475 वर्ष पुराना वसई कैथेड्रल को यूनेस्को पुरस्कार: सामुदायिक संरक्षण को मिला वैश्विक सम्मान

महाराष्ट्र के वसई (पापडी गांव) में स्थित 475 वर्ष पुराना अवर लेडी ऑफ़ ग्रेस कैथेड्रल को 2025 के सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के लिए यूनेस्को एशिया-प्रशांत पुरस्कार (UNESCO Asia-Pacific Awards for Cultural Heritage Conservation) में प्रतिष्ठित Award of Merit प्रदान किया गया है। यह घोषणा बैंकॉक में की गई, जिससे इस ऐतिहासिक चर्च के सामुदायिक वित्तपोषित संरक्षण कार्य को वैश्विक पहचान मिली। 16वीं शताब्दी में बिना सीमेंट और ईंटों के निर्मित इस पत्थर के कैथेड्रल का संरक्षण पुर्तगाली युग की स्थापत्य विरासत और आध्यात्मिक महत्व को सुरक्षित रखते हुए किया गया।

पुर्तगाली स्थापत्य की जीवंत विरासत

अवर लेडी ऑफ़ ग्रेस कैथेड्रल महाराष्ट्र में कैथोलिक धर्म की स्थापना का ऐतिहासिक प्रतीक माना जाता है। 16वीं शताब्दी में निर्मित यह संरचना भारत में पुर्तगाली औपनिवेशिक वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है।

प्रमुख स्थापत्य विशेषताएँ:

  • पत्थर और मिट्टी से निर्मित संरचना (बिना सीमेंट/ईंट)
  • हाथ से नक्काशीदार धार्मिक सज्जा तत्व
  • पारंपरिक मैंगलोर टाइलों की छत
  • ऐतिहासिक घंटाघर (बेल टॉवर) और स्तंभयुक्त गलियारे

समय के साथ प्राकृतिक क्षरण और पूर्व में किए गए गलत मरम्मत कार्यों से संरचना कमजोर हो गई थी। हालिया संरक्षण परियोजना ने इसकी प्रामाणिकता बनाए रखते हुए इसे पुनर्जीवित किया।

यूनेस्को एशिया-प्रशांत पुरस्कार 2025: क्यों मिला सम्मान?

2025 के सिल्वर जुबली (25वें वर्ष) संस्करण में 16 देशों से 90 प्रविष्टियाँ प्राप्त हुईं। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच वसई कैथेड्रल को Award of Merit मिला।

यूनेस्को के अनुसार परियोजना की विशेषताएँ थीं—

  • 16वीं सदी की पुर्तगाली संरचना का पुनरुद्धार
  • पारंपरिक शिल्प तकनीकों का उपयोग
  • इसे पुनः जीवंत पूजा स्थल के रूप में स्थापित करना
  • सतत सामुदायिक भागीदारी
  • सीमित बजट में टिकाऊ संरक्षण

₹4.5 करोड़ की सामुदायिक निधि से हुआ संरक्षण

यह संरक्षण परियोजना लगभग ₹4.5 करोड़ की लागत से पूरी हुई, जिसका अधिकांश वित्तपोषण स्थानीय पैरिश समुदाय ने किया।

संरक्षण कार्य वास्तु संरक्षण विशेषज्ञ ऐन्सले लुईस के नेतृत्व में 2023–2024 के बीच सम्पन्न हुआ। उस समय के पैरिश पुजारी फादर जॉन फर्गोस और आर्चबिशप फेलिक्स मचाडो का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा।

प्रमुख संरक्षण कार्य:

  • मैंगलोर टाइलों की रिसावयुक्त छत की मरम्मत
  • घंटाघर को सुदृढ़ करना
  • अग्रभाग (फैसाड) और गलियारों का पुनर्स्थापन
  • हाथ से नक्काशीदार आंतरिक सज्जा का पुनर्जीवन
  • पूर्व में किए गए गलत मरम्मत कार्यों को हटाना

वैश्विक विजेता और मूल्यांकन मानदंड

जहाँ वसई कैथेड्रल को Award of Merit मिला, वहीं सर्वोच्च Award of Distinction जापान और चीन की परियोजनाओं को प्रदान किया गया—

  • इवामी गिंज़ान लाइब्रेरी (जापान)
  • सिहांग वेयरहाउस (चीन)

निर्णायक मंडल ने परियोजनाओं का मूल्यांकन निम्न आधारों पर किया—

  • स्थान की समझ
  • तकनीकी उत्कृष्टता
  • सतत विकास
  • दीर्घकालिक सामुदायिक प्रभाव

यूनेस्को एशिया-प्रशांत विरासत संरक्षण पुरस्कार: पृष्ठभूमि

सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के लिए यूनेस्को एशिया-प्रशांत पुरस्कार की स्थापना एशिया-प्रशांत क्षेत्र में निर्मित विरासत के संरक्षण के उत्कृष्ट प्रयासों को सम्मानित करने के लिए की गई थी।

इन पुरस्कारों का उद्देश्य है—

  • सतत संरक्षण प्रथाओं को प्रोत्साहन
  • पारंपरिक शिल्प कौशल का संवर्धन
  • सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा
  • सांस्कृतिक पहचान को सशक्त बनाना

वसई कैथेड्रल को मिला यह सम्मान महाराष्ट्र को वैश्विक विरासत पर्यटन मानचित्र पर और अधिक मजबूती से स्थापित करता है।

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vikash

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