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समान नागरिक संहिता पर गुजरात को ड्राफ्ट रिपोर्ट, जानें क्या है खास

गुजरात ने समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को सौंप दी है। यह रिपोर्ट तीन खंडों में प्रस्तुत की गई है, जिसमें एक विस्तृत कानूनी ढांचा तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य विभिन्न समुदायों के लिए समान व्यक्तिगत कानून लागू करना है।

जस्टिस रंजना देसाई समिति रिपोर्ट: मुख्य बिंदु

UCC गुजरात पर समिति की रिपोर्ट व्यक्तिगत कानूनों में समरूपता लाने का एक व्यापक खाका प्रस्तुत करती है।

इसकी सिफारिशें विभिन्न धर्मों में नागरिक मामलों में एकरूपता लाने पर केंद्रित हैं, साथ ही सामाजिक संतुलन बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है।

रिपोर्ट में प्रमुख रूप से निम्न बिंदुओं पर जोर दिया गया है—

  • व्यक्तिगत कानूनों के लिए समान कानूनी ढांचा
  • विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने के लिए सरल व समान नियम
  • महिलाओं के अधिकारों और समानता की सुरक्षा
  • कानूनी एकरूपता और सांस्कृतिक विविधता के बीच संतुलन

यह रिपोर्ट UCC लागू करने की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण चरण मानी जा रही है।

यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) गुजरात: क्या प्रस्ताव है?

UCC का प्रस्ताव विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों को हटाकर एक समान नियम लागू करने का है, जो सभी नागरिकों पर लागू होंगे।

वर्तमान में भारत में अलग-अलग धर्मों के लिए विवाह, तलाक और संपत्ति से जुड़े कानून अलग-अलग हैं।

प्रस्तावित UCC का उद्देश्य—

  • सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी अधिकार सुनिश्चित करना
  • व्यक्तिगत कानूनों में असमानताओं को समाप्त करना
  • लैंगिक न्याय और निष्पक्षता को बढ़ावा देना
  • एक समान कानूनी प्रणाली स्थापित करना

महिलाओं के अधिकारों पर विशेष फोकस

इस रिपोर्ट की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता महिलाओं के अधिकारों पर विशेष ध्यान देना है।

यह ढांचा नागरिक कानूनों में लैंगिक समानता को प्राथमिकता देता है और लंबे समय से चली आ रही असमानताओं को दूर करने का प्रयास करता है।

सिफारिशों के अनुसार महिलाओं को—

  • विवाह और तलाक में समान अधिकार
  • संपत्ति और उत्तराधिकार में बराबरी का हिस्सा
  • सभी समुदायों में कानूनी सुरक्षा

व्यापक परामर्श और जमीनी अध्ययन

समिति ने रिपोर्ट तैयार करने के लिए व्यापक स्तर पर परामर्श किया।

इस प्रक्रिया में जिला स्तर की बैठकों, हितधारकों से चर्चा और तुलनात्मक कानूनी अध्ययन शामिल थे।

समिति ने बातचीत की—

  • गुजरात के विभिन्न स्थानीय समुदायों से
  • कानूनी विशेषज्ञों और शिक्षाविदों से
  • सामाजिक संगठनों और अन्य हितधारकों से

गुजरात सरकार की भूमिका

इस रिपोर्ट के सौंपे जाने के बाद अब गुजरात सरकार पर इसकी सिफारिशों की समीक्षा और कार्यान्वयन की जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि यह रिपोर्ट व्यापक अध्ययन और परामर्श पर आधारित है।

सरकार अब निम्न बिंदुओं पर विचार करेगी—

  • प्रस्तावित कानून की कानूनी व्यवहार्यता
  • लागू करने के प्रशासनिक पहलू
  • जनता और हितधारकों की प्रतिक्रिया

समिति की संरचना

UCC गुजरात समिति में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल थे, जिससे रिपोर्ट तैयार करने में संतुलित दृष्टिकोण अपनाया गया।

मुख्य सदस्य:

  • जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई (अध्यक्ष)
  • सेवानिवृत्त अधिकारी C. L. मीणा
  • वरिष्ठ अधिवक्ता R. C. कोडेकर
  • शिक्षाविद् डॉ. दक्षेश ठाकर
  • सामाजिक कार्यकर्ता गीता श्रॉफ
  • सलाहकार शत्रुघ्न सिंह (पूर्व उत्तराखंड मुख्य सचिव)

यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) क्या है?

समान नागरिक संहिता (UCC) एक ऐसा कानूनी ढांचा है, जिसमें सभी नागरिकों के लिए—धर्म की परवाह किए बिना—विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में एक समान कानून लागू होता है। यह अवधारणा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में उल्लेखित है, जो राज्य को समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

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