राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की 17–19 फरवरी 2026 की भारत यात्रा के दौरान भारत और फ्रांस ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को “विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी” (Special Global Strategic Partnership) तक उन्नत किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने उच्च स्तरीय वार्ता की तथा संयुक्त रूप से “इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026” का शुभारंभ किया। यह राष्ट्रपति मैक्रों की भारत की चौथी यात्रा है और इससे पहले 2025 में प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस का दौरा किया था। उन्नत साझेदारी का उद्देश्य Horizon 2047 रोडमैप के तहत रक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), परमाणु ऊर्जा, जलवायु, इंडो-पैसिफिक और बहुपक्षीय सहयोग को गहरा करना है।
विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा
- भारत-फ्रांस संयुक्त वक्तव्य 2026 में दोनों नेताओं ने संबंधों को विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी तक ले जाने पर सहमति जताई। यह निर्णय एक स्थिर और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था के निर्माण की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। 2023 में रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे होने पर अपनाए गए Horizon 2047 रोडमैप की प्रगति की समीक्षा भी की गई।
- दोनों देशों ने आर्थिक सुरक्षा, वैश्विक मुद्दों और जन-से-जन संपर्क की निगरानी के लिए वार्षिक विदेश मंत्रियों का व्यापक संवाद तंत्र स्थापित करने का निर्णय लिया। यह कदम भारत-फ्रांस संबंधों के दीर्घकालिक संस्थागत सुदृढ़ीकरण का संकेत है।
रक्षा सहयोग: राफेल-मरीन और स्कॉर्पीन
- रक्षा सहयोग भारत-फ्रांस संयुक्त वक्तव्य 2026 का केंद्रीय स्तंभ बना हुआ है।
- दोनों देशों ने उन्नत रक्षा प्लेटफॉर्म के सह-डिज़ाइन, सह-विकास और सह-उत्पादन को तेज़ करने पर सहमति जताई है।
- भारत ने हाल ही में 26 राफेल-मरीन लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं।
- कलवरी-श्रेणी (स्कॉर्पीन) पनडुब्बी कार्यक्रम के तहत सहयोग जारी है, जिसमें छठी पनडुब्बी जनवरी 2025 में सौंप दी गई।
- एक संयुक्त उन्नत प्रौद्योगिकी विकास समूह (Joint Advanced Technology Development Group) उभरती और महत्वपूर्ण तकनीकों की खोज करेगा।
- डीआरडीओ (DRDO) और फ्रांस की डीजीए (DGA) के बीच सहयोग रक्षा अनुसंधान एवं विकास संबंधों को और मजबूत करेगा, जिससे रणनीतिक स्वायत्तता और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती बढ़ेगी।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नवाचार
- राष्ट्रपति मैक्रों भारत में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट 2026 में भाग लेंगे। दोनों नेताओं ने सुरक्षित, भरोसेमंद और सार्वजनिक हित में उपयोगी AI के विकास के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। इससे पहले हस्ताक्षरित भारत-फ्रांस कृत्रिम बुद्धिमत्ता घोषणा पर आगे बढ़ते हुए 2026 को “इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन” घोषित किया गया है।
- AI, साइबर सुरक्षा, डिजिटल प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, स्टार्टअप और अनुसंधान के क्षेत्रों में संयुक्त पहलें शैक्षणिक संस्थानों, अनुसंधान निकायों और उद्योगों को जोड़ेंगी।
परमाणु ऊर्जा और जलवायु सहयोग
- भारत और फ्रांस ने असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग का विस्तार किया है, जिसमें बड़े रिएक्टरों तथा उभरती तकनीकों जैसे स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) को शामिल किया गया है।
- जैतापुर परमाणु ऊर्जा परियोजना पर चर्चाओं में प्रगति हुई है।
- फ्रांस ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु क्षमता हासिल करने के भारत के लक्ष्य का समर्थन किया।
- दोनों पक्षों ने पेरिस समझौते और जलवायु लक्ष्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जिसमें वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5°C तक सीमित रखने का लक्ष्य शामिल है।
- इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA) और कोएलिशन फॉर डिज़ास्टर रेज़िलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (CDRI) के माध्यम से सहयोग वैश्विक जलवायु कार्रवाई को मजबूत करता रहेगा।
इंडो-पैसिफिक और वैश्विक शासन
- दोनों नेताओं ने स्वतंत्र और मुक्त इंडो-पैसिफिक के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
- उन्होंने भारत-फ्रांस इंडो-पैसिफिक रोडमैप के तहत समन्वय तथा ऑस्ट्रेलिया और यूएई के साथ त्रिपक्षीय प्रारूपों पर जोर दिया।
- फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पुनर्गठित स्वरूप में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अपना मजबूत समर्थन दोहराया। राष्ट्रपति मैक्रों ने प्रधानमंत्री मोदी को फ्रांस द्वारा आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन 2026 में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया।
- चर्चाओं में यूक्रेन, गाज़ा, ईरान और वैश्विक व्यापक आर्थिक स्थिरता जैसे मुद्दे शामिल रहे, जिनमें संवाद, कूटनीति और बहुपक्षीय सुधार पर बल दिया गया।
व्यापार और जन-से-जन संपर्क
- भारत-फ्रांस संयुक्त वक्तव्य 2026 में व्यापार, निवेश और डिजिटल सहयोग में वृद्धि का उल्लेख किया गया। फ्रांस पहला यूरोपीय देश है जिसने भारत की UPI भुगतान प्रणाली को स्वीकार किया। दोनों नेताओं ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता में प्रगति का स्वागत किया।
- 2030 तक फ्रांस में भारतीय छात्रों की संख्या 30,000 तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। स्वास्थ्य, शिक्षा, नागरिक उड्डयन, रेलवे, स्टार्टअप और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में सहयोग द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करेगा।
पृष्ठभूमि
- भारत और फ्रांस ने वर्ष 1998 में रणनीतिक साझेदारी स्थापित की थी। समय के साथ यह सहयोग रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, जलवायु कार्रवाई, इंडो-पैसिफिक सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी क्षेत्रों तक विस्तारित हुआ है।
- 2023 में 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर होराइजन 2047 रोडमैप को अपनाया गया, जिससे भविष्य का सहयोग भारत की स्वतंत्रता की शताब्दी के लक्ष्य के अनुरूप तय किया गया।
- फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का लगातार समर्थन किया है।
- 2026 में संबंधों को ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक उन्नत किया जाना दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और दीर्घकालिक भू-राजनीतिक सामंजस्य को दर्शाता है।


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