विकलांग व्यक्तियों के अधिकारिता विभाग (DEPwD) ने जागरूकता बढ़ाने और मानसिक बीमारी के बारे में कलंक को कम करने के लिए सिज़ोफ्रेनिया का स्मरण किया। यह उन चुनौतियों पर से परदा उठाता है जिनसे दुनिया भर के सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित हजारों लोगों को रोज़ाना सामना करना पड़ता है। जानकारी और जागरूकता की कमी के कारण लोग मानसिक समस्याओं और बीमारियों को गंभीरता से नहीं लेते हैं। मानसिक बीमारियों को नजरंदाज करना जानलेवा हो सकता है। सिजोफ्रेनिया भी ऐसी ही एक गंभीर मानसिक बीमारी है। यह बीमारी ज्यादातर युवाओं को चपेट में लेती है। पूरी दुनिया में सिजोफ्रेनिया को लेकर जागरूकता फैलाने और इस बीमारी से जूझ रहे लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 24 मई को विश्व सिजोफ्रेनिया जागरूकता दिवस मनाया जाता है।
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सिजोफ्रेनिया एक गंभीर मानसिक बीमारी है, जो ज्यादातर 16 साल से लेकर 45 साल की उम्र के लोगों में देखने को मिलती है। इस गंभीर मानसिक बीमारी के कारण युवाओं में आत्महत्या के मामले भी बढ़ते हैं। इस बीमारी में व्यक्ति काल्पनिक और वास्तविक वस्तुओं को समझने में भूल कर बैठता है। परिणामस्वरूप रोगी का वास्तविकता से संबंध टूट जाता है, जिसके कारण उसके सोचने समझने की क्षमता पर असर पड़ता है, और वह जीवन की जिम्मेदारियों को संभालने में असमर्थ रहता है। सही समय पर इलाज और सपोर्ट न मिल पाने की स्थिति में मरीज पागल हो सकता है और मौत भी हो सकती है।
सिजोफ्रेनिया एक गंभीर मानसिक बीमारी है, इसे पागलपन के रूप में भी देखा जाता है। जानकारी की कमी के कारण लोग इसे अंधविश्वास से जोड़ देते हैं। इस गंभीर बीमारी मरीज भ्रम की स्थिति में रहता है। सिजोफ्रेनिया के प्रति जागरूकता बढ़ाने और मरीजों को सही स्वास्थ्य सुविधा व इलाज मुहैया कराने के उद्देश्य से दुनियाभर में 24 मई को विश्व सिजोफ्रेनिया जागरूकता दिवस मनाया जाता है। फ्रांस के डॉ फिलिप पिनेल को सम्मानित करने के लिए 24 मई को विश्व सिज़ोफ्रेनिया दिवस के रूप में घोषित किया गया था। वह मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों के लिए उपचार और मानवीय देखभाल देने का काम करते थे।
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