New cricket rules: आईसीसी ने क्रिकेट के कई नियमों में किया बदलाव

 

आईसीसी ने मुख्य कार्यकारी समिति की बैठक के बाद क्रिकेट के कई नियमों में बदलाव किया है। इनमें से नौ बदलाव महत्वपूर्ण हैं, जिनसे खेल पर काफी असर पडे़गा। ये बदलाव 01 अक्तूबर से लागू होंगे। इसका मतलब है कि ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी20 विश्व कप में भी इन नियमों का पालन किया जाएगा। निष्कर्षों को महिला क्रिकेट समिति के साथ भी साझा किया गया, जिन्होंने सिफारिशों का समर्थन किया।

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नये नियम कुछ इस प्रकार है:

 

कैच आउट नियम: जब कोई बल्लेबाज कैच आउट होगा, तो नया बल्लेबाज स्ट्राइक पर ही खेलने आएगा। आउट होने वाले बल्लेबाज का क्रीज बदलने या नहीं बदलने से इस पर कोई असर नहीं होगा। जबकि पहले नियम में था कि अगर बल्लेबाज कैच आउट होने से पहले स्ट्राइक चेंज करता है, तो नया बल्लेबाज नॉन स्ट्राइक पर आता था।

इन-मैच पेनल्टी नियम: जनवरी 2022 में टी20 इंटरनेशनल में लागू किया गया इन-मैच पेनल्टी नियम अब वनडे फॉर्मेट में भी अपनाया जाएगा। यह नियम 2023 में पुरुष क्रिकेट वर्ल्ड कप सुपर लीग के खत्म होने के बाद लागू होगा। बता दें कि जब कोई फील्डिंग टीम समय पर निर्धारित ओवर खत्म नहीं करती है, तो मैच के आखिर (डेथ ओवर्स) में उस टीम को बाउंड्री पर एक फील्डर कम रखने की सजा मिलती है। वह फील्डर सर्कल के अंदर लगता है। इसे ही इन-मैच पेनल्टी नियम कहते हैं।

नॉन-स्ट्राइकर का रनआउट होना: अगर कोई नॉन-स्ट्राइकर गेंदबाज के बॉल डालने से पहले क्रीज से बाहर निकलता है, तब गेंदबाज यदि उस बैटर को रनआउट करता है, तो इसे पहले ‘अनफेयर प्ले’ माना जाता था, लेकिन अब इसे रनआउट ही कहा जाएगा।

लार का इस्तेमाल: कोरोना महामारी के कारण साल 2020 के शुरुआत से ही क्रिकेट पर असर पड़ना शुरू हो गया था। इसके बाद लॉकडाउन के साथ ही क्रिकेट को भी पूरी दुनिया में बंद कर दिया गया था। फिर खेल को दोबारा शुरू करने के लिए कुछ नए नियम बनाए थे। तब लार के इस्तेमाल को अस्थायी तौर पर बैन कर दिया था। लेकिन अब क्रिकेट में लार का इस्तेमाल पूरी तरह से प्रतिबंधित ही रहेगा। यह नियम अब स्थायी हो जाएगा।

स्ट्राइकर के बॉल खेलने का अधिकार: यह प्रतिबंधित है, क्योंकि खेलते समय बल्ले या बैटर को पिच के अंदर ही होना चाहिए। अगर बैटर पिच से बाहर आकर खेलने को मजबूर होता है, तो अंपायर कॉल होगा कि वह उसे डेड बॉल करार दे। यदि कोई बॉल बैटर को पिच से बाहर आने पर मजबूर करती है, तो अंपायर इसे नोबॉल करार देगा।

नए बैटर के लिए स्ट्राइक लेने का टाइम: किसी प्लेयर के आउट होने के बाद जब नया बैटर स्ट्राइक पर आता है, तो उसे टेस्ट और वनडे में 2 मिनट के अंदर स्ट्राइक पर आना होगा। जबकि टी20 इंटरनेशनल में यह समय 90 सेकंड का निर्धारित किया गया है। पहले नए बल्लेबाज को तीन मिनट के अंदर स्ट्राइक पर आना था। यदि नया बैटर टाइम पर नहीं आता है, तो फील्डिंग टीम का कप्तान टाउम आउट की अपील कर सकता है।

डिलेवरी से पहले स्ट्राइकर की तरफ बॉल थ्रो: अगर कोई गेंदबाज बॉल डालने के लिए रनअप लेता है और डिलेवरी स्ट्राइड में आने से पहले देखता है कि बैटर क्रीज से ज्यादा आगे आ गया है। तब बॉलर आउट करने के इरादे से स्ट्राइकर की ओर बॉल थ्रो करता है, तो इसे डेड बॉल करार दिया जाएगा।

फील्डिंग टीम की तरफ से गलत व्यवहार: अगर बॉलर गेंदबाजी के दौरान (रनअप) कुछ अनुचित व्यवहार या जानबूझकर कुछ गलत मूवमेंट करता है, तो अंपायर इस पर एक्शन ले सकता है। पेनल्टी लगाते हुए बैटिंग टीम के खाते में 5 रन भी जोड़ सकता है। साथ ही अंपायर इसे डेड बॉल भी करार देगा।

 

आईसीसी क्रिकेट समिति:

  • सौरव गांगुली (अध्यक्ष);
  • रमिज़ राजा (पर्यवेक्षक);
  • महेला जयवर्धने और रोजर हार्पर (पिछले खिलाड़ी);
  • डेनियल विटोरी और वीवीएस लक्ष्मण (वर्तमान खिलाड़ियों के प्रतिनिधि);
  • गैरी स्टीड (सदस्य टीम कोच प्रतिनिधि);
  • जय शाह (पूर्ण सदस्य प्रतिनिधि);
  • जोएल विल्सन (अंपायर प्रतिनिधि);
  • रंजन मदुगले (आईसीसी चीफ रेफरी); जेमी कॉक्स (एमसीसी प्रतिनिधि);
  • काइल कोएत्जर (एसोसिएट प्रतिनिधि);
  • शॉन पोलक (मीडिया प्रतिनिधि);
  • ग्रेग बार्कले और ज्योफ एलार्डिस (पदेन – आईसीसी अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी);
  • क्लाइव हिचकॉक (समिति सचिव);
  • डेविड केंडिक्स (सांख्यिकीविद्)।

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चावल, गेहूं ने महंगाई को बढ़ाया

 

खाद्य वस्तुओं और कुछ विनिर्मित वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने 10 सितंबर को समाप्त सप्ताह के लिए मुद्रास्फीति को एक प्रतिशत के स्तर से बढ़ाकर 1.21 प्रतिशत कर दिया, जो पिछले सप्ताह में 0.92 प्रतिशत थी। हालांकि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में नरमी आई है, गेहूं और चावल अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति की बैठक से पहले चिंता का कारण बन सकते हैं।

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खाने-पीने का सामान खास तौर पर दाल-चावल, गेहूं और सब्जियों की कीमतों के बढ़ने की वजह से महंगाई बढ़ी है। अगस्त में फूड इन्फ्लेशन 7.62% हो गई जो जुलाई में 6.69% थी। जून में 7.75% रही थी। मई में यह 7.97% और अप्रैल में 8.38% थी। दूसरी ओर, रूस-यूक्रेन युद्ध ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर दिया और कमोडिटी की कीमतों में तेजी आई। इसने भारत को, दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक, युद्ध के कारण गेहूं की आपूर्ति में शून्य को पकड़ने का अवसर प्रदान किया, यूक्रेन ने दुनिया के कुल गेहूं निर्यात का 12 प्रतिशत हिस्सा लिया।

 

गेहूं का उत्पादन क्यों प्रभावित हुआ है?

कई हितधारकों और विशेषज्ञों ने चिंता जताई कि इस साल भारत का अपना उत्पादन और खरीद देश भर में देखी गई गर्मी की लहर से प्रभावित हुई है। लेकिन सरकार ने आगे बढ़कर निजी क्षेत्र द्वारा गेहूं के निर्यात की अनुमति दी। कथित तौर पर इस फैसले से किसानों को गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक कीमत मिली।

जिम्मेदार कारक

वैश्विक और घरेलू कारकों के एक कॉकटेल के कारण बढ़ती मुद्रास्फीति पर्याप्त नहीं थी, मार्च में एक गर्मी की लहर ने गेहूं की कीमतों की स्थिति को और खराब कर दिया। 27 जुलाई को, स्थानीय बाजारों में गेहूं की कीमतें 23,547 रुपये प्रति टन के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गईं, जो सरकार के निर्यात प्रतिबंध के कारण हाल ही में पहुंचे निम्न स्तर से लगभग 12 प्रतिशत अधिक है।

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सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 2022-23 में 30 फीसदी बढ़ा

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वित्तीय वर्ष 2022-23 का सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 17 सितंबर तक 8.36 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक है। चालू वित्त वर्ष में 17 सितंबर तक शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 7.01 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 23 प्रतिशत अधिक है।

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वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 2022-23 में 17 सितंबर तक संचयी अग्रिम कर संग्रह 2.95 लाख करोड़ रुपये था, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 17 प्रतिशत अधिक है। 17 सितंबर तक 1,35,556 करोड़ रुपये का रिफंड जारी किया गया, जो पिछले साल की तुलना में 83 फीसदी अधिक है। बयान में कहा गया है कि रिफंड तेजी से शुरू किया गया, जिससे 2022-23 में जारी किए गए रिफंड की संख्या में लगभग 468 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

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आरबीआई ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को पीसीए फ्रेमवर्क से हटाया

 

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को बड़ी राहत मिली है। दरअसल आरबीआई ने उसे त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) की निगरानी सूची से हटा दिया है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया अब ये बंदिशें हटने के बाद बिना किसी प्रतिबंध के ऋण बांट सकेगा।

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आरबीआई की तरफ से एक बयान जारी किया गया है। जिसमें कहा गया है कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के प्रदर्शन की समीक्षा की गई जिसके बाद उसे पीसीए के फ्रेमवर्क से बाहर करने का फैसला लिया गया है। बयान में कहा गया है कि निगरानी बोर्ड ने बैंक के प्रदर्शन की समीक्षा में पाया कि मार्च 2022 में समाप्त वित्त वर्ष में उसने पीसीए के मानकों का उल्लंघन नहीं किया।

 

बता दें कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया देश का इकलौता सरकारी बैंक है, जो पिछले पांच साल से पीसीए के दायरे में था। रिजर्व बैंक की तरफ से सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को पीसीए फ्रेमवर्क से बाहर करने के बाद इस सरकारी बैंक के शेयरों में भी जबरदस्त उछाल आया है। सेंट्रल बैंक को साल 2017 में पीसीए के दायरे में लाया गया था।

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देवेन्द्र झाझरिया विश्व पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री प्रतियोगिता में रजत पदक हासिल किया

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भारतीय भालाफेंक खिलाड़ी देवेन्द्र झाझरिया मोरक्को में विश्व पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री प्रतियोगिता में रजत पदक हासिल किया। पैरा ओलिम्पिक्स के स्वर्ण पदक विजेता देवेन्द्र ने 60 दशमलव नौ-सात मीटर की दूरी पर भाला फेंककर रजत पदक जीता। वे तीन बार के पैरा ओलिम्पिक पदक विजेता हैं। भारत के ही अजित कुमार ने 64 मीटर जेवलिन फेंककर स्वर्ण पदक जीता।

 

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सिल्वर मेडल से उत्साहित झाझड़िया ने कहा कि साल 2002 में उन्होंने दक्षिण कोरिया में पैरा एशियन गेम्स में गोल्ड के रूप में कैरियर का पहला अंतरराष्ट्रीय पदक जीता था. भारत अब तक मोरक्को में विश्व पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में 3 स्वर्ण पदक, दो रजत और एक कांस्य पदक जीत चुका है। भारत के लिए अन्य पदक विजेताओं में नीरज यादव (F55/56 डिस्कस- गोल्ड), अनिल कुमार (T54 100 मीटर- सिल्वर) और रंजीत भाटी (F57 भाला-कांस्य) शामिल हैं।

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कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव का निधन

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मशहूर कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव का निधन हो गया। वे 58 साल के थे। वे पिछले लगभग डेढ़ महीने से अस्पताल में भर्ती थे। उन्होंने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में अंतिम सांस ली। एक महीने से अधिक समय पहले दिल का दौरा पड़ने के कारण वे अस्पताल में भर्ती कराए गए थे। लोकप्रिय हास्य कलाकार और अभिनेता राजू श्रीवास्तव लंबे समय से जीवन रक्षक प्रणाली (वेंटिलेटर) पर थे।

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राजू श्रीवास्तव को 10 अगस्त को दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती करवाया गया था और उसी दिन उनकी एंजियोप्लास्टी हुई थी।  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव समेत सभी बड़े नेताओं और फिल्मी जगत की हस्तियों ने राजू श्रीवास्तव के निधन पर शोक जताया।

 

राजू श्रीवास्तव के बारे में

 

राजू श्रीवास्तव का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर में 25 दिसंबर 1963 को हुआ था। उनका बचपन में नाम सत्य प्रकाश श्रीवास्तव था। राजू को बचपन से ही मिमिक्री और कॉमेडी का बहुत शौक था। राजू को कॉमेडी शो The Great Indian Laughter Challenge से पहचान मिली थी। इस शो से मिली सफलता के बाद राजू ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। राजू श्रीवास्तव ने साल 1993 में शिखा श्रीवास्तव से शादी की थी। उनके दो बच्चे हैं। उन्होंने ‘मैंने प्यार किया’, ‘बाजीगर’, ‘बॉम्बे टू गोवा’ (रीमेक) और ‘आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया’ जैसी फिल्मों में अभिनय किया था। राजू श्रीवास्तव को साल 2019 में यूपी फिल्म विकास परिषद का अध्यक्ष बनाया गया था।

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World Alzheimer’s Day 2022: जानें विश्व अल्जाइमर दिवस के बारे में

 

प्रत्येक वर्ष 21 सितंबर को विश्व स्तर पर विश्व अल्जाइमर दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाए जाने का उद्देश्य अल्जाइमर रोग और इससे संबंधित भ्रांतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। पिछले कुछ सालों में अल्‍जाइमर एक सामान्‍य बीमारी के रूप में उभर कर सामने आई है। यह दिवस दुनिया भर में बीमारी, सामान्य लक्षणों और जोखिम कारकों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है।

 

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अल्जाइमर रोग

 

अल्‍जाइमर दिमागी बीमारी है, जो व्‍यक्ति के दिमाग को कमजोर कर याद्दाश्‍त पर असर डालती है। पहले ये बीमारी ज्‍यादातर बुजुर्गों में देखने में मिलती थी, लेकिन तनाव और डिप्रेशन की वजह से अब ये कम उम्र के व्‍यक्ति को भी अपना शिकार बना रही है। अल्‍जाइमर के बढ़ने की एक वजह जागरूकता की कमी भी है। यह स्थिति एक प्रगतिशील बीमारी है जिसके कारण मस्तिष्क की कोशिकाएं बिगड़ती हैं और मर जाती हैं।

 

क्‍यों मनाते हैं विश्व अल्जाइमर दिवस?

विश्व अल्जाइमर दिवस हर साल 21 सितंबर को मनाया जाता है। अल्‍जाइमर एक मानसिक रोग है, जिसे लोग गंभीरता से नहीं लेते। ज्‍यादातर लोगों का मानना है कि उम्र के साथ याददाश्त का कमजोर होना आम बात है। यही वजह है कि अधिकतर लोग बिना ट्रीटमेंट के कई तरह की पर्सनेलिटी डिसऑर्डर का सामना कर रहे हैं। भारत में ही नहीं अन्‍य देशों में भी लोग इस बीमारी को नजरअंदाज कर रहे हैं। लोगों की इसी सोच को बदलने के उद्देश्‍य से हर साल अल्‍जाइमर दिवस मनाया जाता है।

 

वर्ल्‍ड अल्‍जाइमर दिवस का इतिहास

वर्ल्‍ड अल्‍जाइमर दिवस को साल 2012 से हर साल विश्‍वस्‍तर पर मनाया जा रहा है। बता दें कि अल्‍जाइमर का इलाज पहली बार साल 1901 में एक जर्मन महिला का किया गया था। इस बीमारी का इलाज जर्मन मनोचिकित्‍सक डॉ. अलोइस अल्‍जाइमर ने किया था। उन्‍हीं के नाम पर इस बीमारी का नाम रखा गया था। जब अल्‍जाइमर डिजीज ने 21 सितंबर 1994 को अपनी 10वीं एनिवर्सरी सेलिब्रेट की तब इस दिवस को विश्‍व स्‍तर पर हर साल मनाने की घोषणा की गई। तभी से हर देश में कई जागरूकता अभियान और आयोजन आयोजित किए जाते हैं।

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गुजराती फिल्म ‘छेलो शो’ हुई ऑस्कर के लिए नॉमिनेट

 

सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार ऑस्कर अवार्ड के 2023 के लिए नॉमिनेशन चल रहे हैं। इस साल के ऑस्कर के लिए भारत की एक फिल्म को नामांकित हुई है। ऑस्कर 2023 के लिए निर्देशक पैन नलिन की गुजराती फिल्म ‘छेलो शो’ (द लास्ट फिल्म शो) को भारत की ओर से आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में भेजने का फैसला किया गया है।

 

‘छेलो शो’ (द लास्ट फिल्म शो) को भारत की तरफ से विदेशी भाषा की कैटिगरी में बेस्ट फिल्म के लिए ऑफिशियल एंट्री मिली है। फिल्म में भाविन राबरी, भावेश श्रीमाली, ऋचा मीणा, दीपेन रावल और परेश मेहता ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। फिल्म को पहली बार साल 2021 में ट्रिबेका फिल्म फेस्टिवल में दिखाया गया था। इसके बाद फिल्म को कई अलग-अलग अवॉर्ड फंक्शन में दिखाया गया है जहां इसे खूब तारीफ मिली है।

 

बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म

 

बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी के लिए ऑस्कर एकेडमी के तमाम सदस्य देशों की तरफ हर साल वहां की स्थानीय भाषा में एक फिल्म भेजी जाती है। इन फिल्मों में से कोई पांच फिल्में अंतिम दौर तक पहुंचेंगी और ये पांच फिल्में ऑस्कर की बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी के लिए नामित फिल्में कही जाती है। जिनमें एक फिल्म को इस अवार्ड के लिए चुना जाता है।

 

फिल्म की कहानी ये है

 

ये फिल्म एक किशोर के सिल्वर स्क्रीन के सपनों की कहानी कहती है। बीते साल अक्तूबर में इस फिल्म को वालाडोलिड इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का गोल्ड स्पाइक अवार्ड मिल चुका है। ‘छेलो शो’ एक ऐसे बच्चे समय की कहानी है जो सौराष्ट्र का रहने वाला है। उसके पिता एक गुजरात के एक रेलवे स्टेशन पर चाय बेचते हैं। एक दिन एक समय सिनेमाघर के प्रॉजेक्शन रूम में पहुंच जाता है और बहुत सारी फिल्में देखता है। जो उसकी लाइफ में कई बदलाव लाता है।

 

ऑस्कर पुरस्कारों में भारत

 

ऑस्कर पुरस्कारों में आखिरी बार साल 2001 में आमिर खान की फिल्म “लगान” ने अंतिम पांच में जगह बनाई थी। अंतिम पांच में जगह बनाने वाली दो अन्य भारतीय फिल्में “मदर इंडिया”(1958) और “सलाम बॉम्बे” (1989) हैं। ऑस्कर 2023 के लिए छेलो शो की एंट्री देश में रीजनल सिनेमा को बढ़ावा देगी।

 

World Peace Day 2022: जानें क्‍यों मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस?

 

अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस (World Peace Day) हर वर्ष 21 सितंबर को पूरे विश्व में मनाया जाता है। इस दिन यूनाइटेड नेशनल जनरल असेंबली (UNGA) राष्ट्रों और लोगों के बीच अहिंसा, शांति और युद्धविराम के आदर्शों को बढ़ावा देने के प्रयास करती है। इस वर्ष वर्ल्‍ड पीस डे की थीम है ‘End racism. Build peace.’ जिसका अर्थ है ‘नस्‍लवाद खत्‍म करें. शांति स्‍थापित करें’।

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पहली बार यह दिवस कब मनाया गया?

 

पहली बार इस दिवस को 1982 में कई राष्ट्रों, राजनीतिक समूहों, सैन्य समूहों और लोगों द्वारा मनाया गया था। 2013 में संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इसे शांति शिक्षा के लिए समर्पित किया। इस दिन की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय (न्यूयॉर्क) में संयुक्त राष्ट्र शांति घंटी बजाकर की जाती है।

 

क्यों मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस?

 

अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस को पूरी दुनिया में अहिंसा और संघर्ष विराम के रूप में माना जाता है। दुनिया में जहां भी युद्ध चल रहा है, इस दिन उनसे अपने विवाद खत्म करने की उम्मीद की जाती है, ताकि वे आपसी झगड़ों को खत्म करके शांति से रह सकें।

 

विश्व शांति दिवस का महत्व

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, विश्‍व शांति का अर्थ केवल हिंसा न होना नहीं है, बल्कि ऐसे समाजों का निर्माण है जहां सभी को यह अहसास हो कि वे आगे बढ़ सकते हैं और फल-फूल सकते हैं। साल 1981 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित यह दिन, मानवता के लिए सभी मतभेदों से ऊपर उठने, शांति के लिए प्रतिबद्ध होने और शांति की संस्कृति के निर्माण में योगदान करने का दिन है।

 

विश्व शांति दिवस का इतिहास

 

साल 2001 में विश्‍व शांति दिवस की आधिकारिक तिथि 21 सितंबर घोषित की गई थी। इससे पहले तक यह वार्षिक महासभा के उद्घाटन सत्र, सितंबर के तीसरे मंगलवार को मनाया जाता था। इस दिन को मनाने के लिए, न्यूयॉर्क शहर में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में संयुक्त राष्ट्र शांति घंटी (UN Peace Bell) बजाई जाती है। जून 1954 में जापान के संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा पीस बेल दान की गई थी। बेल टॉवर को Hanamido (फूलों से सजा हुआ एक छोटा मंदिर) की तर्ज पर बनाया गया था जो उस स्थान का प्रतीक है जहां गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था।

 

सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य:

  • संयुक्त राष्ट्र का मुख्यालय न्यूयॉर्क, यूएसए में है।
  • संयुक्त राष्ट्र की स्थापना 24 अक्टूबर 1945 को हुई थी।
  • एंटोनियो गुटेरेस संयुक्त राष्ट्र के महासचिव हैं।

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महाराष्ट्र सरकार ने ‘दौलताबाद किले’ का नाम बदलकर ‘देवगिरि किला’ करने का किया घोषणा

 

महाराष्ट्र के पर्यटन मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने कहा है कि ‘दौलताबाद किले’ का नाम बदलकर ‘देवगिरी किला’ रखा जाएगा। इससे पहले हाल ही में राज्य की एकनाथ शिंदे सरकार ने औरंगाबाद का नाम बदलकर संभाजीनगर और उस्मानाबाद का धाराशिव किया था। इसके अतिरिक्त सरकार ने नवी मुंबई एयरपोर्ट का भी नाम बदल कर डीबी पाटिल एयरपोर्ट कर दिया था।

 

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हैदराबाद मुक्ति दिवस के अवसर पर किले के परिसर में स्थित भारत माता मंदिर में आयोजित तिरंगा फहराने के एक समारोह में भाग लेते हुए लोढ़ा ने कहा कि किले को दौलताबाद उर्फ ​​देवगिरी के नाम से जाना जाता है। इसे आज भी दौलताबाद किले के नाम से जाना जाता है। राज्य पर्यटन विभाग इसका नाम बदलकर देवगिरी किले के रूप में करने का प्रस्ताव प्रस्तुत करेगा।

 

दौलताबाद किले के बारे में

 

दौलतपुर किला महाराष्ट्र के औरंगाबाद के पास देवगिरी गांव में स्थित एक ऐतिहासिक किलेदार गढ़ है। यह पहले यादव राजवंश की राजधानी थी और कुछ समय के लिए दिल्ली सल्तनत की राजधानी थी। 14 वीं शताब्दी में मोहम्मद तुगलक द्वारा किले का नाम बदलकर दौलताबाद कर दिया गया था, जिन्होंने दक्षिणी भारत में सैन्य अभियानों के आधार के रूप में इसके महत्व को समझा और अपनी राजधानी बनाने के विचार की कल्पना की। किले को बाद में क़ुब्बतुल इस्लाम के नाम से जाना गया और इस नाम से सिक्के ढाले गए।

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