इथेनॉल को समझना: संरचना, उपयोग और लाभ

एथेनॉल, जिसे सामान्य रूप से एथिल अल्कोहल (Ethyl Alcohol) कहा जाता है, दुनिया में सबसे अधिक उपयोग होने वाले अल्कोहल्स में से एक है। यह मादक पेयों का प्रमुख घटक होने के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्र और नवीकरणीय ऊर्जा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सरकारी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों और जिज्ञासु पाठकों के लिए एथेनॉल की संरचना, उपयोग और लाभ जानना आवश्यक है, क्योंकि ऊर्जा, स्वास्थ्य और उद्योग से जुड़े प्रश्न परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाते हैं।

एथेनॉल क्या है?

एथेनॉल एक साधारण अल्कोहल है जिसका रासायनिक सूत्र C₂H₅OH है। यह साफ, रंगहीन और वाष्पशील द्रव है जिसकी एक विशिष्ट गंध होती है। इसे स्वाभाविक रूप से खमीर द्वारा शर्करा के किण्वन से बनाया जाता है और यह मानव जाति को ज्ञात सबसे पुराने अल्कोहल्स में से एक है।

एथेनॉल के मुख्य गुण 

  • रासायनिक सूत्र: C₂H₅OH

  • आणविक भार: 46.07 g/mol

  • क्वथनांक (Boiling Point): 78.37 °C

  • पानी में घुलनशील होने के कारण बहुउपयोगी

एथेनॉल के प्रमुख उपयोग 

  1. मादक पेय (Alcoholic Beverages)

    • बीयर, वाइन और स्पिरिट्स जैसे पेयों में नशे का मुख्य घटक।

    • नियंत्रित मात्रा में सेवन इसे मनोरंजन का माध्यम बनाता है।

  2. ईंधन और ऊर्जा (Fuel and Energy)

    • एथेनॉल का उपयोग जैव ईंधन (Biofuel) के रूप में किया जाता है।

    • पेट्रोल के साथ मिलाकर (जैसे E10, E20) इथेनॉल मिश्रित ईंधन बनाया जाता है।

    • भारत के Ethanol Blending Program का हिस्सा, जो ऊर्जा सुरक्षा और आयातित तेल पर निर्भरता कम करने में मदद करता है।

  3. औद्योगिक उपयोग (Industrial Applications)

    • पेंट, परफ्यूम और दवाओं के उत्पादन में विलायक (Solvent)।

    • कॉस्मेटिक्स, वार्निश और क्लीनिंग प्रोडक्ट्स के निर्माण में आवश्यक।

  4. चिकित्सा और स्वच्छता (Medical and Sanitation)

    • सैनिटाइज़र और डिसइंफेक्टेंट्स का मुख्य घटक।

    • एंटीसेप्टिक के रूप में बैक्टीरिया और वायरस को नष्ट करता है।

    • कई दवाओं में विलायक और संरक्षक के रूप में प्रयोग।

एथेनॉल के लाभ 

  1. नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत

    • पेट्रोलियम की तरह सीमित नहीं; गन्ना, मक्का और अनाज जैसी बायोमास फसलों से उत्पादित

    • टिकाऊ और पर्यावरण-हितैषी।

  2. पर्यावरणीय लाभ

    • जीवाश्म ईंधन की तुलना में स्वच्छ जलन (Cleaner Combustion)।

    • कार्बन मोनोऑक्साइड और हानिकारक गैसों का उत्सर्जन कम।

  3. आर्थिक लाभ

    • किसानों के लिए गन्ना व मक्का जैसी फसलों की मांग बढ़ाता है।

    • भारत जैसे देशों का क्रूड ऑयल आयात बिल घटाता है।

  4. सार्वजनिक स्वास्थ्य लाभ

    • स्वच्छता और हाइजीन में अहम भूमिका, खासकर COVID-19 महामारी के दौरान।

चुनौतियाँ और चिंताएँ 

  • मादक पेयों का अत्यधिक सेवन स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है (जैसे – लिवर डैमेज)।

  • बड़े पैमाने पर उत्पादन से खाद्य सुरक्षा प्रभावित हो सकती है यदि कृषि संसाधन भोजन से हटकर ईंधन उत्पादन में लगें।

  • भंडारण और परिवहन में सावधानी आवश्यक, क्योंकि एथेनॉल अत्यधिक ज्वलनशील है।

अखिल भारतीय थल सैनिक शिविर 2025 का दिल्ली में समापन

भारत में राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) के कैलेंडर का एक सबसे प्रतिष्ठित आयोजन, अखिल भारतीय थल सैनिक शिविर 2025, 11 सितंबर 2025 को डीजीएनसीसी कैंप, दिल्ली कैंट में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस 12 दिवसीय शिविर में पूरे देश के 17 एनसीसी निदेशालयों से 1,547 कैडेट्स ने भाग लिया। शिविर के दौरान कैडेट्स की शारीरिक क्षमता, मानसिक सजगता और नेतृत्व कौशल की कड़ी परीक्षा ली गई।

शिविर की प्रमुख झलकियाँ

इस दौरान कई प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं, जिनमें शामिल थीं –

  • हथियार संचालन एवं फायरिंग – सटीकता और नियंत्रण की जाँच

  • नक्शा पढ़ना, दूरी का आकलन एवं फील्ड सिग्नल – दिशा-निर्देशन व युद्धक्षेत्र संचार के लिए आवश्यक कौशल

  • स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी प्रतियोगिताएँ – फील्ड परिस्थितियों और व्यक्तिगत स्वास्थ्य की समझ की परख

इन गतिविधियों का उद्देश्य कैडेट्स में अनुशासन, रणनीतिक सोच और टीमवर्क जैसी मूलभूत NCC मूल्यों को विकसित करना था।

थल सैनिक शिविर 2025 के विजेता

समापन समारोह में लेफ्टिनेंट जनरल गुरबीरपाल सिंह, महानिदेशक एनसीसी ने कैडेट्स के प्रयासों की सराहना की और विजेता निदेशालयों को पुरस्कृत किया।

  • बालक वर्ग
    प्रथम स्थान – पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश एवं चंडीगढ़ निदेशालय
    द्वितीय स्थान – आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना निदेशालय

  • बालिका वर्ग
    प्रथम स्थान – कर्नाटक एवं गोवा निदेशालय
    द्वितीय स्थान – दिल्ली निदेशालय

नेतृत्व और प्रेरणा का पाठ

अपने संबोधन में ले. जन. गुरबीरपाल सिंह ने कहा कि यह 12 दिवसीय अनुभव कैडेट्स के व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन की मज़बूत नींव साबित होगा। उन्होंने शिविर से मिलने वाले पाठों पर बल दिया, जैसे –

  • अनुशासन और नियमों का सम्मान

  • राष्ट्र सेवा का सम्मान

  • साहस और रोमांच का अनुभव

  • नेतृत्व क्षमता और साथियों के साथ सौहार्द

उन्होंने इस अवसर पर एनसीसी को विश्व का सबसे बड़ा वर्दीधारी युवा संगठन बताते हुए, इसे राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनाने वाला मंच बताया।

परीक्षा हेतु मुख्य तथ्य

  • आयोजन का नाम: अखिल भारतीय थल सैनिक शिविर 2025

  • स्थान: डीजीएनसीसी कैंप, दिल्ली कैंट

  • अवधि: 12 दिन (समापन – 11 सितंबर 2025)

  • प्रतिभागी: 17 निदेशालयों से 1,547 कैडेट्स

भारत घरेलू वित्त और कृषि पर राष्ट्रीय सर्वेक्षण करेगा

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अंतर्गत आने वाला राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) जुलाई 2026 से जून 2027 के बीच दो प्रमुख राष्ट्रीय सर्वेक्षण आयोजित करेगा – संपूर्ण भारत ऋण एवं निवेश सर्वेक्षण (AIDIS) और कृषि परिवार स्थिति मूल्यांकन सर्वेक्षण (SAS)। ये दोनों सर्वेक्षण राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) का हिस्सा हैं, जो 1950 से भारत की सामाजिक-आर्थिक संरचना को समझने का प्रमुख साधन रहा है।

AIDIS: भारत के घरेलू वित्तीय परिदृश्य को समझना

संपूर्ण भारत ऋण एवं निवेश सर्वेक्षण (AIDIS) भारत के सबसे पुराने और महत्वपूर्ण सर्वेक्षणों में से एक है, जो घरेलू वित्त पर केंद्रित है। इसकी शुरुआत 1951–52 में अखिल भारतीय ग्रामीण ऋण सर्वेक्षण से हुई थी, और 1961–62 से यह ऋण और निवेश पैटर्न पर व्यापक सर्वेक्षण बन गया। इसका हालिया दौर 2019 में (77वें NSS राउंड के अंतर्गत) हुआ था।

AIDIS के प्रमुख फोकस क्षेत्र

  • परिवारों की ऋणग्रस्तता का स्तर और स्रोत

  • ग्रामीण एवं शहरी परिवारों में संपत्ति स्वामित्व के पैटर्न

  • संपत्ति का वितरण और वित्तीय असमानता

  • औपचारिक एवं अनौपचारिक ऋण बाजारों तक पहुँच

  • राष्ट्रीय खातों, RBI की नीतियों और वित्तीय नियोजन के लिए आवश्यक आँकड़े

इस सर्वेक्षण से प्राप्त आंकड़े RBI, नीति आयोग, केंद्र और राज्य सरकारों के लिए बेहद अहम होते हैं, विशेषकर क्रेडिट योजनाएँ और वित्तीय समावेशन रणनीतियाँ बनाने में।

SAS: कृषि परिवारों की वास्तविक स्थिति को समझना

कृषि परिवार स्थिति मूल्यांकन सर्वेक्षण (SAS) कृषि परिवारों की आर्थिक दशा की गहन जानकारी देता है और ग्रामीण जीवन व चुनौतियों का वास्तविक परिदृश्य प्रस्तुत करता है। इसकी शुरुआत 2003 में हुई थी और 2013 एवं 2019 में इसे काफी व्यापक बनाया गया।

SAS के मुख्य विषय

  • कृषि परिवारों की आय और व्यय

  • ऋणग्रस्तता और क्रेडिट की उपलब्धता

  • भूमि, पशुधन और संपत्ति का स्वामित्व

  • फसल और पशुपालन उत्पादन संबंधी आँकड़े

  • कृषि तकनीक का उपयोग और सतत प्रथाओं का अपनाना

  • सरकारी योजनाओं और फसल बीमा की पहुँच और प्रभावशीलता

यह सर्वेक्षण कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, नीति आयोग और शोधकर्ताओं के लिए बेहद उपयोगी है, क्योंकि यह नीतियों, सब्सिडी, और कल्याण योजनाओं को बेहतर ढंग से लक्षित करने में मदद करता है।

जन परामर्श प्रक्रिया

आगामी सर्वेक्षणों को अधिक उपयोगी और नीतिगत बनाने के लिए NSO ने प्रारूप अवधारणा नोट और अनुसूचियाँ सार्वजनिक टिप्पणी के लिए जारी की हैं। सुझाव आमंत्रित किए गए हैं –

  • नीतिगत संस्थान और मंत्रालय

  • शैक्षणिक व शोध संस्थान

  • किसान संघ और सहकारी समितियाँ

  • बैंक, NBFC और वित्तीय विशेषज्ञ

  • आम जनता

भारत के विकास के लिए महत्व

दोनों सर्वेक्षण साक्ष्य-आधारित नीतिगत निर्णयों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। ये दिखाएंगे कि भारतीय परिवार और किसान अपनी आर्थिक चुनौतियों से कैसे निपट रहे हैं।

  • क्षेत्रीय असमानताओं की पहचान (क्रेडिट पहुँच व संपत्ति स्वामित्व)

  • कोविड-19 के बाद और जलवायु व्यवधानों के दौरान आर्थिक लचीलापन

  • सब्सिडी, फसल बीमा और डिजिटल वित्त का प्रभाव

  • भविष्य की कृषि और बैंकिंग सुधारों के लिए आधारभूत आंकड़े

ये सर्वेक्षण भारत के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्रगति मापने में भी अहम हैं, खासकर गरीबी उन्मूलन, वित्तीय समावेशन और सतत कृषि से जुड़े लक्ष्यों में।

परीक्षा हेतु मुख्य तथ्य

  • सर्वेक्षण अवधि: जुलाई 2026 – जून 2027

  • संस्थान: NSO, MoSPI

  • AIDIS फोकस: ऋण, निवेश और संपत्ति स्वामित्व (अंतिम बार 2019 में हुआ)

  • SAS फोकस: कृषि परिवारों की आय, व्यय, उत्पादन और ऋण पहुँच

  • जन प्रतिक्रिया की अंतिम तिथि: 30 सितंबर 2025

  • महत्व: वित्तीय समावेशन, ग्रामीण क्रेडिट और कृषि विकास संबंधी नीतियों के लिए उपयोगी

अमित शाह ने फास्ट ट्रैक इमिग्रेशन – ट्रस्टेड ट्रैवलर प्रोग्राम का उद्घाटन किया

केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहयोग मंत्री श्री अमित शाह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से फास्ट ट्रैक इमिग्रेशन – ट्रस्टेड ट्रैवलर प्रोग्राम (FTI–TTP) का शुभारंभ 5 नए हवाई अड्डों – लखनऊ, तिरुवनंतपुरम, त्रिची, कोझिकोड और अमृतसर – पर किया। यह पहल प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के स्पीड, स्केल और स्कोप के विज़न के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य यात्रियों की सुविधा बढ़ाते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

सहज इमिग्रेशन की ओर कदम

श्री शाह ने कहा कि FTI–TTP सिर्फ आरामदायक यात्रा का साधन नहीं है, बल्कि यह भारत में हो रहे तकनीकी परिवर्तन का प्रतीक है।

  • अब यात्रियों को लंबी कतारों में खड़े होने की आवश्यकता नहीं

  • 30 सेकंड में इमिग्रेशन क्लीयरेंस संभव।

  • इसे पासपोर्ट और OCI कार्ड जारी करने की प्रक्रिया से जोड़ने का सुझाव दिया गया है ताकि यात्रियों को बार-बार दस्तावेज़ जमा करने की जरूरत न पड़े।

  • भारतीय नागरिकों के साथ-साथ OCI कार्डधारकों को इससे सबसे अधिक लाभ मिलेगा।

विस्तार और उपलब्धियाँ

  • FTI–TTP की शुरुआत 2024 में दिल्ली एयरपोर्ट से हुई थी।

  • बाद में इसे मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु, कोच्चि और अहमदाबाद तक बढ़ाया गया।

  • अब 5 नए एयरपोर्ट जोड़ने के बाद यह सुविधा 13 हवाई अड्डों पर उपलब्ध है।

  • भविष्य में इसे नवी मुंबई और जेवर एयरपोर्ट तक विस्तारित करने की योजना।

  • अब तक 3 लाख यात्रियों ने पोर्टल पर पंजीकरण किया, जिनमें से 2.65 लाख ने सुविधा का उपयोग किया

  • यात्रियों से प्राप्त फीडबैक बेहद सकारात्मक रहा है।

अंतरराष्ट्रीय यात्री वृद्धि

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले 11 वर्षों में यात्री यातायात में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई –

  • 2014 में विदेश जाने वाले भारतीय: 3.54 करोड़ → 2024 में 6.12 करोड़ (73% वृद्धि)

  • 2014 में भारत आने वाले विदेशी: 1.53 करोड़ → 2024 में लगभग 2 करोड़ (31% वृद्धि)

  • कुल यात्री संख्या: 5.07 करोड़ (2014) → 8.12 करोड़ (2024) (60% वृद्धि)

पंजीकरण और प्रक्रिया

  • पोर्टल: ftittp.mha.gov.in

  • ऑनलाइन पंजीकरण, विवरण भरना, दस्तावेज़ अपलोड करना।

  • बायोमेट्रिक्स: FRRO कार्यालय या हवाई अड्डे पर ट्रांज़िट के दौरान लिए जाते हैं।

  • हवाई अड्डे पर यात्री बोर्डिंग पास और पासपोर्ट स्कैन करते हैं।

  • बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद ई-गेट स्वतः खुल जाता है और सहज इमिग्रेशन क्लीयरेंस हो जाता है।

परीक्षा हेतु मुख्य तथ्य / Takeaways

  • नए एयरपोर्ट: लखनऊ, तिरुवनंतपुरम, त्रिची, कोझिकोड, अमृतसर

  • कुल एयरपोर्ट: 13 (दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु, कोच्चि, अहमदाबाद + 5 नए)

  • भविष्य विस्तार: नवी मुंबई, जेवर

  • क्लीयरेंस समय: 30 सेकंड

  • पंजीकरण: ~3 लाख; सक्रिय उपयोगकर्ता: 2.65 लाख

उत्तराखंड में पर्यटन के लिए केंद्र और ADB ने 126 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर किए हस्ताक्षर

सतत पर्यटन और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार और एशियाई विकास बैंक (ADB) ने 10 सितंबर 2025 को 126.42 मिलियन अमेरिकी डॉलर का ऋण समझौता किया। यह निधि उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में “सस्टेनेबल, इन्क्लूसिव एंड क्लाइमेट-रेज़िलिएंट टूरिज्म डेवलपमेंट एट टिहरी लेक एरिया प्रोजेक्ट” को सहयोग प्रदान करेगी। इस समझौते पर भारत सरकार के आर्थिक मामलों के विभाग में संयुक्त सचिव जूही मुखर्जी और एडीबी के भारत निवासी मिशन के प्रभारी अधिकारी काई वेई यिओ ने हस्ताक्षर किए।

टिहरी गढ़वाल पर फोकस

टिहरी गढ़वाल जिले का टिहरी झील क्षेत्र, जहाँ आर्थिक अविकास और जलवायु जोखिम अधिक हैं, को प्राथमिकता वाले विकास क्षेत्र के रूप में चुना गया है। इस परियोजना का उद्देश्य टिहरी को एक सालभर पर्यटन योग्य स्थल बनाना है, साथ ही आर्थिक समावेशन, पर्यावरणीय स्थिरता और जलवायु अनुकूलता सुनिश्चित करना।

किसे होगा लाभ?

यह परियोजना लाभान्वित करेगी –

  • 87,000 से अधिक स्थानीय निवासियों को

  • लगभग 27 लाख वार्षिक पर्यटकों को

रणनीतिक हस्तक्षेपों के माध्यम से यह पहल रोजगार सृजन, ग्रामीण आय में विविधता और जलवायु व आपदा जोखिमों से निपटने की स्थानीय क्षमता को मजबूत करेगी।

प्रमुख हस्तक्षेप और विशेषताएँ

यह परियोजना बहु-क्षेत्रीय और समावेशी दृष्टिकोण अपनाती है। मुख्य हस्तक्षेप हैं –

  • पर्यटन अवसंरचना का उन्नयन: ईको-पार्क, ट्रेल्स, व्यू-प्वाइंट, विश्राम स्थल

  • स्वच्छता एवं कचरा प्रबंधन: आधुनिक प्रणाली

  • जलवायु-लचीला ढांचा: बाढ़, भूस्खलन और आपदाओं को सहने योग्य

  • संस्थागत सुदृढ़ीकरण: स्थानीय शासन और योजना क्षमता में सुधार

  • प्रकृति-आधारित समाधान: हरित बफर और कैचमेंट बहाली द्वारा बाढ़ और भूस्खलन के जोखिम कम करना

  • दिव्यांगजन हेतु सार्वभौमिक पहुंच सुविधाएँ

समावेशी और समुदाय-नेतृत्व वाला पर्यटन

सभी की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए परियोजना में शामिल है –

  • चयनित गांवों में महिला-नेतृत्व वाली आपदा प्रबंधन पहलें

  • महिलाओं, युवाओं और MSMEs के लिए लाइवलिहुड मैचिंग ग्रांट्स

  • पर्यटन सेवाओं और रोजगार के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी

इस तरह परियोजना का लक्ष्य मौसमी पर्यटन पर निर्भरता को घटाकर सतत और विविधीकृत पर्यटन अर्थव्यवस्था बनाना है।

राष्ट्रीय और वैश्विक लक्ष्यों के अनुरूप

परियोजना कई नीतिगत प्राथमिकताओं के अनुरूप है –

  • डिजिटल इंडिया और स्वच्छ भारत मिशन – स्मार्ट स्वच्छता और स्वच्छ सार्वजनिक स्थलों के माध्यम से

  • राष्ट्रीय पर्यटन नीति 2022 – सतत, समावेशी और लचीले पर्यटन पर जोर

  • पेरिस समझौते के अंतर्गत भारत के जलवायु लक्ष्य – कम-कार्बन ढांचा और आपदा प्रतिरोधक उपाय

परीक्षा हेतु मुख्य बिंदु

  • समझौता तिथि: 10 सितंबर 2025

  • संलिप्त पक्ष: भारत सरकार और एडीबी

  • ऋण राशि: 126.42 मिलियन अमेरिकी डॉलर

  • परियोजना फोकस: टिहरी झील क्षेत्र, टिहरी गढ़वाल जिला, उत्तराखंड

  • लाभार्थी: 87,000 निवासी, 27 लाख पर्यटक

परिणामों की सूची: मॉरीशस के प्रधानमंत्री की भारत की राजकीय यात्रा

मॉरीशस के प्रधानमंत्री ने भारत का दौरा किया, जिसके दौरान सात समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए और विज्ञान, अंतरिक्ष, शिक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा तथा सुशासन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रमुख घोषणाएँ की गईं। यह यात्रा भारत के हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में गहराते जुड़ाव और मॉरीशस जैसे छोटे द्वीपीय विकासशील देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

हस्ताक्षरित समझौते न केवल क्षेत्र में भारत की आर्थिक और तकनीकी उपस्थिति को बढ़ाते हैं, बल्कि सतत विकास और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे अहम क्षेत्रों में पारस्परिक सहयोग को भी मजबूत करते हैं।

दौरे के दौरान प्रमुख समझौते (MoUs) पर हस्ताक्षर

  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी – भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और मॉरीशस के तृतीयक शिक्षा, विज्ञान एवं अनुसंधान मंत्रालय ने संयुक्त अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक सहयोग को मजबूत करने के लिए समझौता किया।
  • महासागरीय अध्ययन (Oceanography)सीएसआईआर-राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान (भारत) और मॉरीशस ओशनोग्राफी संस्थान के बीच समुद्री संसाधनों और पर्यावरणीय निगरानी पर अनुसंधान हेतु समझौता हुआ।
  • लोक सेवा सुधारकर्मयोगी भारत (भारत के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के तहत) और मॉरीशस लोक सेवा एवं प्रशासनिक सुधार मंत्रालय ने सुशासन, ई-लर्निंग और सिविल सेवा प्रशिक्षण में श्रेष्ठ प्रथाओं के आदान-प्रदान हेतु समझौता किया।
  • ऊर्जा और विद्युत क्षेत्र – बिजली क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए नया समझौता हुआ, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण और ऊर्जा प्रबंधन शामिल हैं।
  • लघु विकास परियोजनाएँ – भारत ने लघु विकास परियोजनाओं के दूसरे चरण के तहत सामुदायिक बुनियादी ढांचे के लिए अनुदान सहायता प्रदान करने का वचन दिया।
  • हाइड्रोग्राफीहाइड्रोग्राफी में सहयोग संबंधी मौजूदा समझौते का नवीनीकरण हुआ, जो हिंद महासागर में नौवहन सुरक्षा और समुद्री क्षेत्र जागरूकता को समर्थन देगा।
  • अंतरिक्ष सहयोग – एक ऐतिहासिक समझौते के तहत मॉरीशस में टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और दूरसंचार केंद्र स्थापित किया जाएगा। यह केंद्र भारत के उपग्रह एवं प्रक्षेपण यान मिशनों को सहयोग देगा और अंतरिक्ष अनुसंधान एवं अनुप्रयोगों में व्यापक साझेदारी को प्रोत्साहित करेगा।

प्रमुख घोषणाएँ

  • शैक्षणिक सहयोगआईआईटी मद्रास और यूनिवर्सिटी ऑफ मॉरीशस (Réduit) ने शैक्षणिक आदान-प्रदान, अनुसंधान सहयोग और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु समझौता किया।
    इसके अतिरिक्त, भारतीय बागान प्रबंधन संस्थान, बेंगलुरु ने भी इसी विश्वविद्यालय के साथ कृषि और बागान विशेषज्ञता साझा करने के लिए समझौता किया।

  • नवीकरणीय ऊर्जा पहल – भारत मॉरीशस में तामारिंड फॉल्स पर 17.5 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर पीवी परियोजना का समर्थन करेगा। एनटीपीसी लिमिटेड की टीम शीघ्र ही मॉरीशस जाकर वहां के केंद्रीय विद्युत बोर्ड (CEB) के साथ समझौते को अंतिम रूप देगी।

रणनीतिक संदर्भ और व्यापक महत्व

यह दौरा और इसके परिणाम भारत के उस रणनीतिक लक्ष्य से जुड़े हैं, जिसके तहत वह हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में अपनी उपस्थिति मजबूत करना, सतत विकास को बढ़ावा देना और क्षेत्रीय सहयोग एवं क्षमता निर्माण के जरिए बाहरी प्रभावों का संतुलन करना चाहता है।

मॉरीशस, एक प्रमुख समुद्री पड़ोसी होने के नाते, भारत की SAGAR (Security and Growth for All in the Region) पहल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नए समझौते न केवल आर्थिक विकास बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा में भी भारत को एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में स्थापित करते हैं।

परीक्षा हेतु मुख्य बिंदु

  • दौरे की तिथि: 11 सितंबर 2025

  • हस्ताक्षरित MoUs की संख्या: 7

  • प्रमुख क्षेत्र: विज्ञान, समुद्र विज्ञान, लोक प्रशासन, ऊर्जा, हाइड्रोग्राफी, अंतरिक्ष

  • घोषित प्रमुख परियोजना: तामारिंड फॉल्स पर 17.5 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर पीवी

  • मॉरीशस के प्रधानमंत्री: नवीनचंद्र रामगुलाम

  • राजधानी: पोर्ट लुई

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को मरणोपरांत मिला पी वी नरसिम्हा अवॉर्ड

भारत के दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, जो देश के सबसे प्रख्यात अर्थशास्त्रियों में से एक रहे और 1991 के आर्थिक उदारीकरण के शिल्पकार माने जाते हैं, को मरणोपरांत पी. वी. नरसिम्हा राव स्मृति पुरस्कार (अर्थशास्त्र) से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उनके भारत की आर्थिक सुधार यात्रा में अमूल्य योगदान और आर्थिक नीतियों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के प्रति उनके आजीवन समर्पण को मान्यता देता है। नई दिल्ली में आयोजित समारोह में डॉ. सिंह की पत्नी गुरशरण कौर ने यह पुरस्कार ग्रहण किया। यह सम्मान मोंटेक सिंह अहलूवालिया, जो भारत की आर्थिक नीतियों के प्रमुख निर्माता और योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं, द्वारा प्रदान किया गया।

सुधारों के शिल्पकार को सच्ची श्रद्धांजलि

पी. वी. नरसिम्हा राव स्मृति फाउंडेशन (PVNMF) द्वारा डॉ. मनमोहन सिंह को दिया गया यह सम्मान विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इन दोनों नेताओं को संयुक्त रूप से 1991 के आर्थिक सुधारों का सूत्रधार माना जाता है। इन सुधारों ने भारत को गंभीर वित्तीय संकट से उबारकर उदारीकरण और वैश्वीकरण की दिशा में आगे बढ़ाया।

तत्कालीन प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव के कार्यकाल में वित्त मंत्री रहे डॉ. सिंह ने व्यापक सुधार लागू किए, जिनमें शामिल थे –

  • उद्योगों का लाइसेंस-राज समाप्त करना

  • आयात शुल्क में कमी

  • बाजार-आधारित विनिमय दर की शुरुआत

  • प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को प्रोत्साहन

  • सार्वजनिक क्षेत्र का पुनर्गठन

इन कदमों ने भारत की अर्थव्यवस्था का स्वरूप बदल दिया और आने वाले दशकों में सतत विकास की ठोस नींव रखी।

पुरस्कार और उसकी विरासत

हैदराबाद स्थित पी. वी. नरसिम्हा राव स्मृति फाउंडेशन द्वारा स्थापित पी. वी. नरसिम्हा राव स्मृति पुरस्कार (अर्थशास्त्र) उन व्यक्तियों को सम्मानित करने के लिए दिया जाता है जिन्होंने भारत के आर्थिक विकास में परिवर्तनकारी योगदान दिया है।

डॉ. मनमोहन सिंह को मरणोपरांत यह पुरस्कार प्रदान करके फाउंडेशन ने भारत के दो सबसे प्रभावशाली आर्थिक नेताओं – डॉ. सिंह और नरसिम्हा राव – की ऐतिहासिक साझेदारी को पुनः स्मरण किया है।

इस अवसर पर पीवीएनएमएफ के अध्यक्ष के. रामचंद्र मूर्ति और महासचिव मदमचेत्ती अनिल कुमार भी उपस्थित रहे। समारोह में नीति-निर्माताओं, अर्थशास्त्रियों और डॉ. सिंह की विरासत के प्रशंसकों ने भाग लिया।

परीक्षा हेतु मुख्य बिंदु

  • डॉ. मनमोहन सिंह को मरणोपरांत पी. वी. नरसिम्हा राव स्मृति पुरस्कार (अर्थशास्त्र) से सम्मानित किया गया।

  • पुरस्कार मोंटेक सिंह अहलूवालिया द्वारा प्रदान किया गया और गुरशरण कौर ने ग्रहण किया।

  • यह सम्मान 1991 के आर्थिक सुधारों में डॉ. सिंह की भूमिका को मान्यता देता है।

  • उदारीकरण नीतियों का श्रेय अक्सर मनमोहन सिंह और नरसिम्हा राव दोनों को दिया जाता है।

  • यह पुरस्कार पी. वी. नरसिम्हा राव स्मृति फाउंडेशन (PVNMF) द्वारा प्रदान किया जाता है।

भारत-मॉरीशस विशेष आर्थिक पैकेज 2025

भारत और मॉरीशस ने एक बार फिर अपनी मित्रता और सहयोग के मजबूत संबंधों को और प्रगाढ़ किया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के निमंत्रण पर मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ. नवीनचंद्र रामगुलाम ने भारत की राजकीय यात्रा की। इस अवसर पर दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की। इन वार्ताओं के पश्चात भारत ने मॉरीशस के लिए एक विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की, जिसमें महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा तथा सामरिक सहयोग से जुड़े परियोजनाओं को शामिल किया गया है।

अनुदान सहायता के अंतर्गत प्रमुख परियोजनाएँ

भारत ने लगभग 215 मिलियन अमेरिकी डॉलर (MUR 9.80 बिलियन) मूल्य की अनुदान आधारित परियोजनाओं के माध्यम से मॉरीशस का सहयोग करने का संकल्प लिया है। प्रमुख पहलें इस प्रकार हैं–

  • नया सर शिवसागर रामगुलाम राष्ट्रीय अस्पताल – स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना को सुदृढ़ करना।

  • आयुष उत्कृष्टता केंद्र – पारंपरिक चिकित्सा, आयुर्वेद, योग एवं समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देना।

  • पशु चिकित्सा विद्यालय एवं पशु अस्पताल – पशु चिकित्सा शिक्षा और पशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना।

  • हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति – हवाई गतिशीलता और आपदा प्रबंधन क्षमताओं को मजबूत बनाना।

अनुदान–सह–ऋण रेखा (LOC) के अंतर्गत परियोजनाएँ

बड़े पैमाने पर अवसंरचना विकास के लिए भारत लगभग 440 मिलियन अमेरिकी डॉलर (MUR 20.10 बिलियन) की अनुदान–सह–LOC व्यवस्था के माध्यम से सहायता प्रदान करेगा। इसमें शामिल प्रमुख परियोजनाएँ हैं–

  • एसएसआर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर नए एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) टावर का समापन – हवाई यातायात प्रबंधन को आधुनिक बनाना।

  • मोटरवे M4 का विकास – सड़क संपर्क को सुदृढ़ करना।

  • रिंग रोड चरण–II का विकास – यातायात जाम को कम करना और शहरी गतिशीलता में सुधार लाना।

  • कार्गो हैंडलिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (CHCL) द्वारा बंदरगाह उपकरणों का अधिग्रहण – समुद्री व्यापार क्षमता को बढ़ावा देना।

रणनीतिक सहयोग

आर्थिक और अवसंरचना परियोजनाओं से आगे बढ़ते हुए भारत और मॉरीशस ने रणनीतिक क्षेत्रों में भी सहयोग पर सहमति व्यक्त की है। इनमें प्रमुख हैं–

  • मॉरीशस में बंदरगाह का पुनर्विकास और पुनर्संरचना – समुद्री व्यापार और लॉजिस्टिक्स को सुदृढ़ करना।

  • चागोस समुद्री संरक्षित क्षेत्र का विकास और निगरानी – पर्यावरणीय स्थिरता और क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना।

बजटीय सहायता

उपरोक्त परियोजनाओं के अतिरिक्त भारत ने वर्तमान वित्तीय वर्ष के दौरान मॉरीशस को 25 मिलियन अमेरिकी डॉलर की बजटीय सहायता प्रदान करने पर भी सहमति जताई है।

पैकेज का महत्व

यह घोषणा हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में एक प्रमुख साझेदार के रूप में मॉरीशस को समर्थन देने की भारत की दीर्घकालिक नीति को दर्शाती है। यह पैकेज सुदृढ़ करेगा–

  • मॉरीशस की स्वास्थ्य एवं शिक्षा प्रणाली

  • अवसंरचना विकास, जिससे संपर्क और व्यापार को प्रोत्साहन मिलेगा।

  • रणनीतिक सुरक्षा और समुद्री सहयोग, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।

  • जन–से–जन संबंध, जो भारतीय प्रवासी और मित्र राष्ट्रों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

मुख्य तथ्य / महत्वपूर्ण बिंदु

  • कुल सहायता : ~680 मिलियन अमेरिकी डॉलर (USD 215 मिलियन + USD 440 मिलियन + USD 25 मिलियन)

  • शामिल क्षेत्र : स्वास्थ्य, शिक्षा, पशु चिकित्सा सेवाएँ, परिवहन, बंदरगाह और पर्यावरण

  • रणनीतिक क्षेत्र : बंदरगाह पुनर्विकास एवं चागोस समुद्री संरक्षित क्षेत्र

  • महत्व : भारत–मॉरीशस साझेदारी को गहरा करना, क्षेत्रीय संपर्क और सुरक्षा को बढ़ावा देना

भारत की सबसे तेज़ ट्रेन बनी नमो भारत

भारत ने नमो भारत (Namo Bharat) ट्रेन के साथ तीव्र क्षेत्रीय परिवहन के नए युग में प्रवेश किया है। यह देश की सबसे तेज़ ट्रेन है, जो 160 किमी/घंटा की गति से चलती है और दिल्ली–मेरठ क्षेत्रीय तीव्र परिवहन प्रणाली (RRTS) पर संचालित होती है। इससे दोनों शहरी केंद्रों के बीच की यात्रा 60 मिनट से भी कम समय में पूरी हो जाती है।

यह उपलब्धि न केवल गति का नया मानक स्थापित करती है, बल्कि भारत के परिवहन ढाँचे और अंतर-शहरी कनेक्टिविटी में एक बड़ा कदम भी है।

नमो भारत: गति का नया रिकॉर्ड

  • पहले गतिमान एक्सप्रेस और वंदे भारत (160 किमी/घंटा) भारत की सबसे तेज़ ट्रेनें थीं।

  • लेकिन जून 2024 में सुरक्षा कारणों से उनकी गति अधिकांश मार्गों पर 130 किमी/घंटा तक सीमित कर दी गई।

  • वहीं, नमो भारत विशेष रूप से बने डेडिकेटेड कॉरिडोर पर अब भी 160 किमी/घंटा की रफ्तार से चलती है।

  • यह गति आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत सुरक्षा प्रणालियों के कारण संभव हुई है, जैसे:

    • स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) 
    • स्वचालित ट्रेन नियंत्रण (एटीसी) 
    • स्वचालित ट्रेन संचालन (एटीओ)

दिल्ली–मेरठ RRTS कॉरिडोर

  • वर्तमान में परिचालन खंड: 55 किमी (नई अशोक नगर, दिल्ली से मेरठ साउथ, उत्तर प्रदेश तक)

  • पूर्ण कॉरिडोर: 82.15 किमी, 16 स्टेशन (सराय काले खाँ, दिल्ली से मोदिपुरम, मेरठ तक)

  • यात्रा समय: 60 मिनट से कम

  • ट्रेनसेट: 36 छह-कोच ट्रेनें, हर 15 मिनट पर संचालन।

  • डिजाइन: हैदराबाद में, निर्माण: अल्सटॉम, सवली (गुजरात)

नमो भारत: सिर्फ ट्रेन नहीं, एक नया मॉडल

  • इसमें आरक्षण (Reservation) की आवश्यकता नहीं

  • यह मेट्रो भी नहीं है, बल्कि हाइब्रिड रैपिड ट्रांजिट सिस्टम है।

  • उद्देश्य: मध्यम दूरी की शहरी–उपशहरी यात्रा को तेज़ और सुविधाजनक बनाना।

  • शुभारंभ: 21 अक्टूबर 2023, प्रारंभिक 17 किमी सेक्शन ने ही 1.5 करोड़ यात्रियों को सेवा दी।

मेरठ मेट्रो के साथ एकीकरण

  • RRTS की खासियत है कि यह मेरठ मेट्रो के साथ एकीकृत है।

  • 23 किमी की मेट्रो लाइन (13 स्टेशन) इन्हीं ट्रैक्स पर चलती है।

  • यात्री आसानी से स्थानीय यात्रा और तेज़ क्षेत्रीय यात्रा के बीच इंटरचेंज कर सकते हैं।

राष्ट्रीय और राज्य साझेदारी

  • परियोजना में भागीदारी:

    • भारत सरकार – 50%

    • दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान सरकार – 12.5% प्रत्येक

  • यह भारत का पहला डेडिकेटेड क्षेत्रीय तीव्र परिवहन मॉडल है।

  • उद्देश्य: यातायात जाम कम करना, प्रदूषण घटाना, और तेज़ शहरी–ग्रामीण एकीकरण

  • भविष्य की योजनाएँ: दिल्ली–पानीपत और दिल्ली–अलवर कॉरिडोर।

महत्वपूर्ण तथ्य (Key Takeaways)

  • नमो भारत: भारत की सबसे तेज़ ट्रेन (160 किमी/घंटा)।

  • दिल्ली–मेरठ RRTS: 82.15 किमी, 16 स्टेशन, यात्रा समय < 60 मिनट।

  • अन्य ट्रेनें (गतिमान, वंदे भारत): अधिकतर मार्गों पर 130 किमी/घंटा तक सीमित।

  • निर्माण: अल्सटॉम, गुजरात; डिज़ाइन: हैदराबाद।

  • सुरक्षा प्रणाली: ATP, ATC, ATO।

  • इंटीग्रेशन: मेरठ मेट्रो के साथ सहज कनेक्टिविटी।

  • संयुक्त पहल: केंद्र सरकार और चार राज्य सरकारें।

आईटी अवसंरचना और बैंकिंग तकनीक को बढ़ावा देने के लिए TCIL-PNB समझौता ज्ञापन

भारत में डिजिटल बैंकिंग सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए टेलीकम्यूनिकेशंस कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड (TCIL) और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने 3 सितम्बर 2025 को एक सहमतिपत्र (MoU) पर हस्ताक्षर किए।

यह सहयोग PNB के आईटी ढाँचे को सुदृढ़ करने और अधिक सुरक्षित, लचीली तथा ग्राहक-केंद्रित डिजिटल सेवाओं की ओर बैंक के परिवर्तन को तेज करने पर केंद्रित है। समारोह का आयोजन नई दिल्ली स्थित TCIL मुख्यालय में हुआ, जिसमें संजय कुमार (CMD, TCIL) और मनीष अग्रवाल (GM, PNB) समेत वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

PNB की डिजिटल रीढ़ को मज़बूती

इस समझौते के तहत TCIL, PNB को विशेषीकृत आईटी परामर्श (IT Consultancy), प्रोजेक्ट प्रबंधन, और एंड-टू-एंड तकनीकी समाधान प्रदान करेगा।

मुख्य क्षेत्र:

  • RFP लाइफसाइकिल प्रबंधन – टेक प्रोक्योरमेंट के लिए प्रस्तावों का निर्माण, मूल्यांकन और प्रबंधन।

  • सिस्टम इंटीग्रेशन – बैंक की विभिन्न डिजिटल प्रणालियों को आपस में समन्वित करना।

  • आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर रोलआउट – नेटवर्क, सर्वर और अन्य आवश्यक घटकों की तैनाती।

  • नियामकीय अनुपालन – वित्तीय क्षेत्र के मानकों और साइबर सुरक्षा नियमों का पालन।

TCIL प्रोजेक्ट की आवश्यकता के अनुसार Project Management Consultant (PMC) या Project Implementing Agency (PIA) की भूमिका निभाएगा।

इस साझेदारी का महत्व

PNB के लिए यह सहयोग डिजिटल युग में प्रतिस्पर्धी बनने और ग्राहक सेवाओं को आधुनिक बनाने की दिशा में मील का पत्थर है।

  • फिनटेक के उदय और ग्राहकों की त्वरित, सुरक्षित बैंकिंग की अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए यह समझौता मददगार होगा।

  • TCIL के लिए यह समझौता उसकी विश्वसनीय तकनीकी साझेदार की भूमिका को और मजबूत करता है।

डिजिटल इंडिया से जुड़ाव

यह समझौता डिजिटल इंडिया मिशन के लक्ष्यों के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य भारत को डिजिटली सशक्त समाज बनाना है।
PNB जैसे सार्वजनिक बैंकों की प्रणालियों को अपग्रेड करके यह साझेदारी अधिक नागरिकों, विशेषकर वंचित क्षेत्रों तक, सुरक्षित और तकनीक-संचालित बैंकिंग सेवाएँ पहुँचाने में मदद करेगी।

अवसर और चुनौतियाँ

अवसर (Opportunities):

  • बैंकिंग में तकनीकी नवाचारों का तेज़ रोलआउट

  • साइबर सुरक्षा मानकों का मजबूत अनुपालन

  • भविष्य की माँग के अनुसार स्केलेबल इंफ्रास्ट्रक्चर

चुनौतियाँ (Challenges):

  • समय पर निष्पादन और सिस्टम एकीकरण सुनिश्चित करना

  • बदलते नियामकीय परिदृश्यों के अनुरूप ढलना

  • तकनीकी अप्रचलन (obsolescence) के जोखिमों को कम करना

महत्वपूर्ण तथ्य 

  • TCIL: भारत सरकार का उपक्रम, संचार मंत्रालय के अंतर्गत

  • PNB: भारत के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में से एक

  • PNB के MD एवं CEO: श्री अशोक चन्द्रा

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