विश्व सर्प दिवस हर साल 16 जुलाई को मनाया जाता है। इस दिन का खास उद्देश्य लोगों में सांपों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उनके महत्व को समझाना है। हालांकि बहुत से लोग ऐसे हैं जो सांपों से डरते हैं, मगर यह जानना जरूरी है कि वे भी हमारे इकोसिस्टम का अहम हिस्सा हैं। साथ ही आपको बता दें कि सांपों के ज़हर का इस्तेमाल कई दवाइयों में भी किया जाता है। भारत में साँपों को लेकर कई मिथक हैं। लोग उन्हें खतरनाक मानते हैं और अक्सर डर के मारे मार देते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि साँप प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विश्व सर्प दिवस की शुरुआत को लेकर जानकारों में कुछ मतभेद हैं, लेकिन माना जाता है कि इसकी नींव 1967 में अमेरिका के टेक्सास में पड़ी। वहाँ एक सर्प फार्म शुरू हुआ, जिसने साँपों के प्रति जागरूकता फैलाने का काम किया। 1970 तक यह फार्म इतना लोकप्रिय हो गया कि 16 जुलाई को विश्व सर्प दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत हुई। धीरे-धीरे गैर-सरकारी संगठनों और प्रकृति प्रेमियों ने इस दिन को विश्व स्तर पर बढ़ावा दिया।
भारत में सांपों की कई प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें विषैले और संकटग्रस्त प्रजातियाँ भी शामिल हैं। शहरी विस्तार और प्राकृतिक आवासों के क्षरण के कारण मानव‑सांप मुठभेड़ों में वृद्धि हुई है। इस प्रकार की पहल का उद्देश्य विशेषकर युवाओं के बीच ज्ञान के माध्यम से डर को दूर करना है और सांपों के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना है।
सांपों की पारिस्थितिकी में भूमिका को लेकर वैज्ञानिक जागरूकता फैलाना
युवाओं द्वारा संचालित संरक्षण प्रयासों को प्रोत्साहित करना
वन्यजीव संवाद के माध्यम के रूप में डाक टिकटों और पोस्टकार्ड विषयों का उपयोग करना
सांपों को लेकर जनता में फैली भ्रांतियों और भय को दूर करना
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