हर वर्ष 24 अक्टूबर को विश्व पोलियो दिवस (World Polio Day) मनाया जाता है, ताकि इस घातक और संक्रामक रोग पोलियो के विरुद्ध वैश्विक लड़ाई के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाई जा सके। वर्ष 2025 में इस दिवस की थीम है — “End Polio: Every Child, Every Vaccine, Everywhere” (पोलियो का अंत: हर बच्चा, हर टीका, हर जगह) — जो इस बात पर ज़ोर देती है कि दुनिया के हर बच्चे को जीवनरक्षक पोलियो वैक्सीन अवश्य मिले, चाहे वह कहीं भी रहता हो।
पोलियोमाइलाइटिस (Poliomyelitis) या पोलियो एक अत्यंत संक्रामक वायरल रोग है जो मुख्यतः बच्चों को प्रभावित करता है। यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) पर हमला करता है, जिससे मांसपेशियों की कमजोरी और लकवा (Paralysis) हो सकता है, विशेष रूप से पैरों में। गंभीर मामलों में यह श्वास-प्रणाली को प्रभावित कर मृत्यु तक का कारण बन सकता है।
वैक्सीन अभियानों और वैश्विक सहयोग के कारण पोलियो के मामले 99.9% तक घट चुके हैं, लेकिन जब तक यह वायरस दुनिया के किसी भी हिस्से में मौजूद है, यह हर जगह खतरा बना रहता है।
विश्व पोलियो दिवस की शुरुआत सबसे पहले रोटरी इंटरनेशनल द्वारा डॉ. जोनास साल्क के जन्मदिन के उपलक्ष्य में की गई थी – डॉ. जोनास साल्क वह चिकित्सा शोधकर्ता थे जिन्होंने पहला प्रभावी पोलियो टीका विकसित किया था।
1955 में, डॉ. साल्क ने निष्क्रिय पोलियोवायरस वैक्सीन (आईपीवी) पेश की, जिसके बाद 1962 में डॉ. अल्बर्ट सबिन ने ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी) पेश की।
इन टीकों के संयुक्त उपयोग से वैश्विक टीकाकरण प्रयासों में क्रांति आई और लाखों लोगों की जान बच गई।
1988 में, रोटरी इंटरनेशनल और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने संयुक्त रूप से वैश्विक पोलियो उन्मूलन पहल (GPEI) की शुरुआत की। उस समय, दुनिया में हर साल अनुमानित 3.5 लाख (350,000) पोलियो के मामले दर्ज किए जाते थे।
लगातार टीकाकरण अभियानों, निगरानी, और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के कारण यह संख्या आज नगण्य रह गई है। अमेरिका, यूरोप और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र को पोलियो-मुक्त (Polio-free) घोषित किया जा चुका है।
आज अधिकांश देश पोलियो-मुक्त हैं।
फिर भी अफगानिस्तान और पाकिस्तान में अब भी वाइल्ड पोलियो वायरस (WPV) के छिटपुट मामले सामने आते हैं।
भारत ने 2014 में खुद को पोलियो-मुक्त देश घोषित किया था, लेकिन पुनः संक्रमण से बचाव हेतु निरंतर निगरानी और टीकाकरण जारी है।
संयुक्त राष्ट्र, WHO और रोटरी इंटरनेशनल जैसे संगठन इस अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं।
यह थीम तीन मुख्य प्रतिबद्धताओं को रेखांकित करती है:
हर बच्चा (Every Child) — सभी बच्चों को टीकाकरण तक पहुँच सुनिश्चित करना।
हर टीका (Every Vaccine) — गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के अनुरूप वैक्सीन की उपलब्धता।
हर जगह (Everywhere) — दूरदराज़, संघर्षग्रस्त और कठिन क्षेत्रों तक पहुँचना।
विश्व पोलियो दिवस हमें यह याद दिलाता है कि:
टीकाकरण जीवन बचाता है और विकलांगता रोकता है।
वैश्विक एकजुटता से ही संक्रामक रोगों का अंत संभव है।
स्वास्थ्य शिक्षा और जागरूकता को जमीनी स्तर तक पहुँचाना आवश्यक है।
स्वास्थ्यकर्मी, डॉक्टर, और स्वयंसेवक समाज को सुरक्षित रखने में नायक की भूमिका निभाते हैं।
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