विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस 2025: जानें इतिहास और महत्व

हर वर्ष, वैश्विक स्तर पर 7,20,000 से अधिक लोग आत्महत्या के कारण अपनी जान गंवाते हैं, जिससे भारी मानसिक, सामाजिक और आर्थिक प्रभाव उत्पन्न होते हैं। इस लगातार बढ़ती संकट स्थिति के जवाब में, विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस (WSPD) हर साल 10 सितंबर को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य यह है कि आत्महत्याएं रोकी जा सकती हैं। 2024–2026 की त्रिवार्षिक थीम, “आत्महत्या पर दृष्टिकोण बदलना” (Changing the Narrative on Suicide), समाज में मौन और कलंक की बजाय खुलापन, सहानुभूति और सक्रिय समर्थन को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक रूप से सोच बदलने का संदेश देती है।

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस को समझना

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस (WSPD) की शुरुआत 2003 में इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सुसाइड प्रिवेंशन (IASP) ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से की थी। इस दिवस का उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना, कलंक कम करना और समुदाय, संस्थागत और सरकारी स्तर पर सक्रिय कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

इस वर्ष की थीम, “दृष्टिकोण बदलना” (Changing the Narrative), आत्महत्या से जुड़े हानिकारक मिथकों को चुनौती देती है, सहानुभूतिपूर्ण संवाद को बढ़ावा देती है और सार्वजनिक नीति में मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने पर जोर देती है। यह साक्ष्य-आधारित रोकथाम, समय पर देखभाल, और ऐसे वातावरण के निर्माण का महत्व रेखांकित करती है, जहां लोग मदद मांगने में सुरक्षित महसूस करें।

वैश्विक स्तर पर, आत्महत्या 15–29 वर्ष की आयु के युवाओं में प्रमुख मृत्यु कारण बनी हुई है, और अनुमान है कि हर आत्महत्या मृत्यु पर लगभग 20 आत्महत्या प्रयास होते हैं। ये आंकड़े सशक्त रोकथाम रणनीतियों और सार्वजनिक सहभागिता की आवश्यकता को दर्शाते हैं।

भारत में आत्महत्या का बोझ: दायरा और रुझान

भारत वैश्विक आत्महत्या बोझ में महत्वपूर्ण हिस्सा रखता है, जिसमें शामिल हैं:

  • लगभग एक-तिहाई महिला आत्महत्याएं

  • लगभग एक-चौथाई पुरुष आत्महत्याएं

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार:

  • आत्महत्या दर 2017 में 9.9 प्रति लाख से बढ़कर 2022 में 12.4 प्रति लाख हो गई।

  • भौगोलिक भिन्नता स्पष्ट है, जहां सिक्किम (43.1 प्रति लाख) सबसे अधिक दर दर्ज करता है, इसके बाद विजयवाड़ा (42.6) और कोल्लम (42.5)

  • इसके विपरीत, बिहार में सबसे कम दर 0.6 प्रति लाख है।

ये पैटर्न गहरे सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक तनावों को दर्शाते हैं, जो राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर हस्तक्षेप की आवश्यकता को उजागर करते हैं।

सरकारी प्रतिक्रिया: भारत की आत्महत्या रोकथाम रणनीति

भारत ने 2022 में अपनी पहली राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम रणनीति (NSPS) शुरू की, जिसका उद्देश्य है:

  • 2030 तक आत्महत्या मृत्यु दर में 10% की कमी

  • बहु-क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना

  • प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और सामाजिक कल्याण में आत्महत्या रोकथाम को एकीकृत करना

राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम रणनीति (NSPS) के प्रमुख पहल

1. टेली-मैनस (Tele-MANAS)

  • एक राष्ट्रीय 24×7 टेली-मानसिक स्वास्थ्य सेवा

  • 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 53 सेल संचालित

  • अब तक 10 लाख से अधिक कॉल का निपटान किया गया

2. जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (DMHP)

  • अब 767 जिलों में संचालित

  • सामुदायिक स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य देखभाल और संकट हस्तक्षेप उपलब्ध कराता है

3. आयुष्मान आरोग्य मंदिर (Ayushman Arogya Mandirs)

  • देशभर में 1.78 लाख से अधिक स्वास्थ्य केंद्र

  • अब मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को भी शामिल कर रहे हैं, जिससे जमीनी स्तर पर देखभाल एकीकृत हो सके

4. संस्थागत सुदृढ़ीकरण (Institutional Strengthening)

  • AIIMS, उत्कृष्टता केंद्रों (Centers of Excellence) और मेडिकल कॉलेजों में क्षमता निर्माण

  • मानसिक स्वास्थ्य समर्थन के लिए प्रशिक्षित कार्यबल तैयार किया जा रहा है

युवाओं पर विशेष ध्यान: स्कूल और सामुदायिक स्तर पर सहयोग

किशोर और युवा एक संवेदनशील वर्ग हैं। इसे देखते हुए भारत ने कई युवा-केंद्रित पहलें शुरू की हैं:

  • राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK) और स्कूल स्वास्थ्य एवं कल्याण कार्यक्रम

    • स्कूल-आधारित काउंसलिंग सेवाएं प्रदान करते हैं।

  • मनोदर्पण पहल (Manodarpan Initiative) – COVID-19 महामारी के दौरान शुरू की गई

    • छात्रों, शिक्षकों और परिवारों को मनो-सामाजिक सहयोग प्रदान करती है।

    • सेवाओं में शामिल:

      • 24×7 टोल-फ्री हेल्पलाइन: 8448440632

      • इंटरएक्टिव वेब पोर्टल मानसिक स्वास्थ्य संसाधनों के साथ

      • देशव्यापी स्कूल काउंसलर निर्देशिका

तथ्य याद रखने योग्य

  • दिनांक: 10 सितम्बर (2003 से प्रतिवर्ष)

  • थीम (2024–2026): Changing the Narrative on Suicide (आत्महत्या पर दृष्टिकोण बदलना)

  • वैश्विक आँकड़े: 7.2 लाख+ मौतें प्रतिवर्ष; हर आत्महत्या पर लगभग 20 प्रयास

  • भारत की आत्महत्या दर (2022): 12.4 प्रति लाख

  • सबसे अधिक राज्य: सिक्किम (43.1 प्रति लाख)

  • सबसे कम राज्य: बिहार (0.6 प्रति लाख)

  • मुख्य कार्यक्रम: Tele-MANAS, DMHP, NSPS, Manodarpan, RKSK

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vikash

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