यमन के प्रधानमंत्री ने इस्तीफा दिया, विदेश मंत्री को नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया

यमन में जनवरी 2026 में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला है। देश की सऊदी अरब समर्थित नेतृत्व व्यवस्था ने प्रधानमंत्री के इस्तीफे को स्वीकार करते हुए तुरंत नए प्रधानमंत्री की नियुक्ति की है। यह नेतृत्व परिवर्तन ऐसे समय में हुआ है जब यमन लंबे गृहयुद्ध, क्षेत्रीय तनाव और खाड़ी देशों की भू-राजनीति से जुड़ी अस्थिरता का सामना कर रहा है।

क्यों चर्चा में?

यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल (Presidential Leadership Council – PLC) ने प्रधानमंत्री सलेम बिन ब्रेक का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और देश के विदेश मंत्री शाया मोहसेन ज़िंदानी को नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया है।

यमन के राजनीतिक नेतृत्व में बदलाव

  • सरकारी मीडिया के अनुसार, सऊदी समर्थित नेतृत्व परिषद ने इस सप्ताह की शुरुआत में दिए गए सलेम बिन ब्रेक के इस्तीफे को औपचारिक रूप से मंजूरी दी।
  • इसके बाद विदेश मंत्री रहे शाया मोहसेन ज़िंदानी को नया मंत्रिमंडल गठित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
  • यह कदम राजनीतिक और सुरक्षा चुनौतियों के बीच शासन में निरंतरता बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल की भूमिका

  • वर्तमान में यमन का शासन प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल द्वारा किया जा रहा है, जिसका गठन सऊदी अरब के समर्थन से हूती विरोधी राजनीतिक शक्तियों को एकजुट करने के लिए किया गया था।
  • इस परिषद के पास कार्यकारी अधिकार हैं, जिनमें प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल की नियुक्ति शामिल है।
  • इस्तीफे की स्वीकृति और त्वरित नई नियुक्ति, चल रहे आंतरिक विभाजनों और बाहरी दबावों के बावजूद राजनीतिक स्थिरता का संदेश देने का प्रयास है।

क्षेत्रीय तनाव: सऊदी अरब और यूएई

  • हाल के महीनों में यमन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच बढ़ते तनाव का केंद्र बन गया है।
  • दिसंबर में सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) — जो यूएई समर्थित अलगाववादी समूह है — ने दक्षिणी और पूर्वी यमन के कई इलाकों पर नियंत्रण कर लिया।
  • सऊदी सीमा के पास STC की बढ़त ने रियाद की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है।

पृष्ठभूमि: यमन का गृहयुद्ध

  • सऊदी अरब और यूएई पहले ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ एक साझा गठबंधन में शामिल थे, जो यमन के उत्तरी हिस्सों के बड़े क्षेत्र पर नियंत्रण रखते हैं।
  • 2015 में शुरू हुए इस संघर्ष ने दुनिया के सबसे गंभीर मानवीय संकटों में से एक को जन्म दिया है, जिसमें खाद्य असुरक्षा, बड़े पैमाने पर विस्थापन और बुनियादी सेवाओं का पतन शामिल है।
  • भले ही बड़े पैमाने की लड़ाई की तीव्रता कुछ कम हुई हो, लेकिन राजनीतिक विखंडन और क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता अब भी देश को अस्थिर बनाए हुए हैं।
[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

G7 Summit 2026: फ्रांस में दुनिया के 7 सबसे ताकतवर देशों की बैठक, जानिए 13 बड़े फैसले और भारत के लिए क्यों है खास

दुनिया की राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े कई बड़े फैसलों का मंच माने जाने…

2 weeks ago

दुनिया का सबसे जहरीला बिच्छू कौन सा है?, जानें कहाँ पाए जाते हैं सबसे ज्यादा बिच्छू

धरती पर मौजूद सबसे डरावने जीवों में बिच्छू (Scorpion) का नाम जरूर लिया जाता है।…

2 months ago

भारत में कहाँ है एशियाई शेरों का असली घर? दुनिया की इकलौती जगह जहाँ जंगल में आज़ादी से घूमते हैं Asiatic Lions

शेरों का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में अफ्रीका के विशाल जंगलों की तस्वीर…

2 months ago

भारत का कौन-सा राज्य कहलाता है “Spice Garden of India”? जिसके मसालें दुनिया-भर में है मशहूर

भारत अपने मसालों के लिए सदियों से पूरी दुनिया में प्रसिद्ध रहा है। भारतीय मसालों…

2 months ago

भारत का सबसे अमीर गांव कौन-सा है? यहां हर घर में करोड़ों की संपत्ति, बैंक में जमा हैं हजारों करोड़

भारत गांवों का देश कहा जाता है। यहां लाखों गांव हैं, जिनमें से कई आज…

2 months ago

क्या आप जानते हैं भारत का Tea Capital कौन-सा राज्य है? यहां उगती है सबसे ज्यादा चाय

रेलवे स्टेशन हो, ऑफिस हो या गांव की चौपाल — चाय हर जगह लोगों की…

2 months ago