Monday, 15 August 2022

जानें क्या है विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस?

जानें क्या है विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस?



प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के विभाजन के दर्द को याद करते हुए 14 अगस्त को 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' (Partition Horrors Remembrance Day) मनाया। इस दौरान बीजेपी ने देश भर में मौन मार्च का आयोजन किया। दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (JP Nadda) के साथ केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, पीयूष गोयल और अन्य बीजेपी नेताओं ने 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के अवसर पर मौन मार्च में भाग लिया।


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पीएम मोदी ने कहा, “अब हर साल स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका दिवस के तौर पर याद किया जाएगा। देश का विभाजन कैसे हमारे लिए विभीषिका बनी, इसे याद करने के लिए 14 अगस्त को यह खास दिवस मनाया जाएगा।” एक साल पहले यानी 14 अगस्त 2021 का दिन और आज यानी 14 अगस्त 2021, देश बंटवारे के दर्द को याद करते हुए यह दिवस मना रहा है।


विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस


विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस को लेकर 14 अगस्त 2021 को केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से भारत सरकार का राजपत्र यानी कि गजट जारी किया गया था, जिसमें कहा गया है कि भारत सरकार, भारत की वर्तमान और भावी पीढ़ियों को विभाजन के दौरान लोगों द्वारा सही गई यातना और वेदना का स्मरण दिलाने के लिए 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवसके रूप में घोषित करती है।


प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा था?


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले वर्ष इस दिवस की शुरुआत करते हुए कहा था कि देश के बंटवारे के दर्द को कभी भुलाया नहीं जा सकता. नफरत और हिंसा की वजह से हमारे लाखों बहनों-भाइयों को विस्थापित होना पड़ा और अपनी जान गंवानी पड़ी। उन्होंने कहा था कि विभाजन के कारण हुई हिंसा और नासमझी में की गई नफरत से लाखों लोग विस्थापित हो गए और कई ने जान गंवा दी. उन लोगों के बलिदान और संघर्ष की याद में 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के तौर पर याद किए जाने का निर्णय लिया गया।


पृष्ठभूमि


भारत अपने दूसरे विभीषिका स्मरण दिवस को याद कर रहा है, यह देश में एक राष्ट्रीय स्मारक दिवस है जो भारत के विभाजन के दौरान पीड़ितों और लोगों के कष्टों को याद करता है। यह दिन कई भारतीयों, विस्थापित हुए कई परिवारों और विभाजन में अपनी जान गंवाने वाले कई लोगों की पीड़ा को भी याद करता है। विशेष रूप से, विभाजन में 10 से 20 लाख लोग विस्थापित हुए थे और लाखों लोग मारे गए थे।


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