पंजाब ने पशु कल्याण और सार्वजनिक सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए लुधियाना में राज्य का पहला डॉग सैंक्चुअरी (कुत्ता आश्रय स्थल) शुरू किया है। पायलट परियोजना के रूप में शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य आवारा कुत्तों की समस्या का मानवीय समाधान करना और शहरी क्षेत्रों में कुत्तों के काटने की घटनाओं को कम करना है। भविष्य में इसे पूरे राज्य में लागू करने की योजना है।
क्यों चर्चा में?
पंजाब सरकार ने लुधियाना में राज्य का पहला डॉग सैंक्चुअरी उद्घाटित किया है। यह एक पायलट प्रोजेक्ट है, जिसका उद्देश्य आवारा कुत्तों से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना है और आगे चलकर इसे अन्य जिलों में भी विस्तारित किया जाएगा।
लुधियाना डॉग सैंक्चुअरी: मुख्य विशेषताएँ
- यह पंजाब का पहला संगठित केंद्र है, जो विशेष रूप से आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए स्थापित किया गया है।
- सैंक्चुअरी लुधियाना में स्थित है और यहाँ आवारा कुत्तों को आश्रय व देखभाल प्रदान की जाएगी।
- व्यवस्थित प्रबंधन के माध्यम से कुत्तों के काटने की घटनाओं को कम करना इसका प्रमुख लक्ष्य है।
- यह केंद्र सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित पशु कल्याण दिशानिर्देशों के अनुसार संचालित होगा।
- पहल में सार्वजनिक सुरक्षा और पशुओं के प्रति मानवीय व्यवहार—दोनों के बीच संतुलन पर जोर दिया गया है।
सरकार का उद्देश्य और दृष्टिकोण
- इस पहल का उद्घाटन पंजाब के स्थानीय निकाय मंत्री संजेव अरोड़ा ने किया।
- उद्देश्य है बिना क्रूरता के आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करना।
- शहरी क्षेत्रों में बढ़ती जनस्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान करना।
- पायलट मॉडल के माध्यम से कार्यक्षमता का आकलन कर राज्यव्यापी विस्तार की योजना बनाना।
- सरकार का मानना है कि दीर्घकालिक समाधान के लिए पशु देखभाल और जिम्मेदार शहरी शासन—दोनों आवश्यक हैं।
सुप्रीम कोर्ट दिशानिर्देश और कानूनी ढांचा
- सैंक्चुअरी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप संचालित होगी।
- कुत्तों के मानवीय प्रबंधन, आश्रय और देखभाल पर विशेष जोर।
- एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों के अनुरूप नसबंदी, टीकाकरण और नियंत्रित पुनर्वास।
- इससे पशु करुणा और नागरिक सुरक्षा के बीच संवैधानिक संतुलन सुनिश्चित होगा।
पायलट परियोजना और राज्यव्यापी विस्तार
- लुधियाना सैंक्चुअरी एक परीक्षण मॉडल के रूप में कार्य करेगी।
- इसके प्रदर्शन के आधार पर अन्य जिलों में इसे लागू किया जाएगा।
- शहरी स्थानीय निकायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
- यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो अन्य राज्यों के लिए भी यह एक आदर्श उदाहरण बन सकता है।


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