विश्व रेडियो दिवस प्रतिवर्ष 13 फरवरी को मनाया जाता है, जिससे रेडियो के संचार, सूचना प्रसार और मनोरंजन में महत्त्व को स्वीकार किया जाता है। यह दिन संवाद को बढ़ावा देने, लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने और विविध समुदायों की आवाज़ को सुनिश्चित करने के लिए रेडियो की भूमिका को रेखांकित करता है। यूनेस्को (UNESCO) ने 2011 में इसकी स्थापना की थी, जिसे संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2013 में औपचारिक रूप से अपनाया।
रेडियो तकनीक की यात्रा 19वीं शताब्दी के अंत में शुरू हुई, जिसमें कई वैज्ञानिकों ने योगदान दिया। गुग्लिएल्मो मारकोनी को 1895 में पहली सफल रेडियो तरंग संचार करने का श्रेय दिया जाता है, हालांकि, जगदीश चंद्र बोस ने इससे पहले ही नवंबर 1895 में रेडियो तरंगों के सिद्धांत का प्रदर्शन किया था।
रेडियो विद्युत चुम्बकीय (Electromagnetic) तरंगों के प्रसारण पर आधारित है। इसके दो मुख्य घटक होते हैं:
रेडियो तरंगों की प्रमुख विधियाँ:
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, रेडियो की महत्ता आज भी बनी हुई है:
नवंबर 1895 में, बोस ने कलकत्ता टाउन हॉल में अपने प्रयोग का प्रदर्शन किया:
उन्हें “वायरलेस संचार का जनक” माना जाता है।
रेडियो, संचार और सूचना का एक शक्तिशाली और स्थायी माध्यम बना हुआ है, जो हर वर्ग तक अपनी पहुंच बनाए रखता है।
| वर्ग | विवरण |
| क्यों चर्चा में? | विश्व रेडियो दिवस प्रतिवर्ष 13 फरवरी को मनाया जाता है, जो संचार, सूचना प्रसार और मनोरंजन के प्रभावी माध्यम के रूप में रेडियो की भूमिका को रेखांकित करता है। |
| स्थापना | यूनेस्को (UNESCO) द्वारा 2011 में स्थापित, संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 2013 में अपनाया गया। |
| महत्त्व | संवाद को बढ़ावा देने, लोकतंत्र को सुदृढ़ करने और विविध समुदायों की आवाज़ सुनिश्चित करने में रेडियो की भूमिका को मान्यता देता है। |
| रेडियो तकनीक का जन्म | गुग्लिएल्मो मारकोनी ने 1895 में पहली सफल रेडियो तरंग संचार किया, लेकिन जगदीश चंद्र बोस ने नवंबर 1895 में पहले ही रेडियो तरंग प्रसारण का प्रदर्शन किया था। |
| रेडियो का विकास | – 1920 के दशक में व्यावसायिक रेडियो प्रसारण शुरू हुआ। – 1950 के दशक तक रेडियो वैश्विक सूचना और मनोरंजन का प्रमुख स्रोत बन गया। |
| रेडियो कैसे काम करता है? | – रेडियो ट्रांसमीटर: ध्वनि को विद्युत चुम्बकीय तरंगों में बदलता है। – रेडियो रिसीवर: प्रसारित तरंगों को पकड़कर पुनः ध्वनि में परिवर्तित करता है। |
| रेडियो प्रसारण के प्रकार | – AM (एम्प्लीट्यूड मॉडुलेशन): kHz आवृत्ति का उपयोग करता है, व्यापक कवरेज लेकिन कम ध्वनि गुणवत्ता। – FM (फ्रीक्वेंसी मॉडुलेशन): MHz आवृत्ति का उपयोग करता है, उच्च ध्वनि गुणवत्ता लेकिन सीमित कवरेज। |
| समाज में रेडियो की भूमिका | – विविधता को बढ़ावा: विभिन्न संस्कृतियों और भाषाओं के लिए मंच। – सूचना का प्रसार: समाचार, शिक्षा और आपातकालीन सूचनाओं का प्रसारण। – समुदायों को जोड़ना: ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच। – सशक्तिकरण: उपेक्षित समूहों को आवाज़ देना। |
| भारत में रेडियो | – 1923 में बॉम्बे रेडियो क्लब द्वारा पहला प्रसारण किया गया। – 1956 में ऑल इंडिया रेडियो (AIR) की स्थापना हुई, जो अब दुनिया के सबसे बड़े रेडियो नेटवर्कों में से एक है। – 23 जुलाई 1977 को चेन्नई में एफएम प्रसारण शुरू हुआ। – 2001 में निजी एफएम चैनलों की शुरुआत हुई, लेकिन इन्हें समाचार प्रसारित करने की अनुमति नहीं है। |
| रेडियो का आविष्कार किसने किया? | – जगदीश चंद्र बोस (1895): विद्युत चुम्बकीय तरंगों का प्रदर्शन किया, दीवारों के पार तरंगें भेजीं, दूरस्थ रूप से गनपाउडर जलाया। – गुग्लिएल्मो मारकोनी: पहला व्यावहारिक रेडियो ट्रांसमीटर विकसित किया, लंबी दूरी तक संचार किया, 1909 में नोबेल पुरस्कार जीता। |
| आज भी रेडियो की प्रासंगिकता | – सुलभ: इंटरनेट और स्मार्टफोन के बिना भी कार्य करता है। – विश्वसनीय: आपातकाल में भी कार्यशील रहता है। – सस्ता: न्यूनतम ढांचे में भी प्रभावी संचार सुनिश्चित करता है। |
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