रोल्स-रॉयस और ईज़ी जेट कंपनी ने पहली बार ऐसा एयरक्राफ्ट इंजन बनाया है, जो हाइड्रोजन फ्यूल पर चलेगा। यानी यह दुनिया का पहला हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाला एयरक्राफ्ट इंजन है। इसका सफल परीक्षण स्कॉटलैंड के ओर्कनी आइलैंड के बोसकोम्ब डाउन की सरकारी टेस्ट फैसिलिटी में किया गया।
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रोल्स-रॉयस ने इस काम के लिए AE 2100-A टर्बोप्रोप इंजन का इस्तेमाल किया। जिसे उन्होंने हाइड्रोजन फ्यूल तकनीक के अनुसार बदला था। आमतौर पर यह इंजन नागरिक और मिलिट्री जेट्स में इस्तेमाल किया जाता है। हाइड्रोजन फ्यूल की मदद से एविएशन कंपनियां कार्बन उत्सर्जन कम करेंगी।
संयुक्त राष्ट्र ने साल 2050 तक कार्बन उत्सर्जन को जीरो करने का लक्ष्य रखा है। उस मुहिम में इन दोनों कंपनियों ने ‘द रेस टू जीरो’ के तहत यह इंजन बनाया है। ताकि पेट्रोलियम आधारित फ्यूल के बजाय ग्रीन फ्यूल यानी हाइड्रोजन को ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किया जाए।
भविष्य में एयरबस कंपनी भी अपने सुपरजंबो A380 के लिए हाइड्रोजन पावर्ड जेट इंजन की टेस्टिंग करने वाला है। कंपनी का प्लान है कि वो 2035 तक अपने विमानों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को जीरों कर देगा। दूसरी तरफ टूलाउस स्थित एक समूह जो सीएफएम इंटरनेशनल के साथ काम कर रहा है। उसने ऐसे ही हाइड्रोजन फ्यूल पावर्ड इंजन को बनाने के लिए फ्रांस के साफ्रान और अमेरिका के जनरल इलेक्ट्रिक से समझौता किया है।
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