हर साल 19 नवंबर को दुनिया भर में ‘विश्व शौचालय दिवस’ (World Toilet Day 2025) मनाया जाता है। यह दिन याद दिलाता है कि आधुनिकता, विकास, डिजिटल इंडिया की दौड़ में भी दुनिया के करोड़ों लोग आज सुरक्षित शौचालय से वंचित हैं। यह दिन मानव गरिमा, सार्वजनिक स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और विकास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अभियान है। इसलिए यह दिन बेहद खास है।
विश्व शौचालय दिवस 2025 बदलती दुनिया में स्वच्छता पर केंद्रित (Sanitation In A Changing World) है, जिसका टैगलाइन है, “हमें हमेशा शौचालय की आवश्यकता होगी।”
वर्ल्ड टॉयलेट डे मनाने का मुख्य उद्देश्य दुनिया की उस बड़ी आबादी के संघर्षों को उजागर करना है जो आज भी एक सुरक्षित और स्वच्छ शौचालय की बुनियादी सुविधा से दूर हैं। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, आज भी दुनिया में लगभग 3.5 अरब लोगों के पास शौचालय नहीं है, जबकि लगभग 41.9 करोड़ लोग खुले में शौच को मजबूर हैं।
खुले में शौच की यह प्रथा केवल एक सामाजिक या सांस्कृतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का कारण बनती है। खुले में मल-मूत्र करने से वह मिट्टी, नदियों और ग्राउंड वॉटर को दूषित कर देता है। यह दूषित पानी हैजा, टाइफाइड, हेपेटाइटिस और डायरिया जैसी घातक बीमारियों को जन्म देता है। बता दें, दुनिया भर में हर दिन लगभग 1000 बच्चे दूषित पानी और खराब स्वच्छता के कारण होने वाली डायरिया जैसी बीमारियों से मौत के मुंह में चले जाते हैं।
साल 2001 में सिंगापुर के स्वच्छता सुधारक जैक सिम (Jack Sim) ने विश्व शौचालय संगठन (WTO) की स्थापना की। उन्होंने दुनिया भर में टॉयलेट और सैनिटेशन पर बातचीत को शर्म का नहीं, समाधान का हिस्सा बनाया। बाद में 2013 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने 19 नवंबर को आधिकारिक तौर पर विश्व शौचालय दिवस (World Toilet Day) घोषित किया।
इसे नवंबर महीने की 19 तारीख को मनाने का फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि विश्व शौचालय संगठन की वर्षगांठ 19 नवंबर को ही मनाई जाती है। उस साल WTO की 12वीं वर्षगांठ थी। ये दिन इसलिए चुना गया ताकि दुनिया याद रखें कि स्वच्छता की लड़ाई एक लंबे आंदोलन का परिणाम है।
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