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NHAI राष्ट्रीय राजमार्गों पर बनाएगा मधुमक्खी गलियारे, जानें वजह

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने 17 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे “बी कॉरिडोर” (BeeCorridors) नामक एक अनोखी और पर्यावरण-अनुकूल पहल की घोषणा की है। इस योजना के तहत राजमार्गों के आसपास परागण-अनुकूल (पॉलिनेटर-फ्रेंडली) गलियारों का विकास किया जाएगा, जिनमें फूलदार पेड़-पौधे लगाए जाएंगे ताकि मधुमक्खियों और अन्य परागणकर्ताओं के संरक्षण को बढ़ावा मिल सके। इसका उद्देश्य मधुमक्खियों पर बढ़ते पारिस्थितिक दबाव को कम करना और जैव विविधता को मजबूत करना है। वर्ष 2026–27 में लगभग 40 लाख पेड़ लगाए जाने का लक्ष्य है, जिनमें से करीब 60% पौधारोपण बी कॉरिडोर पहल के तहत होगा। यह कदम सतत और हरित राजमार्ग विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

NHAI बी कॉरिडोर पहल: सतत राष्ट्रीय राजमार्ग विकास की दिशा में बड़ा कदम

एनएचएआई की बी कॉरिडोर पहल राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे सजावटी पौधारोपण से हटकर पारिस्थितिक पौधारोपण की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव दर्शाती है। अब सजावटी पौधों की जगह ऐसे पेड़-पौधे लगाए जाएंगे जो पराग और मधुरस (नेक्टर) से भरपूर हों और मधुमक्खियों सहित अन्य परागणकर्ताओं को समर्थन दें। यह पहल पूरे वर्ष मधुमक्खियों को भोजन की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करेगी। बी कॉरिडोर के माध्यम से जैव विविधता में सुधार होगा और दीर्घकालिक पारिस्थितिक संतुलन को बढ़ावा मिलेगा।

परागण संरक्षण क्यों महत्वपूर्ण है?

मधुमक्खियाँ और अन्य परागणकर्ता कृषि और बागवानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन बढ़ते पारिस्थितिक दबाव के कारण उनकी संख्या प्रभावित हो रही है। एनएचएआई की यह पहल मधुमक्खी-अनुकूल हरित पट्टियाँ विकसित कर पारिस्थितिक संतुलन बहाल करने और कृषि उत्पादकता बढ़ाने का प्रयास करती है। स्वस्थ परागणकर्ता आबादी फसल उत्पादन और जैव विविधता दोनों को मजबूत बनाती है। इस प्रकार राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे पौधारोपण क्षेत्र केवल हरियाली नहीं बल्कि पारिस्थितिक समर्थन तंत्र बनेंगे।

बी कॉरिडोर कैसे विकसित किए जाएंगे?

इस योजना के तहत पेड़, झाड़ियाँ, जड़ी-बूटियाँ और घास का मिश्रण लगाया जाएगा। नीम, करंज, महुआ, पलाश, बॉटल ब्रश, जामुन और सिरिस जैसी देशी प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाएगी। विभिन्न मौसमों में अलग-अलग समय पर फूल खिलने की व्यवस्था की जाएगी ताकि पूरे वर्ष मधुरस उपलब्ध रहे। मधुमक्खियों की औसत उड़ान दूरी को ध्यान में रखते हुए 500 मीटर से 1 किलोमीटर के अंतराल पर फूलदार पेड़ों के समूह लगाए जाएंगे। यह व्यवस्थित दृष्टिकोण सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप है।

वर्ष 2026–27 के लिए पौधारोपण लक्ष्य

एनएचएआई वर्ष 2026–27 में लगभग 40 लाख पेड़ लगाने की योजना बना रहा है, जिनमें से लगभग 60% बी कॉरिडोर पहल के तहत होंगे। देशभर के फील्ड कार्यालय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के आधार पर उपयुक्त राजमार्ग खंड और खाली भूमि का चयन करेंगे। इस अवधि में कम से कम तीन परागण कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे। यह बड़े पैमाने का मधुमक्खी-अनुकूल पौधारोपण अभियान राष्ट्रीय स्तर पर परागण संरक्षण को मजबूती देगा।

परागणकर्ता और पारिस्थितिक अवसंरचना

परागणकर्ता, विशेषकर मधुमक्खियाँ, वैश्विक खाद्य उत्पादन का लगभग एक-तिहाई हिस्सा सुनिश्चित करती हैं। अक्सर अवसंरचना विकास में जैव विविधता की अनदेखी हो जाती है, लेकिन पारिस्थितिक अवसंरचना विकास और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ती है। बी कॉरिडोर जैसी पहल परिवहन विकास को पर्यावरणीय जिम्मेदारी के साथ संतुलित करती है। देशी और मधुरस-समृद्ध प्रजातियों के रोपण से भारत परागण सेवाओं, कृषि उत्पादन और जलवायु सहनशीलता में सुधार कर सकता है। ऐसा सतत राष्ट्रीय राजमार्ग मॉडल अन्य देशों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।

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