केंद्र की स्थापना से भारतीय वैज्ञानिक समुदाय को एक बड़ा बढ़ावा मिलेगा और ‘वैकल्पिक ऊर्जा और पर्यावरणीय संरक्षण‘ में अनुसंधान के लिए प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा जिससे कि थर्मोकेमिकल ऊर्जा रूपांतरण के साधन के रूप में दहन के प्रभावी उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया जा सके.
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