छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती वर्ष 2026 में 19 फरवरी (गुरुवार) को पूरे भारत में, विशेषकर महाराष्ट्र में, बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई जाएगी। यह दिन मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज के साहस, अद्वितीय सैन्य कौशल, कुशल नेतृत्व और स्वराज्य (स्व-शासन) की उनकी महान दृष्टि को स्मरण करने का अवसर है। इस अवसर पर लोग शुभकामनाएं, प्रेरणादायक उद्धरण, चित्र और बैनर साझा करते हैं तथा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं। विद्यालयों, महाविद्यालयों और स्थानीय समुदायों द्वारा विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, ताकि युवा पीढ़ी को वीरता, न्याय और देशभक्ति के उनके आदर्शों से प्रेरित किया जा सके।
शिवाजी महाराज जयंती 2026 कब है?
छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती वर्ष 2026 में गुरुवार, 19 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। Maharashtra में यह उत्सव प्रायः ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार 19 फरवरी को मनाया जाता है, हालांकि पारंपरिक रूप से उनकी जन्मतिथि हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष में भी मानी जाती है। यह दिन व्यापक रूप से सार्वजनिक उत्सव के रूप में मनाया जाता है। शिवाजी महाराज जयंती 2026 उनके जन्मदिवस का स्मरण करते हुए भारतीय इतिहास और मराठा साम्राज्य में उनके अद्वितीय योगदान को सम्मान देती है।
छत्रपति शिवाजी महाराज कौन थे?
छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म शिवनेरी किले में शाहाजी राजे भोसले और माता जीजाबाई के घर हुआ था। उनकी माता ने उनके व्यक्तित्व में वीरता, अनुशासन और धार्मिक आस्था के संस्कार डाले। 6 जून 1674 को रायगढ़ किले में उनका राज्याभिषेक हुआ और वे मराठा साम्राज्य के प्रथम छत्रपति बने। 1674 से 1680 तक उनके शासनकाल में एक मजबूत, जनकेंद्रित और सुव्यवस्थित राज्य की स्थापना हुई। शिवाजी महाराज जयंती 2026 केवल एक वीर योद्धा ही नहीं, बल्कि दूरदर्शी शासक के रूप में भी उनके योगदान का उत्सव है।
सैन्य प्रतिभा और स्वराज्य का सपना
शिवाजी महाराज को गुरिल्ला युद्ध पद्धति “गनिमी कावा” के प्रणेता के रूप में जाना जाता है। उन्होंने मात्र 16 वर्ष की आयु में तोरणा किले पर कब्जा किया और बाद में रायगढ़, सिंहगढ़ तथा प्रतापगढ़ सहित 300 से अधिक किलों का निर्माण या सुदृढ़ीकरण किया। सह्याद्रि पर्वतमाला का रणनीतिक उपयोग कर उन्होंने शक्तिशाली साम्राज्यों के विरुद्ध सैन्य बढ़त हासिल की।
शिवाजी महाराज जयंती 2026 उनके अभिनव सैन्य नियोजन, मजबूत गुप्तचर तंत्र और पश्चिमी तट की रक्षा के लिए सशक्त नौसेना के निर्माण को भी रेखांकित करती है। उनका “स्वराज्य” का सपना स्वतंत्रता और आत्म-शासन का प्रतीक था, जिसने आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित किया।
शिवाजी महाराज जयंती 2026 का महत्व
शिवाजी महाराज की जयंती का महत्व उनके शाश्वत आदर्शों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान में निहित है। यह दिन उनके साहस, दूरदर्शिता और स्वराज्य के संकल्प को याद करने का अवसर है।
सैन्य प्रतिभा
- शिवाजी महाराज ने गुरिल्ला युद्ध पद्धति (गनिमी कावा) को विकसित किया और उसे प्रभावी ढंग से अपनाया।
- उन्होंने रायगढ़, सिंहगढ़ और प्रतापगढ़ जैसे मजबूत पहाड़ी किलों का निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण किया।
- भारत के पश्चिमी तट की सुरक्षा के लिए एक सशक्त नौसेना का गठन किया।
प्रशासनिक सुधार
- उन्होंने एक प्रभावी राजस्व व्यवस्था स्थापित की और न्यायपूर्ण शासन सुनिश्चित किया।
- उनका प्रशासन अनुशासित और जनहितैषी था।
- अधिकारियों की नियुक्ति योग्यता के आधार पर की जाती थी, न कि जाति या धर्म के आधार पर।
धार्मिक सौहार्द
- एक आस्थावान हिंदू होने के बावजूद उन्होंने सभी धर्मों का सम्मान किया।
- पूजा स्थलों की रक्षा की और युद्ध अभियानों के दौरान महिलाओं की सुरक्षा एवं सम्मान सुनिश्चित किया।
सांस्कृतिक गौरव
- उन्होंने मराठी और संस्कृत को राजकीय भाषा के रूप में प्रोत्साहित किया।
- भारतीय परंपराओं और दरबारी संस्कृति को पुनर्जीवित किया।
- शिवाजी महाराज जयंती 2026 उनके आदर्शों को अपनाने और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को सुदृढ़ करने का प्रेरणादायक अवसर है।
शिवाजी महाराज जयंती समारोह का इतिहास
शिवाजी महाराज की जयंती का सार्वजनिक रूप से आयोजन ब्रिटिश शासनकाल के दौरान लोकप्रिय हुआ। समाज सुधारक महात्मा ज्योतिराव फुले ने वर्ष 1870 में पहली बार सार्वजनिक रूप से यह उत्सव प्रारंभ किया, ताकि शिवाजी महाराज के योगदान को उजागर किया जा सके। बाद में Bal Gangadhar Tilak (लोकमान्य तिलक) ने 19वीं सदी के उत्तरार्ध में इसे व्यापक रूप से लोकप्रिय बनाया, जिससे भारतीयों में राष्ट्रवाद और एकता की भावना मजबूत हुई। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह उत्सव आत्मसम्मान और प्रतिरोध का प्रतीक बन गया।
2026 में महाराष्ट्र भर में भव्य आयोजन
- वर्ष 2026 में यह जयंती पूरे महाराष्ट्र में भव्य रूप से मनाई जाएगी।
- रायगढ़ किला पर विशेष समारोह और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
- शिवनेरी किला में उनके बचपन से जुड़ी कथाओं और ऐतिहासिक भ्रमण का आयोजन होगा।
- मुंबई में छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस जैसे प्रमुख स्थलों को सजाया जाएगा और भव्य रैलियां निकाली जाएंगी।
- कोल्हापुर और सिंधुदुर्ग में भी जनसभाएं, शैक्षणिक कार्यक्रम और समुद्री श्रद्धांजलि समारोह आयोजित होंगे।
- विद्यालयों में निबंध प्रतियोगिता, भाषण और नाटकों के माध्यम से विद्यार्थियों को उनके जीवन और आदर्शों से अवगत कराया जाएगा।
शिवाजी महाराज से नेतृत्व के सबक
शिवाजी महाराज का जीवन आज भी प्रेरणा का स्रोत है। उनसे हमें मिलते हैं:
- विपरीत परिस्थितियों में साहस
- दूरदर्शी रणनीति और योजना
- शासन में न्याय और समानता
- महिलाओं और सांस्कृतिक मूल्यों का सम्मान
- स्वराज्य और राष्ट्रीय गौरव के प्रति अटूट प्रतिबद्धता
ये मूल्य आज के आधुनिक नेतृत्व और सुशासन में भी उतने ही प्रासंगिक हैं।


राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद 68वीं राष्ट्री...
अंतरराष्ट्रीय महिला एवं बालिका विज्ञान द...
विश्व दलहन दिवस 2026: इतिहास और महत्व...

