राजस्थान अपने वन्यजीव पर्यटन में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ने जा रहा है। अलवर जिले के कटी घाटी क्षेत्र में एक नया जैविक पार्क (Biological Park) विकसित किया जाएगा। यह पार्क वन्यजीव संरक्षण, पशु देखभाल और पर्यटन—तीनों को एक ही स्थान पर जोड़ने वाला होगा। इसके पूरा होने पर यह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का अपनी तरह का पहला जैविक पार्क बन जाएगा, जिसमें सफारी, रेस्क्यू सेंटर और अत्याधुनिक पशु चिकित्सालय की सुविधाएँ होंगी।
अलवर जैविक पार्क का स्थान और क्षेत्रफल
प्रस्तावित जैविक पार्क का निर्माण अलवर जिले में कटी घाटी और जैसमंद के बीच किया जाएगा। यह लगभग 100 हेक्टेयर भूमि में फैला होगा। इसमें से करीब 30 प्रतिशत क्षेत्र चिड़ियाघर के रूप में विकसित किया जाएगा, जबकि शेष 70 प्रतिशत क्षेत्र हरित क्षेत्र रहेगा, ताकि प्राकृतिक वातावरण बना रहे।
400 से अधिक वन्यजीवों का होगा घर
अलवर जैविक पार्क में 81 विभिन्न प्रजातियों के 400 से अधिक वन्यजीव रखे जाएंगे। यहाँ पर्यटक शेर, चीता और भारत में पाई जाने वाली विभिन्न प्रजातियों के बाघों को देख सकेंगे। इसके अलावा अफ्रीका से लाए गए जिराफ भी यहाँ का प्रमुख आकर्षण होंगे, जो इस पार्क को क्षेत्र में विशिष्ट बनाएंगे।
एक ही स्थान पर शेर, बाघ और शाकाहारी सफारी
इस पार्क की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि यहाँ एक ही परिसर में कई प्रकार की सफारी उपलब्ध होंगी। पर्यटक शेर सफारी, बाघ सफारी और शाकाहारी जीवों की सफारी का आनंद ले सकेंगे। NCR क्षेत्र में इस प्रकार की सुविधा पहली बार देखने को मिलेगी, जिससे बड़ी संख्या में पर्यटकों के आने की संभावना है।
हाई-टेक पशु रेस्क्यू सेंटर
जैविक पार्क के भीतर एक आधुनिक पशु रेस्क्यू सेंटर भी बनाया जाएगा। इसे गुजरात के गिर राष्ट्रीय उद्यान में स्थित प्रसिद्ध रेस्क्यू सुविधा की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। वन विभाग की टीम पहले ही गिर जाकर वहाँ की रेस्क्यू तकनीक, सामुदायिक सहभागिता और पशु देखभाल प्रणाली का अध्ययन कर चुकी है।
वन्यजीवों के लिए आधुनिक पशु चिकित्सालय
परियोजना में एक पूरी तरह सुसज्जित पशु चिकित्सालय भी शामिल है। इसमें घायल, बीमार और बचाए गए वन्यजीवों के उपचार के लिए आधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों और वन विभाग के अधिकारियों की स्थायी तैनाती की जाएगी।
तितली पार्क से बढ़ेगी प्राकृतिक सुंदरता
बड़े वन्यजीवों के साथ-साथ पार्क में एक तितली पार्क भी विकसित किया जाएगा। इसमें विभिन्न प्रजातियों की तितलियाँ प्रदर्शित की जाएँगी, जो पार्क की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ शैक्षणिक महत्व भी रखेगा। यह विशेष रूप से बच्चों, छात्रों और प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करेगा।
देशभर के चिड़ियाघरों से लाए जाएँगे जानवर
पार्क को आबाद करने के लिए वन विभाग ने देश के 25 चिड़ियाघरों से संपर्क किया है। वहाँ से ऐसे जानवरों की जानकारी जुटाई जा रही है, जिन्हें सुरक्षित रूप से अलवर लाया जा सके। आवश्यक अनुमतियाँ मिलने के बाद चरणबद्ध तरीके से स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
स्वीकृति प्रक्रिया और परियोजना की समय-सीमा
वन विभाग द्वारा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) पहले ही तैयार कर ली गई है। निर्माण कार्य केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से स्वीकृति मिलने के बाद शुरू किया जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।
पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
अलवर जैविक पार्क से वन्यजीव संरक्षण को मजबूती मिलने के साथ-साथ राजस्थान के पर्यटन को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। आधुनिक सुविधाओं, विविध प्रजातियों और अनेक सफारी विकल्पों के साथ यह पार्क पर्यटकों, शोधकर्ताओं और वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक प्रमुख आकर्षण केंद्र बनेगा।


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