जलवायु परिवर्तन के कारण नेपाल में याला ग्लेशियर 2040 तक विलुप्त होने के कगार पर

याला ग्लेशियर, नेपाल के लांगटांग नेशनल पार्क में स्थित, पिछले कुछ दशकों में अपने महत्वपूर्ण संकोचन के कारण हिमनद विज्ञान के अध्ययन का केंद्र रहा है। हालिया विश्लेषणों के अनुसार, यह ग्लेशियर 2040 के दशक तक गायब हो सकता है, जो हिमालय के हिमनदों पर जलवायु परिवर्तन के गहरे प्रभाव को दर्शाता है।

ऐतिहासिक संकोचन और वर्तमान स्थिति

संकोचन मापन: 1974 से 2021 के बीच, याला ग्लेशियर 680 मीटर पीछे हट गया और इसके क्षेत्रफल में 36% की कमी आई। इसकी ऊंचाई 2011 में 5,170 मीटर से घटकर 5,750 मीटर रह गई।
वैज्ञानिक महत्व: याला ग्लेशियर हिमालय का एकमात्र ग्लेशियर है जिसे “ग्लोबल ग्लेशियर कैजुअल्टी लिस्ट” में शामिल किया गया है। यह सूची 2024 में शुरू हुई थी और इसमें उन ग्लेशियरों को शामिल किया गया है जो गंभीर रूप से संकटग्रस्त हैं या पहले ही गायब हो चुके हैं।

ग्लेशियर के नुकसान के प्रभाव

जल संसाधन: ग्लेशियर लाखों लोगों के लिए ताजा पानी का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं। हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र, जो ग्लेशियरों पर निर्भर है, वैश्विक औसत से दोगुनी तेजी से गर्म हो रहा है, जिससे लगभग 240 मिलियन लोगों की जल सुरक्षा खतरे में है।
ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड्स (GLOFs): ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से अस्थिर ग्लेशियल झीलों का निर्माण होता है। इनका संभावित उफान डाउनस्ट्रीम समुदायों के लिए विनाशकारी बाढ़ का खतरा पैदा कर सकता है।

वैश्विक और क्षेत्रीय प्रतिक्रियाएं

अंतरराष्ट्रीय पहल:

  • संयुक्त राष्ट्र ने 2025 को “ग्लेशियर संरक्षण का अंतरराष्ट्रीय वर्ष” घोषित किया है।
  • मार्च 21 को हर साल “विश्व ग्लेशियर दिवस” के रूप में मनाया जाएगा, ताकि इनका महत्व उजागर हो और इनसे जुड़े जलवायु, मौसम और जल संबंधी सेवाएं प्रदान की जा सकें।

क्षेत्रीय कार्य:

  • भारत ने “हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय मिशन” शुरू किया है।
  • भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS) स्थापित किया गया है, जो ग्लेशियर संबंधी घटनाओं की निगरानी करता है और GLOF अलर्ट जारी करता है।
क्यों चर्चा में? मुख्य बिंदु
नेपाल का याला ग्लेशियर 2040 के दशक तक गायब होने की आशंका। 1974-2021 के बीच 680 मीटर (36%) संकोचन।
ग्लेशियर की ऊंचाई 5,170 मीटर से घटकर 2011 में 5,750 मीटर हुई।
“ग्लोबल ग्लेशियर कैजुअल्टी लिस्ट” का हिस्सा।
हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में 240 मिलियन लोगों की जल सुरक्षा को खतरा।
ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड्स (GLOFs) का जोखिम।
2025 को “ग्लेशियर संरक्षण का अंतरराष्ट्रीय वर्ष” घोषित किया गया।
भारत ने “हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय मिशन” शुरू किया।
INCOIS भारत में ग्लेशियर संबंधी घटनाओं की निगरानी करता है।
[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

Atal Pension Yojana में रिकॉर्ड नामांकन, 9 करोड़ का आंकड़ा पार

अटल पेंशन योजना (APY) ने 21 अप्रैल, 2026 तक इस योजना में कुल 9 करोड़…

41 mins ago

भारत का कपड़ा निर्यात 2025-26 में 2.1 फीसदी बढ़कर 3.16 लाख करोड़ रुपये

भारत के टेक्सटाइल सेक्टर ने अच्छा प्रदर्शन किया है, क्योंकि वित्त वर्ष 2025-26 में एक्सपोर्ट…

56 mins ago

अंग्रेज़ी भाषा दिवस 2026: वैश्विक संचार में अंग्रेज़ी का महत्व

अंग्रेजी भाषा दिवस 2026, 23 अप्रैल को दुनिया भर में मनाया जाएगा, ताकि वैश्विक संचार…

1 hour ago

ताशकंद जून में विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2027 की मेज़बानी करेगा

विश्व पैरा एथलेटिक्स (World Para Athletics) ने घोषणा की है कि ताशकंद 2027 विश्व पैरा…

3 hours ago

विश्व पुस्तक दिवस 2026: महत्व, इतिहास और UNESCO की पहल

विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस 2026 हर साल 23 अप्रैल को दुनिया भर में मनाया…

3 hours ago

मूडीज़ ने वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की GDP वृद्धि का अनुमान घटाकर 6% किया

ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज़ ने भारत के आर्थिक आउटलुक में बदलाव किया है और FY27…

19 hours ago