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राजस्थान का पहला पूर्णतः जैविक गाँव: बामनवास कांकर ने रचा हरित कीर्तिमान

राजस्थान ने टिकाऊ कृषि के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। बामनवास कांकर पंचायत को राज्य की पहली पूर्णतः जैविक ग्राम पंचायत घोषित किया गया है, जिसमें इसके अंतर्गत आने वाले सातों ढाणियों/बसावटों में पूरी तरह जैविक खेती अपनाई जा रही है। यह उपलब्धि रासायन-मुक्त कृषि, पर्यावरण संरक्षण और किसान-हितैषी खेती को बढ़ावा देने की दिशा में भारत के बढ़ते प्रयासों को दर्शाती है। इससे ग्रामीण आजीविका को मजबूती मिलती है, साथ ही स्वस्थ खाद्य प्रणाली और दीर्घकालिक मृदा संरक्षण को भी प्रोत्साहन मिलता है।

समाचार में क्यों?

राजस्थान की बामनवास कांकर पंचायत को राज्य की पहली पूर्णतः जैविक ग्राम पंचायत घोषित किया गया है, जहाँ सातों बसावटों में सभी कृषि गतिविधियाँ जैविक खेती के सिद्धांतों पर आधारित हैं।

बामनवास कांकर को क्या बनाता है खास?

पूर्णतः जैविक घोषित होने का अर्थ है कि यहाँ के किसानों ने रासायनिक उर्वरकों, कृत्रिम कीटनाशकों और आनुवंशिक रूप से परिवर्तित (GM) इनपुट्स का पूरी तरह त्याग कर दिया है। इसके स्थान पर प्राकृतिक खाद, कम्पोस्ट, फसल चक्र, हरी खाद और जैविक कीट नियंत्रण विधियों को अपनाया गया है।
यह सामूहिक परिवर्तन समुदाय की सक्रिय भागीदारी, निरंतर प्रशिक्षण और निगरानी से संभव हुआ। शुष्क और अर्ध-शुष्क परिस्थितियों के लिए पहचाने जाने वाले राजस्थान में यह उपलब्धि यह साबित करती है कि कठिन कृषि-जलवायु क्षेत्रों में भी टिकाऊ खेती सफल हो सकती है।

जैविक खेती को समझें

  • जैविक खेती एक सतत कृषि प्रणाली है जो मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और कीट प्रबंधन के लिए प्राकृतिक, खेत-आधारित संसाधनों पर निर्भर करती है। इसमें कृत्रिम रसायनों से परहेज़ कर पारिस्थितिक संतुलन को बढ़ावा दिया जाता है।
  • मिट्टी में जैविक पदार्थ और जैव विविधता बढ़ने से दीर्घकालिक उत्पादकता सुनिश्चित होती है। साथ ही, रासायनिक उर्वरकों के कम उपयोग से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन घटता है, जो जलवायु परिवर्तन शमन में सहायक है। किसानों के लिए यह सुरक्षित खाद्य उत्पादन और महंगे बाहरी इनपुट्स पर निर्भरता कम करने का माध्यम है।

जैविक खेती के लाभ

  • जैविक खेती पर्यावरणीय, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी कई लाभ प्रदान करती है। यह मिट्टी, जल और वायु प्रदूषण को कम करती है, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र स्वच्छ रहता है। भोजन में रासायनिक अवशेष घटने से मानव और पशु स्वास्थ्य जोखिम कम होते हैं।
  • मिट्टी की संरचना, वायु संचार और जल-धारण क्षमता में सुधार से कटाव और फसल विफलता का जोखिम घटता है। किसानों को इनपुट लागत में कमी और अधिक लचीली कृषि प्रणाली का लाभ मिलता है, जिससे दीर्घकाल में टिकाऊ उत्पादन और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित होता है।

जैविक खेती को समर्थन देने वाली सरकारी पहलें

  • भारत सरकार जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएँ चला रही है।
  • परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) के तहत क्लस्टर-आधारित जैविक खेती को प्रोत्साहन दिया जाता है।
  • पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए जैविक मूल्य श्रृंखला विकास मिशन (MOVCD-NER) निर्यात-उन्मुख जैविक मूल्य श्रृंखलाओं पर केंद्रित है।
  • राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र (NCOF) कृषि मंत्रालय के अंतर्गत प्रशिक्षण, प्रमाणन और जागरूकता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

भारत में जैविक खेती की स्थिति

  • किसानों की संख्या के लिहाज़ से भारत जैविक खेती करने वाले अग्रणी देशों में शामिल है। जैविक कृषि को समेकित पोषक तत्व प्रबंधन (INM) ढांचे के अंतर्गत बढ़ावा दिया जाता है।
  • PGS-India और NPOP जैसी प्रमाणन प्रणालियाँ जैविक उत्पादों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करती हैं। पूरी तरह जैविक राज्य सिक्किम एक सफल उदाहरण है, और अब राजस्थान की यह पहल भारत की टिकाऊ कृषि यात्रा को और गति देती है।
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