सुखमन सिंह ने IGU 124वें एमेच्योर चैंपियनशिप में जीत हासिल की

भारतीय शौकिया गोल्फ को एक बड़ी उपलब्धि मिली जब सुखमन सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए IGU 124वीं एमेच्योर गोल्फ चैंपियनशिप ऑफ इंडिया का खिताब जीत लिया। यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट देश के सबसे पुराने गोल्फ कोर्सों में से एक टॉलीगंज क्लब, कोलकाता में आयोजित किया गया।

हरमन सचदेवा के खिलाफ दमदार फाइनल

  • 36-होल मैचप्ले फाइनल में सुखमन सिंह का सामना हरियाणा के हरमन सचदेवा से हुआ।
  • मुकाबले की शुरुआत कड़ी टक्कर के साथ हुई और छठे होल तक स्कोर बराबर रहा।
  • इसके बाद सुखमन ने नियंत्रण बनाते हुए 12 होल के बाद 4UP की बढ़त बना ली।
  • फाइनल के मध्य चरण तक उन्होंने 2UP की बढ़त बनाए रखी और लगातार दबाव बनाए रखा।

जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ा, सुखमन ने अपना दबदबा और मजबूत किया और 29 होल के बाद 7UP की अजेय बढ़त बना ली, जिसके चलते मुकाबला वहीं समाप्त कर दिया गया।

मजबूत खेल विरासत

इस जीत का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि सुखमन सिंह एक समृद्ध गोल्फ विरासत से आते हैं। उनके पिता सिमरजीत सिंह भारत के पूर्व नंबर-1 शौकिया गोल्फर रह चुके हैं और कई बार एमेच्योर चैंपियन बने हैं। यह विरासत और सुखमन की खुद की मेहनत व अनुशासन उनके खेल में साफ दिखाई देता है।

सुखमन सिंह के लिए शानदार सीज़न

IGU एमेच्योर चैंपियनशिप का यह खिताब सुखमन सिंह के बेहतरीन सीज़न की परिणति है। इससे पहले उन्होंने—

  • IGU राजस्थान एमेच्योर चैंपियनशिप जीती
  • आंध्र प्रदेश एमेच्योर में उपविजेता रहे
  • साउथ अफ्रीकन एमेच्योर स्ट्रोकप्ले में चौथा स्थान हासिल किया

ये लगातार अच्छे प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय शौकिया गोल्फ में उनकी बढ़ती पहचान को दर्शाते हैं।

IGU एमेच्योर चैंपियनशिप के बारे में

  • इस चैंपियनशिप का आयोजन भारतीय गोल्फ संघ (IGU) द्वारा किया जाता है।
  • इसकी शुरुआत 1892 में हुई थी।
  • यह विश्व का सबसे पुराना लगातार आयोजित होने वाला शौकिया मैचप्ले गोल्फ टूर्नामेंट माना जाता है।
  • 124वां संस्करण भी इसकी प्रतिष्ठा और भारतीय गोल्फरों को निखारने में इसकी भूमिका को दर्शाता है।

मुख्य बिंदु 

  • सुखमन सिंह ने IGU 124वीं एमेच्योर गोल्फ चैंपियनशिप ऑफ इंडिया जीती।
  • टूर्नामेंट का आयोजन टॉलीगंज क्लब, कोलकाता में हुआ।
  • फाइनल में उन्होंने हरमन सचदेवा को हराया।
  • यह प्रतियोगिता भारतीय गोल्फ संघ (IGU) द्वारा आयोजित की जाती है।
  • एमेच्योर गोल्फ चैंपियनशिप ऑफ इंडिया की शुरुआत 1892 में हुई थी।
  • यह विश्व का सबसे पुराना शौकिया मैचप्ले गोल्फ टूर्नामेंट है।

तमिलनाडु सरकार ने कावेरी बेसिन में ऊदबिलाव संरक्षण पहल का अनावरण किया

तमिलनाडु सरकार ने कावेरी नदी डेल्टा में पाई जाने वाली एक कमजोर प्रजाति, स्मूथ-कोटेड ऊदबिलाव की सुरक्षा के लिए एक खास संरक्षण पहल शुरू की है। यह कार्यक्रम ऊदबिलाव की आबादी का अध्ययन करने, उनके रहने की जगहों को बेहतर बनाने और ऊदबिलाव और स्थानीय मछुआरा समुदायों के बीच टकराव को कम करने पर केंद्रित है। यह पहल ताज़े पानी के इकोसिस्टम में गिरावट को लेकर बढ़ती चिंता को दिखाती है और प्रजातियों के संरक्षण के महत्व पर ज़ोर देती है।

तमिलनाडु संरक्षण पहल का विवरण

यह संरक्षण कार्यक्रम लुप्तप्राय प्रजातियों की सुरक्षा से संबंधित तमिलनाडु विधानसभा सत्र के दौरान घोषित किया गया। आधिकारिक रूप से इसे “स्मूथ-कोटेड ऊदबिलाव (Smooth-coated Otter) की जनसंख्या गतिशीलता, व्यवहार पैटर्न और आवास सुधार के अध्ययन हेतु संरक्षण पहल” नाम दिया गया है। यह परियोजना कावेरी डेल्टा क्षेत्र में तंजावुर, तिरुवारुर और कड्डालोर जिलों के कुछ हिस्सों को कवर करेगी।

इस परियोजना के प्रमुख उद्देश्यों में ऊदबिलाव की जनसंख्या का आकलन करना, महत्वपूर्ण आवासों की पहचान और प्राथमिकता निर्धारण करना, प्रदूषण और मानव–वन्यजीव संघर्ष जैसे खतरों का अध्ययन करना तथा रीड (सरकंडा) रोपण और फिश लैडर जैसी उपायों के माध्यम से आवास बहाली शामिल है। इस परियोजना को ₹20 लाख की प्रशासनिक स्वीकृति मिली है, जिसमें से ₹10 लाख वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए आवंटित किए गए हैं।

परियोजना में शामिल संस्थान

यह संरक्षण पहल तमिलनाडु वन विभाग की शोध इकाई एडवांस्ड इंस्टीट्यूट फॉर वाइल्डलाइफ कंज़र्वेशन (AIWC), वंडलूर, चेन्नई के नेतृत्व में संचालित की जा रही है। क्षेत्रीय अनुसंधान कार्य एवीसी ऑटोनॉमस कॉलेज, मयिलाडुथुरै के वन्यजीव जीवविज्ञान विभाग द्वारा, वन विभाग की निगरानी में किया जाएगा। यह अध्ययन एक वर्ष की अवधि के लिए प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त, एंडेंजर्ड वाइल्डलाइफ एंड एनवायरनमेंटल ट्रस्ट (EWET) भी कावेरी डेल्टा में आवास मानचित्रण, क्षेत्रीय सर्वेक्षण और जन-जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से शामिल रहा है।

स्मूथ-कोटेड ऊदबिलाव के बारे में

स्मूथ-कोटेड ऊदबिलाव एशिया की सबसे बड़ी ऊदबिलाव प्रजाति है। यह नदियों, झीलों, आर्द्रभूमियों, मैंग्रोव क्षेत्रों और सिंचाई नहरों में पाया जाता है। तमिलनाडु में ये ऊदबिलाव विशेष रूप से कावेरी डेल्टा के कुछ हिस्सों में देखे जाते हैं, जहां स्थानीय मछुआरे इन्हें प्यार से “मीनाकुट्टी” (अर्थात मछली पकड़ने वाले पिल्ले) कहते हैं।

स्मूथ-कोटेड ऊदबिलाव—

  • समूहों में रहते और शिकार करते हैं, जिन्हें बेवी (Bevvies) कहा जाता है
  • सीटी और चहचहाहट जैसी आवाज़ों से आपस में संवाद करते हैं
  • कार्प, कैटफिश, तिलापिया और झींगे जैसी मछलियों पर भोजन करते हैं

एक ऊदबिलाव समूह प्रतिवर्ष लगभग एक टन मछली का उपभोग कर सकता है, जिससे जलीय पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

संरक्षण की स्थिति और कानूनी सुरक्षा

  • स्मूथ-कोटेड ऊदबिलाव को इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) की रेड लिस्ट में कमजोर (Vulnerable) श्रेणी में रखा गया है।
  • भारत में उन्हें वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के तहत संरक्षित किया गया है, जो उच्चतम स्तर की कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है।
  • इसके बावजूद, आवास के नुकसान और बढ़ते मानवीय दबाव के कारण, खासकर संरक्षित क्षेत्रों के बाहर, उनकी संख्या में तेजी से गिरावट आई है।

ऊदबिलाव संरक्षण का महत्व

ऊदबिलावों को संकेतक प्रजाति (Indicator Species) माना जाता है, अर्थात इनकी उपस्थिति यह दर्शाती है कि नदियां और आर्द्रभूमियां स्वस्थ हैं। ऊदबिलावों का संरक्षण करने से—

  • मीठे पानी की जैव विविधता का संरक्षण होता है
  • दीर्घकाल में मछली संसाधनों में सुधार होता है
  • कृषि और आजीविका को सहारा देने वाली आर्द्रभूमियों की रक्षा होती है

जैसा कि विशेषज्ञों का मानना है, ऊदबिलावों को बचाने का अर्थ अंततः मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र को बचाना है।

मुख्य बिंदु

  • तमिलनाडु ने कावेरी डेल्टा में स्मूथ-कोटेड ऊदबिलाव संरक्षण पहल शुरू की
  • यह प्रजाति IUCN द्वारा Vulnerable श्रेणी में सूचीबद्ध है
  • भारत में इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत संरक्षण प्राप्त है
  • परियोजना तंजावुर, तिरुवारूर और कुड्डालोर जिलों में लागू होगी
  • कुल स्वीकृत राशि ₹20 लाख, जिसमें ₹10 लाख वर्ष 2025–26 के लिए
  • पहल का उद्देश्य जनसंख्या अध्ययन, आवास सुधार और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना है

Elon Musk बने 700 अरब डॉलर नेटवर्थ वाले पहले इंसान

टेक अरबपति एलन मस्क ने इतिहास रचते हुए दुनिया के पहले ऐसे व्यक्ति बन गए हैं, जिनकी कुल संपत्ति 700 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गई है। Forbes Billionaires Index के अनुसार, उनकी नेटवर्थ बढ़कर लगभग 749 अरब डॉलर पहुंच गई है। यह उछाल डेलावेयर सुप्रीम कोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले के बाद आया, जिसमें टेस्ला से जुड़ा उनका विशाल स्टॉक ऑप्शन पैकेज दोबारा बहाल कर दिया गया।

डेलावेयर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

  • डेलावेयर सुप्रीम कोर्ट ने 20 दिसंबर 2025 को पहले के फैसले को पलट दिया।
  • कोर्ट ने माना कि मस्क के मुआवजा पैकेज को रद्द करना अनुचित और असमान था।
  • इसके बाद 139 अरब डॉलर मूल्य के टेस्ला स्टॉक ऑप्शंस पूरी तरह बहाल कर दिए गए।
  • इस फैसले के चलते फोर्ब्स ने मस्क की संपत्ति पर लगाया गया वैल्यूएशन डिस्काउंट हटा दिया, जिससे उनकी नेटवर्थ में लगभग 70 अरब डॉलर की तत्काल वृद्धि हुई।

टेस्ला फिर से सबसे बड़ी संपत्ति

  • स्टॉक ऑप्शंस की बहाली के बाद टेस्ला एक बार फिर मस्क की सबसे मूल्यवान संपत्ति बन गई है।
  • मस्क के पास टेस्ला के लगभग 12% शेयर हैं, जिनकी कीमत करीब 199 अरब डॉलर है।
  • स्टॉक ऑप्शंस को मिलाकर टेस्ला में उनकी कुल हिस्सेदारी लगभग 338 अरब डॉलर आंकी जा रही है।

स्पेसएक्स: संपत्ति का दूसरा बड़ा स्तंभ

  • मस्क की दूसरी सबसे बड़ी संपत्ति स्पेसएक्स में उनकी हिस्सेदारी है।
  • उनके पास स्पेसएक्स के लगभग 42% शेयर हैं।
  • हालिया निजी टेंडर ऑफर में कंपनी का मूल्यांकन करीब 800 अरब डॉलर हुआ, जिससे मस्क की हिस्सेदारी लगभग 336 अरब डॉलर की हो गई।
  • रिपोर्ट्स के अनुसार, स्पेसएक्स 2026 तक IPO पर भी विचार कर सकती है।

ऐतिहासिक अंतर

  • 749 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ मस्क दुनिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति लैरी पेज से लगभग 500 अरब डॉलर आगे निकल चुके हैं।
  • यह अंतर दर्शाता है कि कैसे हाई-ग्रोथ टेक्नोलॉजी और स्पेस कंपनियों में संस्थापक हिस्सेदारी अभूतपूर्व संपत्ति सृजन कर रही है।

मुख्य बिंदु

  • एलन मस्क 700 अरब डॉलर से अधिक संपत्ति वाले दुनिया के पहले व्यक्ति बने
  • कुल संपत्ति: लगभग 749 अरब डॉलर (Forbes के अनुसार)
  • वृद्धि का मुख्य कारण: टेस्ला स्टॉक ऑप्शंस की बहाली
  • सबसे बड़ी संपत्ति: टेस्ला, उसके बाद स्पेसएक्स
  • मस्क की संपत्ति दुनिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति से लगभग 500 अरब डॉलर अधिक

राष्ट्रपति ने ‘वीबी-जी राम जी विधेयक’ को दी मंजूरी

भारत की ग्रामीण रोज़गार व्यवस्था ने एक नए चरण में प्रवेश किया है, क्योंकि VB-G RAM G विधेयक, 2025 अब आधिकारिक रूप से कानून बन गया है। 21 दिसंबर 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की स्वीकृति मिलने के बाद यह अधिनियम लागू हो गया, जिसकी पुष्टि ग्रामीण विकास मंत्रालय ने की है। यह नया कानून लंबे समय से लागू महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) का स्थान लेता है और सरकार के व्यापक विकास लक्ष्यों के अनुरूप ग्रामीण रोज़गार एवं आजीविका के लिए एक संशोधित दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।

VB-G RAM G विधेयक, 2025 क्या है?

  • विकसित भारत गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण), जिसे संक्षेप में VB-G RAM G कहा जाता है, वर्ष 2025 में संसद द्वारा पारित एक नया ग्रामीण रोज़गार एवं आजीविका कानून है।
  • यह विधेयक MGNREGA को प्रतिस्थापित करता है, जिस पर विपक्षी दलों ने आपत्ति जताई और संसद में विरोध प्रदर्शन भी हुए।
  • सरकार का तर्क है कि बदलती ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कौशल आवश्यकताओं और विकास प्राथमिकताओं को देखते हुए ग्रामीण विकास नीतियों के आधुनिकीकरण के लिए एक नए ढांचे की आवश्यकता थी।

मुख्य प्रावधान: 125 दिनों के रोज़गार की गारंटी

  • VB-G RAM G कानून का सबसे अहम प्रावधान प्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिनों के मज़दूरी आधारित रोज़गार की गारंटी देना है। यह MGNREGA के तहत दी जाने वाली 100 दिनों की गारंटी से अधिक है, इसलिए यह कानून व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है।
  • सरकार के अनुसार, यह योजना केवल रोज़गार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि बेहतर योजना, टिकाऊ परिसंपत्ति निर्माण और अन्य विकास कार्यक्रमों के साथ समन्वय के ज़रिये ग्रामीण आजीविका (Ajeevika) को मज़बूत करने पर भी केंद्रित है।

MGNREGA का स्थानापन्न: क्यों है यह अहम?

2005 में लागू होने के बाद से MGNREGA भारत के सबसे प्रभावशाली सामाजिक कल्याण कानूनों में रहा है, जिसने करोड़ों ग्रामीण परिवारों को रोज़गार सुरक्षा प्रदान की। ऐसे में इसका प्रतिस्थापन एक बड़ा नीतिगत बदलाव माना जा रहा है।

सरकार का कहना है कि VB-G RAM G के माध्यम से—

  • ग्रामीण रोज़गार वितरण प्रणाली का आधुनिकीकरण होगा
  • अल्पकालिक काम के बजाय टिकाऊ आजीविका पर अधिक ज़ोर दिया जाएगा
  • ग्रामीण रोज़गार को राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप जोड़ा जाएगा

वहीं, आलोचकों को आशंका है कि क्रियान्वयन के स्तर पर चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नया ढांचा MGNREGA की तरह मज़बूत कानूनी और अधिकार-आधारित गारंटियों को बनाए रख पाता है या नहीं।

मुख्य बातें

  • VB-G RAM G बिल, 2025 राष्ट्रपति की मंज़ूरी के बाद कानून बन गया है
  • यह MGNREGA ग्रामीण रोज़गार कानून की जगह लेगा
  • हर ग्रामीण परिवार को सालाना 125 दिन की मज़दूरी वाली रोज़गार की गारंटी देता है
  • यह कानून विकसित भारत 2047 के विज़न के साथ मेल खाता है
  • विपक्ष के विरोध के बीच संसद में पास हुआ

प्रधानमंत्री ने असम के गुवाहाटी में लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 दिसंबर 2025 को असम के लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (गुवाहाटी) के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया। यह पूर्वोत्तर भारत में बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने एयरपोर्ट परिसर के बाहर असम के प्रथम मुख्यमंत्री गोपीनाथ बोरदोलोई की 80 फीट ऊँची प्रतिमा का भी अनावरण किया।

नए टर्मिनल भवन की प्रमुख विशेषताएँ

  • नया टर्मिनल लगभग 1.4 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और इसे प्रतिवर्ष 1.3 करोड़ यात्रियों को संभालने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इससे हवाई अड्डे की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और यात्रियों को बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध होंगी।
  • इस परियोजना के तहत एयरसाइड अवसंरचना में सुधार, आधुनिक यात्री सुविधाएँ, तथा विमानों और यात्रियों की सुगम आवाजाही के लिए उन्नत प्रणालियाँ विकसित की गई हैं।
  • इन सुधारों के साथ गुवाहाटी हवाई अड्डा पूर्वोत्तर भारत का एक प्रमुख क्षेत्रीय विमानन केंद्र बनकर उभरेगा।

प्रकृति-प्रेरित डिज़ाइन: “बैंबू ऑर्किड्स”

गुवाहाटी एयरपोर्ट का नया टर्मिनल असम की जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित है और इसकी केंद्रीय थीम “बैंबू ऑर्किड्स” रखी गई है। यह डिज़ाइन प्रकृति और परंपरा के साथ असम के गहरे संबंध को दर्शाती है।

वास्तुशिल्प की प्रमुख झलकियाँ

  • बांस से प्रेरित संरचनाओं का व्यापक उपयोग
  • असम की वनस्पति और सांस्कृतिक प्रतीकों पर आधारित डिज़ाइन मोटिफ़
  • आधुनिक वास्तुकला के साथ स्थानीय पहचान को समाहित करने वाले आंतरिक साज-सज्जा तत्व

यह अवधारणा प्रधानमंत्री के “विकास भी, विरासत भी” के विज़न के अनुरूप है, जहाँ आधुनिक विकास के साथ सांस्कृतिक मूल्यों को भी संरक्षित किया गया है।

गुवाहाटी एयरपोर्ट का महत्व

  • लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पूर्वोत्तर भारत का प्रमुख विमानन प्रवेश द्वार है।
  • यह क्षेत्र को देश के प्रमुख शहरों और अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों से जोड़ता है तथा व्यापार, पर्यटन और आवागमन में रणनीतिक भूमिका निभाता है।
  • पिछले एक दशक में यात्रियों की संख्या में तेज़ वृद्धि को देखते हुए एयरपोर्ट का विस्तार और आधुनिकीकरण असम की बढ़ती आर्थिक आकांक्षाओं को समर्थन देने के लिए आवश्यक हो गया था।

मुख्य बिंदु

  • पीएम नरेंद्र मोदी ने 20 दिसंबर 2025 को गुवाहाटी एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का उद्घाटन किया
  • टर्मिनल की क्षमता: 1.3 करोड़ यात्री प्रतिवर्ष
  • डिज़ाइन थीम: “बैंबू ऑर्किड्स”, असम की जैव विविधता से प्रेरित
  • टर्मिनल के बाहर गोपीनाथ बोरदोलोई की 80 फीट ऊँची प्रतिमा का अनावरण
  • परियोजना से पूर्वोत्तर में कनेक्टिविटी, पर्यटन और आर्थिक विकास को बढ़ावा

जय शाह को ‘ट्रांसफॉर्मेशनल लीडर ऑफ द ईयर’ अवॉर्ड मिला

NDTV इंडियन ऑफ द ईयर 2025 समारोह में जय शाह को भारतीय और विश्व क्रिकेट में उनके व्यापक और दूरगामी योगदान के लिए ‘ट्रांसफॉर्मेशनल लीडर ऑफ द ईयर’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके 2019 से 2024 के बीच भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सचिव के रूप में किए गए उन बड़े सुधारों की मान्यता है, जिनका प्रभाव आज भी क्रिकेट जगत में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

NDTV इंडियन ऑफ द ईयर 2025 में सम्मान

पुरस्कार ग्रहण करते हुए जय शाह ने अपने कार्यकाल के दौरान आई चुनौतियों पर खुलकर बात की।

उन्होंने विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के दौर को याद किया, जब सबसे बड़ी प्राथमिकता आईपीएल को फिर से शुरू करना और क्रिकेट संचालन को स्थिर करना था।

जय शाह ने यह भी बताया कि 2022 में पुनः निर्वाचित होने के बाद उन्होंने स्पष्ट कहा था कि “महिला खिलाड़ियों के साथ अन्याय अब नहीं होगा”। यह केवल एक बयान नहीं था, बल्कि इसके बाद ठोस नीतिगत बदलाव किए गए, जिनसे महिला क्रिकेट को मजबूती मिली।

उनके कार्यकाल को परिभाषित करने वाले प्रमुख सुधार

  • जय शाह का बीसीसीआई में कार्यकाल भारतीय क्रिकेट प्रशासन के सबसे परिवर्तनकारी दौरों में से एक माना जाता है।
  • उनकी सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक पुरुष और महिला क्रिकेटरों के बीच वेतन समानता (Pay Parity) लागू करना रहा।
  • इस ऐतिहासिक सुधार के तहत महिला खिलाड़ियों की मैच फीस में कई गुना वृद्धि की गई, जिससे वर्षों से चली आ रही असमानता समाप्त हुई।
  • महिला खिलाड़ियों को अब ₹6 लाख प्रति वनडे, ₹3 लाख प्रति टी20 अंतरराष्ट्रीय, ₹15 लाख प्रति टेस्ट मैच मिलते हैं, जो पहले की तुलना में काफी अधिक है।
  • एक और ऐतिहासिक कदम रहा वुमेन्स प्रीमियर लीग (WPL) की शुरुआत, जिसने महिला क्रिकेट को नई पहचान, मंच और व्यावसायिक मजबूती प्रदान की।

आईपीएल मीडिया अधिकार और व्यावसायिक विस्तार

  • जय शाह ने इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की व्यावसायिक संरचना को भी नए सिरे से आकार देने में अहम भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में आईपीएल के मीडिया अधिकार सौदे रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे।
  • ब्रॉडकास्ट और डिजिटल अधिकारों के रणनीतिक विभाजन ने न केवल राजस्व को अधिकतम किया, बल्कि आईपीएल की वैश्विक पहुंच भी बढ़ाई।
  • इन फैसलों से बीसीसीआई की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई, जिससे घरेलू क्रिकेट ढांचे, खिलाड़ी कल्याण, और जमीनी स्तर के विकास में अधिक निवेश संभव हो सका।

मुख्य बिंदु

  • जय शाह को NDTV इंडियन ऑफ द ईयर 2025 में ‘ट्रांसफॉर्मेशनल लीडर ऑफ द ईयर’ पुरस्कार मिला।
  • वे 2019 से 2024 तक बीसीसीआई सचिव रहे और दिसंबर 2024 में आईसीसी चेयरमैन बने।
  • उनके कार्यकाल में वेतन समानता, WPL की शुरुआत, और रिकॉर्ड आईपीएल मीडिया अधिकार सौदे जैसे बड़े सुधार हुए।
  • महिला क्रिकेटरों की मैच फीस में सभी प्रारूपों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

PM मोदी ने असम के डिब्रूगढ़ में ₹10,601 करोड़ के फर्टिलाइजर प्लांट का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 दिसंबर, 2025 को असम के डिब्रूगढ़ ज़िले के नामरूप में ₹10,601 करोड़ के अमोनिया यूरिया फर्टिलाइज़र प्लांट का शिलान्यास किया। यह प्रोजेक्ट असम वैली फर्टिलाइज़र एंड केमिकल कंपनी लिमिटेड (AVFCCL) के तहत बनाया गया है और यह हर साल 12.7 लाख टन यूरिया का उत्पादन करेगा। यह फर्टिलाइज़र के मामले में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिससे किसानों का कल्याण होगा और पूर्वोत्तर भारत में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।

परियोजना विवरण

  • परियोजना प्रकार: ब्राउनफील्ड विस्तार (मौजूदा परिसर में)
  • निवेश: ₹10,601 करोड़
  • वार्षिक उत्पादन क्षमता: 12.7 लाख मीट्रिक टन यूरिया
  • स्थान: नामरूप, डिब्रूगढ़ ज़िला, असम
  • अपेक्षित कमीशनिंग: 2030 तक
  • केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति: मार्च 2025
  • AVFCCL का गठन: जुलाई 2025

संयुक्त उपक्रम (JV) साझेदार

  • असम सरकार
  • ऑयल इंडिया लिमिटेड
  • नेशनल फ़र्टिलाइज़र्स लिमिटेड
  • हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (HURL)
  • ब्रह्मपुत्र वैली फ़र्टिलाइज़र कॉरपोरेशन लिमिटेड (BVFCL)
  • यह साझेदारी परियोजना की वित्तीय मजबूती, तकनीकी दक्षता और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करती है।

नामरूप उर्वरक परिसर का महत्व

  • नामरूप दशकों से उर्वरक उत्पादन का प्रमुख केंद्र रहा है।
  • यहाँ स्थित BVFCL पूर्वोत्तर भारत की सबसे पुरानी उर्वरक इकाई है।
  • बढ़ती मांग और पुरानी अवसंरचना के कारण आधुनिक, उच्च क्षमता वाले संयंत्र की आवश्यकता थी।
  • नई परियोजना से यूरिया की निर्बाध आपूर्ति, आयात पर निर्भरता में कमी और क्षेत्र की कृषि सुदृढ़ता बढ़ेगी।

मुख्य बिंदु

  • ₹10,601 करोड़ की उर्वरक परियोजना की आधारशिला पीएम मोदी द्वारा रखी गई।
  • वार्षिक 12.7 लाख मीट्रिक टन यूरिया उत्पादन क्षमता।
  • AVFCCL द्वारा विकसित, जो एक मल्टी-PSU संयुक्त उपक्रम है।
  • किसानों को समर्थन और यूरिया आयात में कमी का लक्ष्य।
  • 2030 तक संचालन शुरू होने की उम्मीद।

राष्ट्रीय गणित दिवस 2025: गणित में रामानुजन के योगदान का सम्मान

हर साल 22 दिसंबर को पूरे भारत में राष्ट्रीय गणित दिवस मनाया जाता है। यह दिन श्रीनिवास रामानुजन की जयंती के रूप में मनाया जाता है, जो भारत के अब तक के सबसे महान गणितज्ञों में से एक थे। 2025 में, स्कूल, कॉलेज, रिसर्च संस्थान और एकेडमिक संस्थाएं एक बार फिर शिक्षा, विज्ञान, टेक्नोलॉजी और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में गणित के महत्व को बताने के लिए यह दिन मना रहे हैं।

राष्ट्रीय गणित दिवस का उद्देश्य 

राष्ट्रीय गणित दिवस केवल श्रीनिवास रामानुजन को श्रद्धांजलि देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके व्यापक शैक्षिक और सामाजिक उद्देश्य हैं। इस दिवस को मनाने के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं—

  • छात्रों में गणित के प्रति रुचि और जिज्ञासा विकसित करना
  • वैज्ञानिक सोच, तार्किक क्षमता और समस्या-समाधान कौशल को बढ़ावा देना
  • तकनीक, अंतरिक्ष विज्ञान, अर्थशास्त्र और दैनिक जीवन में गणित की भूमिका को उजागर करना
  • भारत की प्राचीन और समृद्ध गणितीय विरासत को पहचान और सम्मान दिलाना

इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए शैक्षणिक संस्थानों द्वारा व्याख्यान, कार्यशालाएँ, प्रश्नोत्तरी, प्रदर्शनी और विभिन्न शैक्षिक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है, जिससे गणित को अधिक सरल, रोचक और उपयोगी बनाया जा सके।

22 दिसंबर को राष्ट्रीय गणित दिवस क्यों मनाया जाता है? 

  • 22 दिसंबर महान भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जन्मतिथि है। उनका जन्म वर्ष 1887 में हुआ था।
  • रामानुजन के गणितीय कार्य आज भी आधुनिक गणित को गहराई से प्रभावित करते हैं और उनकी खोजें समय से बहुत आगे थीं।
  • भारत सरकार ने वर्ष 2011 में औपचारिक रूप से 22 दिसंबर को राष्ट्रीय गणित दिवस घोषित किया।
  • यह निर्णय रामानुजन के असाधारण, मौलिक और ऐतिहासिक योगदानों को सम्मान देने के उद्देश्य से लिया गया।
  • गणितीय शिक्षा और अनुसंधान को और अधिक बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2012 को राष्ट्रीय गणित वर्ष के रूप में मनाया गया।

इस प्रकार, 22 दिसंबर न केवल रामानुजन की स्मृति को सम्मान देता है, बल्कि भारत में गणितीय सोच और शिक्षा को सुदृढ़ करने का भी प्रतीक है।

भारत की प्राचीन और समृद्ध गणितीय परंपरा 

भारत में गणित की परंपरा अत्यंत प्राचीन और गहरी रही है, जिसकी जड़ें कई हजार वर्षों पुरानी हैं। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा उद्धृत आधिकारिक अभिलेखों के अनुसार, भारत के गणितीय योगदानों का इतिहास 1200–1800 ईसा पूर्व तक जाता है।

भारत में उत्पन्न हुए कुछ प्रमुख गणितीय सिद्धांत और अवधारणाएँ इस प्रकार हैं—

  • दशमलव संख्या पद्धति
  • शून्य की अवधारणा
  • ऋणात्मक संख्याओं के प्रारंभिक विचार

चौथी से सोलहवीं शताब्दी के बीच का काल, जिसे भारतीय गणित का शास्त्रीय और मध्यकालीन दौर माना जाता है, अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। इस अवधि में आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त, वराहमिहिर और भास्कराचार्य द्वितीय जैसे महान विद्वानों ने अंकगणित, बीजगणित, ज्यामिति और त्रिकोणमिति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया।

राष्ट्रीय गणित दिवस न केवल श्रीनिवास रामानुजन के योगदान को सम्मान देता है, बल्कि उन्हें भारत की इसी दीर्घकालिक और निरंतर चली आ रही बौद्धिक एवं गणितीय परंपरा से भी जोड़ता है।

श्रीनिवास रामानुजन: जीवन और योगदान 

  • श्रीनिवास रामानुजन को संख्या सिद्धांत (Number Theory), अनंत श्रेणियों (Infinite Series), सतत भिन्नों (Continued Fractions) और गणितीय विश्लेषण (Mathematical Analysis) में उनके क्रांतिकारी योगदान के लिए याद किया जाता है।
  • औपचारिक शिक्षा बहुत सीमित होने के बावजूद, रामानुजन ने स्वतंत्र रूप से लगभग 3,900 गणितीय सूत्रों और परिणामों की खोज की। इनमें से अनेक खोजें बाद में न केवल मौलिक सिद्ध हुईं, बल्कि अत्यंत गहन और महत्वपूर्ण भी पाई गईं।
  • गणित के प्रति उनका दृष्टिकोण अत्यंत सहज और अंतर्ज्ञान-आधारित था। उनकी कई संकल्पनाएँ और सूत्र प्रारंभ में अन्य गणितज्ञों के लिए रहस्यमय थे, लेकिन समय के साथ वे आधुनिक गणितीय अनुसंधान के केंद्र बन गए।
  • आज रामानुजन का कार्य सैद्धांतिक भौतिकी, कंप्यूटर विज्ञान, क्रिप्टोग्राफी (गोपनीयता विज्ञान) और उन्नत गणित जैसे क्षेत्रों में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।

उनका जीवन-प्रसंग छात्रों के लिए निरंतर प्रेरणा का स्रोत है, जो यह दर्शाता है कि प्रतिभा, जिज्ञासा और दृढ़ संकल्प कठिन परिस्थितियों को भी पार कर सकते हैं।

आज के समय में राष्ट्रीय गणित दिवस का महत्व 

आज की दुनिया में गणित की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। यह निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों की आधारशिला है—

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) और डेटा साइंस
  • अंतरिक्ष अनुसंधान और इंजीनियरिंग
  • अर्थशास्त्र और वित्तीय प्रणाली
  • जलवायु मॉडलिंग और चिकित्सा अनुसंधान

राष्ट्रीय गणित दिवस मनाकर भारत यह संदेश देता है कि नवाचार, तकनीकी प्रगति और राष्ट्रीय विकास के लिए गणित एक मजबूत आधार है। यह दिवस देश में गणितीय साक्षरता बढ़ाने, अनुसंधान को प्रोत्साहित करने और छात्रों को गणित की ओर आकर्षित करने के प्रयासों को भी मजबूती प्रदान करता है।

मुख्य तथ्य 

  • राष्ट्रीय गणित दिवस हर वर्ष 22 दिसंबर को मनाया जाता है।
  • यह महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन (1887–1920) की जयंती पर मनाया जाता है।
  • भारत सरकार ने इसे वर्ष 2011 में घोषित किया था।
  • वर्ष 2012 को पूरे देश में राष्ट्रीय गणित वर्ष के रूप में मनाया गया।
  • रामानुजन ने संख्या सिद्धांत और अनंत श्रेणियों में उल्लेखनीय योगदान दिया।
  • भारत की गणितीय परंपरा अत्यंत प्राचीन और समृद्ध है, जिसमें शून्य और दशमलव प्रणाली का आविष्कार शामिल है।

 

प्रधानमंत्री ने WHO ग्लोबल समिट में अश्वगंधा पर स्मारक डाक टिकट जारी किया

नई दिल्ली में आयोजित द्वितीय WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के प्रसिद्ध औषधीय पौधे अश्वगंधा पर एक स्मारक डाक टिकट जारी किया। यह पहल पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने और इसे समग्र (Holistic) एवं निवारक स्वास्थ्य सेवा के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में वैश्विक पहचान दिलाने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

डाक टिकट जारी करने का महत्व

  • स्मारक डाक टिकट प्रतीकात्मक और शैक्षणिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण होते हैं।
  • डाक टिकट किसी देश की संस्कृति, विरासत और प्राथमिकताओं के सांस्कृतिक दूत के रूप में कार्य करते हैं।
  • अश्वगंधा को दर्शाकर भारत ने पारंपरिक औषधीय पौधों के वैज्ञानिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया है।
  • यह कदम आयुष प्रणालियों (आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने और पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणालियों से जोड़ने के भारत के प्रयासों को मजबूत करता है।

अश्वगंधा के बारे में

  • अश्वगंधा (Withania somnifera) आयुर्वेद में सदियों से उपयोग की जाने वाली एक प्रमुख औषधीय जड़ी-बूटी है।
  • यह तनाव कम करने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, ऊर्जा और समग्र स्वास्थ्य के लिए जानी जाती है।
  • इसे एक “एडैप्टोजेन” माना जाता है, जो शरीर को शारीरिक और मानसिक तनाव से निपटने में मदद करता है।
  • हाल के वर्षों में अश्वगंधा ने वैश्विक वेलनेस, न्यूट्रास्यूटिकल और इंटीग्रेटिव मेडिसिन बाजारों में व्यापक लोकप्रियता हासिल की है।

पृष्ठभूमि

  • भारत के पास पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों, विशेषकर आयुर्वेद, की समृद्ध विरासत है, जो औषधीय पौधों और प्राकृतिक उपचारों पर आधारित है।
  • पिछले एक दशक में भारत ने संस्थागत ढांचे, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और नीतिगत समर्थन के माध्यम से अपने पारंपरिक ज्ञान के वैश्वीकरण पर विशेष ध्यान दिया है।

मुख्य बिंदु 

  • अश्वगंधा पर स्मारक डाक टिकट नई दिल्ली में जारी किया गया।
  • यह टिकट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा द्वितीय WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन के दौरान जारी किया गया।
  • अश्वगंधा एक प्रमुख आयुर्वेदिक औषधीय पौधा है, जो तनाव निवारण और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए प्रसिद्ध है।
  • यह पहल भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देती है।
  • कदम आयुष प्रणालियों की अंतरराष्ट्रीय पहुंच को मजबूत करता है।

भारत और नीदरलैंड ने संयुक्त व्यापार और निवेश समिति (JTIC) का गठन किया

भारत और नीदरलैंड्स ने अपने आर्थिक साझेदारी संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए संयुक्त व्यापार एवं निवेश समिति (Joint Trade and Investment Committee – JTIC) की स्थापना की है। इस निर्णय को एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर के माध्यम से औपचारिक रूप दिया गया, जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार और निवेश सहयोग के लिए एक समर्पित संस्थागत ढांचा तैयार करना है।

संयुक्त व्यापार एवं निवेश समिति (JTIC) क्या है

संयुक्त व्यापार एवं निवेश समिति (JTIC) भारत और नीदरलैंड्स के बीच आर्थिक संबंधों की समीक्षा, मार्गदर्शन और विस्तार के लिए एक द्विपक्षीय तंत्र के रूप में कार्य करेगी।
यह समिति—

  • व्यापार प्रवाह को सुदृढ़ करने
  • द्विपक्षीय निवेश को प्रोत्साहित करने
  • आपसी हित के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित होगी।

JTIC का उद्देश्य अस्थायी बैठकों से आगे बढ़कर नियमित और संस्थागत संवाद सुनिश्चित करना है।

JTIC के उद्देश्य

  • द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना
  • व्यापार एवं निवेश से जुड़ी नियामक और प्रक्रियागत बाधाओं की पहचान कर उन्हें दूर करना
  • उभरते और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएँ तलाशना
  • प्रौद्योगिकी, स्थिरता (Sustainability) और नवाचार आधारित विकास में साझेदारी को बढ़ावा देना

संरचना और कार्यप्रणाली

  • JTIC की बैठकें हर वर्ष आयोजित की जाएँगी
  • बैठकें बारी-बारी से भारत और नीदरलैंड्स में होंगी

समिति की सह-अध्यक्षता—

  • भारत की ओर से: अतिरिक्त सचिव, वाणिज्य विभाग, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
  • नीदरलैंड्स की ओर से: महानिदेशक (Foreign Economic Relations), विदेश मंत्रालय
  • दोनों देशों के संबंधित सरकारी अधिकारी एवं नामित सदस्य बैठकों में भाग लेंगे

पहल का महत्व

JTIC की स्थापना से—

  • आर्थिक संवाद के लिए एक औपचारिक और संरचित मंच उपलब्ध होगा
  • व्यापार और निवेश से जुड़ी समस्याओं का व्यवस्थित समाधान संभव होगा
  • निवेशकों के लिए ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस और पूर्वानुमेय कारोबारी माहौल बेहतर होगा

भारत के लिए यह पहल यूरोपीय देशों के साथ आर्थिक जुड़ाव मजबूत करने की रणनीति के अनुरूप है, जबकि नीदरलैंड्स के लिए यह यूरोप में भारतीय व्यापार और निवेश का प्रमुख प्रवेश द्वार बनने की भूमिका को और सुदृढ़ करती है।

मुख्य बिंदु 

  • भारत और नीदरलैंड्स ने संयुक्त व्यापार एवं निवेश समिति (JTIC) की स्थापना की
  • समिति को औपचारिक रूप देने के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए गए
  • JTIC द्विपक्षीय व्यापार और दोतरफा निवेश को बढ़ावा देगी
  • व्यापार और निवेश बाधाओं की पहचान व समाधान इसका प्रमुख लक्ष्य है
  • समिति की बैठकें प्रतिवर्ष, दोनों देशों में बारी-बारी से होंगी

Recent Posts

about - Part 100_12.1
QR Code
Scan Me