भारतीय खेल जगत से आई एक प्रेरक कहानी में, आठ महीने की गर्भवती निशानेबाज़ मेघना सज्जनार ने एशियन शूटिंग चैंपियनशिप 2026 में पदक जीतकर इतिहास रच दिया। 8 फरवरी 2026 को 32 वर्षीय मेघना ने महिला 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल किया, जो एशियन चैंपियनशिप में उनका पहला व्यक्तिगत पदक है। मातृत्व की तैयारी के साथ-साथ उच्चतम स्तर की सटीक निशानेबाज़ी में प्रतिस्पर्धा करते हुए मेघना की यह उपलब्धि खेल जगत में व्यापक सराहना का कारण बनी है।
एशियन चैंपियनशिप में मेघना सज्जनार का ऐतिहासिक पदक
एशियन शूटिंग चैंपियनशिप में मेघना सज्जनार ने भारी दबाव के बीच बेहद संयमित प्रदर्शन किया। फाइनल में 10-रिंग के बाहर सिर्फ एक शॉट जाने के कारण वह बेहद मामूली अंतर से रजत पदक से चूक गईं। व्यक्तिगत कांस्य पदक के साथ-साथ उन्होंने महिला टीम स्पर्धा में भारत के स्वर्ण पदक में भी अहम योगदान दिया, जिससे यह चैंपियनशिप उनके लिए दोगुनी यादगार बन गई। यह पदक एशियन स्तर पर उनका पहला व्यक्तिगत पोडियम फिनिश रहा, जिसने उनके खेल करियर को ऐतिहासिक महत्व दिया।
10 मीटर एयर राइफल क्यों है बेहद चुनौतीपूर्ण
10 मीटर एयर राइफल सबसे कठिन सटीकता वाले खेलों में से एक है, जिसमें संतुलन, सही पोश्चर और शरीर के सूक्ष्म कंपन पर पूर्ण नियंत्रण आवश्यक होता है। निशानेबाज़ों को मात्र 0.5 मिमी के बुल्सआई पर निशाना लगाना होता है, जहां शरीर में होने वाला हल्का सा बदलाव भी प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है। गर्भावस्था के दौरान प्रतिस्पर्धा करना इस चुनौती को और असाधारण बना देता है, क्योंकि शरीर का वजन, संतुलन और पोश्चर लगातार बदलते रहते हैं। मेघना ने रोज़ाना अपने स्टांस और तकनीक में बदलाव कर एलीट स्तर की निरंतरता बनाए रखी।
गर्भावस्था के दौरान प्रशिक्षण: एक सुनियोजित निर्णय
मेघना ने बताया कि गर्भावस्था की जानकारी मिलने के बाद भी उन्होंने प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धा जारी रखने को लेकर कोई संदेह नहीं किया। अपने कोच के मार्गदर्शन में उन्होंने खेल से दूरी बनाने के बजाय अपनी ट्रेनिंग रूटीन में आवश्यक बदलाव किए। शारीरिक असहजता और लगातार समायोजन के बावजूद वह मानसिक रूप से पूरी तरह तैयार रहीं। शुरुआत में उनके कोच को आश्चर्य हुआ, लेकिन जल्द ही उन्होंने मेघना के लिए सुरक्षित और अनुकूल समर्थन प्रणाली विकसित की।
कोचों का समर्थन और तकनीकी समायोजन
भारतीय राष्ट्रीय शूटिंग कोचों के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान राइफल स्पर्धाएं विशेष रूप से कठिन हो जाती हैं क्योंकि इनमें पोश्चर की संवेदनशीलता अधिक होती है। मेघना को अपनी शूटिंग जैकेट और ट्राउज़र—जो स्थिरता और संतुलन प्रदान करते हैं—में बार-बार बदलाव करने पड़े। शरीर में हो रहे परिवर्तनों के साथ अतिरिक्त तकनीकी समायोजन जरूरी थे। इन उपकरणों और तकनीकों में किए गए बदलावों ने उनके पदक जीतने वाले प्रदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भारतीय खेल के लिए इस उपलब्धि का महत्व
मेघना सज्जनार की यह उपलब्धि सिर्फ पदक तक सीमित नहीं है। यह गर्भावस्था और एलीट खेल से जुड़े रूढ़िवादी विचारों को चुनौती देती है और दिखाती है कि सही चिकित्सा देखभाल, योजना और समर्थन के साथ महिला खिलाड़ी सर्वोच्च स्तर पर प्रतिस्पर्धा जारी रख सकती हैं। उनकी सफलता भारतीय खेलों में एथलीट मातृत्व, समावेशिता और लचीली प्रशिक्षण प्रणालियों पर एक नई और मजबूत चर्चा को आगे बढ़ाती है।


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