भारत ने फिलिस्तीन के दो-राज्य समाधान पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव का समर्थन किया

भारत ने फ़िलिस्तीन मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान के लिए दो-राष्ट्र समाधान (Two-State Solution) का समर्थन करते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा में पारित “न्यूयॉर्क घोषणा” के पक्ष में मतदान किया। यह प्रस्ताव 12 सितम्बर 2025 को पारित हुआ, जिसमें 142 देशों ने समर्थन किया, 10 ने विरोध और 12 ने मतदान से दूरी बनाई।

यह कदम इज़रायल-फ़िलिस्तीन संघर्ष पर भारत की दीर्घकालिक नीति को पुनः पुष्ट करता है—एक स्वतंत्र, संप्रभु और व्यवहार्य फ़िलिस्तीन का निर्माण, जो सुरक्षित इज़रायल के साथ मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर शांति से सह-अस्तित्व करे।

प्रस्ताव से जुड़ी प्रमुख बातें

  • प्रस्ताव का नाम: न्यूयॉर्क घोषणा

  • प्रस्तुतकर्ता देश: फ्रांस और सऊदी अरब

  • उद्देश्य: दो-राष्ट्र समाधान के प्रति वैश्विक प्रतिबद्धता को दोहराना

मतदान परिणाम:

  • समर्थन में: 142 देश (भारत सहित)

  • विरोध में: 10 देश (अमेरिका सहित)

  • अनुपस्थित/तटस्थ: 12 देश

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इसे मध्य-पूर्व में शांति की ओर अपरिवर्तनीय मार्ग बताया।

भारत की स्थिति

भारत हमेशा से मानता आया है कि इज़रायल-फ़िलिस्तीन विवाद का एकमात्र व्यावहारिक समाधान दो-राष्ट्र नीति है।

भारत की नीति के मुख्य पहलू:

  • एक स्वतंत्र और संप्रभु फ़िलिस्तीन का समर्थन

  • इज़रायल के शांतिपूर्ण और सुरक्षित जीवन के अधिकार को मान्यता

  • मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर वार्ता का समर्थन

  • दोनों देशों के साथ संतुलित कूटनीतिक संबंध

यह मतदान भारत की ऐतिहासिक स्थिति के अनुरूप है और शांति के लिए कूटनीति को मजबूती देता है।

अमेरिका का विरोध

अमेरिका ने इस प्रस्ताव को “प्रचार का हथकंडा” बताया और विरोध में मतदान किया।

अमेरिका के तर्क:

  • यह प्रस्ताव हमास को पुरस्कृत करता है

  • गाज़ा में पीड़ा समाप्त करने और बंधकों को छुड़ाने की कूटनीतिक कोशिशों को कमजोर करता है

  • यह भ्रामक, समय से पूर्व और राजनीतिक रूप से प्रेरित है

  • वास्तविक शांति केवल प्रत्यक्ष वार्ताओं से ही संभव है, न कि UN प्रस्तावों से

वैश्विक और क्षेत्रीय असर

  • समर्थन (142 देश): दो-राष्ट्र समाधान के लिए मज़बूत वैश्विक समर्थन दर्शाता है।

  • विरोध (10 देश, अमेरिका सहित): फ़िलिस्तीनी समूहों जैसे हमास को वैधता मिलने की आशंका।

  • अनुपस्थित/तटस्थ (12 देश): जटिल परिस्थितियों में सावधानीपूर्ण तटस्थता।

भारत के लिए यह मतदान उसकी छवि को फ़िलिस्तीनी राज्यत्व के स्थायी समर्थक के रूप में मजबूत करता है, जबकि इज़रायल के साथ उसके रणनीतिक संबंध (रक्षा, तकनीक, व्यापार) भी जारी रहेंगे।

परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

  • तिथि: 12 सितम्बर 2025

  • प्रस्ताव का नाम: न्यूयॉर्क घोषणा (Palestine Two-State Solution)

  • पारित करने वाला निकाय: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA)

  • मतदान परिणाम: 142 पक्ष में, 10 विरोध, 12 अनुपस्थित

  • भारत का रुख: पक्ष में मतदान (दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन)

  • प्रस्तावक देश: फ्रांस और सऊदी अरब

मणिपुर चिड़ियाघर में एशियाई विशालकाय कछुओं का प्रजनन

भारत में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई है। मणिपुर प्राणी उद्यान (Manipur Zoological Garden – MZG) ने इंडिया टर्टल कंजरवेशन प्रोग्राम (ITCP) के सहयोग से पहली बार एशियाई विशाल कछुए (Asian Giant Tortoise – Manouria emys phayrei) का सफल कृत्रिम ऊष्मायन (artificial incubation) किया है। वर्ष 2025 में एक ही घोंसले से 28 बच्चे कछुए (हैचलिंग्स) बाहर निकले, जो इस संकटग्रस्त प्रजाति के संरक्षण में एक बड़ा कदम है।

एशियाई विशाल कछुआ 

  • वैज्ञानिक नाम: Manouria emys phayrei

  • स्थिति: गंभीर रूप से संकटग्रस्त (Critically Endangered, IUCN रेड लिस्ट)

  • प्राकृतिक क्षेत्र: पूर्वोत्तर भारत (मणिपुर, नागालैंड, मिज़ोरम, असम, मेघालय) एवं दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्से

  • मुख्य खतरे:

    • वनों की कटाई से आवास का नुकसान

    • मांस के लिए शिकार

    • अवैध वन्यजीव व्यापार

  • पारिस्थितिक महत्व: जंगलों में बीज फैलाव (seed dispersal) में योगदान देकर पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित करता है।

मणिपुर चिड़ियाघर की पहल

  • 28 हैचलिंग्स का सफल ऊष्मायन – पहला प्रयोगात्मक प्रयास।

  • प्रजनन कार्यक्रम को और बड़े स्तर पर आगे बढ़ाने की योजना।

  • वार्षिक प्रजनन चक्र चलाने और चरणबद्ध तरीके से इन्हें प्राकृतिक आवास में छोड़ने का लक्ष्य।

  • 21 अगस्त 2025: 25 ज़ूकीपर और वनकर्मियों को प्रशिक्षण देने हेतु कार्यशाला आयोजित।

ITCP की भूमिका और भावी योजना

  • वैज्ञानिक ढंग से प्रजनन और छोड़ने (release) की व्यवस्था।

  • प्राकृतिक आवास का आकलन कर उपयुक्त स्थानों की पहचान।

  • मणिपुर में कछुओं के वितरण और मौजूदा जनसंख्या पर शोध।

  • साइट-विशिष्ट संरक्षण रणनीतियाँ तैयार करना।

राष्ट्रीय और क्षेत्रीय महत्व

  • जैव विविधता संरक्षण: पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध सरीसृप विविधता की रक्षा।

  • नीतिगत महत्व: सेंट्रल ज़ू अथॉरिटी (CZA) द्वारा MZG को “मीडियम ज़ू” का दर्जा, जिससे संरक्षण क्षमता बढ़ेगी।

  • क्षेत्रीय गौरव: मणिपुर ने पूर्वोत्तर में कछुओं और कछुओं की प्रजातियों के संरक्षण की मिसाल कायम की।

महत्वपूर्ण तथ्य 

  • प्रजाति: एशियाई विशाल कछुआ (Manouria emys phayrei)

  • स्थिति: गंभीर संकटग्रस्त (IUCN)

  • प्राकृतिक क्षेत्र: पूर्वोत्तर भारत (मणिपुर, नागालैंड, मिज़ोरम, असम, मेघालय)

  • उपलब्धि: 2025 में मणिपुर प्राणी उद्यान में पहली सफल कृत्रिम ऊष्मायन

  • सहयोगी संस्था: इंडिया टर्टल कंजरवेशन प्रोग्राम (ITCP)

प्रधानमंत्री मोदी 5 राज्यों में 71,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शुभारंभ करेंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13–15 सितंबर 2025 तक तीन दिवसीय दौरे पर मिज़ोरम, मणिपुर, असम, पश्चिम बंगाल और बिहार का भ्रमण करेंगे। इस दौरान वे ₹71,000 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इन परियोजनाओं का उद्देश्य क्षेत्रीय संपर्क, औद्योगिक विकास और समावेशी प्रगति को बढ़ावा देना है।

मिज़ोरम: ऐतिहासिक रेल संपर्क (13 सितंबर)

पीएम मोदी आईज़ोल में लगभग ₹9,000 करोड़ की परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित करेंगे।

  • बैराबी–सैरांग नई रेल लाइन (₹8,070 करोड़): पहली बार मिज़ोरम की राजधानी आईज़ोल भारतीय रेल नेटवर्क से जुड़ी।

  • नई ट्रेनें शुरू:

    • सैरांग–दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस

    • सैरांग–गुवाहाटी एक्सप्रेस

    • सैरांग–कोलकाता एक्सप्रेस

  • अन्य परियोजनाएँ:

    • आईज़ोल बायपास रोड

    • मुअलखांग में LPG बॉटलिंग प्लांट

    • खेलो इंडिया मल्टीपरपज़ इंडोर हॉल

    • नए आवासीय विद्यालय
      इससे आईज़ोल, गुवाहाटी, अगरतला और ईटानगर के बाद रेल नेटवर्क से जुड़ने वाला चौथा पूर्वोत्तर राज्य की राजधानी बना।

मणिपुर: अवसंरचना और आईटी विकास

चुराचांदपुर (₹7,300 करोड़):

  • बड़े सड़क एवं राजमार्ग प्रोजेक्ट

  • मणिपुर इन्फोटेक विकास परियोजना

  • कार्यरत महिला छात्रावास

इंफाल (₹1,200 करोड़):

  • नया सिविल सचिवालय

  • आईटी विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ)

  • पुलिस मुख्यालय

  • दिल्ली और कोलकाता में मणिपुर भवन

  • महिलाओं के इमा मार्केट

असम: स्वास्थ्य, ऊर्जा और अवसंरचना बूस्ट (14 सितंबर)

कुल परियोजनाएँ: ₹18,530 करोड़

  • दरांग मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल

  • गुवाहाटी रिंग रोड

  • नया ब्रह्मपुत्र पुल

  • नुमालीगढ़ में बायोएथेनॉल प्लांट

  • नुमालीगढ़ रिफाइनरी में पॉलीप्रोपाइलीन प्लांट का शिलान्यास

  • भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका की जन्मशती समारोह में भागीदारी

पश्चिम बंगाल: सामरिक सम्मेलन (15 सितंबर)

  • कोलकाता में 16वाँ संयुक्त कमांडर्स सम्मेलन का उद्घाटन

  • थीम: “Year of Reforms – Transforming for the Future”

  • भागीदारी: भारत की शीर्ष सैन्य व नागरिक नेतृत्व

  • फोकस: रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के भविष्य की रणनीतियाँ

बिहार: विकास का महाअभियान (15 सितंबर)

कुल परियोजनाएँ: ₹36,000 करोड़

  • पूर्णिया एयरपोर्ट का नया टर्मिनल भवन

  • भागलपुर में 3×800 MW थर्मल पावर प्रोजेक्ट

  • कोसी–मेची नदी लिंक परियोजना (चरण 1)

  • नई रेल परियोजनाएँ व ट्रेनें:

    • जोगबनी–दानापुर वंदे भारत एक्सप्रेस

    • 2 अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें

  • राष्ट्रीय मखाना बोर्ड: किसानों के प्रबंधन व निर्यात को बढ़ावा

  • Sex Sorted Semen Facility (पूर्णिया, राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत)

  • ₹500 करोड़ सामुदायिक निवेश निधि का वितरण (DAY–NRLM)

  • PM आवास योजना (PMAY) के तहत घरों का वितरण

इन पहलों से बिहार में ऊर्जा सुरक्षा, कृषि विकास और परिवहन संपर्क को मजबूती मिलेगी।

महत्वपूर्ण तथ्य 

  • पीएम मोदी का दौरा: 13–15 सितंबर 2025

  • कुल परियोजनाएँ: ₹71,000 करोड़+

  • प्रमुख राज्य: मिज़ोरम, मणिपुर, असम, पश्चिम बंगाल, बिहार

गोवा वैश्विक आउटरीच के साथ ऐतिहासिक 10वें आयुर्वेद दिवस की मेजबानी करेगा

भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलने जा रही है, क्योंकि 23 सितंबर 2025 को 10वाँ आयुर्वेद दिवस गोवा स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) में मनाया जाएगा। इस बार की थीम है – “आयुर्वेद फॉर पीपल एंड प्लेनेट” (जन-जन और धरती के लिए आयुर्वेद)। यह आयोजन इस तथ्य को रेखांकित करता है कि आयुर्वेद न केवल एक प्रभावी स्वास्थ्य समाधान है, बल्कि आधुनिक पर्यावरणीय आवश्यकताओं के अनुरूप एक सतत जीवन शैली भी है।

पहली बार आयुर्वेद दिवस को एक नियत तिथि (23 सितंबर) पर मनाया जाएगा। पहले यह धन्वंतरि जयंती पर मनाया जाता था। यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयुर्वेद को निरंतरता और अधिक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

क्यों चुना गया गोवा?

माउंट आबू में कार्यक्रम की घोषणा करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने गोवा को आयुर्वेद दिवस के लिए “आदर्श वैश्विक मंच” बताया।

  • गोवा की अंतरराष्ट्रीय अपील, वेलनेस टूरिज़्म और सांस्कृतिक विविधता इसे विश्व स्तर पर आयुर्वेद को प्रस्तुत करने के लिए उपयुक्त बनाती है।

  • AIIA गोवा, जो आयुष मंत्रालय के अधीन एक अत्याधुनिक संस्थान है, भारत की विश्वस्तरीय आयुर्वेदिक अवसंरचना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

थीम 2025: “Ayurveda for People & Planet”

  • People (जन-जन के लिए): आयुर्वेद को एक सुलभ, किफायती और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य प्रणाली के रूप में बढ़ावा देना।

  • Planet (धरती के लिए): आयुर्वेद की प्रकृति-संगत जीवनशैली, संतुलन, सतत संसाधन उपयोग और पर्यावरण संरक्षण की अवधारणा को सामने लाना।

यह थीम संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) से मेल खाती है और आयुर्वेद को आधुनिक स्वास्थ्य मॉडल के रूप में प्रस्तुत करती है।

वैश्विक भागीदारी

पिछले वर्ष 150 से अधिक देशों की भागीदारी के बाद, आयुष मंत्रालय इस बार और व्यापक वैश्विक कार्यक्रम आयोजित करेगा:

  • भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आयोजन।

  • भारतीय मिशन (Embassies) विदेशों में कार्यशालाएँ, स्वास्थ्य शिविर और अकादमिक चर्चाएँ करेंगे।

  • अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों, वेलनेस संगठनों और प्रवासी भारतीयों के साथ सहयोग।

यह भारत की बढ़ती “हेल्थ डिप्लोमेसी” को दर्शाता है, जहाँ आयुर्वेद केवल सांस्कृतिक धरोहर ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य साझेदारी का साधन भी बन रहा है।

महत्व

10वाँ आयुर्वेद दिवस सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि यह आयुर्वेद को वैश्विक समाधान के रूप में स्थापित करने का ऐतिहासिक अवसर है।

  • बढ़ती जीवनशैली संबंधी बीमारियाँ

  • जलवायु परिवर्तन

  • सतत स्वास्थ्य मॉडलों की मांग

इन सभी चुनौतियों के बीच, आयुर्वेद का संतुलन, रोकथाम और प्रकृति के साथ सामंजस्य का संदेश विश्वभर में प्रासंगिक हो रहा है।

23 सितंबर को निश्चित तिथि पर मनाना, योग दिवस की तरह आयुर्वेद को एक वैश्विक पहचान और वार्षिक अंतरराष्ट्रीय भागीदारी सुनिश्चित करेगा।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • कार्यक्रम: 10वाँ आयुर्वेद दिवस

  • तिथि: 23 सितंबर 2025 (पहली बार निश्चित तिथि पर, पहले धन्वंतरि जयंती पर)

  • थीम: Ayurveda for People & Planet

  • स्थान: अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), गोवा

  • आयोजक: आयुष मंत्रालय, भारत सरकार

NHAI के लिए बीमा ज़मानत बांड ने ₹10,000 करोड़ का आंकड़ा पार किया

भारत के अवसंरचना वित्त पोषण परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, क्योंकि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के अनुबंधों के लिए जारी इंश्योरेंस श्योरिटी बॉन्ड्स (ISBs) का मूल्य ₹10,000 करोड़ का आंकड़ा पार कर गया है। जुलाई 2025 तक, 12 बीमा कंपनियों ने लगभग 1,600 ISBs बोली सुरक्षा (Bid Security) और 207 ISBs प्रदर्शन सुरक्षा (Performance Security) के रूप में जारी किए हैं, जिनकी कुल कीमत ₹10,369 करोड़ है।

यह विकास इस बात का संकेत है कि बड़े पैमाने पर सार्वजनिक खरीद और अवसंरचना अनुबंधों में ISBs को पारंपरिक बैंक गारंटी (BGs) के सुरक्षित, किफायती और विश्वसनीय विकल्प के रूप में अपनाने और उन पर भरोसा बढ़ रहा है।

इंश्योरेंस श्योरिटी बॉन्ड क्या है?

इंश्योरेंस श्योरिटी बॉन्ड एक त्रिपक्षीय समझौता है, जिसमें बीमा कंपनी ‘श्योरिटी’ (जमानतदाता) के रूप में काम करती है और यह वित्तीय गारंटी देती है कि ठेकेदार अपने अनुबंधीय दायित्वों को पूरा करेगा। यदि ठेकेदार चूक करता है तो बीमा कंपनी परियोजना मालिक को क्षतिपूर्ति देती है।
इससे ठेकेदारों पर वित्तीय बोझ कम होता है और बैंक गारंटी की तरह बड़े पूंजीगत धन को ब्लॉक करने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

सरकारी पहल और नीतिगत समर्थन

वित्त मंत्रालय ने इंश्योरेंस श्योरिटी बॉन्ड्स (ISBs) और इलेक्ट्रॉनिक बैंक गारंटी (e-BG) को सभी सरकारी खरीद प्रक्रियाओं में पारंपरिक बैंक गारंटी के समकक्ष मान्यता दी है। इसके पीछे उद्देश्य है:

  • ठेकेदारों के लिए पूंजी लॉक-इन कम करना

  • खरीद प्रणाली में जोखिम उपकरणों का विविधीकरण

  • बीमा क्षेत्र के माध्यम से वित्तीय गारंटी तक पहुँच बढ़ाना

इसी को बढ़ावा देने के लिए NHAI ने नई दिल्ली में एक कार्यशाला आयोजित की, जिसकी अध्यक्षता श्री एन.आर.वी.वी.एम.के. राजेंद्र कुमार, सदस्य (वित्त), NHAI ने की। इसमें IRDA, बीमा कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और अवसंरचना विशेषज्ञों ने भाग लिया।

अवसंरचना परियोजनाओं में ISBs के लाभ

भारत जब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा निर्माण बाजार बनने की ओर बढ़ रहा है, तब प्रदर्शन और बोली गारंटी की वार्षिक मांग 6–8% की दर से बढ़ रही है। इस संदर्भ में ISBs के फायदे हैं:

  • किफायती: प्रीमियम अक्सर BGs की फीस से कम होते हैं

  • पूंजी दक्षता: ठेकेदारों को कार्यशील पूंजी ब्लॉक नहीं करनी पड़ती

  • तेज़ प्रक्रिया: खासकर डिजिटल प्रारूप में जल्दी जारी होते हैं

  • विस्तार योग्य: मध्यम और नए ठेकेदारों के लिए बीमा क्षेत्र भागीदारी से पहुँच आसान

NHAI और निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव

NHAI ने ISBs को मुख्यधारा में लाकर, उन्हें बोली सुरक्षा (पूर्व-अनुबंध) और प्रदर्शन सुरक्षा (अनुबंध पश्चात) दोनों के लिए स्वीकार किया है। इससे:

  • नए ठेकेदारों के लिए बाधाएँ कम होती हैं

  • राजमार्ग परियोजनाओं में प्रतिस्पर्धा बढ़ती है

  • अवसंरचना पारिस्थितिकी तंत्र में तरलता (Liquidity) बढ़ती है

  • वैश्विक सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं के अनुरूप वित्तपोषण मॉडल अपनाने में मदद मिलती है

मुख्य तथ्य याद रखें

  • NHAI के लिए ISBs का मूल्य (जुलाई 2025 तक): ₹10,369 करोड़

  • जारी करने वाली कंपनियाँ: 12 बीमा कंपनियाँ

  • उपयोग:

    • 1,600 बोली सुरक्षा (Bid Security)

    • 207 प्रदर्शन सुरक्षा (Performance Security)

  • नियामकीय समर्थन: वित्त मंत्रालय ने ISBs को BGs के बराबर माना

आईआईएम अहमदाबाद ने दुबई में अपना पहला वैश्विक परिसर शुरू किया

भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद (IIMA) ने 11 सितंबर 2025 को अपना पहला अंतर्राष्ट्रीय कैंपस दुबई में उद्घाटित किया। यह समारोह दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम और भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। यह भारत–यूएई शिक्षा साझेदारी में एक बड़ा मील का पत्थर है, जो नवाचार, नेतृत्व और वैश्विक प्रतिभा गतिशीलता को प्रोत्साहित करने की साझा प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।

उच्च-स्तरीय उद्घाटन समारोह
दुबई इंटरनेशनल एकेडमिक सिटी में आयोजित इस कार्यक्रम में दोनों देशों के वरिष्ठ नेता और अधिकारी उपस्थित थे, जिनमें शामिल थे—

  • मोहम्मद बिन अब्दुल्ला अल गेरगावी – यूएई के कैबिनेट मामलों के मंत्री

  • रीम बिंत इब्राहीम अल हाशिमी – अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मामलों की राज्य मंत्री

  • सारा बिंत यूसुफ अल अमीरी – यूएई की शिक्षा मंत्री

  • सुंजय सुधीर – भारत के राजदूत, यूएई

  • सतीश कुमार सिवन – भारत के महावाणिज्य दूत, दुबई

  • IIMA के वरिष्ठ पदाधिकारी

शेख हमदान ने इस पहल को “भारत–यूएई सहयोग की गहराई का प्रतीक” बताते हुए कहा कि यह दुबई को एक वैश्विक शिक्षा और नवाचार केंद्र बनाने की दृष्टि को और मज़बूत करेगा।

“भारतीय आत्मा, वैश्विक दृष्टिकोण”
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इसे भारत की शिक्षा के वैश्वीकरण की दिशा में “ऐतिहासिक उपलब्धि” बताया। उन्होंने कहा कि IIMA दुबई, संस्थान की उस मूल भावना को दर्शाता है जो “भारतीय आत्मा में, पर वैश्विक दृष्टिकोण में” विश्वास करती है।

कैंपस की रूपरेखा और शैक्षणिक दृष्टि

  • पहला चरण: दुबई इंटरनेशनल एकेडमिक सिटी से शैक्षणिक गतिविधियों की शुरुआत।

  • दूसरा चरण (2029 तक): यूएई सरकार द्वारा आवंटित भूमि पर स्थायी कैंपस की स्थापना।

पहला कार्यक्रम: एक वर्ष का पूर्णकालिक एमबीए, खासकर कामकाजी पेशेवरों और उद्यमियों के लिए।
पहला बैच: 35 छात्र, जो बैंकिंग, कंसल्टिंग, आईटी, हेल्थकेयर और मैन्युफैक्चरिंग जैसे विभिन्न क्षेत्रों से हैं।
पाठ्यक्रम संरचना: पाँच टर्म में विभाजित, जिसमें उन्नत नेतृत्व, रणनीतिक सोच और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर विशेष ध्यान।

भारत और यूएई के लिए रणनीतिक महत्व

  • भारत की शैक्षणिक सॉफ्ट पावर और वैश्विक ब्रांड को बढ़ावा।

  • भारत–यूएई कूटनीतिक और शैक्षणिक संबंध और मज़बूत होंगे।

  • दुबई को अंतर्राष्ट्रीय छात्रों और संकाय को आकर्षित करने में मदद।

  • पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरोप तक भारतीय प्रबंधन शिक्षा की पहुँच।

  • नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत भारतीय संस्थानों के वैश्विक विस्तार को प्रोत्साहन।

महत्वपूर्ण तथ्य (Key Takeaways)

  • कार्यक्रम: IIMA का पहला अंतर्राष्ट्रीय कैंपस उद्घाटन

  • स्थान: दुबई इंटरनेशनल एकेडमिक सिटी

  • उद्घाटन: शेख हमदान (दुबई) और धर्मेंद्र प्रधान (भारत)

  • शुरुआती कार्यक्रम: एक वर्ष का पूर्णकालिक एमबीए (पेशेवरों के लिए)

  • भविष्य योजना: 2029 तक स्थायी कैंपस

  • महत्व: किसी भी IIM का पहला वैश्विक कैंपस, भारत की शिक्षा कूटनीति का हिस्सा

नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं सुशीला कार्की

नेपाल में एक ऐतिहासिक राजनीतिक परिवर्तन के तहत देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अब पहली महिला प्रधानमंत्री चुना गया है। उन्हें यह पद जनरेशन-ज़ेड (Gen-Z) प्रदर्शनकारियों द्वारा अंतरिम नेता के रूप में चयनित किए जाने के बाद मिला। यह फैसला उस जन-आंदोलन का परिणाम है जिसने युवाओं के नेतृत्व में पूर्व प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली को इस्तीफा देने पर मजबूर किया और लंबे समय से जमी राजनीतिक व्यवस्था को बदलकर रख दिया। 73 वर्षीय कार्की ने 12 सितम्बर 2025 को शपथ ग्रहण की। उनका यह कार्यभार ग्रहण करना राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल, नेपाली सेना नेतृत्व और Gen-Z प्रतिनिधियों के बीच हुई सहमति का हिस्सा है, जो नेपाल की राजनीति में एक नई दिशा और महिला सशक्तिकरण का प्रतीक माना जा रहा है।

Gen-Z विद्रोह
नेपाल में हालिया विद्रोह मुख्य रूप से उन युवाओं द्वारा नेतृत्व किया गया जिन्हें भ्रष्टाचार और शासन की विफलताओं से गहरी नाराज़गी थी। जब सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की तो आक्रोश और तेज़ हो गया। यह आंदोलन हिंसक रूप ले बैठा, जिसमें 30 से अधिक लोगों की मौत और 1,000 से अधिक लोग घायल हुए। नतीजतन, वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं को बड़े पैमाने पर इस्तीफे देने पड़े और नेपाल की राजनीति में एक पीढ़ीगत बदलाव देखने को मिला। नेतृत्व के लिए वैकल्पिक नामों में काठमांडू के मेयर बालेन्द्र शाह (बालेन) और नेपाल विद्युत प्राधिकरण के पूर्व प्रमुख कुलमान घिसिंग पर विचार हुआ, लेकिन अंततः उनकी साफ-सुथरी छवि, भ्रष्टाचार विरोधी रुख और जनविश्वसनीयता के कारण सुशीला कार्की सर्वसम्मति से चुनी गईं।

सुशीला कार्की कौन हैं?

  • जन्म: 7 जून 1952, बिराटनगर, नेपाल

  • शिक्षा:

    • बी.ए., महेन्द्र मोरंग कैंपस, नेपाल (1972)

    • एम.ए. (राजनीति विज्ञान), बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, भारत (1975)

    • एलएलबी, त्रिभुवन विश्वविद्यालय, नेपाल (1978)

  • कानूनी करियर: 1979 में वकालत शुरू की, 2007 में सीनियर एडवोकेट बनीं।

  • न्यायपालिका:

    • 2009 में सुप्रीम कोर्ट की ऐड-हॉक जज नियुक्त हुईं, 2010 में स्थायी जज बनीं।

    • जुलाई 2016 से जून 2017 तक नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रहीं।

    • भ्रष्टाचार पर जीरो-टॉलरेंस नीति के लिए जानी जाती हैं, इसी वजह से राजनीतिक अभिजात वर्ग से टकराव भी हुआ।

    • 2017 में महाभियोग की कोशिशों का सामना किया लेकिन सफलतापूर्वक कार्यकाल पूरा किया।

अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में भूमिका
प्रधानमंत्री पद की शपथ लेकर कार्की का मुख्य उद्देश्य होगा—

  • हालिया अशांति के बाद नेपाल में स्थिरता लाना

  • अगले 6–12 महीनों में निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराना।

  • शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाकर जनता का विश्वास बहाल करना

क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व
भारत और चीन के बीच स्थित नेपाल का भू-राजनीतिक महत्व बहुत बड़ा है। कार्की का उदय न केवल पीढ़ीगत बदलाव का संकेत है बल्कि लैंगिक समानता और महिला नेतृत्व के लिए भी ऐतिहासिक मील का पत्थर है। दक्षिण एशिया में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को यह एक नई प्रेरणा दे सकता है। साथ ही, भारत में शिक्षा प्राप्त करने के कारण उनके नेतृत्व से भारत-नेपाल संबंधों में सांस्कृतिक और कूटनीतिक मजबूती आने की उम्मीद है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • नाम: सुशीला कार्की

  • पद: नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री (पहली महिला प्रधानमंत्री)

  • शपथ: 12 सितम्बर 2025

  • चयनित द्वारा: Gen-Z नेता, नेपाली सेना, राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल

  • पूर्ववर्ती: के. पी. शर्मा ओली (प्रदर्शनों के बाद इस्तीफा)

  • प्रमुख कार्य: 6–12 महीनों में चुनाव कराना

  • पृष्ठभूमि: नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश (2016–2017)

सीपी राधाकृष्णन ने भारत के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली

सी. पी. राधाकृष्णन ने 12 सितम्बर 2025 को भारत के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर कई वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। इस शपथ ग्रहण समारोह के साथ ही राधाकृष्णन देश के दूसरे सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन हुए।

उप राष्ट्रपति चुनाव और विजय

  • राधाकृष्णन एनडीए (NDA) के उम्मीदवार थे।

  • उन्होंने 452 मत प्राप्त कर जीत हासिल की।

  • विपक्षी उम्मीदवार और पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बी. सुदर्शन रेड्डी को 300 मत मिले।

  • एनडीए के पास कागज़ों पर 427 सांसदों का समर्थन था, लेकिन वाईएसआर कांग्रेस (YSRCP) के 11 सांसदों ने भी राधाकृष्णन के पक्ष में मतदान किया।

  • उन्हें कुल 14 अतिरिक्त वोट मिले, जिससे विपक्षी खेमे में क्रॉस-वोटिंग की अटकलें लगाई जा रही हैं।

शपथ ग्रहण समारोह

  • स्थान: राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली

  • शपथ दिलाने वालीं: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

  • प्रमुख उपस्थित अतिथि:

    • पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ (पद छोड़ने के बाद पहली सार्वजनिक उपस्थिति)

    • पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद

    • लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला

    • महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

    • मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव

    • आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू

राजनीतिक महत्व

  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राधाकृष्णन को बधाई दी और आशा जताई कि वे भारत के संवैधानिक मूल्यों को और मज़बूती देंगे।

  • यह विजय एनडीए की शीर्ष संवैधानिक पदों पर पकड़ को और सुदृढ़ करती है।

  • राधाकृष्णन की इस उन्नति को कई लोग “कोयंबटूर के वाजपेयी” क्षण कह रहे हैं, जो उनकी लंबे समय से पार्टी की विचारधारा और सुशासन के प्रति निष्ठा को दर्शाता है।

परीक्षा हेतु मुख्य तथ्य

  • पद: भारत के 15वें उपराष्ट्रपति

  • नाम: सी. पी. राधाकृष्णन

  • तिथि: 12 सितम्बर 2025

  • स्थान: राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली

  • चुनाव परिणाम:

    • राधाकृष्णन (452 वोट)

    • बी. सुदर्शन रेड्डी (300 वोट)

  • राजनीतिक पहचान: “कोयंबटूर के वाजपेयी”

भारत ने आभूषण व्यापार को बढ़ावा देने के लिए जेद्दा में SAJEX 2025 का शुभारंभ किया

भारत और सऊदी अरब के बीच द्विपक्षीय व्यापार को गहराई देने और वैश्विक ज्वेलरी सेक्टर में भारत की उपस्थिति को बढ़ाने के लिए जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) ने सऊदी अरब ज्वेलरी एक्सपोज़िशन (SAJEX) 2025 का आयोजन जेद्दा में किया है। यह आयोजन भारतीय वाणिज्य मंत्रालय, भारतीय दूतावास (रियाद) और भारतीय वाणिज्य दूतावास (जेद्दा) के सहयोग से हो रहा है। यह पहल सऊदी अरब और खाड़ी देशों (GCC) में भारत के ज्वेलरी निर्यात को मज़बूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

इवेंट विवरण

  • स्थान: जेद्दा सुपरडोम, सऊदी अरब

  • तिथि: 11–13 सितम्बर 2025

  • प्रदर्शक: 200+

  • बूथ्स: 250

  • अंतर्राष्ट्रीय खरीदार/बिज़नेस विज़िटर: 2,000+

प्रमुख प्रदर्शनी उत्पाद:

  • हीरा और रंगीन रत्नों के आभूषण

  • ब्राइडल कलेक्शन

  • 18 कैरेट, 21 कैरेट और 22 कैरेट सोने के आभूषण

  • लैब-ग्रोउन डायमंड्स

  • ज्वेलरी बनाने की तकनीक और नवाचार

भारत का ज्वेलरी उद्योग: वैश्विक नेतृत्व

भारत ने वित्त वर्ष 2024–25 में 32 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के रत्न और आभूषण निर्यात किए।

  • वैश्विक हीरा मूल्य का 65% भारत में प्रोसेस होता है (हर साल 1 अरब से अधिक हीरे)।

  • हीरा व्यापार का 92% वॉल्यूम भारत से आता है।

  • सोना, चांदी, रंगीन रत्न और लैब-ग्रोउन डायमंड्स में अग्रणी निर्यातक।

  • FY 2024–25 में इस क्षेत्र में FDI में 315% वृद्धि हुई, जो कुल 50 अरब अमेरिकी डॉलर के FDI प्रवाह का बड़ा हिस्सा है।

सऊदी अरब: विज़न 2030 के तहत उभरता बाज़ार

  • GDP: 1.1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर (खाड़ी का सबसे बड़ा अर्थतंत्र)।

  • लक्ज़री, रिटेल और टूरिज़्म में तेज़ी से बढ़ता प्रभाव।

  • डायमंड और गोल्ड ज्वेलरी मार्केट:

    • 2024 में $4.56 अरब

    • 2030 तक $8.34 अरब (CAGR 10.6%)

SAJEX 2025 का उद्देश्य इस बढ़ते बाज़ार का लाभ उठाना और सऊदी अरब को क्षेत्रीय ज्वेलरी हब के रूप में स्थापित करना है।

परीक्षा हेतु मुख्य तथ्य

  • इवेंट: सऊदी अरब ज्वेलरी एक्सपोज़िशन (SAJEX) 2025

  • स्थान: जेद्दा सुपरडोम

  • तिथियाँ: 11–13 सितम्बर 2025

  • आयोजक: GJEPC, भारतीय वाणिज्य दूतावास (जेद्दा), भारतीय दूतावास (रियाद), वाणिज्य मंत्रालय

  • भारत का ज्वेलरी निर्यात (FY 2024–25): $32 अरब

  • सऊदी मार्केट ग्रोथ: $4.56B (2024) → $8.34B (2030), CAGR 10.6%

भारत ने 250 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन बिजली क्षमता हासिल की

भारत ने स्वच्छ और सतत ऊर्जा भविष्य की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर छू लिया है। 11 सितम्बर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित नवीकरणीय ऊर्जा पर राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने घोषणा की कि देश ने 250 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता हासिल कर ली है।

यह उपलब्धि भारत को स्वच्छ ऊर्जा क्षमता वाले शीर्ष देशों में शामिल करती है और पेरिस समझौते के तहत तय 2030 तक 500 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य की ओर तेज़ी से आगे बढ़ाती है।

गैर-जीवाश्म क्षमता का विभाजन

इस 250 गीगावॉट क्षमता में शामिल हैं –

  • सौर ऊर्जा

  • पवन ऊर्जा

  • जलविद्युत

  • बायोमास ऊर्जा

  • परमाणु ऊर्जा

यह केवल एक आँकड़ा नहीं बल्कि भारत की ऊर्जा संरचना में जीवाश्म ईंधन से स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव का प्रतीक है।

2030 का लक्ष्य: 500 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा

मंत्री जोशी ने दोहराया कि सरकार 2030 तक 500 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह लक्ष्य चुनौतीपूर्ण जरूर है लेकिन वर्तमान नीतियों, निवेश और राज्यों की सक्रिय भागीदारी से संभव है।

स्वच्छ भारत और स्वच्छ ऊर्जा: सतत विकास के स्तंभ

मंत्री ने कहा कि स्वच्छ भारत और स्वच्छ ऊर्जा प्रधानमंत्री मोदी की सबसे प्रिय पहलें हैं। स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने से –

  • जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद मिलेगी,

  • प्रदूषण कम होगा,

  • सार्वजनिक स्वास्थ्य सुधरेगा,

  • गरीबों तक ऊर्जा की पहुँच बढ़ेगी।

20 लाख घरों को मुफ्त बिजली: यूटिलिटी-नेतृत्व मॉडल

एक प्रमुख नीति उपलब्धि के तौर पर सरकार ने 20 लाख घरों को यूटिलिटी-आधारित सौर मॉडल से मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई है।

मुख्य बिंदु –

  • यह योजना उन परिवारों के लिए है जिनके पास रूफटॉप स्वामित्व या ढांचा नहीं है।

  • आंध्र प्रदेश ने इस योजना में उत्कृष्ट प्रगति दिखाई और विस्तृत प्रस्ताव जमा किए।

  • केंद्र सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 1 करोड़ घरों तक पहुँचाना है।

  • यह मॉडल ग्रिड से जुड़े सौर संयंत्रों के जरिए गरीब और ग्रामीण परिवारों को ऊर्जा समानता प्रदान करता है।

NEXT GEN GST और आर्थिक प्रभाव

मंत्री ने कहा कि नेक्स्ट जेन जीएसटी सुधार जीडीपी वृद्धि को बढ़ावा देंगे और अप्रत्यक्ष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को लाभ पहुंचाएँगे। इससे क्लीन टेक कंपनियों के लिए निवेश ढाँचा और अनुपालन सरल होगा।

प्रमुख तथ्य 

  • उपलब्धि: भारत ने 250 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल की।

  • घोषणा: प्रह्लाद जोशी, 11 सितम्बर 2025।

  • 2030 लक्ष्य: 500 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा।

  • मुफ्त बिजली पहल:

    • अब तक 20 लाख घर लाभान्वित।

    • लक्ष्य: 1 करोड़ घर।

    • यूटिलिटी-नेतृत्व सौर मॉडल से लागू।

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