महाराष्ट्र सरकार ने सार्वजनिक गणेशोत्सव को आधिकारिक राज्य उत्सव घोषित कर दिया है। सांस्कृतिक मामलों के मंत्री आशीष शेलार ने विधानसभा सत्र के दौरान यह घोषणा की। यह निर्णय महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे राज्य के सबसे बड़े सांस्कृतिक उत्सवों में से एक को सरकारी सहायता और धन प्राप्त होगा।
गणेशोत्सव को मिला राज्योत्सव का दर्जा
महाराष्ट्र विधानमंडल में एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए राज्य के सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार ने सार्वजनिक गणेशोत्सव को राज्योत्सव का दर्जा देने की घोषणा की। इसका मतलब यह है कि अब महाराष्ट्र सरकार प्रदेश भर में शहरों और गांवों में होने वाले बड़े गणेशोत्सव आयोजनों का खर्च वहन करेगी।
यह कदम महाराष्ट्र की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित और प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। सार्वजनिक गणेशोत्सव राज्य के सबसे बड़े और लोकप्रिय त्योहारों में से एक है, जो समाज को एकजुट करने और सांस्कृतिक चेतना को बढ़ाने का माध्यम बन चुका है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और सांस्कृतिक महत्व
मंत्री आशीष शेलार ने सभी को यह याद दिलाया कि स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य तिलक ने 1893 में सार्वजनिक गणेशोत्सव की शुरुआत की थी। उनका उद्देश्य था कि ब्रिटिश शासन के दौरान लोगों को एकजुट किया जाए और आज़ादी व राष्ट्रवाद की भावना को जागृत किया जाए।
शेलार ने कहा कि यह उत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह एकता का प्रतीक, मराठी भाषा के अभिमान और महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक भी है। उन्होंने कहा, “गणेशोत्सव सिर्फ एक त्योहार नहीं है – यह महाराष्ट्र की सांस्कृतिक शान का प्रतीक है।”
भविष्य के लिए क्या है इसका मतलब
सरकार द्वारा सार्वजनिक गणेशोत्सव को राज्य उत्सव घोषित किए जाने का अर्थ यह है कि अब महाराष्ट्र सरकार इस पर्व से जुड़ी प्रचार-प्रसार, व्यवस्थापन और खर्चों की ज़िम्मेदारी अपने हाथ में लेगी। इसमें स्थानीय मंडलों को सहायता, सजावट और सार्वजनिक आयोजनों के लिए सहयोग शामिल होगा।
इस घोषणा को विभिन्न सांस्कृतिक संगठनों और गणेश मंडलों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। इससे उम्मीद है कि 10 दिनों तक चलने वाले इस पर्व के दौरान पारंपरिक कला, संगीत और सामुदायिक एकता को और अधिक बढ़ावा मिलेगा।
तेलंगाना ने राज्य नेतृत्व – बैटरी निर्माण श्रेणी में भारत ऊर्जा भंडारण गठबंधन (IESA) उद्योग उत्कृष्टता पुरस्कार 2025 जीता है। यह पुरस्कार नई दिल्ली में आयोजित 11वें भारत ऊर्जा भंडारण सप्ताह (IESW) 2025 के दौरान प्रदान किया गया। यह सम्मान बैटरी निर्माण और स्वच्छ ऊर्जा समाधानों को बढ़ावा देने में तेलंगाना के प्रयासों को दर्शाता है।
बैटरी निर्माण में नेतृत्व के लिए पुरस्कार
IESA इंडस्ट्री एक्सीलेंस अवॉर्ड 2025 तेलंगाना सरकार को दिया गया, जिसे इलेक्ट्रॉनिक्स और ईवी एवं ईएसएस के निदेशक एस. के. शर्मा ने प्राप्त किया। यह सम्मान तेलंगाना राज्य द्वारा बैटरी उत्पादन और नई ऊर्जा तकनीकों के लिए मजबूत प्रणाली विकसित करने के प्रयासों को मान्यता देने के लिए दिया गया। यह पुरस्कार समारोह नई दिल्ली में आयोजित 11वें इंडिया एनर्जी स्टोरेज वीक (IESW) के दौरान हुआ, जो ऊर्जा और क्लीन-टेक क्षेत्र का एक प्रमुख आयोजन है।
तेलंगाना की ऊर्जा रणनीति
तेलंगाना उन्नत ऊर्जा निर्माण का एक उभरता हुआ केंद्र बन गया है, जिसमें बैटरी उत्पादन, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) असेंबली, और ऊर्जा भंडारण प्रणाली (Energy Storage Systems) शामिल हैं। इस विकास के पीछे राज्य सरकार की दूरदर्शी नीतियाँ हैं, जैसे कि:
तेलंगाना ईवी और एनर्जी स्टोरेज पॉलिसी
तेलंगाना अक्षय ऊर्जा नीति
राज्य सरकार ने बैटरी और ईवी क्षेत्रों में उद्योगों को आकर्षित करने के लिए विशेष औद्योगिक क्षेत्र (Industrial Zones) भी स्थापित किए हैं। इन पहलों के चलते तेलंगाना ने बड़े निवेश आकर्षित किए हैं और बैटरी निर्माण व ईवी कंपोनेंट्स के लिए एक पूर्ण सप्लाई चेन विकसित करने में सफलता पाई है।
आधिकारिक बयान और भविष्य की दिशा
तेलंगाना के सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार विभाग (IT, Electronics, and Communications Department) ने कहा कि यह पुरस्कार राज्य की नवाचार, बुनियादी ढांचे के विकास और हरित ऊर्जा (Green Energy) को दिए जा रहे सशक्त समर्थन का प्रमाण है। सरकार का लक्ष्य है कि तेलंगाना को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में राष्ट्रीय अग्रणी राज्य बनाया जाए, विशेष रूप से एनर्जी स्टोरेज और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उद्योग में। यह सम्मान आने वाले समय में और अधिक उद्योगों और निवेश को आकर्षित करेगा, जिससे तेलंगाना की नई ऊर्जा अर्थव्यवस्था (New Energy Economy) में स्थिति और भी मजबूत होगी।
भारत 2027 में शूटिंग विश्व कप और 2028 में जूनियर विश्व चैंपियनशिप की मेजबानी करेगा, इसकी घोषणा 10 जुलाई 2025 को नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने की। यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय निशानेबाजी खेल महासंघ (ISSF) द्वारा लिया गया। ये आयोजन भारत को वैश्विक निशानेबाजी प्रतियोगिताओं का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माने जा रहे हैं।
भारतीय निशानेबाजी को बड़ी मजबूती
NRAI के अनुसार, भारत को जिन प्रमुख प्रतियोगिताओं की मेजबानी का जिम्मा सौंपा गया है, वे इस प्रकार हैं:
जूनियर वर्ल्ड कप – सितंबर 2025
एशियन राइफल और पिस्टल चैंपियनशिप – फरवरी 2026
शूटिंग वर्ल्ड कप – 2027
वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप – 2028
इन आयोजनों से भारत के जूनियर और सीनियर निशानेबाजों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घरेलू मैदान पर अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, इस तरह की वैश्विक प्रतियोगिताओं की मेजबानी भारत में निशानेबाजी खेल को अंतरराष्ट्रीय पहचान और विकास प्रदान करेगी।
नई शूटिंग लीग की घोषणा
भारत नवंबर 2025 में दिल्ली में पहली बार शूटिंग लीग ऑफ इंडिया की शुरुआत करेगा। इस लीग में दुनिया के शीर्ष निशानेबाज एक अनोखे और रोमांचक फॉर्मेट में हिस्सा लेंगे। इसका उद्देश्य युवाओं के बीच शूटिंग को लोकप्रिय बनाना, खेल में नए प्रशंसक जोड़ना और देशभर में प्रतिभा को प्रोत्साहित करना है।
आधिकारिक प्रतिक्रियाएं और उद्देश्य
NRAI के अध्यक्ष कलिकेश सिंह देव ने कहा कि 2028 लॉस एंजेलेस ओलंपिक तक हर साल अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की मेजबानी भारतीय निशानेबाजों को उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा में प्रशिक्षण का अवसर देगी। उन्होंने कहा कि शूटिंग लीग इस खेल में एक नया और आकर्षक पहलू जोड़ेगी।
NRAI के महासचिव सुल्तान सिंह ने भारत सरकार, खेल मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण का समर्थन के लिए धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय शूटिंग कैलेंडर में एक प्रमुख गंतव्य बन चुका है।
भारतीय पुरुष फुटबॉल टीम फीफा विश्व रैंकिंग में छह स्थान नीचे खिसककर 133वें स्थान पर आ गई है। यह गिरावट जून में थाईलैंड और हांगकांग के खिलाफ दो हालिया हार के बाद आई है। यह दिसंबर 2016 के बाद से भारत की सबसे निचली रैंकिंग है, जिससे आगामी टूर्नामेंटों में टीम के भविष्य को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं।
भारत की फीफा रैंकिंग में बड़ी गिरावट
भारत की फीफा रैंकिंग में भारी गिरावट आई है, जो अब 127वें स्थान से फिसलकर 133वें स्थान पर पहुंच गई है। यह नई रैंकिंग गुरुवार, 10 जुलाई को जारी की गई। यह गिरावट जून में खेले गए दो मैचों के बाद हुई—भारत को 4 जून को एक दोस्ताना मुकाबले में थाईलैंड से 0-2 से हार का सामना करना पड़ा, और फिर एशियन कप क्वालिफायर में रैंकिंग में नीचे मौजूद हांगकांग से 0-1 से हार मिली।
इन हारों के बाद भारत के मुख्य कोच मैनोलो मार्केज़ ने अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) से आपसी सहमति से पद छोड़ दिया। भारत के रेटिंग पॉइंट्स भी घटकर 1132.03 से 1113.22 रह गए हैं। एशियाई देशों में भारत अब 46 में से 24वें स्थान पर है, जबकि जापान एशिया में शीर्ष पर है और विश्व रैंकिंग में 17वें स्थान पर काबिज है।
प्रदर्शन में गिरावट: भारतीय फुटबॉल के लिए चिंताजनक संकेत
भारत की फीफा रैंकिंग में हालिया गिरावट केवल दो हार का नतीजा नहीं है, बल्कि यह एक बड़ी समस्या की ओर इशारा करती है। कोच मैनोलो मार्केज़ के नेतृत्व में भारत ने अपने पिछले आठ अंतरराष्ट्रीय मैचों में से केवल एक ही जीता है — मार्च 2025 में मालदीव के खिलाफ। साल 2025 में अब तक भारत ने कुल चार अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं, जिनमें एक जीत, एक ड्रॉ और दो हार शामिल हैं।
एशियन कप 2027 की राह मुश्किल
इन कमजोर प्रदर्शनों ने भारत की एएफसी एशियन कप 2027 के लिए क्वालिफाई करने की संभावनाओं को भी खतरे में डाल दिया है। टीम को मजबूती देने के लिए इस साल की शुरुआत में पूर्व कप्तान सुनील छेत्री को फिर से टीम में शामिल किया गया, लेकिन उनका अनुभव भी टीम के हालात सुधारने में काम नहीं आ सका।
आगे क्या?
भारत का अगला अंतरराष्ट्रीय मुकाबला अक्टूबर 2025 में सिंगापुर के खिलाफ है, जो एशियन कप क्वालिफायर के तीसरे राउंड का हिस्सा होगा। हालिया नाकामी के बाद इस मैच को लेकर उम्मीदें भी अधिक हैं और टीम पर दबाव भी बहुत बड़ा है।
वैश्विक रैंकिंग में शीर्ष पर अर्जेंटीना
दुनिया की बात करें तो फीफा रैंकिंग में अर्जेंटीना पहले स्थान पर है, उसके बाद क्रमशः स्पेन, फ्रांस, इंग्लैंड, ब्राज़ील, पुर्तगाल, नीदरलैंड, बेल्जियम, जर्मनी, और क्रोएशिया टॉप 10 में हैं।
प्राजक्ता कोली, जिन्हें डिजिटल दुनिया में ‘मोस्टलीसेन’ (MostlySane) के नाम से जाना जाता है, को TIME100 क्रिएटर्स लिस्ट 2025 में शामिल किया गया है। यह सूची दुनिया के सबसे प्रभावशाली डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स को सम्मानित करती है। जुलाई 2025 में टाइम मैगज़ीन द्वारा घोषित इस सूची में प्राजक्ता एकमात्र भारतीय हैं जिन्हें स्थान मिला है। यह सम्मान उनकी एक क्रिएटर, अभिनेत्री और प्रभावशाली कहानीकार के रूप में वैश्विक पहचान और प्रभाव को दर्शाता है।
यूट्यूब से ग्लोबल मंच तक का सफर
प्राजक्ता कोली ने 2015 में यूट्यूब से अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने भारत की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर आधारित मज़ेदार वीडियो बनाकर लाखों दिल जीते। उनके चैनल ‘MostlySane’ को 70 लाख से अधिक लोग यूट्यूब पर और 80 लाख से ज़्यादा लोग इंस्टाग्राम पर फॉलो करते हैं। उनका कंटेंट हास्य और जीवन से जुड़े अनुभवों से भरपूर होता है, जिससे वे लोगों के साथ एक खास जुड़ाव बना पाईं।
डिजिटल क्रिएटर से एक्ट्रेस और लेखिका तक
प्राजक्ता ने डिजिटल कंटेंट से आगे बढ़ते हुए अभिनय में भी अपनी जगह बनाई। उन्होंने नेटफ्लिक्स की सीरीज़ Mismatched, बॉलीवुड फिल्मों जुगजुग जीयो और नीयत में अभिनय किया। साथ ही वे यूट्यूब ओरिजिनल्स शो Pretty Fit की होस्ट भी रही हैं। 2025 की शुरुआत में उन्होंने अपनी पहली किताब Too Good To Be True भी प्रकाशित की।
सिर्फ कंटेंट क्रिएटर ही नहीं, सामाजिक बदलाव की प्रेरक भी
प्राजक्ता कोली केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक बदलाव की एक मजबूत आवाज़ भी हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (UN), गेट्स फाउंडेशन, वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम और COP समिट जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर काम किया है। वे यूट्यूब की Creators for Change सीरीज़ का हिस्सा रही हैं, जिसमें वे मिशेल ओबामा के साथ नजर आईं और यह सीरीज़ Daytime Emmy Award से सम्मानित भी हुई।
प्राजक्ता को Forbes India की 30 अंडर 30 सूची और GQ India की 2025 की सबसे प्रभावशाली युवा भारतीयों की सूची में भी शामिल किया गया है। उनकी ये उपलब्धियां दिखाती हैं कि कैसे दक्षिण एशिया के डिजिटल क्रिएटर्स अब वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बना रहे हैं।
प्राजक्ता ने फैंस को कहा धन्यवाद
इस सम्मान के मिलने के बाद प्राजक्ता कोली ने इंस्टाग्राम पर एक भावुक पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा, “सिर्फ दो शब्द ज़हन में आ रहे हैं: धन्यवाद।” उन्होंने अपने दर्शकों, परिवार, टीम और अपनी 21 साल की उस खुद की भी तारीफ की, जिसने बिना किसी ठोस योजना के सिर्फ कहानियाँ सुनाने के जुनून के साथ यह सफर शुरू किया था।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने घोषणा की कि पिछले कुछ वर्षों में भारत की सौर ऊर्जा क्षमता में 4,000% की वृद्धि हुई है। नई दिल्ली में भारत ऊर्जा भंडारण सप्ताह (IESW) में बोलते हुए, उन्होंने कहा कि देश 227 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन तक पहुँच गया है और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की राह पर है। यह भारत के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य के लिए एक बड़ा कदम है।
भारत की सौर और नवीकरणीय ऊर्जा में प्रगति
IESW 2025 कार्यक्रम में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत शायद पहला G20 देश होगा जो पेरिस समझौते में तय किए गए जलवायु लक्ष्यों को समय से पहले पूरा कर लेगा। उन्होंने सौर पैनल निर्माण में हुई बड़ी प्रगति की सराहना की और बताया कि पिछले 10 वर्षों में भारत की सोलर मॉड्यूल निर्माण क्षमता 38 गुना और सोलर सेल निर्माण क्षमता 21 गुना बढ़ी है। उन्होंने पीएम सूर्य घर योजना का भी ज़िक्र किया, जिसका लक्ष्य 1 करोड़ घरों को रूफटॉप सोलर पैनल से जोड़ना है। इसके अलावा, पीएम कुसुम योजना की सफलता को भी रेखांकित किया गया, जो किसानों को सोलर पंप उपलब्ध कराने पर केंद्रित है। इन पहलों से यह स्पष्ट होता है कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और हरित ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में एक मजबूत उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।
भविष्य की वृद्धि के लिए बैटरी भंडारण और नवाचार महत्वपूर्ण
पीयूष गोयल ने नवीकरणीय ऊर्जा को 24×7 सपोर्ट देने के लिए ऊर्जा भंडारण पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि बैटरियों, पंप्ड स्टोरेज, और हाइड्रो सिस्टम्स की भूमिका स्वच्छ ऊर्जा को लगातार उपलब्ध कराने में बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने ₹1 लाख करोड़ का नवाचार कोष (Innovation Fund) मंजूर किया है, जो सॉलिड-स्टेट और हाइब्रिड बैटरी जैसी अगली पीढ़ी की तकनीकों में अनुसंधान को प्रोत्साहित करेगा। सरकार ने उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (PLI) भी शुरू की है, जिसका उद्देश्य एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) के निर्माण को भारत में बढ़ावा देना है।
मजबूत सप्लाई चेन और संपूर्ण वैल्यू चेन विकास की जरूरत
मंत्री ने उद्योगों से आग्रह किया कि वे ऐसी लचीली आपूर्ति श्रृंखलाएं बनाएं जो किसी एक देश या क्षेत्र पर निर्भर न हों। उन्होंने ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र के हर पहलू — जैसे कच्चे माल, बैटरी रीसायक्लिंग, सेमीकंडक्टर, और चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर — के विकास की बात कही। उन्होंने कहा कि इस समग्र विकास से भारत ऊर्जा आत्मनिर्भर बनेगा और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी में वैश्विक नेता के रूप में उभरेगा। उन्होंने उद्योग, शोधकर्ता और नीति निर्माताओं के बीच सहयोग की आवश्यकता पर भी बल दिया।
प्रगति का मंच: इंडिया एनर्जी स्टोरेज वीक
इंडिया एनर्जी स्टोरेज वीक एक वार्षिक आयोजन है जो ऊर्जा, बैटरी, ई-मोबिलिटी, और हरित हाइड्रोजन क्षेत्रों के नेताओं को एक मंच पर लाता है। इस वर्ष का कार्यक्रम यशोभूमि, नई दिल्ली में आयोजित हुआ, जिसमें स्वच्छ ऊर्जा समाधान, नई तकनीकें, और सरकारी नीतियों को प्रदर्शित किया गया। श्री गोयल ने आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि यह आयोजन सीखने और सहयोग का एक शानदार अवसर प्रदान करता है, जो भारत को 2030 तक 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य तक पहुंचने में मदद करेगा।
नेशनल एजुकेशन सोसाइटी फॉर ट्राइबल स्टूडेंट्स (नेस्ट्स) ने यूनिसेफ इंडिया, टाटा मोटर्स और एक्स-नवोदयन फाउंडेशन के साथ महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों का उद्देश्य देशभर के एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (EMRSs) में पढ़ने वाले 1.3 लाख से अधिक आदिवासी छात्रों की शिक्षा, जीवन कौशल और रोजगार प्रशिक्षण को मज़बूत करना है। यह पहल आदिवासी युवाओं को एक बेहतर भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
छात्रों की क्षमताएं पहचानने में मदद
नए शुरू किए गए प्रमुख कार्यक्रमों में से एक है TALASH (Tribal Aptitude, Life Skills and Self-Esteem Hub), जिसे नेस्ट्स ने यूनिसेफ के सहयोग से तैयार किया है। यह डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म छात्रों को अपनी प्रतिभाएं पहचानने, आत्मविश्वास बढ़ाने और सही करियर चुनने में मदद करेगा। TALASH में NCERT के ‘तमन्ना’ मॉडल जैसे विशेष परीक्षणों का उपयोग किया जाएगा, जिनके आधार पर हर छात्र के लिए एक कैरियर कार्ड तैयार किया जाएगा। इस कार्ड में छात्र की क्षमताओं के अनुसार उपयुक्त नौकरियों के सुझाव होंगे। इस प्लेटफॉर्म पर करियर काउंसलिंग, जीवन कौशल से जुड़ी कक्षाएं और शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण टूल्स भी उपलब्ध होंगे ताकि वे छात्रों को बेहतर मार्गदर्शन दे सकें। यह कार्यक्रम पहले ही 75 स्कूलों में शुरू हो चुका है और 2025 के अंत तक यह देश के 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों के सभी EMRS में लागू कर दिया जाएगा।
टाटा मोटर्स के साथ नौकरी प्रशिक्षण
नेस्ट्स (NESTS) ने टाटा मोटर्स के साथ एक पाँच साल का समझौता किया है, जिसके तहत कक्षा 12 पास ईएमआरएस (EMRS) छात्रों को ‘कौशल्य प्रोग्राम’ से जोड़ा जाएगा। यह एक “सीखो और कमाओ” कार्यक्रम है जिसमें छात्र इंजीनियरिंग में डिप्लोमा की पढ़ाई करेंगे और साथ ही उन्हें वास्तविक कार्य अनुभव भी मिलेगा। इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए छात्रों की आयु 18 से 23 वर्ष के बीच होनी चाहिए और कक्षा 10 में कम से कम 60% अंक प्राप्त होना अनिवार्य है। प्रतिभागियों को मासिक वजीफा, भोजन, परिवहन, यूनिफॉर्म, बीमा, और BITS पिलानी जैसी संस्थाओं के सहयोग से आगे पढ़ाई का अवसर भी मिलेगा। टाटा मोटर्स इन छात्रों को “वन ट्रेनी, वन जॉब” वादे के तहत अपनी फैक्ट्रियों या सर्विस सेंटर्स में रोजगार दिलाने में मदद करेगा।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोचिंग
तीसरी पहल में उन मेधावी विज्ञान छात्रों के लिए विशेष कोचिंग दी जाएगी जो IIT-JEE या NEET जैसी परीक्षाओं की तैयारी करना चाहते हैं। यह रिहायशी कोचिंग केंद्र नेस्ट्स (NESTS), टाटा मोटर्स और एक्स-नवोदयन फाउंडेशन के सहयोग से चांकापुर (महाराष्ट्र) और चिंतापल्ली (आंध्र प्रदेश) में चलाए जाएंगे। कक्षा 11 और 12 के छात्रों को केंद्रों में केंद्रित सहायता दी जाएगी, जबकि कक्षा 9 से ऊपर के छात्र जो डिजिटल ईएमआरएस में पढ़ते हैं, उन्हें ऑनलाइन कोचिंग दी जाएगी—जैसे कि ओलंपियाड, एनटीएसई और केवीपीवाई जैसी परीक्षाओं के लिए। इससे छात्र इंजीनियरिंग और मेडिकल करियर की बेहतर तैयारी कर सकेंगे।
आदिवासी युवाओं के लिए सरकार की सोच
नेस्ट्स के आयुक्त अजीत कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि ये साझेदारियाँ आदिवासी छात्रों को उनकी पूरी क्षमता तक पहुँचने का अवसर देने के प्रयास का हिस्सा हैं। उन्होंने बताया कि ये कार्यक्रम सीखने की खाई को पाटने, आत्मविश्वास बढ़ाने, और भविष्य के नेतृत्वकर्ताओं को गढ़ने में मदद करेंगे। नेस्ट्स पूरे भारत में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) चलाता है, ताकि आदिवासी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। अब यूनिसेफ, टाटा मोटर्स और अन्य भागीदारों की मदद से ये प्रयास और अधिक युवाओं तक पहुँचेंगे और उनके जीवन में वास्तविक बदलाव लाएंगे।
राष्ट्रीय आदिवासी छात्र शिक्षा समिति (नेस्ट्स) और यूनिसेफ इंडिया ने आदिवासी छात्रों की शिक्षा और व्यक्तिगत विकास में सहयोग के लिए एक नया कार्यक्रम, “तलाश” शुरू किया है। यह पहल 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) में पढ़ने वाले छात्रों की मदद करेगी। इसका उद्देश्य आत्मविश्वास और जीवन कौशल का विकास करना और छात्रों को सही करियर चुनने में मार्गदर्शन प्रदान करना है।
तलाश क्या है?
‘तलाश’ का पूरा नाम Tribal Aptitude, Life Skills and Self-Esteem Hub है। यह भारत का पहला राष्ट्रीय कार्यक्रम है जो विशेष रूप से जनजातीय छात्रों के लिए बनाया गया है। यह कार्यक्रम देशभर के ईएमआरएस (एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय) में पढ़ने वाले 1.38 लाख से अधिक छात्रों को लाभ पहुंचाएगा। यह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जहाँ छात्र अपने कौशल और रुचियों को जानने के लिए टेस्ट दे सकते हैं, करियर सुझाव प्राप्त कर सकते हैं, जीवन कौशल सीख सकते हैं और प्रशिक्षित शिक्षकों से मार्गदर्शन ले सकते हैं। ‘तलाश’ नाम का अर्थ है खोज — अपनी आंतरिक शक्ति, क्षमताओं और सपनों की खोज। यह कार्यक्रम पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों के मानसिक और भावनात्मक विकास को भी प्रोत्साहित करता है।
छात्रों और शिक्षकों के लिए उपकरण और समर्थन
‘तलाश’ प्लेटफ़ॉर्म में एनसीईआरटी की तमन्ना पहल पर आधारित साइकोमेट्रिक टेस्ट (मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन) का उपयोग किया गया है, जिससे छात्र यह जान सकें कि वे किन क्षेत्रों में अच्छे हैं। इस टेस्ट के बाद हर छात्र को एक करियर कार्ड मिलता है, जिसमें उसके लिए उपयुक्त करियर विकल्पों का सुझाव दिया जाता है। छात्रों को करियर काउंसलिंग के साथ-साथ जीवन कौशल की ट्रेनिंग भी दी जाएगी, जैसे – समस्या सुलझाने की क्षमता, संवाद कौशल और भावनाओं को समझना और नियंत्रित करना। ये सभी बातें उन्हें आत्मविश्वासी बनाएंगी और भविष्य के लिए तैयार करेंगी। शिक्षकों को भी एक विशेष ई-लर्निंग सिस्टम के माध्यम से प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि वे छात्रों का बेहतर मार्गदर्शन कर सकें। अब तक 75 स्कूलों के 189 शिक्षक इस प्रशिक्षण में भाग ले चुके हैं और अपने-अपने विद्यालयों में छात्रों को गाइड करना शुरू कर चुके हैं।
रोलआउट योजना और भविष्य की दिशा
‘तलाश’ को चरणबद्ध तरीके से सभी एकलव्य मॉडल स्कूलों में लागू किया जाएगा ताकि इसे आसानी से अपनाया जा सके। योजना के अनुसार, वर्ष 2025 के अंत तक यह सभी स्कूलों में पूरी तरह से शुरू हो जाएगा। छात्रों, शिक्षकों और विशेषज्ञों से मिले फीडबैक के आधार पर इस प्लेटफॉर्म में समय-समय पर सुधार भी किए जाएंगे।
एनईएसटीएस के आयुक्त अजीत कुमार श्रीवास्तव ने कहा: “तलाश हमारे वादे का प्रतीक है कि हम जनजातीय छात्रों को उनकी पूरी क्षमता तक पहुँचने का अवसर देना चाहते हैं। हमारा लक्ष्य शिक्षा में खाई को पाटना और भविष्य के मजबूत नेता तैयार करना है।” ‘तलाश’ राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के उद्देश्यों से भी जुड़ा है, जिसका लक्ष्य सभी छात्रों को समान अवसर देना और उनके सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देना है।
हर साल 11 जुलाई को मनाया जाने वाला विश्व जनसंख्या दिवस केवल बढ़ती वैश्विक जनसंख्या की याद नहीं दिलाता, बल्कि यह एक ऐसा वैश्विक मंच है जो स्वास्थ्य, पर्यावरण, विकास और मानवाधिकारों पर जनसंख्या वृद्धि के प्रभावों को उजागर करता है। वर्ष 2025 में, जब विश्व की जनसंख्या 8.1 अरब के पार पहुंच चुकी है और भारत विश्व का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन गया है, इस दिन का केंद्र बिंदु युवाओं का सशक्तिकरण, प्रजनन अधिकार और सतत जीवन शैली को बढ़ावा देना है। यह दिवस 1989 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा शुरू किया गया था। इसकी प्रेरणा 11 जुलाई 1987 को फाइव बिलियन डे से मिली थी—जिस दिन वैश्विक जनसंख्या पहली बार 5 अरब तक पहुंची थी। विश्व जनसंख्या दिवस हमें याद दिलाता है कि जनसंख्या केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि यह हमारे संसाधनों, नीतियों और भविष्य की दिशा को तय करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक है।
उत्पत्ति और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
स्थापनाकर्ता: संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) प्रथम आयोजन: 11 जुलाई 1989 प्रेरणा:फाइव बिलियन डे — 11 जुलाई 1987 को जब वैश्विक जनसंख्या 5 अरब के आंकड़े तक पहुंची थी।
विश्व जनसंख्या दिवस की शुरुआत इसलिए की गई थी ताकि जनसंख्या से जुड़ी चुनौतियों की गंभीरता पर वैश्विक ध्यान केंद्रित किया जा सके और उनके लिए सतत एवं दीर्घकालिक समाधान खोजे जा सकें। यह दिन हमें याद दिलाता है कि बढ़ती जनसंख्या केवल आंकड़ों का विषय नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण, रोजगार और संसाधनों पर गहरा प्रभाव डालती है।
विश्व जनसंख्या दिवस 2025 की थीम
थीम:“युवाओं को सशक्त बनाना ताकि वे एक न्यायसंगत और आशावादी दुनिया में अपनी पसंद के परिवार बना सकें।”
इस वर्ष की थीम का केंद्रबिंदु है — दुनिया की अब तक की सबसे बड़ी युवा पीढ़ी। यह थीम युवाओं को उनके प्रजनन संबंधी अधिकारों, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और समान अवसरों तक पहुँच सुनिश्चित करने की वकालत करती है। संदेश स्पष्ट है: जनसंख्या से जुड़ी नीतियों और चर्चाओं में युवाओं को केंद्र में रखा जाना चाहिए, क्योंकि लैंगिक समानता, बेहतर स्वास्थ्य और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति में उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
मुख्य उद्देश्य
जनसंख्या वृद्धि के प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाना — आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय क्षेत्रों पर इसके प्रभाव को समझाना।
प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकारों को बढ़ावा देना, विशेषकर युवाओं और महिलाओं के बीच।
लैंगिक समानता को बढ़ावा देना, जिससे महिलाएं परिवार नियोजन से जुड़े निर्णय खुद ले सकें।
सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को बढ़ावा देना:
SDG 3: सभी के लिए अच्छा स्वास्थ्य और भलाई
SDG 5: लैंगिक समानता और सभी महिलाओं व लड़कियों को सशक्त बनाना
वैश्विक जनसंख्या रुझान (2025 और आगे)
वर्तमान वैश्विक जनसंख्या (2025): 8.1 अरब से अधिक
2030 तक अनुमानित जनसंख्या: 8.5 अरब
2050 तक अनुमानित जनसंख्या: 9.7 अरब
प्रमुख पड़ाव:
1800 के दशक में: 1 अरब
2011 में: 7 अरब
शहरीकरण:
2007 से, ग्रामीणों की तुलना में अधिक लोग शहरी क्षेत्रों में रहने लगे हैं।
2050 तक, वैश्विक जनसंख्या का 66% हिस्सा शहरी इलाकों में रहेगा।
भारत: अब विश्व का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश
2025 में भारत की जनसंख्या: लगभग 1.46 अरब
चीन से अधिक: चीन की जनसंख्या 2025 में लगभग 1.41 अरब
इस जनसांख्यिकीय बदलाव के कारण भारत को वैश्विक नीतिगत चर्चाओं में केंद्रीय भूमिका निभानी होगी – खासकर रोज़गार, शिक्षा, शहरी नियोजन और युवा विकास जैसे विषयों पर। यह बदलाव प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं, बुनियादी ढांचे, नौकरियों और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में त्वरित सुधारों की मांग करता है।
2025 में विश्व के 10 सर्वाधिक जनसंख्या वाले देश
स्थान
देश
जनसंख्या
1
भारत
1,46,38,65,525
2
चीन
1,41,60,96,094
3
संयुक्त राज्य अमेरिका
34,72,75,807
4
इंडोनेशिया
28,57,21,236
5
पाकिस्तान
25,52,19,554
6
नाइजीरिया
23,75,27,782
7
ब्राज़ील
21,28,12,405
8
बांग्लादेश
17,56,86,899
9
रूस
14,39,97,393
10
इथियोपिया
13,54,72,051
2025 में जनसंख्या घनत्व: भीड़भाड़ और चुनौतियाँ
अत्यधिक जनसंख्या घनत्व वाले क्षेत्रों में आवास, परिवहन, पर्यावरण और स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर दबाव पड़ता है। नीचे 2025 में सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व वाले 5 देश/क्षेत्र दिए गए हैं:
स्थान
देश/क्षेत्र
जनसंख्या घनत्व (लोग/किमी²)
1
मकाऊ (Macau)
21,946
2
मोनाको (Monaco)
19,171
3
सिंगापुर (Singapore)
8,177
4
हांगकांग (Hong Kong)
7,044
5
जिब्राल्टर (Gibraltar)
5,901
ये क्षेत्र आकार में छोटे होने के बावजूद अत्यधिक जनसंख्या वाले हैं, जिससे शहरी सेवाओं पर बहुत दबाव रहता है।
भारतीय राज्यों की जनसंख्या (2011 की जनगणना के अनुसार)
स्थान
राज्य
जनसंख्या (2011)
1
उत्तर प्रदेश
19.98 करोड़
2
महाराष्ट्र
11.24 करोड़
3
बिहार
10.41 करोड़
4
पश्चिम बंगाल
9.12 करोड़
5
मध्य प्रदेश
7.26 करोड़
अनुमान है कि 2025 तक इन राज्यों की जनसंख्या में और वृद्धि हुई है, जिससे रोजगार, आवास और स्वास्थ्य सेवाओं की मांग भी बढ़ी है।
2025 में सबसे अधिक और सबसे कम जनसंख्या वाले राज्य
सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य: उत्तर प्रदेश – 24.1 करोड़ (241 मिलियन)
सबसे कम जनसंख्या वाला राज्य: सिक्किम – लगभग 7.03 लाख (703,000)
यह जनसंख्या असमानता क्षेत्र-विशेष नीति निर्माण और संसाधनों के संतुलित वितरण की आवश्यकता को दर्शाती है।
2025 में युवाओं के सामने प्रमुख चुनौतियाँ
हालाँकि वैश्विक प्रजनन दर में गिरावट आई है, लेकिन विकासशील देशों में करोड़ों युवा अब भी प्रजनन स्वायत्तता (Reproductive Autonomy) से वंचित हैं। उनके सामने कई समस्याएँ हैं:
आर्थिक अस्थिरता
स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की कमी
जलवायु चिंता और मानसिक तनाव
सीमित शिक्षा और रोजगार के अवसर
सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता
UNFPA के अनुसार, लगभग 20% वयस्कों को लगता है कि वे अपनी पसंद की संख्या में बच्चों का पालन-पोषण नहीं कर पाएंगे।
क्यों महत्वपूर्ण है विश्व जनसंख्या दिवस 2025?
यह दिन हमें नीति निर्माताओं और समाज को निम्नलिखित संदेश देने के लिए प्रेरित करता है:
युवाओं को शिक्षा और निर्णय की स्वतंत्रता से सशक्त बनाना
सभी के लिए प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुँच सुनिश्चित करना
लंदन के लॉर्ड्स स्टेडियम स्थित एमसीसी म्यूज़ियम में 10 जुलाई 2025 को सचिन तेंदुलकर का चित्र (पोर्ट्रेट) अनावरण किया गया। यह चित्र प्रसिद्ध ब्रिटिश कलाकार स्टुअर्ट पियर्सन राइट द्वारा बनाया गया है। यह कार्यक्रम भारत और इंग्लैंड के बीच तीसरे टेस्ट मैच से पहले आयोजित किया गया, और यह पल क्रिकेट के इस महान खिलाड़ी के लिए बेहद भावुक क्षण था। यह सम्मान तेंदुलकर के लिए विशेष है, क्योंकि इंग्लैंड में खेले गए उनके कई मुकाबले उनकी यादों में बसे हुए हैं। लॉर्ड्स में उनका चित्र लगना न केवल उनकी उपलब्धियों की सराहना है, बल्कि यह क्रिकेट इतिहास में उनके योगदान को भी अमर करता है।
लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड: एक गौरवपूर्ण क्षण
क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड स्थित एमसीसी म्यूज़ियम में भारत के क्रिकेट महानायक सचिन तेंदुलकर का चित्र लगना एक गर्वपूर्ण क्षण रहा। यह चित्र प्रसिद्ध ब्रिटिश पोर्ट्रेट कलाकार स्टुअर्ट पियर्सन राइट ने बनाया है। चित्र के अनावरण से पहले तेंदुलकर ने भारत और इंग्लैंड के बीच टेस्ट मैच की शुरुआत करने के लिए परंपरागत घंटी भी बजाई।
तेंदुलकर ने अपनी खुशी ज़ाहिर करते हुए कलाकार की प्रशंसा की और कहा, “यह चित्र आपसे संवाद करता है। स्टुअर्ट में कला के माध्यम से भावनाएं व्यक्त करने की अद्भुत प्रतिभा है।” इस समारोह में कई क्रिकेट प्रेमी और गणमान्य अतिथि मौजूद थे, जिससे यह पल और भी यादगार बन गया।
सचिन की इंग्लैंड से जुड़ी यादें
सचिन तेंदुलकर ने इंग्लैंड से अपने गहरे जुड़ाव को साझा किया। उन्होंने बताया कि वे पहली बार 1980 के दशक के अंत में किशोरावस्था में कैलाश गट्टानी के स्टार क्रिकेट क्लब के साथ इंग्लैंड आए थे। बाद में, उन्होंने मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर अपना पहला टेस्ट शतक भी बनाया था।
लॉर्ड्स से जुड़ी यादें ताज़ा करते हुए तेंदुलकर ने बताया कि 1988-89 में वे पहली बार लॉर्ड्स आए थे और तब उन्होंने लॉर्ड्स पवेलियन के सामने एक तस्वीर खिंचवाई थी। अब सालों बाद उसी पवेलियन के भीतर उनका चित्र लगना उनके लिए एक भावुक क्षण रहा। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “ऐसा लग रहा है जैसे ज़िंदगी का एक चक्र पूरा हो गया हो।”
शुभमन गिल की कप्तानी की सराहना
समारोह के दौरान तेंदुलकर ने भारतीय टीम के नए कप्तान शुभमन गिल की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि गिल शांत, आत्मविश्वासी और निर्णय लेने में समझदार हैं। तेंदुलकर ने यह भी कहा कि शुभमन की अच्छी बल्लेबाज़ी का उनकी कप्तानी पर सकारात्मक असर पड़ता है।
उन्होंने आगे कहा, “जब कप्तान खुद अच्छा खेल रहा होता है, तो वह टीम के लिए बेहतर फैसले ले पाता है। शुभमन ने टीम को बहुत अच्छे ढंग से संभाला है।”