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चिराग पासवान ने असम में PMFME इनक्यूबेशन सेंटर का शुभारंभ किया

केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने 13 मार्च 2026 को सोनितपुर जिले के तेजपुर विश्वविद्यालय में एक आधुनिक ‘कॉमन इनक्यूबेशन सेंटर’ का उद्घाटन किया। इस केंद्र की स्थापना खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के पूर्ण वित्तीय सहयोग से ‘प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना’ (PMFME) के तहत की गई है। इस पहल का उद्देश्य भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण नवाचार, उद्यमिता और कौशल विकास को सुदृढ़ बनाना है।

कॉमन इनक्यूबेशन सेंटर क्या है?

नया कॉमन इनक्यूबेशन सेंटर एक अत्याधुनिक सुविधा के रूप में विकसित किया गया है, जो सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को सहयोग देने और इस क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है। यह केंद्र उद्यमियों को तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और आवश्यक अवसंरचना प्रदान करेगा, जिससे वे नए खाद्य उत्पादों का विकास और परीक्षण कर सकें।

यह सुविधा विशेष रूप से स्वयं सहायता समूह (SHGs), किसान उत्पादक संगठन (FPOs), सहकारी समितियों, स्टार्ट-अप्स और नए उद्यमियों को लाभ पहुंचाएगी। आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण तकनीकों तक पहुंच मिलने से उनके उत्पादों की गुणवत्ता और बाजार प्रतिस्पर्धा में सुधार होगा।

कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

  • उद्घाटन समारोह में कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे, जिनमें विधायक पृथ्वीराज राभा तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय और असम सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
  • कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने PMFME योजना के लाभार्थियों, उद्यमियों, स्टार्ट-अप्स, तेजपुर विश्वविद्यालय के शिक्षकों और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारकों से भी संवाद किया।

तेजपुर विश्वविद्यालय की तकनीकी भूमिका

स्वागत भाषण के दौरान विश्वविद्यालय के प्रो-वाइस चांसलर अमरेंद्र कुमार दास ने कहा कि यह इनक्यूबेशन सेंटर क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने इस परियोजना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने पर मंत्रालय का आभार व्यक्त किया।

विश्वविद्यालय का फूड इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी विभाग उद्यमियों को तकनीकी मार्गदर्शन देगा। इसमें खाद्य प्रसंस्करण तकनीक, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, लेबलिंग और खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन जैसे क्षेत्रों में सहायता प्रदान की जाएगी।

परियोजना के लिए सरकारी सहायता

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के संयुक्त सचिव डी. प्रवीण ने कहा कि सरकार, विश्वविद्यालयों और उद्यमियों के बीच सहयोग खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को मजबूत करने के लिए आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि PMFME योजना के तहत इस इनक्यूबेशन सेंटर की स्थापना के लिए मंत्रालय ने ₹2.35 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की है।

युवाओं में उद्यमिता को बढ़ावा

विधायक पृथिराज राभा ने छात्रों को खाद्य प्रसंस्करण और कौशल विकास कार्यक्रमों में करियर के अवसर तलाशने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने युवाओं से उद्यमी बनने और क्षेत्र में आर्थिक विकास तथा रोजगार सृजन में योगदान देने का आह्वान किया।

यह केंद्र छात्रों और युवा नवाचारकर्ताओं को अपने विचारों को सफल व्यवसाय में बदलने का अवसर प्रदान करेगा।

उत्तर-पूर्व में खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा

  • अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि सरकार का लक्ष्य उत्तर-पूर्व क्षेत्र में नवाचार, उद्यमिता और कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन के माध्यम से खाद्य प्रसंस्करण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है।
  • इस इनक्यूबेशन सेंटर में फल, अनाज, मसाले, बेकरी उत्पादों और अन्य क्षेत्रों के लिए सात विशेष प्रसंस्करण एवं सहायक लाइनें स्थापित की गई हैं। इन सुविधाओं से उद्यमी नए उत्पादों का विकास, परीक्षण और व्यावसायीकरण कर सकेंगे।
  • यह केंद्र दरांग, उदलगुरी, बिश्वनाथ, नगांव और गोलाघाट सहित कई जिलों के उद्यमियों को लाभ पहुंचाने की उम्मीद है।

PMFME योजना का प्रभाव

PMFME योजना आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य देशभर में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को सहयोग देना है। मंत्री के अनुसार, देश में 1.87 लाख से अधिक सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को ऋण स्वीकृत किया जा चुका है।

यह योजना किसानों, स्वयं सहायता समूहों, सहकारी समितियों और छोटे उद्यमियों को वित्तीय सहायता, क्षमता निर्माण और बाजार से जुड़ाव प्रदान करती है।

“फार्म टू फोर्क” और वैश्विक खाद्य टोकरी का लक्ष्य

चिराग पासवान ने “फार्म टू फोर्क” दृष्टिकोण के महत्व पर जोर दिया, जिसका उद्देश्य खाद्य अपव्यय को कम करना और कृषि मूल्य श्रृंखला को मजबूत बनाना है। यह दृष्टिकोण प्रधानमंत्री Narendra Modi के किसानों की आय बढ़ाने के लक्ष्य को भी समर्थन देता है।

उन्होंने कहा कि उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार, निर्यात बढ़ाने और क्षेत्रीय खाद्य उत्पादों को बढ़ावा देकर भारत “ग्लोबल फूड बास्केट” बनने की क्षमता रखता है।

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