चीन हाइड्रोजन संचालित ट्रेन शुरू करने वाला एशिया का पहला देश बन गया है

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चीन हाइड्रोजन संचालित शहरी ट्रेनों को लॉन्च करने वाला एशिया का पहला और दुनिया का दूसरा देश बन गया है। सितंबर 2022 में हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनों की शुरुआत करने वाला जर्मनी विश्व का पहला देश था। चीनी कंपनी सीआरआरसी कॉर्पोरेशन लिमिटेडने एक ऐसी ट्रेन बनाई है जिसकी अधिकतम गति 160 किमी प्रति घंटा है और यह बिना ईंधन भरे 600 किमीतक चल सकता है। फ्रांसीसी कंपनी एल्सटॉम द्वारा विकसित जर्मन कोराडिया आईलिंट सीरियल ट्रेन बिना ईंधन भरे 1175 किलोमीटर की दूरी तय की है। चीनी अधिकारियों के अनुसार, ट्रेन के संचालन से डीजल कर्षण की तुलना में कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जन में प्रति वर्ष 10 टन की कमी आएगी।

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हाइड्रोजन ट्रेनों की शुरुआत सबसे पहले अगस्त 2022 में जर्मनी में हुई थी। जर्मनी ने 14 हाइड्रोजन ट्रेनों का बेड़ा लॉन्च किया गया था। इन ट्रेनों को फ्रांस की कंपनी Alstom ने तैयार किया है। इनमें हाइड्रोजन फ्यूल सेल का इस्तेमाल किया गया है। ट्रेनों की छतों पर हाइड्रोजन को स्टोर किया जाता है और ऑक्सीजन से मिलने पर यह H2O यानी पानी बनाता है। इस प्रक्रिया में बनने वाली ऊर्जा का इस्तेमाल ट्रेनों को चलाने के लिए किया जाता है। इसमें किसी तरह का प्रदूषण नहीं होता है और इंजन किसी तरह की आवाज नहीं करता। जर्मनी की हाइड्रोजन ट्रेन की माइलेज 1,000 किमी है लेकिन सितंबर में यह 1175 किमी तक पहुंच गई थी।

 

भारत में कब आएगी हाइड्रोजन ट्रेन

भारत भी हाइड्रोजन गैस से चलने वाली ट्रेनों का विकास कर रहा है। यह ट्रेन पूरी तरह स्वदेशी होगी, जिसका डिजाइन भारतीय इंजीनियर तैयार कर रहे हैं। रेल मंत्री का कहना है कि इस साल के अंत तक भारत में हाइड्रोजन फ्यूल सेल से चलने वाली ट्रेन तैयार हो जाएगी। इनका डिजाइन मई-जून 2023 तक सामने आ जाएगा। रेलवे ने फाइनेंशियल ईयर 2030 तक नेट जीरो कार्बन एमिटर बनने का लक्ष्य रखा है।

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वाराणसी से डिब्रूगढ़ के लिए रवाना होगा क्रूज, पीएम मोदी दिखाएंगे हरी झंडी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 जनवरी 2023 को दुनिया की सबसे लंबी नदी क्रूज का शुभारंभ करेंगे, जो 13 जनवरी 2023 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी से असम के डिब्रूगढ़ तक बांग्लादेश के माध्यम से यात्रा करेगी। यह दुनिया में एकल नदी जहाज द्वारा सबसे बड़ी एकल नदी यात्रा होगी। क्रूज, जिसे ‘गंगा विलास क्रूज’ नाम दिया गया है, 50 दिनों में गंगा-भागीरथी-हुगली, ब्रह्मपुत्र और वेस्ट कोस्ट नहर सहित 27 नदी प्रणालियों के साथ 4000 किलोमीटर की दूरी तय करेगा।

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यह क्रूज सुंदरवन डेल्टा और काजीरंगा नेशनल पार्क एवं राष्ट्रीय उद्यानों से होते हुए गुजरेगा। बनारस से डिब्रूगढ़ तक संचालित होने वाली यह क्रूज सेवा दुनिया की सबसे लंबी क्रूज सेवा होगी। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों द्वारा बताया गया कि यह क्रूज सेवा प्रारंभ हो जाने के बाद इसके सफल संचालन को देखते हुए भारत के अन्य नदियों में भी रिवर क्रूज संचालित करने पर विचार किया जाएगा।

 

नदी क्रूज का मार्ग

 

गंगा विलास क्रूज उत्तर प्रदेश के वाराणसी से बांग्लादेश होते हुए असम के डिब्रूगढ़ तक शुरू होगा। बांग्लादेश में, यह फिर से भारत में प्रवेश करने से पहले 1100 किलोमीटर का रास्ता तय करेगा। यह भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल रूट के तहत संभव होगा, जिसने पहले ही गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों पर दोनों देशों को जोड़ने वाले व्यापार और पारगमन चैनल खोल दिए हैं। यात्रा के दौरान 50 महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों का दौरा किया जाएगा, जिसमें कुछ ऐतिहासिक स्मारक, प्रतिष्ठित वाराणसी गंगा आरती, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, असम और पश्चिम बंगाल में सुंदरबन डेल्टा जैसे संरक्षित क्षेत्र शामिल हैं।

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ऑनलाइन गेमिंग में सट्टेबाज़ी पर होगी रोक, सरकार ने जारी किया कंपनियों के लिए नया ड्राफ्ट

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केंद्र सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग (Online Gaming) कंपनियों के लिए नए नियमों का ड्राफ्ट तैयार किया है। इसके मुताबिक, इन कंपनियों के लिए एक सेल्फ-रेगुलेटरी सिस्टम बनाए जाने के साथ ही भारत में स्थित उनके पते का वेरीफिकेशन अनिवार्य करने का प्रावधान रखा गया है। नए नियमों के ड्राफ्ट के मुताबिक, ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को नए आईटी एक्ट (सूचना प्रौद्योगिकी नियमों) के तहत लाया जाएगा। ये नियम साल 2021 में सोशल मीडिया कंपनियों के लिए जारी किए गए थे। मंत्रालय ने ऑनलाइन गेमिंग के रेगुलेशन से जुड़े इन नियमों के ड्राफ्ट पर 17 जनवरी तक लोगों की राय मांगी हैं, जिसके बाद फरवरी की शुरुआत में नए नियम तैयार हो जाने की उम्मीद है।

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इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MEITY) ने नियमों के मसौदे में ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों के लिए भारत में लागू कानूनों का अनुपालन जरूरी किया गया है। इसके साथ ही इसमें कहा गया है कि जुआ या सट्टेबाजी से जुड़े सारे कानून इन कंपनियों पर लागू होंगे। इन मसौदा नियमों के बारे में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि गेमिंग कंपनियों को किसी खेल के नतीज़ों को लेकर दांव लगाने की इजाजत नहीं होगी। उन्होंने कहा कि नियम के तहत निर्धारित सिद्धांतों के अनुसार, खेल के नतीजों पर दांव लगाना प्रतिबंधित होगा।

 

मंत्रालय की तरफ से जारी सूचना के मुताबिक, ‘सेल्फ-रेगुलेटरी बॉडी का मंत्रालय के पास रजिस्ट्रेशन कराना होगा। यह निकाय ऑनलाइन गेम्स की पेशकश करने वाली इंटरमीडियटरी (बिचौलिया) कंपनियों का रजिस्ट्रेशन उनकी योग्यता के आधार पर करेगा। य़ह रेगुलेटरी बॉडी शिकायत निपटान व्यवस्था के जरिये आने वाली शिकायतों का निपटारा भी करेगा।’

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फेम इंडिया फेज II योजना के तहत दिल्ली में 50 इलेक्ट्रिक बसें लॉन्च की गईं

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सरकार द्वारा 3 जनवरी 2022 को भारी उद्योग मंत्रालय की फ़ेम इंडिया चरण II योजना के तहत समर्थन के साथ दिल्ली में 50 इलेक्ट्रिक बसें लॉन्च की गईं। साल 2019 में, सरकार ने तीन साल की अवधि के लिए 10,000 करोड़ रुपये मंजूर किए। कुल बजटीय सहायता में से लगभग 86 प्रतिशत धन प्रोत्साहन के लिए आवंटित किया गया है ताकि इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग पैदा की जा सके। केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री महेंद्र नाथ पांडे ने कहा कि सरकार ने 3,538 इलेक्ट्रिक बसों के लिए ऑर्डर दिया है। इनमें से अब तक कुल 1,716 बसों को तैनात किया जा चुका है।

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केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली 400 इलेक्ट्रिक बसें – 300 दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) को इंट्रा-सिटी संचालन के लिए और 100 दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) को अंतिम मील कनेक्टिविटी के लिए – अगस्त 2019 में स्वीकृत की गई थी। डीटीसी द्वारा कुल 250 बसें पहले ही तैनात की जा चुकी हैं और अब डीटीसी को 300 इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध कराने की एमएचआई की प्रतिबद्धता को पूरा करते हुए शेष 50 बसों को लॉन्च किया गया है।

 

फेम इंडिया योजना के बारे में

 

इलेक्ट्रिक वाहनों के बड़े पैमाने पर उपयोग के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए, सरकार ने 2015 में FAME India (फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स) नामक एक योजना तैयार की। इस योजना के तहत वर्ष 2022 तक देशभर में 60-70 लाख हाइब्रिड और इलेक्ट्रिकल वाहन सडकों पर उतारने का लक्ष्य है। इससे लगभग 950 करोड़ लीटर पेट्रोल एवं डीजल की खपत में कमी आएगी, जिससे इस पर खर्च होने वाले 62 हज़ार करोड़ रुपए की भी बचत होगी।

 

इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदूषण कम करना और ग्रीनहाउस गैस उत्‍सर्जन में कमी लाना है। फेम-इंडिया योजना के दूसरे चरण को 1 अप्रैल 2019 से 3 साल की अवधि के लिए लागू किया जा रहा है। इस योजना का पहला चरण 1 अप्रैल 2015 से 2 साल की अवधि के लिए शुरू किया गया था, जिसे समय-समय पर बढ़ाया गया था और अंतिम विस्तार 31 मार्च 2019 तक की अनुमति दी गई थी।

 

इलेक्ट्रिक वाहन क्या हैं?

 

इलेक्ट्रिक वाहन वे वाहन हैं जो या तो आंशिक रूप से या पूरी तरह से विद्युत शक्ति से संचालित होते हैं। इनकी चलने की लागत कम होती है और ये पर्यावरण के अनुकूल भी होते हैं क्योंकि ये जीवाश्म ईंधन (पेट्रोल या डीजल) का बहुत कम या बिल्कुल उपयोग नहीं करते हैं। ये वाहन बढ़ते प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग, घटते प्राकृतिक संसाधन आदि समस्याओं को हल कर सकते हैं।

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राजभवन में संविधान पार्क का किया उद्धाटन

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राजस्थान की राजधानी जयपुर में संविधान पार्क का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हमारा लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा व जीवंत लोकतंत्र है और इस लोकतंत्र का आधार हमारा संविधान है। उन्होंने कहा कि हमारा लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा व जीवंत लोकतंत्र है। हमारे इस महान लोकतंत्र का आधार हमारा संविधान है। उन्होंने कहा कि इस संविधान उद्यान के निर्माण का मुख्य उद्देश्य संविधान के आदर्शों के प्रति जागरुकता बनाए रखना है। यह बहुत ही महत्वपूर्ण उद्देश्य है जो हमारे देश के लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने की दिशा में बड़ा प्रयास है।

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संविधान में संशोधन के प्रावधान

 

मुर्मु ने 105 संविधान संशोधनों का जिक्र करते हुए कहा कि हमारा संविधान एक जीवंत दस्तावेज है जो समय के साथ बदलती जनता की आशाओं और आकांक्षाओं को समाहित करने में पूरी तरह सक्षम है। क्योंकि हमारे संविधान निर्माताओं ने समाज के प्रत्येक वर्ग के प्रति संवेदनशीलता, लोकतंत्र के प्रत्येक स्तर और प्रशासन के प्रत्येक पहलू के प्रति जागरूकता के कारण एक व्यापक संविधान का निर्माण किया। हमारे संविधान निर्माता दूरदर्शी थे इसलिए उन्होंने भविष्य की पीढ़ियों के अधिकार और जरूरत को समझते हुए संविधान में ही संशोधन के प्रावधान को शामिल किया गया था।

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ओएनजीसी 2021-22 में शीर्ष लाभ कमाने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की उद्यम

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भारत सरकार के सार्वजनिक उद्यम सर्वेक्षण 2021-22 के अनुसार 2021-22 में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) में सबसे ज्यादा लाभ कमाने वाली कंपनी ओएनजीसी था। ओएनजीसी के बाद सबसे अधिक लाभ कमाने वाले अन्य सीपीएसई हैं, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, पावर ग्रिड, एनटीपीसी और सेल।

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सार्वजनिक उद्यम सर्वेक्षण 2021-22 की मुख्य विशेषताएं

 

  • 2021-22 के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के संचालन का शुद्ध लाभ 50.87 प्रतिशत बढ़कर 2.49 लाख करोड़ रुपये हो गया। 2020-21 में यह 1.65 लाख करोड़ रुपए था।
  • घाटे में चल रहे सीपीएसई का शुद्ध घाटा वित्त वर्ष 2020-21 में 0.23 लाख करोड़ रुपये से घटकर वित्त वर्ष 2021-22 में 0.15 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो 37.82 प्रतिशत की कमी दर्शाता है।
  • घाटे में चल रहे प्रमुख सीपीएसई क्रम अनुसार , भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल), महानगर टेलीकॉम निगम लिमिटेड (एमटीएनएल), एयर इंडिया एसेट्स होल्डिंग लिमिटेड, ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड थे।
  • वित्त वर्ष 2021-22 में परिचालन सीपीएसई द्वारा घोषित लाभांश वित्त वर्ष 21 में 0.73 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले 57.58 प्रतिशत बढ़कर 1.15 लाख करोड़ रुपये रहा।
  • सर्वेक्षण ने वित्त वर्ष 2021-22 में पेट्रोलियम (रिफाइनरी और विपणन), कच्चे तेल और परिवहन, और रसद क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन को राजस्व वृद्धि के लिए जिम्मेदार ठहराया।
  • वित्त वर्ष 2021-22 में सकल राजस्व में पेट्रोलियम (रिफाइनरी और विपणन), व्यापार और विपणन, और बिजली उत्पादन ने मिलकर 69.08 प्रतिशत का योगदान दिया।
  • उत्पाद शुल्क,सीमा शुल्क , जीएसटी, कॉरपोरेट टैक्स, केंद्र सरकार के ऋणों पर ब्याज, लाभांश और अन्य शुल्कों और करों के माध्यम से केंद्रीय खजाने में सभी सीपीएसई का योगदान 020-21 में 4.97 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले 2021-22 में 5.07 लाख करोड़ रुपये रहा जो 2, 2.14 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
  • इसके अलावा, सभी सीएसआर पात्र सीपीएसई (160) का कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) व्यय वित्त वर्ष 2021-22 में 4,600 करोड़ रुपये रहा, जबकि वित्त वर्ष-21 में यह 4,483 करोड़ रुपये था, जो 2.61 प्रतिशत अधिक था।
  • सीएसआर के तहत सबसे अधिक योगदान देने वाले शीर्ष पांच सीपीएसई ओएनजीसी, एनटीपीसी, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, एनएमडीसी और पावर ग्रिड थे।

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Jio to Acquire Reliance Infratel for Rs 3,720 Crore_80.1

108वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस का उद्घाटन पीएम मोदी ने किया

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 03 जनवरी 2023 को 108वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अगले 25 वर्षों में भारत जिस ऊंचाई पर होगा, उसमें भारत की वैज्ञानिक शक्ति की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होगी। विज्ञान में जुनून के साथ जब देश की सेवा का संकल्प जुड़ जाता है, तो नतीजे भी अभूतपूर्ण आते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की 21वीं सदी में हमारे पास डेटा और तकनीकी बहुतायत में है। यह भारत के विज्ञान को नई ऊंचाईयों तक पहुंचा सकता है।

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पिछला संस्करण

 

भारतीय विज्ञान कांग्रेस (ISC) का पिछला संस्करण जनवरी 2020 में बेंगलुरु में हुआ था। तो वहीं यदि इसके पहले सत्र की बात करें तो आईएससी का पहला सत्र 1914 में आयोजित किया गया था।

 

108वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस सत्र में ‘आदिवासी विज्ञान कांग्रेस’ भी शामिल किया गया है, जो आदिवासी महिलाओं के सशक्तिकरण पर ध्यान केंद्रित करती है। इसके साथ ही स्वदेशी प्राचीन ज्ञान प्रणालियों और अभ्यास के वैज्ञानिक प्रदर्शन के लिए भी एक मंच प्रदान किया गया है। 108वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस सत्र में अंतरिक्ष, रक्षा, आईटी और चिकित्सा अनुसंधान सहित विभिन्न प्रकार के क्षेत्रों के नोबेल पुरस्कार विजेता, प्रमुख भारतीय और विदेशी शोधकर्ता, विशेषज्ञ और टेक्नोक्रेट शामिल हुए हैं। विज्ञान और प्रौद्योगिकी में महिलाओं के योगदान को दिखाने के लिए एक विशेष कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया है।

 

पीएम मोदी ने भारतीय विज्ञान कांग्रेस के कार्यक्रम में कहा कि आज का भारत जिस साइंटिफिक अप्रोच के साथ आगे बढ़ रहा है, हम उसके नतीजे भी देख रहे हैं। विज्ञान के क्षेत्र में भारत तेजी से विश्व के टॉप देशों में शामिल हो रहा है। उन्होंने कहा कि विज्ञान के क्षेत्र में भारत दुनिया के शीर्ष 10 देशों में अपना स्थान रखता है। पीएम मोदी ने कहा कि 2015 तक 130 देशों की ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत 81वें स्थान पर था और 2022 में हम 40वें स्थान पर पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि पीएचडी और स्टार्टअप इकोसिस्टम में भारत शीर्ष तीन देशों में शामिल है।

 

पीएम मोदी ने कहा कि इस बार भारतीय विज्ञान कांग्रेस की थीम भी एक ऐसा विषय है, जिसकी दुनिया में सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। उन्होंने कहा कि विश्व का भविष्य सस्टेनेबल डेवलमेंट के साथ ही सुरक्षित है और आपने सस्टेनेबल डेवलमेंट के विषय को नारी सशक्तिकरण के साथ जोड़ा है। उन्होंने कहा कि व्यवहारिक रूप से भी ये दोनों एक-दूसरे जुड़े हुए हैं। आज महिलाओं की भागीदारी से समाज और विज्ञान आगे बढ़ रहे हैं।

 

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अरुणाचल प्रदेश में सियोम पुल का उद्घाटन किया

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में अरुणाचल प्रदेश में सियोम पुल का उद्धघाटन किया। साथ ही उन्‍होंने सीमा सड़क संगठन द्वारा पूरी की गई 27 आधारभूत परियोजनाओं का भी उद्घाटन किया। 724 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इन परियोजनाओं से भारत की सीमा पर और विशेष रूप से लद्दाख से अरुणाचल तक, चीन से लगी सीमा पर मूलभूत सुविधाओं का विस्‍तार किया जाएगा। अलंग-इकियोंग रोड़ पर बनाए गए सियोम पुल की मदद से सेना वाहनों और हथियारों को वास्‍तविक नियंत्रण रेखा से लगे ऊपरी सिंयाग जिले, तुतिंग और इन्कियांग क्षेत्र में पहुंचाने में सुविधा होगी। राजनाथ सिंह ने वर्चुअल माध्‍यम से सियोम पुल से अरुणाचल प्रदेश, जम्‍मू-कश्‍मीर, लद्दाख, उत्तराखंड, सिक्किम, पंजाब और राजस्‍थान में 21 अन्‍य पुलों, तीन सड़कों और तीन आधारभूत परियोजनाओं का भी उद्घाटन किया।

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रक्षा मंत्री द्वारा पुल का उद्घाटन बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के दूर-दराज के क्षेत्रों में सैनिकों को तैनात करने में सैन्य लाभ देता है। यह पुल 100 मीटर लंबा है और सयोम नदी पर बनाया गया है। इस पुल से स्थानीय लोगों को भी आवाजाही में मदद मिलेगी।

चीन एलएसी से सटे इलाकों में काफी समय से इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ा रहा है। लेकिन अब भारत भी पिछले कुछ सालों से बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर तेजी से बढ़ाने में लगा है। इसके तहत कई सड़कें, सुरंग, ब्रिज, सैनिकों के रहने के ठिकाने, स्थायी सैन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर, हेलिपैड और एयरफील्ड बन रहे हैं। जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई खूनी झड़प के बाद भारत ने बॉर्डर इन्फ्रा की रफ्तार और तेज की है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हाल में सीमा सड़क संगठन( BRO) ने जिस भावना और गति के साथ विकास कार्यों को अंजाम दिया है वह सराहनीय है। अधिक से अधिक सीमावर्ती क्षेत्रों को जोड़ने की योजना सरकार की प्राथमिकता में है, ताकि वहां रहने वाले लोगों के विकास के साथ-साथ, उनमें व्यवस्था के प्रति विश्वास की भावना विकसित हो सके।

 

सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण टेकअवे:

 

  • सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की स्थापना: 7 मई 1960;
  • सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) मुख्यालय: नई दिल्ली;
  • सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के संस्थापक: जवाहरलाल नेहरू;
  • सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के महानिदेशक: लेफ्टिनेंट जनरल राजीव चौधरी।

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एनटीपीसी ने पीएनजी में हरित हाइड्रोजन मिश्रण का परिचालन शुरू किया

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भारत की सबसे बड़ी बिजली कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड ने कवास में भारत की पहली हरित हाइड्रोजन सम्मिश्रण परियोजना शुरू की है। एनटीपीसी कवास टाउनशिप, सूरत में गुजरात गैस लिमिटेड पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) नेटवर्क के माध्यम से ग्रीन हाइड्रोजन गैस के साथ मिश्रित पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की आपूर्ति की जा रही है। ग्रीन हाइड्रोजन ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों का उपयोग करके पानी के अणु को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में तोड़ने को संदर्भित करता है।

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केंद्र सरकार के स्वामित्व वाली एनटीपीसी ब्लेंडिंग उद्देश्यों के लिए गुजरात के सूरत जिले में एनटीपीसी कवास की 1 मेगावाट फ्लोटिंग सौर परियोजना में उत्पादित ग्रीन हाइड्रोजन प्रदान करती है। प्रारंभ में, पीएनजी में हाइड्रोजन सम्मिश्रण का प्रतिशत लगभग 5% होगा और सफल समापन के बाद इसे बढ़ाया जाएगा। हाइड्रोजन मिश्रित पीएनजी का उपयोग खाना पकाने के लिए किया जाएगा। यह देश में अपनी तरह की पहली परियोजना है। इसे खाना पकाने के क्षेत्र के डीकार्बोनाइजेशन और राष्ट्र की ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में पहले कदम के रूप में देखा जा रहा है।

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Assam Grants Industry Status to Its Tourism Sector_70.1

उत्तराखंड सरकार ने राजस्व पुलिस व्यवस्था को खत्म करने का फैसला किया

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उत्तराखंड सरकार ने राज्य में राजस्व पुलिस प्रणाली को खत्म करने का फैसला किया है। पुष्कर सिंह धामी सरकार ने भी राजस्व गांवों को नियमित पुलिस व्यवस्था के तहत लाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री कार्यालय के एक बयान के अनुसार, उत्तराखंड के 1,800 राजस्व गांवों में कानून व्यवस्था अब राज्य पुलिस द्वारा संभाली जाएगी।

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उत्तराखंड सरकार ने राजस्व पुलिस व्यवस्था क्यों खत्म की?

 

सितंबर 2022 में अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच के दौरान उत्तराखंड में राजस्व पुलिस व्यवस्था को बदलने की मांग जोर पकड़ी। भाजपा नेता विनोद आर्य छह दिनों तक लापता रहने के बाद 24 सितंबर को ऋषिकेश में चिल्ला नहर में मृत पाए गए थे। यह क्षेत्र राजस्व पुलिस के अधिकार क्षेत्र में था। राजस्व पुलिस पर समय पर शिकायत दर्ज नहीं करने और आरोपियों का पक्ष लेने का भी आरोप लगाया गया।

 

इन आरोपों के जवाब में उत्तराखंड सरकार ने राजस्व पुलिस प्रणाली को खत्म करने का फैसला किया है। सरकार ने घोषणा की है कि उत्तराखंड के 1800 राजस्व गांवों में कानून व्यवस्था अब रेगुलर पुलिस संभालेगी। सरकार ने राजस्व पुलिस की व्यवस्था को समाप्त कर इन गांवों को रेगुलर पुलिस के अधीन करने के लिए अधिसूचित कर दिया है। पहले चरण में 52 थाने और 19 पुलिस चौकियों का सीमा विस्तार किया जाएगा।

 

उत्तराखंड में राजस्व पुलिस

 

उत्तराखंड प्रदेश में राजस्व पुलिस की व्यवस्था की शुरूआत साल 1861 में हुई थी। जिसके तहत पटवारी, कानूनगो, तहसीलदार से लेकर जिलाधिकारी और मंडलायुक्त तक को राजस्व कार्यों के साथ ही पुलिस के कार्यों की जिम्मेदारी निभानी होती थी। इस व्यवस्था में एक बड़ा रोल पटवारी का रहता है। जिसके पास अपराधियों से टक्कर लेने के लिए आधुनिक हथियार नहीं, महज एक डंडा रहता है। भारतीय कानून के अनुसार अस्त्र-शस्त्र केवल रेगुलर पुलिस को धारण करने का अधिकार है। राजस्व पुलिस को यह सुविधा नहीं मिलती। जिस कारण इस पुलिस को उत्तराखंड में गांधी पुलिस के नाम से भी संबोधित किया जाता है।

 

सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण टेकअवे:

 

  • उत्तराखंड के राज्यपाल: गुरमीत सिंह;
  • उत्तराखंड के मुख्यमंत्री: पुष्कर सिंह धामी;
  • उत्तराखंड की राजधानियाँ: देहरादून (शीतकालीन), गैरसैंण (ग्रीष्मकालीन)।

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