की निरंतरता सुनिश्चित करता है।

  • आयकर विभाग के कार्यों में प्रशासनिक स्थिरता और पारदर्शिता को बनाए रखने में सहायक।

  • वित्त मंत्रालय को नीति-निर्माण में सलाह देने में प्रमुख भूमिका निभाता है।

  • सरकार का रवि अग्रवाल के अनुभव और कार्यशैली पर विश्वास का प्रतीक है।

कर्नाटक बैंक के प्रबंध निदेशक, कार्यकारी निदेशक ने इस्तीफा दिया

कर्नाटक बैंक के प्रबंध निदेशक (MD) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) श्रीकृष्णन हरि हर सरमा और कार्यकारी निदेशक शेखर राव ने इस्तीफा दे दिया है। कर्नाटक बैंक ने बयान में कहा, इसके अलावा कार्यकारी निदेशक (ईडी) शेखर राव ने मंगलुरु स्थानांतरित होने में असमर्थता और अन्य व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए पद छोड़ दिया है। जुलाई 2025 से प्रभावी ये इस्तीफे बैंक के चल रहे परिवर्तन अभियान के बीच आए हैं। इसके जवाब में, निदेशक मंडल ने उपयुक्त उत्तराधिकारियों की नियुक्ति करने और निर्बाध नेतृत्व निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए एक खोज समिति का गठन किया है।

समाचार में क्यों?

जुलाई 2025 में कर्नाटक बैंक के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ श्रीकृष्णन हरि हर शर्मा और कार्यकारी निदेशक शेखर राव ने निजी कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया है। इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बीच बैंक ने नए नेतृत्व की तलाश शुरू कर दी है और संचालन की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) की नियुक्ति की घोषणा की है।

मुख्य बिंदु

  • श्रीकृष्णन शर्मा का इस्तीफा 15 जुलाई 2025 से प्रभावी होगा।
    उन्होंने मुंबई में बसने की योजना के चलते पद छोड़ा।

  • शेखर राव का इस्तीफा 31 जुलाई 2025 से प्रभावी होगा।
    उन्होंने मैंगलुरु स्थानांतरण में असमर्थता जताई।

  • COO की नियुक्ति 2 जुलाई से लागू होगी, जब तक स्थायी नियुक्तियाँ नहीं हो जातीं।

  • नियुक्तियों को लेकर RBI की मंज़ूरी लंबित है।

  • बैंक के निदेशक मंडल ने खोज समिति (Search Committee) गठित की है, जो नए MD, CEO और ED की नियुक्ति सुनिश्चित करेगी।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

  • श्रीकृष्णन शर्मा को बैंक के डिजिटलीकरण और आधुनिकीकरण की दिशा में नेतृत्व के लिए चुना गया था।

  • उनकी अगुवाई में बैंक ने जोखिम प्रबंधन, डिजिटल बैंकिंग, और परिचालन दक्षता को प्राथमिकता दी।

  • शेखर राव ने बैंक की रणनीतिक पहल और कार्यान्वयन में अहम भूमिका निभाई।

  • इस्तीफे ऐसे समय आए हैं जब बैंक के FY25 वित्तीय विवरणों में ऑडिटर टिप्पणियाँ भी सामने आई हैं।

कर्नाटक बैंक: स्थायी जानकारी

  • स्थापना: 1924

  • मुख्यालय: मैंगलुरु, कर्नाटक

  • विनियामक: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI)

  • स्थिति: अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक, देशव्यापी उपस्थिति

महत्व और प्रभाव

  • नेतृत्व परिवर्तन से निवेशक विश्वास, कर्मचारियों का मनोबल और परिवर्तन प्रक्रिया की गति प्रभावित हो सकती है।

  • बैंक ने आश्वस्त किया है कि
    वह पूरी तरह से पूंजीकृत (well-capitalized) है,
    और उसका परिवर्तन कार्यक्रम जारी रहेगा।

  • COO की त्वरित नियुक्ति और खोज समिति का गठन बैंक के सुशासन और संक्रमण प्रबंधन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

केंद्र ने कृषि वानिकी विनियमन को आसान बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने हेतु आदर्श नियमों का अनावरण किया

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने 29 जून 2025 को “कृषि भूमि में पेड़ों की कटाई के लिए मॉडल नियम” जारी किए। यह पहल सतत कृषि, आजीविका संवर्धन, और आग्रोफॉरेस्ट्री (Agroforestry) को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही मंत्रालय ने आगामी नेशनल टिंबर मैनेजमेंट सिस्टम (NTMS) पोर्टल की भी घोषणा की, जो वृक्ष कटाई की मंजूरी प्रक्रिया को डिजिटली सरल बनाएगा।

समाचार में क्यों?

  • 29 जून 2025 को MoEFCC ने कृषि भूमि में पेड़ों की कटाई के लिए मॉडल नियम जारी किए।

  • इसका उद्देश्य राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को आग्रोफॉरेस्ट्री को बढ़ावा देने और प्रक्रिया सरल बनाने में मदद करना है।

  • साथ ही NTMS पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पंजीकरण व अनुमति प्रणाली की शुरुआत की जाएगी।

उद्देश्य

  • आग्रोफॉरेस्ट्री को बढ़ावा देना और खेती में पेड़ों के समावेश को सुविधाजनक बनाना।

  • किसानों की आय बढ़ाने के लिए पेड़ आधारित खेती को व्यावसायिक रूप से लाभकारी बनाना।

  • पारिस्थितिक संतुलन के साथ आर्थिक विकास सुनिश्चित करना।

  • डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए पारदर्शिता और ट्रेसबिलिटी (traceability) को बढ़ाना।

पृष्ठभूमि और आवश्यकता

  • आग्रोफॉरेस्ट्री से मिट्टी की उर्वरता, जल संरक्षण, जैव विविधता और जलवायु सहनशीलता में सुधार होता है।

  • परंतु, किसानों को पेड़ लगाने के बाद कटाई की अनुमति लेने में अत्यधिक नौकरशाही का सामना करना पड़ता था।

  • इससे किसान हतोत्साहित होते थे और खेती में पेड़ लगाने से बचते थे।

मॉडल नियमों की मुख्य विशेषताएं

  • राज्य स्तर पर समितियों का गठन (2016 की वुड-बेस्ड इंडस्ट्रीज गाइडलाइंस के तहत)।

  • NTMS पोर्टल पर अनिवार्य पंजीकरण, जिसमें सम्मिलित हैं:

    • भूमि स्वामित्व का प्रमाण

    • खेत की लोकेशन (KML फाइल्स)

    • लगाए गए वृक्षों की प्रजातियां व विवरण

    • जियो-टैग्ड फोटोज

  • ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया द्वारा कटाई की अनुमति के लिए आवेदन।

  • प्रमाणित सत्यापन एजेंसियों द्वारा भौतिक निरीक्षण।

  • वन विभाग के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) इन एजेंसियों की निगरानी करेंगे।

महत्त्व और प्रभाव

  • घरेलू टिंबर (लकड़ी) उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा; आयात पर निर्भरता घटेगी।

  • वुड-बेस्ड इंडस्ट्रीज को स्थायी और ट्रेसेबल कच्चा माल उपलब्ध होगा।

  • निर्यात के नए अवसर खुलेंगे।

  • भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को समर्थन मिलेगा (पेड़ आवरण वृद्धि के माध्यम से)।

  • किसानों को उनकी ज़मीन का टिकाऊ आर्थिक उपयोग करने का अवसर मिलेगा।

National Doctor Day 2025: जानें क्यों मनाया जाता है नेशनल डॉक्टर्स डे?

हर साल भारत में 1 जुलाई को नेशनल डॉक्टर्स डे (National Doctor’s Day) मनाया जाता है। नेशनल डॉक्टर्स डे देश के उन सभी डॉक्टरों के लिए एक सम्मान के तौर पर मनाया जाता है, जो मानव जीवन को बचाने, रोगों से लड़ने और स्वस्थ समाज के निर्माण में अपना योगदान दे रहे हैं। भारत जैसे विविधताओं वाले देश में डॉक्टरों की भूमिका सिर्फ एक मरीज के इलाज तक सीमित नहीं है। बल्कि डॉक्टर समाज में जागरूकता लाने और पुरानी कुरीतियों को तोड़कर नया नजरिया देने का भी काम करते हैं।

यह दिन डॉ. बिधान चंद्र रॉय की स्मृति में 1991 में भारत सरकार द्वारा आरंभ किया गया था। डॉ. रॉय न केवल एक प्रसिद्ध चिकित्सक थे, बल्कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में भी देश सेवा में अग्रणी रहे।

इतिहास और पृष्ठभूमि

  • डॉ. बी.सी. रॉय का जन्म 1 जुलाई को हुआ था और उन्हीं की पुण्यतिथि भी यही दिन है।

  • वे भारतीय चिकित्सा परिषद (MCI) और भारतीय चिकित्सा संघ (IMA) के संस्थापक थे।

  • उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

  • उनका जीवन चिकित्सा नैतिकता, सेवा और नेतृत्व का प्रतीक था।

2025 की थीम: “Behind the Mask: Who Heals the Healers?”

  • इस वर्ष की थीम स्वास्थ्यकर्मियों की मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक भलाई पर केंद्रित है।

  • यह संदेश देती है कि डॉक्टर भी इंसान हैं—वे तनाव, थकावट और भावनात्मक दबाव से गुजरते हैं।

  • थीम का उद्देश्य है चिकित्सकों के लिए परामर्श, मानसिक स्वास्थ्य संसाधन और कार्य-जीवन संतुलन जैसी सहयोगी व्यवस्थाओं को बढ़ावा देना।

महत्त्व और उद्देश्य

  • यह दिन डॉक्टरों के निःस्वार्थ समर्पण, दैनिक चुनौतियों, और आपातकालीन स्थितियों में उनकी सतत सेवा को सम्मानित करता है।

  • साथ ही, यह समाज और नीति निर्माताओं को स्वास्थ्यकर्मियों के सुरक्षा, सम्मान, और संपर्क साधनों के बारे में जागरूक करता है।

डॉ. बी.सी. रॉय की विरासत

  • आधुनिक भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था की नींव रखने में उनकी भूमिका ऐतिहासिक है।

  • उन्होंने चिकित्सा शिक्षा, अस्पतालों और सार्वजनिक स्वास्थ्य संरचना को मजबूत किया।

  • उनका जीवन भावी पीढ़ी के डॉक्टरों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

डॉक्टर्स डे कैसे मनाएं?

  • धन्यवाद पत्र या हस्तलिखित संदेश भेजें।

  • सोशल मीडिया पर #DoctorsDay या #NationalDoctorsDay के साथ प्रशंसा साझा करें।

  • स्थानीय अस्पतालों के साथ मिलकर ऑनलाइन स्वास्थ्य सेमिनार आयोजित करें।

  • डॉक्टरों के लिए भोजन, देखभाल पैकेज या सहायता उपलब्ध कराएं।

  • अपने पारिवारिक डॉक्टर से मिलें या फोन करके आभार व्यक्त करें।

यह दिन क्यों महत्वपूर्ण है?

  • यह सिर्फ औपचारिक धन्यवाद नहीं है—बल्कि डॉक्टरों की भूमिका, उनके अधिकारों, और स्वस्थ स्वास्थ्य तंत्र की आवश्यकता को समझने का अवसर है।

  • यह दिन हमें प्रेरित करता है कि हम अपने स्वास्थ्य रक्षकों के लिए भी एक सुरक्षित, सहयोगी और सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करें।

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