मद्रास का भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, हाइपरलूप के बारे में जागरूकता बढ़ाने और प्रोत्साहित करने के लिए भारत की पहली वैश्विक हाइपरलूप पॉड स्पर्धा का आयोजन ‘भारतीय हाइपरलूप पॉड स्पर्धा‘ के रूप में करेगा। यह प्रतियोगिता विश्व स्तर पर जुलाई में शुरू होकर और जुलाई 2020 के आखिर तक आईआईटी मद्रास परिसर में आयोजित की जाएगी। आईआईटी मद्रास की आविष्कार टीम 2019 हाइपरलूप पॉड प्रतियोगिता के फाइनल के लिए क्वालीफाई करने वाली एशिया की एकमात्र टीम थी, जिसने भारत का पहला स्व-चालित हाइपरलूप विकसित किया है।
इस स्पर्धा का उद्देश्य भारत और विदेश की छात्र टीमों को हाइपरलूप पॉड विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना और इस क्षेत्र से संबंधित प्रौद्योगिकियों के सबसे तेज, सबसे नवीन और कुशल डिजाइन और प्रोटोटाइप के निर्माण के लिए प्रतिस्पर्धा करना है। यह प्रतियोगिता दुनिया भर के सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए हाइपरलूप पॉड्स के लिए अपने विचारों को तैयार करने, डिज़ाइन करने और लागू करने के लिए खुली होगी,
क्या है हाइपरलूप पॉड्स?
हाइपरलूप परिवहन की 5 वीं पीढ़ी है, जिसमे अधिकतम गति वाली ट्रेने वैक्यूम ट्यूब में चलती है। इसमें हवा का घर्षण नहीं होने से पॉड की गति 1000 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच जाती है। यह ट्रांसपोर्ट के सामान्य साधन कार व ट्रेन से सस्ता और प्रदूषण रहित तकनीक है।
SpaceX के संस्थापक और टेस्ला के सीईओ एलोन मस्क ने साल 2013 में व्हाइटपेपर के माध्यम से हाइपरलूप पर विचार ‘Hyperloop Alpha’ प्रस्तावित किया था। एलोन मस्क पिछले कुछ वर्षों से कैलिफोर्निया के हॉथोर्न में स्पेसएक्स, टेस्ला और द बोरिंग कंपनी के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय हाइपरलूप पॉड प्रतियोगिता का आयोजन कर रहे है।



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