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नदी और मुहाना क्षेत्र में पाई जाने वाली डॉल्फिन का दूसरा व्यापक सर्वेक्षण शुरू

भारत ने प्रोजेक्ट डॉल्फिन के तहत दूसरी रेंज-वाइड डॉल्फ़िन सर्वेक्षण की शुरुआत उत्तर प्रदेश के बिजनौर से की है। यह राष्ट्रीय स्तर का अभियान नदियों और तटीय क्षेत्रों में डॉल्फिन की आबादी का आकलन करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। दो चरणों में होने वाला यह सर्वेक्षण प्रजातियों की स्थिति, उनके आवास की दशा और खतरों को समझने में मदद करेगा, जिससे भारत में नदीय और मुहाना (एस्टुअरी) डॉल्फिन संरक्षण के लिए बेहतर योजना बनाई जा सकेगी।

क्यों चर्चा में?

भारत में दूसरी रेंज-वाइड डॉल्फिन सर्वेक्षण की शुरुआत की गई है। यह सर्वेक्षण प्रोजेक्ट डॉल्फ़िन के अंतर्गत किया जा रहा है, ताकि डॉल्फ़िन की संख्या और संरक्षण से जुड़े अद्यतन आंकड़े जुटाए जा सकें।

प्रोजेक्ट डॉल्फिन क्या है?

प्रोजेक्ट डॉल्फिन भारत सरकार की एक राष्ट्रीय संरक्षण पहल है, जिसका उद्देश्य नदीय और समुद्री डॉल्फ़िन प्रजातियों की रक्षा करना है। इसमें गंगा नदी डॉल्फिन, जो भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव है, के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। यह परियोजना आवास संरक्षण, वैज्ञानिक निगरानी, समुदाय की भागीदारी और प्रदूषण तथा मछली पकड़ने के दौरान होने वाली आकस्मिक मौतों जैसे खतरों को कम करने पर केंद्रित है। डॉल्फिन का स्वास्थ्य नदी पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का संकेतक माना जाता है, इसलिए यह परियोजना व्यापक मीठे पानी के संरक्षण के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सर्वेक्षण कौन कर रहा है?

इस सर्वेक्षण का समन्वय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा किया जा रहा है। यह एक वैज्ञानिक अभ्यास है, जिसमें वन्यजीव विशेषज्ञ और फील्ड टीमें शामिल हैं। मंत्रालय के अनुसार, सर्वेक्षण में केवल डॉल्फ़िन की संख्या ही नहीं, बल्कि आवास की गुणवत्ता, मानव दबाव और पारिस्थितिक खतरों से जुड़े आंकड़े भी एकत्र किए जाएंगे। इन निष्कर्षों के आधार पर प्रोजेक्ट डॉल्फ़िन के तहत भविष्य की नीतियां और संरक्षण रणनीतियां तय की जाएंगी।

सर्वेक्षण का क्षेत्र और चरण

डॉल्फिन सर्वेक्षण दो चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में गंगा नदी के मुख्य प्रवाह को बिजनौर से गंगा सागर तक कवर किया जाएगा, साथ ही सिंधु नदी को भी शामिल किया गया है। दूसरे चरण में ब्रह्मपुत्र नदी, गंगा की सहायक नदियां, सुंदरबन क्षेत्र और ओडिशा के कुछ हिस्से शामिल होंगे। यह व्यापक कवरेज भारत में डॉल्फिन आवासों का समग्र आकलन सुनिश्चित करता है।

सर्वेक्षण में शामिल प्रजातियां

इस सर्वेक्षण में गंगा डॉल्फिन के अलावा सिंधु नदी डॉल्फिन और इरावदी डॉल्फ़िन जैसी अन्य प्रजातियों की स्थिति का भी आकलन किया जाएगा। जनसंख्या गणना के साथ-साथ आवास की स्थिति, प्रदूषण और मछली पकड़ने जैसे खतरों तथा संरक्षण प्राथमिकता वाली अन्य प्रजातियों का भी अध्ययन किया जाएगा। यह समग्र दृष्टिकोण पूरे पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ी चुनौतियों को समझने में सहायक होगा।

डॉल्फिन सर्वेक्षण का महत्व

डॉल्फिन को संकेतक प्रजाति माना जाता है, यानी उनकी मौजूदगी नदियों और तटीय पारिस्थितिक तंत्र के स्वास्थ्य को दर्शाती है। डॉल्फिन की संख्या में गिरावट अक्सर बढ़ते प्रदूषण, जल प्रवाह में कमी या आवास क्षरण का संकेत देती है। अद्यतन जनसंख्या आंकड़े संरक्षण प्रयासों की सफलता को मापने और गंभीर समस्या वाले क्षेत्रों की पहचान करने में मदद करते हैं। यह सर्वेक्षण विज्ञान-आधारित योजना को मजबूत करेगा और नदियों व जैव विविधता की रक्षा के लिए लक्षित कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।

भारत में नदी डॉल्फ़िन की प्रजातियाँ

प्रजाति आवास संरक्षण स्थिति (IUCN व वन्यजीव संरक्षण अधिनियम अनुसूची) प्रमुख विशेषताएँ एवं खतरे
गंगा नदी डॉल्फ़िन (Platanista gangetica) गंगा–ब्रह्मपुत्र–मेघना एवं कर्णफुली नदी प्रणालियाँ (भारत, बांग्लादेश, नेपाल) संकटग्रस्त (Endangered)
अनुसूची–I
“सुसु” के नाम से प्रसिद्ध
2009 में राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित
खतरे: प्रदूषण, आवास का विखंडन, मछली पकड़ने में फँसना (Bycatch)
सिंधु नदी डॉल्फ़िन (Platanista minor) सिंधु नदी (पाकिस्तान), ब्यास नदी (भारत) संकटग्रस्त (Endangered)
अनुसूची–I
विश्व की सबसे दुर्लभ डॉल्फ़िन में से एक
खतरे: जल प्रवाह में कमी, बाँध, आवास क्षरण
इरावदी डॉल्फ़िन (Orcaella brevirostris) चिलिका झील एवं दक्षिण व दक्षिण–पूर्व एशिया की नदियाँ संकटग्रस्त (Endangered)
अनुसूची–I
“स्पाय–हॉपिंग” व्यवहार के लिए प्रसिद्ध
खतरे: मछली पकड़ने के जाल, आवास विनाश

महत्वपूर्ण संरक्षण क्षेत्र: गंगा–ब्रह्मपुत्र बेसिन, ब्यास नदी खंड, चिलिका झील और सुंदरबन जैसे क्षेत्र भारत में नदी डॉल्फ़िन संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

महत्वपूर्ण संरक्षण क्षेत्र

संरक्षित क्षेत्र राज्य संरक्षित प्रजाति
विक्रमशिला गंगा डॉल्फ़िन अभयारण्य बिहार गंगा नदी डॉल्फ़िन
(भारत का एकमात्र डॉल्फ़िन अभयारण्य)
ब्यास संरक्षण रिज़र्व पंजाब सिंधु नदी डॉल्फ़िन

प्रथम डॉल्फ़िन सर्वेक्षण के प्रमुख निष्कर्ष 

  • कुल दर्ज डॉल्फ़िन: 6,327
  • गंगा नदी डॉल्फ़िन: 6,324
  • उत्तर प्रदेश: 2,397
  • बिहार: 2,220
  • ब्रह्मपुत्र बेसिन: 635 डॉल्फ़िन (जनसंख्या स्थिर)

सिंधु नदी डॉल्फ़िन:

  • ब्यास नदी (पंजाब): केवल 3 डॉल्फ़िन

प्रमुख डॉल्फ़िन हॉटस्पॉट 

  • भिंड–पचनादा खंड — चंबल नदी
  • चौसा–मणिहारी खंड — गंगा नदी
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