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AI आधारित ‘प्रज्ञा’ सिस्टम गृह मंत्रालय को सौंपा गया, देश की सुरक्षा होगी और मजबूत

भारत की आंतरिक सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए, ‘प्रज्ञा’ (Prajna) नामक एक उन्नत सैटेलाइट इमेजिंग सिस्टम विकसित किया गया है। इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित किया गया है और यह सिस्टम गृह मंत्रालय (MHA) को सौंप दिया गया है। यह सिस्टम सुरक्षा एजेंसियों के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग और निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाएगा। यह सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित है और देश में निगरानी तथा आतंकवाद-रोधी अभियानों में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है।

‘प्रज्ञा’ क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

प्रज्ञा सैटेलाइट इमेजिंग सिस्टम एक AI-सक्षम प्लेटफॉर्म है, जिसे सुरक्षा बलों को रियल-टाइम विज़ुअल इंटेलिजेंस प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

इसे DRDO के ‘सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स’ द्वारा विकसित किया गया है।

यह सिस्टम अधिकारियों को महत्वपूर्ण क्षेत्रों की अधिक कुशलता से निगरानी करने और संभावित खतरों पर त्वरित प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाएगा।

उन्नत इमेज प्रोसेसिंग और डेटा विश्लेषण क्षमताओं के साथ, ‘प्रज्ञा’ (Prajna) स्थितिजन्य जागरूकता में सुधार करेगा और निर्णय लेने वालों को अधिक तेज़ी तथा सटीकता से कार्य करने में सहायता करेगा।

इस सिस्टम को नई दिल्ली में आयोजित एक औपचारिक कार्यक्रम में समीर वी. कामत द्वारा गोविंद मोहन को आधिकारिक तौर पर सौंपा गया।

AI भारत की आंतरिक सुरक्षा को कैसे बदल रहा है

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधुनिक सुरक्षा व्यवस्थाओं में तेज़ी से एक महत्वपूर्ण साधन बनता जा रहा है। ‘प्रज्ञा’ (Prajna) के माध्यम से, भारत ऐसी ज़्यादा स्मार्ट निगरानी प्रणालियों की ओर बढ़ रहा है जो:

  • असामान्य पैटर्न और संदिग्ध गतिविधियों का पता लगा सकती हैं।
  • सुरक्षा एजेंसियों को रियल-टाइम अलर्ट भी दे सकती हैं।
  • विभिन्न सुरक्षा बलों के बीच तालमेल को बेहतर बनाएंगी।
  • और आतंकवाद-रोधी रणनीतियों को भी मज़बूत करेंगी।

AI का सैटेलाइट इमेजिंग के साथ यह जुड़ाव, निगरानी के पारंपरिक तरीकों से हटकर तकनीक-आधारित सुरक्षा प्रणालियों की ओर हो रहे बदलाव का प्रतीक है।

रक्षा प्रौद्योगिकी को मज़बूत करने में DRDO की भूमिका

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों को विकसित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मिसाइलों के निर्माण से लेकर उन्नत निगरानी प्रणालियों तक, DRDO विदेशी प्रौद्योगिकी पर निर्भरता कम करने और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करता है।

‘प्रज्ञा’ (Prajna) का विकास देश के भीतर ही अत्याधुनिक समाधानों के निर्माण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

ADC-150: भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमताओं को बढ़ाना

‘प्रज्ञा’ के साथ-साथ, DRDO ने ‘एयर ड्रॉपेबल कंटेनर’ (ADC-150) के ज़रिए नौसेना की लॉजिस्टिक्स को मज़बूत करने की दिशा में भी प्रगति की है।

इस प्रणाली का भारतीय नौसेना द्वारा सफलतापूर्वक परीक्षण किया जा चुका है, और इसे समुद्र में मौजूद जहाज़ों तक ज़रूरी सामान पहुँचाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

ADC-150 की मुख्य विशेषताओं में शामिल हैं:

  • 150 किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने की क्षमता।
  • कठिन और विषम परिस्थितियों में भी विमान से एयर-ड्रॉप द्वारा डिलीवरी।
  • साथ ही, चिकित्सा सहायता, उपकरण और आवश्यक उत्पादों की त्वरित आपूर्ति।
  • समुद्र में आपात स्थितियों के दौरान प्रतिक्रिया क्षमता में सुधार।
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