कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब विज्ञान के सबसे जटिल क्षेत्रों में से एक—मानव डीएनए—में प्रवेश कर चुकी है। एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि के रूप में, गूगल डीपमाइंड ने अल्फ़ाजीनोम (AlphaGenome) नामक एक उन्नत एआई टूल प्रस्तुत किया है, जो अभूतपूर्व स्तर पर डीएनए का विश्लेषण करने में सक्षम है। यह नवाचार रोग अनुसंधान, जीन थेरेपी और व्यक्तिगत चिकित्सा (पर्सनलाइज़्ड मेडिसिन) के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है, क्योंकि यह वैज्ञानिकों को आनुवंशिक अनुक्रमों को समझने और यहां तक कि डिज़ाइन करने में मदद करता है।
अल्फ़ाजीनोम क्या है?
- अल्फ़ाजीनोम एक उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल है, जिसे डीएनए के अत्यंत लंबे अनुक्रमों को पढ़ने और उनकी व्याख्या करने के लिए विकसित किया गया है।
- यह एक बार में दस लाख (1 मिलियन) बेस पेयर्स तक का विश्लेषण कर सकता है, जिससे यह समझना संभव हो जाता है कि छोटे-छोटे आनुवंशिक परिवर्तन (म्यूटेशन) जैविक प्रक्रियाओं को कैसे प्रभावित करते हैं।
- पहले के टूल्स जहाँ मुख्य रूप से प्रोटीन बनाने वाले जीनों पर केंद्रित थे, वहीं अल्फ़ाजीनोम कोडिंग और नॉन-कोडिंग दोनों क्षेत्रों का अध्ययन करता है, जिससे स्वास्थ्य और बीमारी को नियंत्रित करने वाले डीएनए तंत्र की अधिक समग्र समझ मिलती है।
सिंथेटिक या “डिज़ाइनर डीएनए” में बड़ी सफलता
- अल्फ़ाजीनोम की सबसे शक्तिशाली विशेषताओं में से एक है सिंथेटिक या “डिज़ाइनर डीएनए” बनाने में सहायता करना।
- ये ऐसे छोटे डीएनए अनुक्रम होते हैं जो प्रकृति में स्वाभाविक रूप से नहीं पाए जाते, लेकिन उन्हें आनुवंशिक स्विच की तरह डिज़ाइन किया जा सकता है।
- ये स्विच केवल विशेष ऊतकों—जैसे यकृत (लिवर) या रेटिना—में जीन को चालू या बंद कर सकते हैं।
- इस तरह की सटीकता मौजूदा जीन थेरेपी की बड़ी सीमाओं को दूर कर सकती है, जहाँ उपचार का असर कभी-कभी शरीर के अनचाहे हिस्सों पर भी पड़ जाता है।
“डार्क जीनोम” की पहेली सुलझाना
- मानव डीएनए का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा प्रोटीन नहीं बनाता, जिसे लंबे समय तक “जंक डीएनए” कहा जाता रहा।
- अल्फ़ाजीनोम इसी नॉन-कोडिंग या रेगुलेटरी डीएनए पर ध्यान केंद्रित करता है, जिसे अब “डार्क जीनोम” कहा जाता है।
- नवीन शोधों से पता चला है कि ये क्षेत्र जीन गतिविधि और रोगों के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं।
- इन हिस्सों में होने वाले म्यूटेशन के प्रभावों की भविष्यवाणी करके अल्फ़ाजीनोम उन आनुवंशिक बीमारियों को समझने में मदद करता है, जिन्हें पहले समझ पाना मुश्किल था।
प्रशिक्षण और वैज्ञानिक मान्यता
- अल्फ़ाजीनोम को मानव और चूहे (माउस) के जीनोम का उपयोग करके प्रशिक्षित किया गया है, जिससे यह विभिन्न प्रजातियों में डीएनए अनुक्रमों और जैविक कार्यों के बीच संबंध सीख सका।
- इस शोध को प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका Nature में प्रकाशित किया गया है, जो इसकी वैज्ञानिक विश्वसनीयता को दर्शाता है।
- विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपलब्धि जीनोमिक एआई को प्रयोगशाला स्तर से आगे ले जाकर व्यावहारिक उपयोग की दिशा में एक बड़ा कदम है।
व्यक्तिगत चिकित्सा पर प्रभाव
- यह अनुमान लगाकर कि कौन से आनुवंशिक परिवर्तन हानिकारक हैं और कौन से लाभकारी, अल्फ़ाजीनोम पर्सनलाइज़्ड मेडिसिन के विकास में मदद कर सकता है, जहाँ उपचार व्यक्ति की आनुवंशिक बनावट के अनुसार तय किए जाते हैं।
- मानव स्वास्थ्य के अलावा, वैज्ञानिकों का मानना है कि यह टूल पौधों और सूक्ष्मजीवों के अध्ययन में भी नई समझ प्रदान करेगा, जिससे कृषि, जैव-प्रौद्योगिकी और पर्यावरण विज्ञान को भी लाभ मिल सकता है।


केरल ने बैसिलस सब्टिलिस को आधिकारिक रूप ...
वैज्ञानिकों ने उत्तराखंड के ओक के जंगलों...
IIT गुवाहाटी ने पूर्वी हिमालय में ग्लेशि...

